बुधवार, 26 August 2026
GOLD ₹0 ▼ 0%
SENSEX 0 ▼ 0%
BITCOIN $0 ▼ 0%
38°C मुजफ्फरनगर
EDITION:
BREAKING
#ShahTimes #Muzaffarnagar #Bijnor #Moradabad #BreakingNews #Politics #Education #Crime #Sports #Business
Book Your Ads With Shah Times
World

ममदानी ने मोहन भागवत के न्यूयॉर्क कार्यक्रम का विरोध किया

Shah Times 2026-08-26 11:14:12
ममदानी ने मोहन भागवत के न्यूयॉर्क कार्यक्रम का विरोध किया

ममदानी बोले, मोहन भागवत के कार्यक्रम का समर्थन नहीं

न्यूयॉर्क में भागवत के कार्यक्रम पर ममदानी का विरोध

भागवत के न्यूयॉर्क कार्यक्रम पर क्यों भिड़े ममदानी


न्यूयॉर्क मेयर जोहरान ममदानी ने मोहन भागवत के प्रस्तावित कार्यक्रम का विरोध किया है। उन्होंने निजी आयोजन को रद्द करने के शहर के अधिकार पर अनिश्चितता जताई। कार्यक्रम 29 अगस्त को प्रस्तावित है। आयोजक इसे हिंदू अमेरिकी समुदाय की एकता और साझा विरासत से जोड़ते हैं, जबकि विरोधी संगठन आरएसएस की विचारधारा पर सवाल उठा रहे हैं।


न्यूयॉर्क, अमेरिका |26 अगस्त 2026 |शाह टाइम्स 

By Mohd Haris


न्यूयॉर्क में भागवत के कार्यक्रम पर ममदानी का विरोध

न्यूयॉर्क सिटी के मेयर जोहरान ममदानी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत के प्रस्तावित न्यूयॉर्क कार्यक्रम का खुलकर विरोध किया है। ममदानी ने कहा कि वह इस रैली का समर्थन नहीं करते, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि किसी निजी आयोजन को रद्द करने का अधिकार शहर प्रशासन के पास है या नहीं, उन्हें इसकी जानकारी नहीं है। यह विवाद ऐसे वक्त सामने आया है जब भागवत आरएसएस के शताब्दी वर्ष से जुड़े वैश्विक संपर्क कार्यक्रम के तहत अमेरिका पहुंचे हैं। 29 अगस्त को होने वाले ‘यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन’ में उनके संबोधन को लेकर हिंदू अमेरिकी संगठनों के एक हिस्से में समर्थन है, जबकि कुछ नागरिक अधिकार और अंतरधार्मिक संगठन इसका विरोध कर रहे हैं।

ममदानी ने क्या कहा

ममदानी से जब पूछा गया कि क्या मोहन भागवत का कार्यक्रम रद्द किया जाना चाहिए, तो उन्होंने कहा कि वह इस रैली का समर्थन नहीं करते। साथ ही उन्होंने निजी कार्यक्रम को रद्द करने के लिए न्यूयॉर्क प्रशासन के अधिकार क्षेत्र पर अनिश्चितता जताई। ममदानी ने अपने रुख को भारत के बारे में अपने पारिवारिक अनुभव से भी जोड़ा। उन्होंने कहा कि उनके परिवार से मिली भारत की समझ एक बहुलतावादी समाज और धर्मनिरपेक्ष गणराज्य की थी, जहां हर भारतीय के लिए जगह होने की अवधारणा महत्वपूर्ण थी। उन्होंने भारत में एक ऐसे आंदोलन के उभार पर चिंता जताई जिसे वह बहिष्करण की सोच से जोड़ते हैं। यह बयान महज एक स्थानीय कार्यक्रम पर मेयर की टिप्पणी नहीं है। इसके पीछे अमेरिका में भारतीय डायस्पोरा की सियासत, भारत की राजनीतिक छवि, धार्मिक स्वतंत्रता और न्यूयॉर्क में अभिव्यक्ति की आज़ादी जैसे कई सवाल जुड़े हुए हैं।

29 अगस्त के कार्यक्रम को लेकर क्या स्थिति है

आयोजक संस्था अमेरिकन हिंदूज़ फॉर एंगेजमेंट एंड डायलॉग यानी एएचईएडी फोरम ने 29 अगस्त को ‘यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन’ आयोजित करने की घोषणा की है। आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक कार्यक्रम न्यूयॉर्क में होगा और इसका केंद्रीय संदेश साझा विरासत, एकता और सामाजिक सद्भाव से जुड़ा है। मोहन भागवत को प्रमुख वक्ताओं में शामिल किया गया है। हालांकि आयोजन स्थल को लेकर एक अहम तथ्य सामने आता है। कई मीडिया रिपोर्टों में मैडिसन स्क्वायर गार्डन का उल्लेख किया गया है, जबकि कार्यक्रम की आधिकारिक वेबसाइट फिलहाल स्थल को केवल मैनहैटन, न्यूयॉर्क बताती है और सटीक पता बाद में घोषित करने की बात कहती है। इसलिए प्रकाशन के स्तर पर मैडिसन स्क्वायर गार्डन को निश्चित आयोजन स्थल बताने से पहले आधिकारिक पुष्टि जरूरी है। रिपोर्टों के मुताबिक इस कार्यक्रम में लगभग 5,000 लोगों के शामिल होने की उम्मीद है। आयोजकों ने इससे जुड़े नेटवर्क में 200 से अधिक हिंदू अमेरिकी संगठनों के समर्थन का दावा किया है।

