दिल्ली में विपक्ष की महारैली के बीच ममता बनर्जी ने बीजेपी पर राम मंदिर के पैसे के कथित दुरुपयोग का आरोप लगाया है। उनके बयान से राजनीतिक विवाद बढ़ने की आशंका है। आरोपों के प्रमाण और बीजेपी की प्रतिक्रिया की पुष्टि बाकी है।
📍 नई दिल्ली
🗓️ 1 नवंबर 2026
✍️ वसी सिद्दीकी
नई दिल्ली। देश की राजधानी में रविवार को विपक्षी गठबंधन इंडिया की महारैली के दौरान तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी के एक कथित बयान ने राजनीतिक बहस को नया मुद्दा दे दिया है। उपलब्ध शुरुआती इनपुट के मुताबिक, ममता बनर्जी ने बीजेपी पर राम मंदिर से जुड़े पैसे के कथित दुरुपयोग का आरोप लगाया और पार्टी के सत्ता से बाहर होने की बात कही।
हालांकि, इस विशेष बयान की मूल वीडियो रिकॉर्डिंग या आधिकारिक ट्रांसक्रिप्ट स्वतंत्र रूप से उपलब्ध नहीं हो सकी है। इसलिए आरोप को प्रमाणित तथ्य के बजाय ममता बनर्जी से संबद्ध एक राजनीतिक दावे के तौर पर देखा जाना चाहिए।
1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में विपक्षी गठबंधन इंडिया की बड़ी रैली आयोजित हुई। इस प्रदर्शन का प्रमुख मुद्दा मतदाता सूचियों में कथित अनियमितताएं, विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की मांग रहा।
रैली में राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, अखिलेश यादव और ममता बनर्जी समेत विपक्ष के कई प्रमुख नेताओं की भागीदारी दर्ज की गई। विपक्ष ने चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और मताधिकार की सुरक्षा को लेकर सवाल उठाए।
ममता बनर्जी से संबद्ध बयान में राम मंदिर के पैसे के कथित दुरुपयोग का आरोप सामने आया है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी से यह स्पष्ट नहीं होता कि आरोप मंदिर निर्माण के चंदे, किसी वित्तीय लेनदेन या किसी अन्य मद से संबंधित है।
किस व्यक्ति या संस्था पर आरोप लगाया गया, कितनी धनराशि की बात हो रही है और आरोप के समर्थन में कौन से दस्तावेज़ मौजूद हैं, इन सवालों का जवाब अभी नहीं मिला है।
ऐसे में यह निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा कि राम मंदिर के लिए जुटाए गए पैसे में कोई वित्तीय गड़बड़ी साबित हो चुकी है।
उपलब्ध इनपुट के मुताबिक, ममता बनर्जी ने बीजेपी के सत्ता से बाहर होने की बात भी कही। इसे विपक्ष की राजनीतिक रणनीति और आगामी चुनावी मुकाबलों के संदर्भ में देखा जा रहा है।
इससे पहले 29 अक्टूबर को ममता बनर्जी ने विपक्षी एकजुटता की अपील करते हुए मतदाता सूचियों, इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों, वोटर डेटा और मतगणना से संबंधित सवाल उठाए थे। उन्होंने लोकतांत्रिक संस्थाओं की जवाबदेही और संविधान की रक्षा को विपक्षी अभियान का प्रमुख मुद्दा बताया था।
रामलीला मैदान की रैली का मुख्य राजनीतिक संदर्भ चुनाव आयोग के ख़िलाफ़ विपक्ष का अभियान रहा।
विपक्षी दलों का आरोप है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां हुई हैं। दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने राजनीतिक पक्षपात के आरोपों से इनकार किया है और कहा है कि ग़लत तरीके से हटाए गए पात्र मतदाताओं के नाम दोबारा दर्ज कराने की प्रक्रिया उपलब्ध है।
इस विवाद में आरोपों, आधिकारिक स्पष्टीकरण और दस्तावेज़ी प्रमाणों के बीच अंतर करना ज़रूरी है।
बीजेपी ने विपक्ष की दिल्ली रैली को राजनीतिक नाटकीयता बताते हुए उसकी आलोचना की है। पार्टी ने 1984 के सिख विरोधी दंगों के मुद्दे पर दिल्ली में अलग विरोध प्रदर्शन भी आयोजित किया।
हालांकि, राम मंदिर के पैसे से संबंधित ममता बनर्जी के कथित आरोप पर बीजेपी की कोई विशिष्ट, सत्यापित प्रतिक्रिया इस रिपोर्ट के तैयार होने तक उपलब्ध नहीं हुई है।
ममता बनर्जी के कथित बयान को लेकर 3 अहम पहलुओं पर नज़र रहेगी। पहला, भाषण की मूल रिकॉर्डिंग से आरोप के सटीक शब्दों की पुष्टि। दूसरा, आरोप के समर्थन में दस्तावेज़ या अन्य प्रमाण सामने आते हैं या नहीं। तीसरा, बीजेपी अथवा संबंधित संस्था इस मामले में क्या आधिकारिक प्रतिक्रिया देती है।
फिलहाल राम मंदिर से संबंधित वित्तीय अनियमितता का आरोप अपुष्ट है। इस दावे को स्थापित तथ्य के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।