केंद्र सरकार ने 23,731 करोड़ रुपये की राष्ट्रीय पुनर्चक्रण जैव ऊर्जा (गोबरधन) योजना को मंजूरी दी है। योजना के तहत कृषि अवशेष, पशुओं के गोबर और जैविक कचरे से संपीड़ित बायोगैस (CBG) का उत्पादन बढ़ाया जाएगा। सरकार का लक्ष्य 2035-36 तक भारत को स्वच्छ ऊर्जा और जैविक अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना है।
📍 Location: नई दिल्ली
📰 Date: 6 अगस्त 2026
✍️ By: Apurva Choudhary
नई ऊर्जा क्रांति की ओर भारत का बड़ा कदम
देश में स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने और आयातित जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 23,731 करोड़ रुपये की राष्ट्रीय पुनर्चक्रण जैव ऊर्जा (गोबरधन) योजना को मंजूरी दी है। यह योजना वित्त वर्ष 2026-27 से 2035-36 तक लागू रहेगी और इसका उद्देश्य संपीड़ित बायोगैस (Compressed Bio Gas - CBG) उत्पादन को कई गुना बढ़ाना है।
क्या है गोबरधन योजना?
गोबरधन योजना के तहत कृषि अवशेष, पशुओं का गोबर, चीनी मिलों का अपशिष्ट, नगर निकायों का जैविक कचरा और अन्य बायोमास संसाधनों का उपयोग कर स्वच्छ ईंधन, जैविक खाद और ग्रामीण आय के नए स्रोत विकसित किए जाएंगे। यह योजना देश में सर्कुलर बायो-इकोनॉमी को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।
CBG उत्पादन बढ़ाने पर रहेगा विशेष फोकस
सरकार का लक्ष्य देश में संपीड़ित बायोगैस उत्पादन को लगभग 10 गुना तक बढ़ाना है। इसके लिए निजी निवेश को प्रोत्साहित किया जाएगा और नए CBG संयंत्रों की स्थापना में वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। इससे प्राकृतिक गैस की घरेलू उपलब्धता बढ़ेगी और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती मिलेगी।
किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को होगा फायदा
योजना का सबसे बड़ा लाभ किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों को मिलने की उम्मीद है। पशु गोबर और कृषि अवशेष अब अतिरिक्त आय का स्रोत बन सकेंगे। इससे फसल अवशेष जलाने की समस्या कम होगी, पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा और किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी।
ग्रीनफील्ड और ब्राउनफील्ड परियोजनाओं को सहायता
सरकार योग्य ग्रीनफील्ड CBG परियोजनाओं को प्रति टन प्रतिदिन स्थापित क्षमता के आधार पर 2 करोड़ रुपये तक की पूंजी सहायता देगी। साथ ही उत्पादन क्षमता बढ़ाने वाली ब्राउनफील्ड परियोजनाओं को भी इस योजना का लाभ मिलेगा। इससे नई तकनीक अपनाने और उत्पादन क्षमता बढ़ाने में तेजी आएगी।
पाइपलाइन और गैस वितरण नेटवर्क का विस्तार
गोबरधन योजना के तहत CBG संयंत्रों को ट्रंक पाइपलाइन और सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क से जोड़ने के लिए भी सहायता दी जाएगी। इससे उत्पादित बायोगैस का उपयोग परिवहन, घरेलू और औद्योगिक क्षेत्रों में आसानी से किया जा सकेगा।
MSME परियोजनाओं को मिलेगा विशेष समर्थन
योजना में MSME आधारित परियोजनाओं के लिए विशेष ऋण गारंटी तंत्र की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा सरकार एक इकोसिस्टम चैलेंज फंड भी स्थापित करेगी, जिसके माध्यम से फीडस्टॉक संग्रह, जिला स्तर की परियोजनाओं, तकनीकी नवाचार, क्षमता निर्माण और जैविक खाद के मूल्य संवर्धन को बढ़ावा दिया जाएगा।
CBG मिश्रण लक्ष्य भी तय
सरकार ने नगर गैस वितरण कंपनियों के लिए CBG मिश्रण लक्ष्य भी निर्धारित किए हैं। वित्त वर्ष 2026-27 में 3%, 2027-28 में 4% और 2028-29 से आगे 5% तक CBG मिश्रण सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा गया है। इससे स्वच्छ ईंधन के उपयोग को बढ़ावा मिलेगा और कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी।
पर्यावरण और अर्थव्यवस्था दोनों को मिलेगा लाभ
विशेषज्ञों का मानना है कि गोबरधन योजना से वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन, ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी और जैविक खाद के उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा। इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ ग्रामीण रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
सरकार की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा
सरकार का कहना है कि यह योजना भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। प्राकृतिक गैस की बढ़ती मांग को घरेलू बायोगैस उत्पादन से पूरा करने का प्रयास किया जाएगा, जिससे आयातित ईंधन पर निर्भरता कम होगी और विदेशी मुद्रा की बचत भी होगी।
23,731 करोड़ रुपये की गोबरधन योजना भारत के स्वच्छ ऊर्जा मिशन की सबसे बड़ी पहलों में से एक मानी जा रही है। यदि योजना तय समय पर प्रभावी ढंग से लागू होती है, तो इससे किसानों की आय, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, पर्यावरण संरक्षण और देश की ऊर्जा सुरक्षा—चारों क्षेत्रों में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकता है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।