आयोजकों का नज़रिया क्या है

आयोजकों के मुताबिक ‘यूनिवर्सल वननेस’ कार्यक्रम का मकसद हिंदू अमेरिकी समुदाय को साझा मूल्यों, सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक एकता के मुद्दे पर जोड़ना है। आधिकारिक कार्यक्रम विवरण में इसे रक्षाबंधन के अवसर से जोड़ा गया है और समुदाय, सेवा तथा विभिन्न परंपराओं के बीच संवाद को प्रमुख विषय बताया गया है। आयोजकों ने भागवत के संबोधन को कार्यक्रम के मुख्य आकर्षणों में रखा है। उनके अनुसार यह आयोजन किसी एक राजनीतिक मुद्दे के बजाय साझा मानवीय मूल्यों और समुदाय के बीच संबंधों पर केंद्रित है। यही वह बिंदु है जहां समर्थकों और विरोधियों के नैरेटिव में स्पष्ट अंतर दिखाई देता है। आयोजक इसे सांस्कृतिक और सामुदायिक एकता का कार्यक्रम बताते हैं, जबकि विरोध करने वाले संगठन भागवत की मौजूदगी को आरएसएस की विचारधारा और उसके भारत में सामाजिक-राजनीतिक प्रभाव के संदर्भ में देखते हैं।

विरोध करने वाले संगठनों की आपत्ति

न्यूयॉर्क में कई नागरिक अधिकार और अंतरधार्मिक संगठनों ने भागवत के कार्यक्रम पर आपत्ति दर्ज की है। इंडिया टुडे के मुताबिक हिंदूज़ फॉर ह्यूमन राइट्स, इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल और इंटरफेथ सेंटर ऑफ न्यूयॉर्क समेत संगठनों ने न्यूयॉर्क सिटी हॉल के बाहर विरोध दर्ज कराया और आयोजन स्थल से कार्यक्रम रद्द करने की मांग की। इन संगठनों की आपत्ति का केंद्र आरएसएस की विचारधारा और भारत में अल्पसंख्यकों से जुड़े विवाद हैं। रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी धार्मिक स्वतंत्रता आयोग ने आरएसएस पर अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा और असहिष्णुता से जुड़े आरोप लगाए हैं। हालांकि आरएसएस इन आरोपों को खारिज करता है और खुद को हिंदू केंद्रित सभ्यतागत तथा सांस्कृतिक संगठन के रूप में प्रस्तुत करता है। इसलिए इस मामले में आरोप और स्थापित तथ्य के बीच फर्क बनाए रखना जरूरी है। आरएसएस के खिलाफ लगाए गए सभी आरोपों को संगठन स्वीकार नहीं करता और भारत सरकार भी धार्मिक भेदभाव के आरोपों को खारिज करती रही है।

आरएसएस का अमेरिकी आउटरीच क्यों अहम है

भागवत का अमेरिका दौरा आरएसएस के शताब्दी वर्ष में शुरू किए गए वैश्विक संपर्क अभियान का हिस्सा है। रिपोर्टों के मुताबिक इस यात्रा का मकसद विदेशों में भारतीय और हिंदू समुदायों के साथ संपर्क मजबूत करना और संगठन को लेकर मौजूद धारणाओं पर अपनी बात रखना है।

आरएसएस भारत के राजनीतिक परिदृश्य में भी महत्वपूर्ण भूमिका रखता है। रॉयटर्स ने इसे भारतीय जनता पार्टी का वैचारिक मूल संगठन बताया है। आरएसएस इस संबंध और अपनी भूमिका को अपने सामाजिक-सांस्कृतिक दृष्टिकोण से देखता है, जबकि आलोचक इसे भारत की सियासत और हिंदुत्व की राजनीति के संदर्भ में रखते हैं। अमेरिका में किसी बड़े सार्वजनिक मंच पर भागवत का संबोधन इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि इससे भारतीय डायस्पोरा के बीच संगठन की अंतरराष्ट्रीय मौजूदगी और नैरेटिव को विस्तार मिलता है।

