मुंबई
27 जुलाई 2026
आसिफ़ खानलगातार कई कारोबारी सत्रों तक दबाव झेलने के बाद भारतीय शेयर बाजार ने सोमवार को उल्लेखनीय वापसी की। कारोबार की शुरुआत से ही निवेशकों का रुझान सकारात्मक दिखाई दिया। दिन भर खरीदारी का माहौल बना रहा और प्रमुख सूचकांक बढ़त के साथ कारोबार करते रहे।
विश्लेषकों का कहना है कि वैश्विक स्तर पर जोखिम की धारणा में सुधार ने निवेशकों का भरोसा मजबूत किया। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव में तत्काल बढ़ोतरी की आशंका कम होने से अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में भी राहत का माहौल बना।
भारतीय अर्थव्यवस्था अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए बड़े पैमाने पर आयातित कच्चे तेल पर निर्भर है। जब अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की कीमतें घटती हैं तो आयात बिल कम होने की संभावना बनती है।
इसी वजह से निवेशकों ने ऐसे क्षेत्रों में खरीदारी बढ़ाई जिन पर ऊर्जा लागत का सीधा प्रभाव पड़ता है। इससे बाज़ार की व्यापक धारणा में सुधार देखने को मिला।
बीते कुछ दिनों में पश्चिम एशिया की स्थिति ने वित्तीय बाज़ारों में अनिश्चितता बढ़ा दी थी। निवेशकों को आशंका थी कि यदि तनाव और बढ़ता है तो ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।
हालिया घटनाक्रम ने इन आशंकाओं को कुछ समय के लिए कम किया। इसके बाद एशियाई और अन्य वैश्विक बाज़ारों में भी सकारात्मक संकेत दिखाई दिए, जिनका असर भारतीय बाज़ार पर पड़ा।
कारोबार के दौरान सूचना प्रौद्योगिकी, बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं, उपभोक्ता उत्पाद और वाहन क्षेत्र से जुड़े शेयरों में बेहतर प्रदर्शन देखने को मिला। कई बड़ी कंपनियों के तिमाही नतीजों ने भी निवेशकों का विश्वास बढ़ाया।
हालांकि कुछ विश्लेषकों ने यह भी संकेत दिया कि बाज़ार अभी पूरी तरह जोखिम से मुक्त नहीं हुआ है और वैश्विक घटनाक्रम पर नज़र बनाए रखना आवश्यक रहेगा।
हाल के सप्ताहों में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में अस्थिरता पैदा कर दी थी। कच्चे तेल की कीमतों में तेज़ उतार-चढ़ाव देखने को मिला और निवेशकों ने सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख किया।
भारतीय शेयर बाजार भी इस वैश्विक दबाव से अछूता नहीं रहा। कई सत्रों तक बिकवाली का माहौल बना रहा।
बाज़ार विशेषज्ञों का एक वर्ग मानता है कि यदि पश्चिम एशिया में हालात स्थिर रहते हैं और कच्चे तेल की कीमतें नियंत्रित रहती हैं तो भारतीय बाज़ार को आगे भी समर्थन मिल सकता है।
दूसरी ओर कुछ विश्लेषकों का कहना है कि भू-राजनीतिक परिस्थितियाँ तेज़ी से बदल सकती हैं। इसलिए केवल एक दिन की तेजी को दीर्घकालिक रुझान मानना जल्दबाज़ी होगी।
ऊर्जा कीमतों में नरमी भारत जैसे आयातक देशों के लिए राहत का संकेत मानी जाती है। इससे महंगाई पर दबाव कम हो सकता है और चालू खाते के घाटे पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
यदि यह रुझान जारी रहता है तो सरकार और उद्योग दोनों के लिए आर्थिक योजना बनाना अपेक्षाकृत आसान हो सकता है।
पश्चिम एशिया में स्थिरता केवल क्षेत्रीय मुद्दा नहीं है। इसका असर वैश्विक व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति, शिपिंग मार्गों और निवेश प्रवाह पर पड़ता है।
इसी कारण अंतरराष्ट्रीय निवेशक क्षेत्र की हर गतिविधि पर लगातार नज़र बनाए हुए हैं।
आने वाले दिनों में निवेशकों की निगाह अमेरिका-ईरान से जुड़े नए घटनाक्रम, कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों, प्रमुख केंद्रीय बैंकों की नीतियों और भारतीय कंपनियों के तिमाही परिणामों पर रहेगी।
यदि वैश्विक परिस्थितियाँ स्थिर रहती हैं तो बाज़ार में सकारात्मक रुझान आगे भी जारी रह सकता है। वहीं किसी नए भू-राजनीतिक तनाव की स्थिति में उतार-चढ़ाव फिर बढ़ सकता है।
आज की तेजी ने यह संकेत दिया कि वैश्विक जोखिम कम होने पर भारतीय शेयर बाजार तेज़ी से प्रतिक्रिया देता है। हालांकि बाज़ार की आगे की दिशा केवल एक कारोबारी सत्र से तय नहीं होगी। निवेशकों के लिए आने वाले दिनों में वैश्विक घटनाक्रम, आर्थिक आँकड़े और कॉरपोरेट नतीजे समान रूप से महत्वपूर्ण रहेंगे।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।