रसोई के फल-सब्जियों के छिलकों और दूसरे जैविक कचरे से घर पर प्राकृतिक खाद बनाई जा सकती है। सही सामग्री, नमी और हवा का संतुलन रखने से बदबू और मक्खियों से बचाव संभव है।
किचन के कचरे से घर पर बनाएं प्राकृतिक खाद, नहीं आएगी तेज बदबू और मक्खियां
रसोई में रोजाना निकलने वाला फल-सब्जियों का कचरा अक्सर सामान्य कूड़े के साथ फेंक दिया जाता है। लेकिन इसी जैविक कचरे को सही तरीके से सड़ाकर घर के पौधों और किचन गार्डन के लिए उपयोगी कंपोस्ट खाद में बदला जा सकता है। कंपोस्ट बनाने की प्रक्रिया में सबसे अहम बात यह है कि जैविक सामग्री में नमी, हवा और सूखी सामग्री का संतुलन बना रहे। अगर खाद में बहुत अधिक गीलापन हो जाए या उसमें पर्याप्त हवा न पहुंचे तो दुर्गंध और मक्खियों की समस्या पैदा हो सकती है।
सबसे पहले समझें, कंपोस्ट क्या है
कंपोस्ट एक ऐसी जैविक खाद है जो पौधों और अन्य जैविक पदार्थों के प्राकृतिक अपघटन से तैयार होती है। घरेलू स्तर पर फल-सब्जियों के छिलके, खराब या बची हुई कच्ची सब्जियां, सूखे पत्ते और कुछ अन्य जैविक सामग्री का इस्तेमाल किया जा सकता है। इस प्रक्रिया में सूक्ष्मजीव जैविक पदार्थों को धीरे-धीरे विघटित करते हैं। समय के साथ सामग्री का आकार कम होता जाता है और वह गहरे रंग की, भुरभुरी तथा मिट्टी जैसी सामग्री में बदलने लगती है।
किचन के कौन से कचरे का करें इस्तेमाल
घर में कंपोस्ट तैयार करने के लिए मुख्य रूप से जैविक कचरे का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें फल और सब्जियों के छिलके, सब्जियों के डंठल, खराब हो चुके फल-सब्जियों के छोटे टुकड़े और पौधों से निकलने वाला कुछ जैविक अवशेष शामिल किए जा सकते हैं। इसके साथ सूखे पत्ते, सूखी घास, बिना चमक वाली कागज की छोटी कतरन या सूखी जैविक सामग्री मिलाने से कंपोस्ट में कार्बन और नाइट्रोजन का संतुलन बनाए रखने में मदद मिलती है। हालांकि, शुरुआत में बड़ी मात्रा में तेल, घी, मांस, मछली, डेयरी उत्पाद और अत्यधिक नमकीन या मसालेदार भोजन का कचरा डालने से बचना बेहतर है। ऐसी सामग्री घरेलू कंपोस्ट में दुर्गंध और कीटों की समस्या बढ़ा सकती है।
बदबू रोकने का सबसे जरूरी तरीका
कंपोस्ट से आने वाली तेज बदबू का एक प्रमुख कारण अत्यधिक नमी और हवा की कमी हो सकता है। इसलिए सिर्फ गीला किचन वेस्ट कंटेनर में भरते जाना सही तरीका नहीं है। जब भी गीले फल-सब्जियों के छिलके डालें, उनके साथ कुछ सूखे पत्ते, सूखी घास या अन्य उपयुक्त सूखी जैविक सामग्री मिलाएं। इससे अतिरिक्त नमी सोखने में मदद मिलती है और मिश्रण में हवा के लिए जगह बनी रहती है। कंटेनर में पानी जमा नहीं होना चाहिए। कंपोस्ट मिश्रण नम रहना चाहिए, लेकिन इतना गीला नहीं कि उसमें से पानी टपकने लगे।
मक्खियों से कैसे बचें
किचन वेस्ट खुला छोड़ने पर मक्खियां आसानी से आकर्षित हो सकती हैं। इसलिए कंपोस्ट कंटेनर को ढक्कन से ढककर रखना जरूरी है। हालांकि, कंटेनर पूरी तरह वायुरुद्ध नहीं होना चाहिए, क्योंकि जैविक अपघटन के लिए हवा का आवागमन भी जरूरी है। ताजे फल-सब्जियों के अवशेषों को ऊपर खुला छोड़ने के बजाय उन्हें सूखी सामग्री की एक परत से ढक देना भी उपयोगी तरीका है। इससे कचरे की सतह कम खुली रहती है और मक्खियों का आकर्षण घटाया जा सकता है। अगर कंपोस्ट में अचानक बहुत ज्यादा मक्खियां दिखाई देने लगें, तो उसमें गीला कचरा डालना कुछ समय के लिए कम करें और ऊपर से सूखी जैविक सामग्री की परत डालें।
