📍नई दिल्ली 🗓️2 नवंबर 2026 |✍️ आसिफ खान
दिल्ली के रामलीला मैदान में 1 नवंबर को आयोजित कांग्रेस और विपक्षी दलों की महारैली के बाद राजधानी के व्यापारियों को भारी आर्थिक नुकसान होने का दावा सामने आया है। चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (सीटीआई) के चेयरमैन बृजेश गोयल के मुताबिक़, रैली के कारण दिल्ली के कई प्रमुख बाज़ारों में कारोबारी गतिविधियां प्रभावित हुईं।
व्यापारिक संगठन का दावा है कि रैली के दौरान करीब 2.5 लाख दुकानें प्रभावित हुईं और व्यापारियों को ₹10,000 करोड़ से ₹12,000 करोड़ तक का आर्थिक नुकसान हुआ। हालांकि, इन आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
सीटीआई के मुताबिक़, रामलीला मैदान में आयोजित राजनीतिक रैली के दौरान मध्य दिल्ली की कई सड़कों पर यातायात प्रभावित रहा। भीड़ और ट्रैफिक संबंधी परेशानियों के कारण ग्राहकों की आवाजाही में कमी आने की शिकायत व्यापारियों ने की है।
संगठन का दावा है कि रामलीला मैदान से जुड़े कारोबारी इलाक़ों के लगभग 25 बाज़ार प्रभावित हुए। कुछ प्रमुख बाज़ारों में करीब 80 फ़ीसदी दुकानें बंद रहने की बात भी कही गई है।
इनमें चांदनी चौक, कश्मीरी गेट, भागीरथ पैलेस, सदर बाज़ार, चावड़ी बाज़ार, मीना बाज़ार, पहाड़गंज, करोलबाग, लाजपत मार्केट और कनॉट प्लेस जैसे व्यापारिक इलाक़े शामिल बताए गए हैं।
हालांकि, अलग-अलग बाज़ारों में कितनी दुकानें वास्तव में बंद रहीं और कितनी देर कारोबार प्रभावित हुआ, इसका स्वतंत्र सत्यापन अभी उपलब्ध नहीं है।
व्यापारिक संगठनों का कहना है कि दीपावली से पहले का समय थोक और खुदरा व्यापार के लिए अहम होता है।
ऐसे में राजनीतिक आयोजन के कारण सड़कों पर यातायात बाधित होने और ग्राहकों के बाज़ारों तक नहीं पहुंचने से व्यापारियों को आर्थिक परेशानी उठानी पड़ी।
सीटीआई के अलावा किराना कमिटी दिल्ली और नट्स एंड ड्राई फ्रूट्स काउंसिल ने भी व्यापार प्रभावित होने की बात कही है।
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सीटीआई के मुताबिक़, संगठन ने रैली से पहले कांग्रेस नेता राहुल गांधी को पत्र लिखकर कार्यक्रम की तारीख़ या स्थान बदलने की गुज़ारिश की थी।
संगठन का कहना है कि पहला पत्र 24 अक्टूबर 2026 को भेजा गया। इसके बाद 27 और 28 अक्टूबर को भी पत्र लिखे गए।
इन पत्रों में व्यापारियों की चिंताओं पर चर्चा करने के लिए 20 मिनट का समय मांगा गया था।
सीटीआई के अनुसार, चौथा पत्र 1 नवंबर को रैली के दिन भेजा गया। हालांकि, पत्रों की मूल प्रतियों और उनकी प्राप्ति की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
इस पूरे मामले में सबसे अहम सवाल आर्थिक नुकसान के आकलन को लेकर है।
सीटीआई ने ₹10,000 करोड़ से ₹12,000 करोड़ तक के नुकसान का अनुमान पेश किया है, लेकिन उपलब्ध जानकारी में यह स्पष्ट नहीं है कि इस आंकड़े की गणना किस पद्धति से की गई।
यह भी साफ़ नहीं है कि इस अनुमान में वास्तविक बिक्री का नुकसान, संभावित कारोबार में कमी या अन्य कारोबारी गतिविधियों पर पड़े असर को शामिल किया गया है।
इसलिए ₹12,000 करोड़ की राशि को प्रमाणित आर्थिक नुकसान के बजाय व्यापारिक संगठन के दावे के तौर पर देखना ज़रूरी है।
लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण राजनीतिक सभा और प्रदर्शन का अधिकार महत्वपूर्ण है। वहीं, बड़े आयोजनों के दौरान यातायात व्यवस्था और आम नागरिकों की सुविधाएं बनाए रखना प्रशासन की ज़िम्मेदारी है।
दिल्ली के व्यापारिक संगठनों की शिकायत के बाद सवाल उठ रहा है कि बड़े राजनीतिक कार्यक्रमों से पहले स्थानीय बाज़ारों पर पड़ने वाले संभावित असर का आकलन किस तरह किया जाना चाहिए।
व्यापारियों की शिकायतों, रैली से जुड़े यातायात प्रतिबंधों और आर्थिक नुकसान के अनुमान की स्वतंत्र जांच से ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
उपलब्ध सामग्री में कांग्रेस या राहुल गांधी की ओर से इन दावों पर कोई सत्यापित प्रतिक्रिया शामिल नहीं है।
फिलहाल दिल्ली के व्यापारियों के आर्थिक नुकसान का दावा राजनीतिक और कारोबारी बहस का विषय बना हुआ है।
संपादकीय नोट: इस रिपोर्ट में उल्लिखित आर्थिक नुकसान, प्रभावित दुकानों की संख्या और पत्राचार संबंधी जानकारी
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।