भारतीय शेयर बाजार मंगलवार को महंगे Crude और Middle East तनाव के बीच गिरावट के साथ बंद हुआ। Sensex 555.23 अंक टूटकर 75,577.58 और Nifty 144.05 अंक गिरकर 23,635.10 पर पहुंचा। Brent Crude $98.4 तक चढ़ा। Weekly derivatives expiry के दौरान Closing Auction Session ने अंतिम कारोबार में volatility बढ़ाई।
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📍 मुंबई | 📰 8 सितंबर 2026 | ✍️ Apurva Choudhary
Sensex और Nifty में तेज गिरावट
भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को लगातार दूसरे कारोबारी सत्र गिरावट रही। Middle East में बढ़ते तनाव और Crude Oil की कीमतों में तेजी ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई।
कारोबार के अंत में BSE Sensex 555.23 अंक यानी 0.73% गिरकर 75,577.58 पर बंद हुआ। वहीं Nifty 50 144.05 अंक यानी 0.61% टूटकर 23,635.10 पर आ गया। दोनों Benchmark Indices दिन के निचले स्तरों के आसपास बंद हुए।
Reuters के अनुसार, पिछले सात कारोबारी सत्रों में Sensex और Nifty दोनों लगभग 2.2% नीचे आ चुके हैं। इससे बाजार में Risk Aversion बढ़ने का संकेत मिलता है।
Crude Oil बना बाजार की बड़ी चिंता
शेयर बाजार पर सबसे बड़ा बाहरी दबाव Crude Oil Prices से आया। मंगलवार को Brent Crude करीब 1.4% बढ़कर $98.4 प्रति बैरल तक पहुंच गया।
Middle East में Energy Infrastructure पर हमलों और क्षेत्रीय तनाव ने Global Oil Supply को लेकर चिंताएं बढ़ाई हैं। Oil Prices में तेजी भारत जैसे बड़े Crude Importer के लिए महत्वपूर्ण जोखिम है।
महंगा Crude भारत के Import Bill को बढ़ा सकता है और कंपनियों की Input Costs पर दबाव डाल सकता है। लंबे समय तक ऊंची Oil Prices रहने पर Inflation Expectations और Corporate Margins पर भी असर पड़ सकता है।
Financial और Large-cap Stocks पर दबाव
मंगलवार की गिरावट में Financial और Large-cap Stocks की भूमिका महत्वपूर्ण रही।
HDFC Bank करीब 1.1% गिरकर बंद हुआ। ICICI Bank और Reliance Industries में भी कमजोरी देखी गई। Reuters के अनुसार Financials और Private Bank Stocks में लगभग 1% तक की गिरावट रही।
HDFC Bank जैसे बड़े Index Weight वाले Stocks में कमजोरी का सीधा असर Benchmark Indices पर पड़ता है। यही वजह रही कि बाजार में व्यापक कमजोरी के बीच Nifty और Sensex पर दबाव बना रहा।
Defence Stocks ने दिखाया अलग रुख
जहां प्रमुख Benchmark Indices गिरावट में रहे, वहीं Defence Stocks में मजबूती देखने को मिली।
सरकार के Defence Acquisition Council ने करीब ₹1.10 लाख करोड़ के Defence Procurement Proposals को मंजूरी दी। इसके बाद Defence Sector से जुड़े Stocks में खरीदारी बढ़ी।
Reports के अनुसार Defence Stocks का Index करीब 2.5% चढ़ा।
Economic Times की रिपोर्टिंग के मुताबिक प्रस्तावों में लगभग 98% Procurement भारतीय कंपनियों से किए जाने की बात कही गई है। इससे HAL, BEL, Paras Defence, BEML और Astra Microwave जैसी Defence कंपनियां बाजार में फोकस में रहीं।
इससे बाजार में Sectoral Rotation का संकेत भी मिला। यानी व्यापक बाजार कमजोर रहने के बावजूद कुछ खास सेक्टरों में सकारात्मक धारणा बनी रही।
सात कारोबारी सत्रों में 2.2% की गिरावट
मंगलवार की गिरावट कोई अकेली घटना नहीं थी। Reuters के अनुसार पिछले सात कारोबारी सत्रों में Nifty और Sensex दोनों करीब 2.2% गिर चुके हैं।