घर पर कंपोस्ट बनाने का आसान तरीका
सबसे पहले ढक्कन वाला उपयुक्त कंटेनर लें। उसमें हवा के आवागमन के लिए छोटे छेद होना उपयोगी है। कंटेनर को ऐसी जगह रखें जहां सीधी तेज धूप और बारिश से वह सुरक्षित रहे। सबसे नीचे सूखे पत्तों या अन्य सूखी जैविक सामग्री की एक परत बिछाई जा सकती है। इसके ऊपर फल और सब्जियों के छोटे टुकड़े डालें। फिर उनके ऊपर दोबारा सूखी सामग्री की पतली परत डालें। इसी तरह गीली और सूखी सामग्री की परतें बनाते रहें। कचरे के बड़े टुकड़ों को छोटा काटने से उनके अपघटन की प्रक्रिया तेज होने में मदद मिल सकती है। समय-समय पर मिश्रण को हल्का पलटें, ताकि उसमें हवा पहुंचती रहे। यदि मिश्रण बहुत सूखा दिखाई दे तो थोड़ी नमी दी जा सकती है, लेकिन पानी अधिक मात्रा में नहीं डालना चाहिए।
किन चीजों से बचना चाहिए
घरेलू कंपोस्ट में प्लास्टिक, कांच, धातु, रबर और अन्य गैर-जैविक कचरा नहीं डालना चाहिए। संक्रमित पौधों के अवशेष भी सामान्य घरेलू कंपोस्ट में डालने से पहले सावधानी बरतनी चाहिए। इसके अलावा तेल और चिकनाई वाली खाद्य सामग्री अधिक मात्रा में डालने से कंपोस्टिंग प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है और दुर्गंध या कीटों की समस्या बढ़ सकती है।
खाद तैयार होने की पहचान कैसे करें
कंपोस्ट तैयार होने में समय सामग्री, मौसम, नमी, हवा और प्रबंधन पर निर्भर करता है। इसलिए हर घर में इसके लिए एक निश्चित अवधि बताना सही नहीं होगा। तैयार कंपोस्ट आमतौर पर गहरे भूरे या लगभग काले रंग की, भुरभुरी और मिट्टी जैसी दिखाई देती है। इसमें इस्तेमाल की गई मूल सामग्री काफी हद तक पहचान में नहीं आती और तेज सड़ांध जैसी गंध के बजाय मिट्टी जैसी गंध होनी चाहिए। यदि मिश्रण में अभी भी बड़ी मात्रा में ताजा कचरा दिखाई दे रहा है या तेज दुर्गंध बनी हुई है, तो उसे पूरी तरह तैयार खाद मानकर पौधों में डालने से बचना चाहिए।
तैयार कंपोस्ट का पौधों में इस्तेमाल
तैयार कंपोस्ट को गमलों, किचन गार्डन और अन्य पौधों की मिट्टी में जैविक पदार्थ के रूप में मिलाया जा सकता है। यह मिट्टी में जैविक पदार्थ बढ़ाने और उसकी संरचना को बेहतर बनाने में मदद कर सकती है। हालांकि, कंपोस्ट को पौधों के लिए हर जरूरी पोषक तत्व का अकेला स्रोत नहीं माना जाना चाहिए। पौधे और मिट्टी की जरूरत के अनुसार खाद का इस्तेमाल करना बेहतर रहता है।
किचन वेस्ट को कूड़ा समझने के बजाय संसाधन बनाएं
घरेलू स्तर पर कंपोस्टिंग का सबसे बड़ा फायदा यह है कि रसोई से निकलने वाले जैविक कचरे का उपयोग दोबारा किया जा सकता है। इससे घर के कचरे की मात्रा कम करने और पौधों के लिए जैविक सामग्री तैयार करने में मदद मिलती है। सही तरीका अपनाने पर कंपोस्ट बनाना मुश्किल काम नहीं है। गीले कचरे के साथ सूखी सामग्री, पर्याप्त हवा, नियंत्रित नमी और ढका हुआ लेकिन हवादार कंटेनर—ये चार बातें बदबू और मक्खियों की समस्या को कम करने में खास तौर पर महत्वपूर्ण हैं।
Note:
कंपोस्टिंग में परिणाम मौसम और सामग्री के अनुसार बदल सकते हैं। खाद को पौधों में इस्तेमाल करने से पहले यह सुनिश्चित करें कि वह अच्छी तरह परिपक्व हो चुकी है।