मिस्र की टीवी प्रस्तोता सारा खलीफा को ड्रग्स मामले में मौत की सजा
मिस्र की राजधानी काहिरा की एक आपराधिक अदालत ने TV presenter सारा खलीफा और 11 अन्य आरोपियों को मादक पदार्थों के निर्माण और तस्करी से जुड़े मामले में मौत की सजा सुनाई है। फैसला एक ऐसे मुकदमे में आया है जिसमें कुल 28 आरोपी शामिल थे।
काहिरा, 7 सितंबर 2026 | शाह टाइम्स
By Mohd Haris
अदालत ने 9 अन्य आरोपियों को उम्रकैद की सजा दी, जबकि 7 लोगों को बरी कर दिया गया। मामले में अभियोजन ने संगठित आपराधिक गिरोह बनाने, सिंथेटिक ड्रग्स के लिए कच्चा माल हासिल करने और उसे तस्करी के इरादे से इस्तेमाल करने के आरोप लगाए थे।
सारा खलीफा कौन हैं?
39 वर्षीय सारा खलीफा मिस्र की जानी-पहचानी TV presenter हैं। वह “मिशन इम्पॉसिबल” नाम के कार्यक्रम की मेजबानी करती थीं, जिसमें सुरक्षा और अपराध से जुड़े मामले दिखाए जाते थे।
टेलीविजन के अलावा वह कॉस्मेटिक सर्जरी क्लिनिक और इवेंट मैनेजमेंट कारोबार से भी जुड़ी रही हैं। सोशल मीडिया पर उनके लाखों फॉलोअर्स हैं।
ड्रग्स नेटवर्क पर क्या आरोप था?
अभियोजन पक्ष के मुताबिक आरोपी एक संगठित नेटवर्क का हिस्सा थे, जो विदेश से सिंथेटिक ड्रग्स बनाने में इस्तेमाल होने वाली सामग्री मंगाता था। जांचकर्ताओं के अनुसार सामग्री को आवासीय संपत्तियों में रखा जाता था और वहां ड्रग्स के निर्माण की गतिविधियां चलती थीं।
अधिकारियों ने जांच के दौरान 750 किलोग्राम से अधिक मादक पदार्थ और ड्रग्स बनाने से जुड़ी सामग्री बरामद करने की बात कही है। दो आवासीय परिसरों को कथित तौर पर प्रयोगशाला के तौर पर इस्तेमाल किए जाने की जानकारी भी सामने आई है।
अवैध हथियार भी बरामद
मामला केवल ड्रग्स तक सीमित नहीं था। अभियोजन के मुताबिक जांच के दौरान बिना लाइसेंस वाली बंदूकें और गोला-बारूद भी बरामद किए गए।
अदालत के सामने आरोपों में मादक पदार्थों के निर्माण और तस्करी के साथ अवैध हथियार रखने से जुड़े आरोप भी शामिल थे।
सारा खलीफा ने आरोपों से किया इनकार
सारा खलीफा ने जांच के दौरान आरोपों को खारिज किया। उन्होंने अपनी बेगुनाही पर जोर दिया और कहा कि उनका ड्रग्स से कोई संबंध नहीं है।
अदालत में फैसला सुनाए जाने के दौरान भी उन्होंने अपनी बेगुनाही की बात कही। उनके बचाव पक्ष की दलीलों और अभियोजन के साक्ष्यों के बीच अदालत ने दोषसिद्धि के बाद मौत की सजा सुनाई।
मौत की सजा से पहले ग्रैंड मुफ्ती की राय
मिस्र में मौत की सजा वाले मामलों में अदालत द्वारा देश के ग्रैंड मुफ्ती से धार्मिक राय लेना कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है। इस मामले में भी अदालत ने फैसला सुनाने से पहले ग्रैंड मुफ्ती से राय ली थी।
यह राय न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन इसे अंतिम न्यायिक फैसले के बराबर नहीं माना जाता।
क्या सजा अंतिम है?
नहीं। फैसला अपील के दायरे में है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक दोषियों के पास फैसले को चुनौती देने का कानूनी रास्ता मौजूद है।
इसलिए अदालत की ओर से मौत की सजा सुनाए जाने और सजा पर अंतिम अमल के बीच कानूनी प्रक्रिया के कई चरण बाकी हो सकते हैं।
अलग मामले में भी सजा
सारा खलीफा से जुड़े एक अलग मामले में भी अदालत ने उन्हें सजा सुनाई है। इस मामले में एक युवक के अपहरण और मारपीट से जुड़े आरोप थे।
रिपोर्टों में इस अलग मामले की सजा की अवधि को लेकर अंतर है। इसलिए मुख्य ड्रग्स मामले की मौत की सजा को ही इस खबर का केंद्रीय तथ्य माना जा रहा है।
मिस्र में ड्रग्स अपराध पर सख्त कानून
मिस्र में मादक पदार्थों की तस्करी ऐसे अपराधों में शामिल है जिनमें मौत की सजा का प्रावधान है। इसके अलावा पूर्व नियोजित हत्या और आतंकवाद जैसे गंभीर अपराध भी मृत्युदंड के दायरे में आते हैं।
यह मामला इसलिए भी चर्चा में आया है क्योंकि दोषियों में एक जानी-पहचानी टीवी हस्ती शामिल है। लेकिन कानूनी दृष्टि से अदालत का फैसला उनके सेलिब्रिटी दर्जे के बजाय मुकदमे में सामने आए आरोपों और साक्ष्यों पर आधारित है।
अब आगे क्या होगा?
सारा खलीफा और अन्य दोषियों के लिए अपील की प्रक्रिया अहम होगी। इस चरण में मौत की सजा को अंतिम परिणाम मानना जल्दबाजी होगी।
मामले की आगे की कानूनी कार्रवाई यह तय करेगी कि दोषसिद्धि और सजा बरकरार रहती है, बदली जाती है या मामले में दोबारा सुनवाई होती है।