भारत सरकार द्वारा एलआईसी में हिस्सेदारी बेचने के लिए लाए गए ऑफर फॉर सेल (OFS) को रिटेल और संस्थागत निवेशकों से शानदार प्रतिक्रिया मिली। सरकार ने 31,552 करोड़ रुपये जुटाए और एलआईसी में सार्वजनिक शेयरधारिता 10 प्रतिशत तक पहुंच गई। यह भारत के पूंजी बाजार के इतिहास का सबसे बड़ा सार्वजनिक शेयर ऑफर माना जा रहा है।
📍 Location नई दिल्ली
📰 Date 6 अगस्त 2026
✍️ By Apurva Choudhary
एलआईसी शेयर बिक्री में नया इतिहास, निवेशकों ने दिखाया जबरदस्त भरोसा
भारत सरकार ने देश की सबसे बड़ी जीवन बीमा कंपनी लाइफ इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (LIC) में हिस्सेदारी बेचने के लिए लाए गए ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिए बड़ी सफलता हासिल की है। दो दिन तक चले इस शेयर बिक्री कार्यक्रम को रिटेल निवेशकों के साथ-साथ घरेलू और विदेशी संस्थागत निवेशकों से भी शानदार प्रतिक्रिया मिली। निवेशकों की भारी मांग को देखते हुए सरकार ने अपने ग्रीन शू ऑप्शन का भी पूरा उपयोग किया।
निवेश और लोक संपत्ति प्रबंधन विभाग (DIPAM) के अनुसार इस ऑफर के माध्यम से सरकार ने कुल 31,552 करोड़ रुपये जुटाए हैं। इसके साथ ही एलआईसी में पब्लिक शेयरहोल्डिंग बढ़कर 10 प्रतिशत हो गई है, जिससे कंपनी ने समय सीमा से पहले ही नियामकीय आवश्यकता पूरी कर ली है।
क्या है पूरा मामला?
सरकार ने एलआईसी में अपनी हिस्सेदारी का एक हिस्सा बेचने के लिए ऑफर फॉर सेल जारी किया था। इस दौरान कुल 82,23,33,558 शेयर निवेशकों को आवंटित किए गए। इन शेयरों की कुल कीमत 31,552 करोड़ रुपये रही, जो भारतीय पूंजी बाजार के इतिहास में सबसे बड़ा सार्वजनिक शेयर ऑफर बन गया है।
DIPAM ने बताया कि दोनों दिनों के दौरान निवेशकों की ओर से उम्मीद से कहीं अधिक आवेदन प्राप्त हुए। मजबूत मांग के कारण सरकार ने अतिरिक्त शेयर बेचने के लिए उपलब्ध ग्रीन शू ऑप्शन का भी पूरा इस्तेमाल किया।
सरकार ने क्या कहा?
निवेश और लोक संपत्ति प्रबंधन विभाग (DIPAM) ने सभी निवेशकों का धन्यवाद देते हुए कहा कि यह प्रतिक्रिया भारतीय पूंजी बाजार और एलआईसी की मजबूत स्थिति पर निवेशकों के विश्वास को दर्शाती है। विभाग ने कहा कि निवेशकों के उत्साहपूर्ण सहयोग के कारण यह ऑफर पूरी तरह सफल रहा और सरकार अपने विनिवेश लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करने में सफल रही।
सार्वजनिक शेयरधारिता का लक्ष्य पूरा
भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) के नियमों के अनुसार सूचीबद्ध कंपनियों में न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता बनाए रखना आवश्यक होता है। इस ऑफर के बाद एलआईसी की सार्वजनिक हिस्सेदारी 10 प्रतिशत तक पहुंच गई है। कंपनी ने यह लक्ष्य निर्धारित समय से पहले पूरा कर लिया, जिसे बाजार के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है.
भारत के पूंजी बाजार के लिए क्यों अहम है यह OFS?
