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लिथुआनिया ने बनाए निकासी प्लान, पीएम ने कहा रूस ने हमला किया तो लड़ेंगे
Harish Qureshi
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2026-09-22 12:43:10
रूस से बढ़ते सुरक्षा खतरे और ड्रोन घटनाओं के बीच लिथुआनिया ने निकासी योजनाएं तैयार की हैं। पीएम ने कहा, हमला हुआ तो देश जवाब देगा।
विल्नियस, लिथुआनिया | 22 सितंबर 2026
By Mohd Haris
रूस के खतरे के बीच लिथुआनिया की तैयारी
यूरोप के बाल्टिक क्षेत्र में सुरक्षा तनाव एक बार फिर चर्चा में है। NATO सदस्य लिथुआनिया ने रूस से जुड़े संभावित खतरों के मद्देनजर आपातकालीन तैयारियां बढ़ा दी हैं। प्रधानमंत्री माइंडॉगस सिंकेविचियस ने BBC को दिए इंटरव्यू में कहा कि अगर रूस लिथुआनिया पर हमला करता है तो उनका देश जवाब देगा। साथ ही सरकार ने अलग-अलग परिस्थितियों के लिए निकासी योजनाएं भी तैयार की हैं।
यह बयान ऐसे समय आया है जब सितंबर में लिथुआनियाई हवाई क्षेत्र में एक ड्रोन को NATO के इतालवी लड़ाकू विमान ने मार गिराया था। लिथुआनियाई राष्ट्रपति ने बाद में कहा कि ड्रोन रूस में इस्तेमाल होने वाले प्रकार का था और संभवतः उसका लक्ष्य यूक्रेन था।
पीएम ने क्या कहा?
प्रधानमंत्री सिंकेविचियस ने BBC को बताया कि लिथुआनिया रूस से लगातार खतरा महसूस करता है। उन्होंने कहा कि अगर देश पर हमला होता है तो लिथुआनिया “लड़ेगा” और जवाब देगा। सरकार ने अलग-अलग संभावित परिस्थितियों के लिए आपातकालीन योजनाएं भी तैयार की हैं।
इन योजनाओं में जरूरत पड़ने पर शहरों से नागरिकों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाना भी शामिल है। प्रधानमंत्री ने बुजुर्गों और अन्य नागरिकों की व्यवस्थित निकासी की तैयारी का उदाहरण दिया।
हालांकि, उपलब्ध जानकारी में लिथुआनिया पर रूस के किसी आसन्न सैन्य हमले की पुष्टि नहीं हुई है। मौजूदा तैयारियां संभावित खतरों और सुरक्षा आकलनों पर आधारित हैं।
सितंबर में लिथुआनिया के ऊपर ड्रोन गिराया गया
14 सितंबर को NATO के इतालवी लड़ाकू विमान ने लिथुआनियाई हवाई क्षेत्र में प्रवेश करने वाले एक ड्रोन को मार गिराया। यह घटना लिथुआनिया के लिए महत्वपूर्ण थी क्योंकि देश में NATO Baltic Air Policing मिशन पहले से सक्रिय है।
अगले दिन रिपोर्ट किया कि लिथुआनियाई राष्ट्रपति गितानस नौसेदा ने ड्रोन को रूस में इस्तेमाल होने वाले प्रकार का बताया। उन्होंने कहा कि लिथुआनियाई सेना उसके इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम का विश्लेषण कर रही थी ताकि उसके लक्ष्य का पता लगाया जा सके।
इस घटना की शुरुआती रिपोर्टिंग में ड्रोन के संभावित विस्फोटक होने की बात भी सामने आई थी, लेकिन उसके उद्देश्य और उत्पत्ति की जांच अलग-अलग स्तरों पर जारी रही। इसलिए इसे सीधे रूस द्वारा लिथुआनिया पर हमला कहना उचित नहीं होगा।
इससे पहले भी हवाई क्षेत्र को लेकर घटनाएं हुईं
13 सितंबर को लिथुआनिया ने संभावित ड्रोन की सूचना मिलने के बाद विल्नियस एयरपोर्ट को अस्थायी रूप से बंद किया था। NATO के लड़ाकू विमान भी सक्रिय हुए। बाद में अधिकारियों ने बताया कि देखी गई वस्तुएं ड्रोन नहीं, बल्कि पक्षियों का झुंड थीं।
यह घटना बताती है कि बाल्टिक देशों में हवाई क्षेत्र को लेकर सुरक्षा सतर्कता कितनी बढ़ गई है।
लिथुआनिया को रूस से खतरा क्यों महसूस होता है?
