ब्राजील में पुलिस ने 33 वर्षीय जोरलान लोपेस दा सिल्वा को महिला के वेश में गिरफ्तार किया। पुलिस के मुताबिक वह कम से कम 16 हत्याओं की जांच में संदिग्ध है। पूछताछ में उसने 80 हत्याओं का दावा किया, जिसकी पूरी पुष्टि अभी बाकी है।
मुलुंगु, पाराइबा, ब्राजील | 19 सितंबर 2026
By Mohd Haris
ब्राजील के उत्तर-पूर्वी राज्य पाराइबा में पुलिस ने एक ऐसे संदिग्ध को गिरफ्तार किया है, जिसे कई हत्याओं के मामले में तलाशा जा रहा था। 33 वर्षीय जोरलान लोपेस दा सिल्वा को मुलुंगु इलाके में पुलिस ने महिला के कपड़े और विग पहने हुए पकड़ा। गिरफ्तारी के समय वह एक छोटे बच्चे को गोद में लिए हुए था। पुलिस के मुताबिक बच्चा आरोपी का रिश्तेदार नहीं है।
16 हत्याओं की जांच में संदिग्ध
पुलिस के मुताबिक जोरलान को पाराइबा के वाले दो मामांगुआपे इलाके में कम से कम 16 हत्याओं से जोड़ा गया है। इन मामलों में से कई हत्याएं मई के बाद हुईं। पुलिस ने कहा है कि 16 मामलों में से 11 के बारे में आरोपी ने पूछताछ के दौरान कथित तौर पर स्वीकारोक्ति की है।
हालांकि पुलिस की जांच अभी जारी है। इसलिए आरोपी को अदालत से दोषी ठहराए जाने से पहले हत्याओं का अंतिम तौर पर जिम्मेदार व्यक्ति कहना कानूनी रूप से उचित नहीं होगा।
80 हत्याओं का दावा
पूछताछ के दौरान आरोपी ने अपने आप को करीब 80 हत्याओं से जोड़ने वाला दावा किया। उसने कहा कि उसने पहली हत्या 13 साल की उम्र में की थी। पुलिस ने अभी 80 हत्याओं की पुष्टि नहीं की है और इन दावों की जांच जारी है।
पुलिस के मुताबिक फिलहाल जांच में पुष्ट या मजबूत तौर पर जुड़े मामलों की संख्या आरोपी के दावे से काफी कम है। इसी वजह से 80 हत्याओं के आंकड़े को आरोपी का दावा ही माना जा रहा है, स्थापित तथ्य नहीं।
महिला का भेष क्यों बनाया?
पुलिस के अनुसार आरोपी गिरफ्तारी से बचने के लिए अपना हुलिया बदलकर जंगल वाले इलाके में छिपा था। उसके शरीर पर ड्रेस, लंबी काली विग और महिलाओं के जूते थे। रिपोर्टों के अनुसार उसने नाखूनों पर रंग भी लगाया हुआ था।
उस वक्त उसके साथ करीब 2 साल का एक बच्चा भी था। पुलिस ने बताया कि बच्चा आरोपी का रिश्तेदार नहीं है। बच्चे की स्थिति को लेकर पुलिस ने कहा कि वह सुरक्षित था और उसे चिकित्सकीय देखभाल दी गई। बच्चा आरोपी के साथ कैसे पहुंचा, इसकी जांच अलग से चल रही है।
30 घंटे चला पुलिस ऑपरेशन
जोरलान की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने करीब 30 घंटे तक तलाशी अभियान चलाया। कार्रवाई में पाराइबा की सिविल पुलिस, मिलिट्री पुलिस और संघीय राजमार्ग पुलिस से जुड़ी खुफिया इकाइयों ने सहयोग किया।
इससे पहले भी पुलिस ने उसे पकड़ने की कोशिश की थी। एक कार्रवाई के दौरान वह सुरक्षा बलों से बच निकलने में कामयाब रहा था। बाद की तलाश में पुलिस ने बुलेटप्रूफ जैकेट, हथियार का एक हिस्सा और 100 से अधिक गोलियां बरामद करने की जानकारी दी।
गैंग से संबंध या अकेले अपराध?
पुलिस आरोपी को एक हिंसक आपराधिक संगठन से जोड़कर जांच कर रही है। इसी मामले में दो अन्य संदिग्धों को भी गिरफ्तार किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि संगठन पर इलाके में कई हत्याओं में शामिल होने का संदेह है।
दूसरी ओर, पूछताछ में जोरलान ने किसी आपराधिक संगठन से संबंध होने से इनकार किया। उसने दावा किया कि उसने अपने स्तर पर कार्रवाई की और उसके निशाने पर ऐसे लोग थे, जिन्हें वह अपराधी मानता था। उसके इस बयान की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
पुराने हत्या मामलों की भी खुलेगी फाइल
ब्राजील पुलिस ने संकेत दिया है कि आरोपी से जुड़े पुराने हत्या मामलों की दोबारा जांच की जाएगी। पुलिस के मुताबिक पूछताछ से ऐसे मामलों की जानकारी मिल सकती है, जिनका आरोपी से संबंध पहले स्थापित नहीं हो सका था।
जांचकर्ताओं के सामने अब दो बड़े सवाल हैं। पहला, आरोपी के 80 हत्याओं वाले दावे में कितनी सच्चाई है। दूसरा, जिन मामलों में उसे संदिग्ध माना जा रहा है, उनमें उसके खिलाफ उपलब्ध सबूत किस स्तर तक अदालत में टिकते हैं।
बच्चे को लेकर भी जांच
गिरफ्तारी के समय आरोपी के साथ मौजूद बच्चे ने इस मामले को और गंभीर बना दिया है। पुलिस ने बताया कि बच्चा उसका रिश्तेदार नहीं है। बच्चे को नुकसान पहुंचने की सूचना नहीं है, लेकिन वह आरोपी के साथ कैसे और क्यों था, इसकी परिस्थितियों की जांच की जा रही है।
आगे क्या होगा
जोरलान को गिरफ्तारी के बाद न्यायिक प्रक्रिया का सामना करना होगा। पुलिस अब हत्या के मामलों में उपलब्ध फॉरेंसिक साक्ष्य, गवाहों के बयान और पूछताछ से मिली जानकारी को मिलाकर जांच आगे बढ़ाएगी।
फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण अंतर 16 और 80 के आंकड़ों के बीच है। 16 हत्याएं पुलिस की जांच से जुड़ा आंकड़ा है, जबकि 80 हत्याओं की संख्या आरोपी का अपना दावा है। जब तक जांच और न्यायिक प्रक्रिया इसे प्रमाणित नहीं करती, 80 हत्याओं को पुष्ट संख्या के तौर पर पेश करना सही नहीं होगा।
यह मामला इस बात की भी मिसाल है कि किसी आरोपी के बयान और पुलिस जांच के बीच फर्क रखना जरूरी है। आगे की फॉरेंसिक जांच और अदालत की कार्रवाई ही तय करेगी कि आरोपी पर लगे आरोपों में से कितने साबित होते हैं।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।