एलआईसी भारत की सबसे बड़ी जीवन बीमा कंपनी होने के साथ-साथ शेयर बाजार की सबसे प्रभावशाली कंपनियों में भी शामिल है। ऐसे में कंपनी के शेयरों की सार्वजनिक हिस् ddr 6r5सेदारी बढ़ने से बाजार में इसकी लिक्विडिटी (Liquidity) बेहतर होगी और अधिक निवेशकों को इसमें निवेश का अवसर मिलेगा।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि सार्वजनिक हिस्सेदारी बढ़ने से एलआईसी के शेयरों में ट्रेडिंग गतिविधि बढ़ेगी, जिससे कंपनी का शेयर बाजार में प्रदर्शन और पारदर्शिता दोनों मजबूत हो सकते हैं। साथ ही यह कदम भारतीय पूंजी बाजार में निवेशकों का भरोसा बढ़ाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
ग्रीन शू ऑप्शन क्या होता है?
ऑफर फॉर सेल के दौरान यदि निवेशकों की मांग अनुमान से अधिक होती है, तो सरकार या प्रमोटर अतिरिक्त शेयर बेचने के लिए ग्रीन शू ऑप्शन (Green Shoe Option) का इस्तेमाल कर सकते हैं। इस व्यवस्था का उद्देश्य बढ़ती मांग को पूरा करना और बाजार में शेयरों का संतुलित वितरण सुनिश्चित करना होता है।
एलआईसी के इस OFS में भी निवेशकों की भारी मांग को देखते हुए सरकार ने ग्रीन शू ऑप्शन का पूरा उपयोग किया, जिससे कुल जुटाई गई राशि बढ़कर 31,552 करोड़ रुपये तक पहुंच गई।
निवेशकों की मजबूत भागीदारी
इस शेयर बिक्री कार्यक्रम में रिटेल निवेशकों, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs)—तीनों वर्गों ने सक्रिय भागीदारी दिखाई। विशेषज्ञों के अनुसार यह संकेत देता है कि निवेशकों का भरोसा भारत की सबसे बड़ी बीमा कंपनी और सरकार की विनिवेश नीति दोनों पर बना हुआ है।
सरकार ने भी कहा कि निवेशकों का उत्साह इस बात का प्रमाण है कि भारतीय शेयर बाजार में बड़े सार्वजनिक निर्गमों के लिए मजबूत मांग मौजूद है।
विनिवेश कार्यक्रम को मिली रफ्तार
एलआईसी में हिस्सेदारी बिक्री सरकार के विनिवेश कार्यक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस सफल OFS से सरकार को न केवल बड़ी राशि प्राप्त हुई, बल्कि सार्वजनिक शेयरधारिता बढ़ाने का लक्ष्य भी समय से पहले पूरा हो गया।
आर्थिक मामलों के जानकारों का मानना है कि इससे भविष्य में अन्य सार्वजनिक उपक्रमों में हिस्सेदारी बिक्री के लिए भी सकारात्मक माहौल बनेगा और सरकार को अपने विनिवेश लक्ष्यों को पूरा करने में मदद मिलेगी।
आगे क्या?
अब निवेशकों की नजर एलआईसी के शेयरों के आगामी प्रदर्शन, कंपनी के वित्तीय नतीजों और सरकार की भविष्य की विनिवेश रणनीति पर रहेगी। यदि बाजार का माहौल अनुकूल बना रहता है, तो एलआईसी में बढ़ी सार्वजनिक हिस्सेदारी कंपनी के लिए दीर्घकालिक रूप से लाभदायक साबित हो सकती है।
एलआईसी का ऑफर फॉर सेल भारतीय पूंजी बाजार के इतिहास की सबसे बड़ी सार्वजनिक शेयर बिक्री बन गया है। 31,552 करोड़ रुपये जुटाने के साथ सरकार ने सार्वजनिक शेयरधारिता का लक्ष्य भी समय से पहले हासिल कर लिया। निवेशकों की रिकॉर्ड भागीदारी यह दर्शाती है कि एलआईसी और भारतीय बाजार में विश्वास मजबूत बना हुआ है। आने वाले समय में यह कदम भारतीय शेयर बाजार की गहराई बढ़ाने और सरकार के विनिवेश कार्यक्रम को नई गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।