लिथुआनिया की भौगोलिक स्थिति इसे रूस-नाटो तनाव के केंद्र में रखती है। देश की सीमा रूस के कालिनिनग्राद क्षेत्र और रूस के सहयोगी बेलारूस से लगती है।
कालिनिनग्राद रूस का एक महत्वपूर्ण सैन्य क्षेत्र है, जो मुख्य रूसी भूभाग से अलग है। इसके साथ ही लिथुआनिया NATO और यूरोपीय संघ दोनों का सदस्य है।
लिथुआनिया की राष्ट्रीय सुरक्षा आकलन रिपोर्ट में रूस की सैन्य क्षमता, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध, खुफिया गतिविधियों और ड्रोन गतिविधियों को प्रमुख सुरक्षा चिंताओं में शामिल किया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि यूक्रेन पर रूसी UAV हमलों में बढ़ोतरी के साथ लिथुआनियाई हवाई क्षेत्र के उल्लंघनों में भी वृद्धि हुई है।
लिथुआनिया ने महत्वपूर्ण ऊर्जा ढांचे की सुरक्षा बढ़ाई
रूस से जुड़े संभावित हाइब्रिड और ड्रोन खतरों के मद्देनजर लिथुआनिया महत्वपूर्ण ऊर्जा बुनियादी ढांचे की सुरक्षा भी बदल रहा है।
22 सितंबर की रिपोर्ट के मुताबिक, रूस के कालिनिनग्राद के पास बनने वाले गिजाई सबस्टेशन को ड्रोन और संभावित तोड़फोड़ के खिलाफ अतिरिक्त सुरक्षा के साथ तैयार किया जा रहा है। इसमें मजबूत बाड़, सुरंगों का पता लगाने वाले सेंसर और ट्रांसफॉर्मरों के लिए मजबूत कंक्रीट संरचनाएं शामिल हैं।
यह परियोजना Baltic electricity grid को पश्चिमी यूरोप से जोड़ने वाली व्यापक ऊर्जा व्यवस्था का हिस्सा है।
रूस से संभावित इंफ्रास्ट्रक्चर हमलों की चिंता
जुलाई में लिथुआनियाई राष्ट्रपति गितानस नौसेदा ने कहा था कि देश की खुफिया एजेंसियों को ऐसी जानकारी मिली है जिससे संकेत मिलता है कि रूस बुनियादी ढांचे पर हमले की योजना बना सकता है।
हालांकि, नौसेदा ने उस समय यह भी स्पष्ट किया था कि उन्हें संभावित हमले का स्थान या समय पता नहीं था और उन्होंने यह नहीं कहा था कि लिथुआनिया निश्चित रूप से निशाना है।
इसलिए इस दावे को भी “रूस लिथुआनिया पर हमला करने जा रहा है” के रूप में प्रस्तुत करना सही नहीं होगा। यह लिथुआनिया के सुरक्षा आकलन में मौजूद संभावित खतरे का हिस्सा है।
लिथुआनिया का जवाबी कार्रवाई वाला रुख
सितंबर की शुरुआत में लिथुआनिया के विदेश मंत्री केस्तुतिस बुद्रिस ने कहा था कि अगर रूस लिथुआनियाई क्षेत्र को गंभीर नुकसान पहुंचाता है और हमले की जिम्मेदारी स्थापित होती है, तो लिथुआनिया आत्मरक्षा में तत्काल कार्रवाई करेगा।
बुद्रिस ने यह भी कहा था कि यूरोपीय देशों को रूस से जुड़े हमलों और तोड़फोड़ की घटनाओं पर तेजी से प्रतिक्रिया देने की जरूरत है। उन्होंने रूस द्वारा संभावित हमलों की escalation की आशंका भी व्यक्त की थी। यह उनका सुरक्षा आकलन है, स्थापित तथ्य नहीं।
NATO की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण है?
