मेरठ के लिसाड़ी गेट थाना क्षेत्र में 26 वर्षीय विवाहिता की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। मायके पक्ष ने दहेज के लिए हत्या का आरोप लगाया है, जबकि ससुराल पक्ष इसे दुर्घटना बता रहा है। पुलिस ने पोस्टमार्टम और फोरेंसिक जांच शुरू कर दी है। मामले की सच्चाई मेडिकल और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर सामने आएगी।
📍 मेरठ 📰 ✍️ वसी सिद्दीकी/शावेज़ खान
13 जुलाई 2026
मेरठ के लिसाड़ी गेट थाना क्षेत्र में रविवार को हुई एक विवाहिता की संदिग्ध मौत ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 26 वर्षीय निदा उर्फ सोनी का शव घर के भीतर खून से लथपथ हालत में मिलने के बाद मामला केवल एक पारिवारिक घटना नहीं रह गया, बल्कि यह पुलिस जांच का विषय बन गया है। एक ओर मायके पक्ष इसे दहेज के लिए की गई हत्या बता रहा है, जबकि दूसरी ओर ससुराल पक्ष का कहना है कि महिला की मौत फर्श पर फिसलने से लगी चोट के कारण हुई।
घटना के बाद दो अलग-अलग दावे
पुलिस के अनुसार घटना रविवार दोपहर सामने आई। सूचना मिलने के बाद पुलिस, फोरेंसिक टीम और क्षेत्राधिकारी मौके पर पहुंचे। शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया।
मायके पक्ष का आरोप है कि मृतका के शरीर पर कई चोटों के निशान थे और हत्या किसी नुकीली वस्तु से की गई। परिजनों का कहना है कि दहेज को लेकर पहले भी विवाद होता रहा था।
दूसरी ओर ससुराल पक्ष का कहना है कि महिला का पैर फिसल गया था, जिससे सिर में गंभीर चोट लगी और उसकी मृत्यु हो गई। उन्होंने हत्या के आरोपों से इनकार किया है।
ऐसे मामलों में केवल आरोप या बचाव के आधार पर निष्कर्ष निकालना उचित नहीं माना जाता। पोस्टमार्टम रिपोर्ट, फोरेंसिक जांच, घटनास्थल से जुटाए गए साक्ष्य और इलेक्ट्रॉनिक प्रमाण जांच की दिशा तय करेंगे।
यदि शरीर पर पाए गए चोटों का स्वरूप दुर्घटना से मेल नहीं खाता है तो जांच की दिशा बदल सकती है। वहीं यदि मेडिकल रिपोर्ट हादसे की पुष्टि करती है तो पुलिस उसी आधार पर आगे की कार्रवाई करेगी।
दहेज से जुड़े मामलों में जांच क्यों होती है संवेदनशील
भारत में विवाहिता की असामान्य परिस्थितियों में मृत्यु होने पर पुलिस विशेष सतर्कता के साथ जांच करती है। यदि मृत्यु विवाह के कुछ वर्षों के भीतर होती है और दहेज उत्पीड़न के आरोप सामने आते हैं तो संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत विस्तृत जांच की जाती है।
हालांकि केवल आरोप लगना किसी व्यक्ति के दोषी होने का प्रमाण नहीं माना जाता। अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही निकलता है।
परिवार और बच्चों पर सबसे बड़ा असर
मृतका अपने पीछे दो छोटे बच्चों को छोड़ गई है। ऐसी घटनाओं का सबसे अधिक प्रभाव बच्चों और दोनों परिवारों पर पड़ता है। यदि मामला हत्या का सिद्ध होता है तो यह एक गंभीर आपराधिक मामला होगा, जबकि दुर्घटना सिद्ध होने पर जांच का निष्कर्ष अलग होगा।
पुलिस की अगली कार्रवाई
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि दोनों पक्षों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फोरेंसिक रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। फरार बताए जा रहे परिजनों की तलाश भी जारी है।
संपादकीय दृष्टिकोणफिलहाल यह मामला संदिग्ध मौत के रूप में जांच के अधीन है। दहेज हत्या का आरोप और दुर्घटना का दावा—दोनों की सत्यता अभी जांच से गुजरनी बाकी है। ऐसे मामलों में अंतिम निष्कर्ष केवल मेडिकल रिपोर्ट, वैज्ञानिक साक्ष्यों और पुलिस जांच के आधार पर ही सामने आएगा। जब तक आधिकारिक जांच पूरी नहीं हो जाती, किसी भी पक्ष के दावे को अंतिम सत्य नहीं माना जा सकता।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।