इस दौरान बाजार पर कई बाहरी और घरेलू कारकों का दबाव रहा है। Middle East तनाव, Crude Oil Prices, अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता और Foreign Fund Flows बाजार की दिशा को प्रभावित कर रहे हैं।
सोमवार को भी दोनों Benchmark Indices लगभग 0.5% गिरकर छह सप्ताह के निचले स्तर पर पहुंचे थे।
Closing Auction Session ने बढ़ाई Volatility
मंगलवार के कारोबार में एक और महत्वपूर्ण घटनाक्रम Closing Auction Session यानी CAS रहा।
नई Closing Auction व्यवस्था, जो 3 अगस्त से लागू हुई है, Weekly और Monthly Derivatives Expiry के दिनों में बाजार की अंतिम कीमतों के आसपास अधिक उतार-चढ़ाव का कारण बन रही है।
Reuters के अनुसार मंगलवार को Closing Auction के दौरान Nifty का Indicative Close एक समय लगभग 1.8% तक नीचे चला गया था। हालांकि अंतिम Settlement में Nifty ने नुकसान कम किया और 0.61% की गिरावट के साथ 23,635.10 पर बंद हुआ।
HDFC Bank का Indicative Close भी Auction के दौरान करीब 3.91% तक गिरा था, लेकिन अंत में शेयर 1.1% नीचे बंद हुआ।
Traders के लिए क्यों महत्वपूर्ण है CAS?
Closing Auction Session का उद्देश्य अधिक व्यवस्थित तरीके से Closing Price निर्धारित करना है, लेकिन शुरुआती अनुभव में Expiry Days पर Liquidity और Order Participation को लेकर सवाल उठे हैं।
Reuters के मुताबिक बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि सीमित भागीदारी के कारण कुछ बड़े Orders Closing Price में असामान्य बदलाव ला सकते हैं। इससे Systematic Options Strategies के लिए Expiry-Day Execution कम Predictable हो सकता है।
यह मंगलवार को खास तौर पर दिखाई दिया, क्योंकि बाजार पहले से ही Crude Oil और Geopolitical Risk के कारण अस्थिर था।
क्या बाजार में और गिरावट का जोखिम है?
निकट अवधि में बाजार की दिशा कई Global Factors पर निर्भर करेगी। सबसे महत्वपूर्ण संकेत Crude Oil Prices से मिलेगा। अगर Middle East तनाव लंबा चलता है और Oil Prices लगातार ऊंचे स्तर पर रहती हैं, तो भारतीय Equities पर दबाव जारी रह सकता है। इसके अलावा अमेरिकी Federal Reserve की Interest Rate Expectations भी Emerging Markets के लिए महत्वपूर्ण रहेंगी। दूसरी तरफ यदि Geopolitical तनाव कम होता है और Crude Oil में तेजी थमती है, तो भारतीय बाजार को राहत मिल सकती है।
हालांकि मंगलवार की गिरावट के बावजूद Mid-cap और Small-cap Indices में लगभग 0.2% की मामूली बढ़त रही, जो बताती है कि बाजार में कमजोरी पूरी तरह व्यापक नहीं थी।
Investors की नजर अब किन संकेतकों पर?
आने वाले कारोबारी सत्रों में Investors की नजर Brent Crude, Middle East Developments, Global Bond Yields, Federal Reserve Policy Expectations और Foreign Institutional Flows पर रहेगी। घरेलू स्तर पर रुपये की चाल भी महत्वपूर्ण होगी। महंगे Crude के साथ रुपये की कमजोरी भारतीय कंपनियों और अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त लागत दबाव डाल सकती है।
मंगलवार को रुपये में भी कमजोरी रही और Reports के अनुसार भारतीय मुद्रा ₹94.8175 प्रति डॉलर पर बंद हुई। इससे Equity और Currency Markets के बीच मौजूद External Risk का संकेत मिलता है।
फिलहाल बाजार के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह है कि Geopolitical Risk, Oil Prices और Global Rate Expectations एक साथ अनिश्चितता पैदा कर रहे हैं।