लिथुआनिया 2004 से NATO का सदस्य है। इसलिए किसी सशस्त्र हमले की स्थिति में मामला केवल लिथुआनिया और रूस के बीच द्विपक्षीय संकट तक सीमित नहीं रहेगा।
NATO Baltic Air Policing मिशन के तहत सहयोगी देशों के लड़ाकू विमान बाल्टिक क्षेत्र के हवाई क्षेत्र की निगरानी करते हैं। सितंबर में इतालवी NATO विमान द्वारा ड्रोन गिराए जाने की घटना इसी सुरक्षा व्यवस्था की भूमिका को सामने लाती है।
हालांकि, हर ड्रोन घटना या संदिग्ध घुसपैठ को NATO Article 5 के तहत सशस्त्र हमला मानना स्वतः लागू नहीं होता। घटना की प्रकृति, जिम्मेदारी और परिस्थितियों का आकलन जरूरी होता है।
रूस का रुख क्या है?
मॉस्को ने यूरोपीय देशों द्वारा रूस पर तोड़फोड़, ड्रोन गतिविधियों और अन्य हमलों के आरोपों को नियमित रूप से खारिज किया है। रूस का कहना है कि ऐसे आरोप उसके खिलाफ राजनीतिक दबाव और प्रचार का हिस्सा हैं।
इसलिए रूस से जुड़े किसी भी नए सुरक्षा आरोप में जिम्मेदारी स्थापित करने के लिए स्वतंत्र जांच और विश्वसनीय प्रमाण महत्वपूर्ण होंगे।
क्या युद्ध का खतरा बढ़ गया है?
मौजूदा घटनाएं बाल्टिक क्षेत्र में सुरक्षा तनाव बढ़ने का संकेत देती हैं, लेकिन इससे यह निष्कर्ष नहीं निकलता कि रूस और NATO के बीच युद्ध निश्चित है।
लिथुआनिया की सरकार एक तरफ नागरिक निकासी और बुनियादी ढांचे की सुरक्षा की तैयारी कर रही है। दूसरी तरफ NATO की हवाई निगरानी और यूरोपीय देशों की सुरक्षा व्यवस्था भी सक्रिय है।
लिथुआनिया का मौजूदा संदेश दो हिस्सों में है। संभावित संकट के लिए तैयारी और हमले की स्थिति में आत्मरक्षा।
आगे क्या होगा?
आने वाले दिनों में तीन घटनाक्रम महत्वपूर्ण रहेंगे।
पहला, लिथुआनिया में हवाई क्षेत्र की सुरक्षा और संदिग्ध ड्रोन गतिविधियों पर NATO की प्रतिक्रिया।
दूसरा, महत्वपूर्ण ऊर्जा और परिवहन बुनियादी ढांचे की सुरक्षा को लेकर यूरोपीय संघ और NATO का सहयोग।
तीसरा, रूस और पश्चिमी देशों के बीच आरोप-प्रत्यारोप के बीच किसी नई सुरक्षा घटना की स्वतंत्र जांच।
लिथुआनियाई सरकार पहले ही यूरोप से सामूहिक सुरक्षा और तैयारियों को मजबूत करने की अपील कर चुकी है। प्रधानमंत्री ने कहा है कि यूरोप को रूस से जुड़े हाइब्रिड खतरों के जवाब में तेजी और एकजुटता बढ़ानी चाहिए।
निष्कर्ष
लिथुआनिया ने रूस से संभावित खतरे को देखते हुए अपनी नागरिक और सैन्य तैयारियां बढ़ा दी हैं। प्रधानमंत्री ने साफ कहा है कि रूस की ओर से हमला होने पर देश आत्मसमर्पण नहीं करेगा और जवाब देगा। साथ ही संभावित निकासी के लिए योजनाएं तैयार की गई हैं।
सितंबर में लिथुआनियाई हवाई क्षेत्र में ड्रोन गिराए जाने की घटना और ऊर्जा बुनियादी ढांचे की सुरक्षा के नए उपाय बताते हैं कि बाल्टिक क्षेत्र में सुरक्षा चिंताएं गंभीर हैं।
लेकिन अभी तक लिथुआनिया पर रूस के आसन्न हमले की स्वतंत्र पुष्टि नहीं है। मौजूदा स्थिति को संभावित खतरे के खिलाफ बढ़ी हुई तैयारी के रूप में देखना अधिक सटीक है।
Harish Qureshi
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक,
अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।