ममदानी के बयान का सियासी संदर्भ

ममदानी का रुख उनके न्यूयॉर्क मेयर के रूप में संवैधानिक और प्रशासनिक दायरे से भी जुड़ा है। उन्होंने राजनीतिक असहमति व्यक्त की, लेकिन निजी आयोजन को प्रशासनिक आदेश से रोकने के सवाल पर अपने अधिकार क्षेत्र को लेकर स्पष्ट दावा नहीं किया। यह अंतर महत्वपूर्ण है। किसी आयोजन का विरोध करना और उसे कानूनी या प्रशासनिक प्रक्रिया के जरिए रोक पाना दो अलग-अलग बातें हैं। ममदानी का बयान इसी फर्क को सामने लाता है। न्यूयॉर्क जैसे शहर में धार्मिक और राजनीतिक अभिव्यक्ति से जुड़े कार्यक्रमों को लेकर प्रशासन को स्वतंत्र अभिव्यक्ति, निजी संपत्ति, सार्वजनिक सुरक्षा और स्थानीय कानूनों के बीच संतुलन बनाना पड़ता है। इस मामले में उपलब्ध रिपोर्टों से यह स्थापित नहीं होता कि शहर ने कार्यक्रम रद्द करने का कोई औपचारिक आदेश जारी किया है।

क्या कार्यक्रम रोका जा सकता है

फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर ऐसा कोई प्रमाण सामने नहीं आया है कि न्यूयॉर्क प्रशासन ने कार्यक्रम को रद्द कर दिया है। ममदानी ने भी कार्यक्रम रोकने की घोषणा नहीं की, बल्कि निजी आयोजन पर शहर के अधिकार क्षेत्र को लेकर अनिश्चितता जताई। इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि मेयर ने कार्यक्रम रद्द करने का आदेश दिया है। मौजूदा स्थिति यह है कि मेयर ने राजनीतिक तौर पर विरोध जताया है, जबकि कार्यक्रम की योजना आगे बढ़ रही है। आयोजन स्थल की स्थिति भी पूरी तरह स्पष्ट होने तक सावधानी जरूरी है। आयोजक की वेबसाइट अभी मैनहैटन का उल्लेख करती है, जबकि कई मीडिया रिपोर्टों में मैडिसन स्क्वायर गार्डन का नाम दिया गया है।

भारत-अमेरिका संबंधों पर संभावित असर

इस विवाद का भारत-अमेरिका के औपचारिक द्विपक्षीय रिश्तों पर तत्काल असर पड़ने का कोई प्रमाण अभी नहीं है। यह मुख्य तौर पर न्यूयॉर्क की स्थानीय सियासत, भारतीय डायस्पोरा की आंतरिक बहस और आरएसएस की अंतरराष्ट्रीय छवि से जुड़ा मामला है। फिर भी इसका राजनीतिक और कूटनीतिक इम्पैक्ट नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। ममदानी की टिप्पणी अमेरिकी सार्वजनिक विमर्श में भारत की धर्मनिरपेक्षता, बहुलवाद और धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर जारी बहस को फिर सामने लाती है। भारत की तरफ से इस तरह के अमेरिकी बयानों को लेकर अलग राजनीतिक प्रतिक्रिया सामने आ सकती है। हालांकि 26 अगस्त तक उपलब्ध स्रोतों में केंद्र सरकार की ओर से ममदानी के इस बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इसलिए ऐसी प्रतिक्रिया के बारे में अनुमान लगाना उचित नहीं होगा।

सबसे अहम सवाल, विरोध और अभिव्यक्ति की आज़ादी के बीच संतुलन

इस विवाद का एक दूसरा पहलू भी है। किसी सार्वजनिक व्यक्ति या संगठन के विचारों से असहमति जताना लोकतांत्रिक अधिकार का हिस्सा है। दूसरी तरफ, किसी निजी कार्यक्रम को केवल राजनीतिक असहमति के आधार पर प्रशासनिक शक्ति से रोकना अलग कानूनी सवाल पैदा करता है।

ममदानी का बयान इसी जटिलता को रेखांकित करता है। उन्होंने आयोजन का समर्थन नहीं किया, लेकिन उसे रोकने के लिए नगर प्रशासन की शक्ति पर स्पष्ट दावा भी नहीं किया। यही वजह है कि इस मामले को केवल भारत बनाम अमेरिका या हिंदू बनाम मुस्लिम विवाद के रूप में देखना अधूरा होगा। असल बहस में डायस्पोरा पॉलिटिक्स, धार्मिक पहचान, अभिव्यक्ति की आज़ादी और सार्वजनिक संस्थानों की सीमाएं भी शामिल हैं।

आगे क्या होगा

सबसे तत्काल घटनाक्रम 29 अगस्त का प्रस्तावित कार्यक्रम होगा। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आयोजन तय कार्यक्रम के मुताबिक होता है या नहीं, सटीक स्थल की आधिकारिक पुष्टि कब होती है और विरोध प्रदर्शन किस स्तर तक पहुंचते हैं। भागवत के संबोधन की सामग्री भी इस विवाद की दिशा तय कर सकती है। यदि भाषण मुख्य रूप से सांस्कृतिक एकता, समुदाय और सामाजिक सेवा पर केंद्रित रहता है, तो आयोजकों का नैरेटिव मजबूत हो सकता है। दूसरी तरफ, भारत की सियासत, धार्मिक पहचान या आरएसएस से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर कोई टिप्पणी होती है तो अमेरिकी डायस्पोरा में बहस और तेज हो सकती है।

निष्कर्ष

ममदानी का बयान फिलहाल एक राजनीतिक विरोध का बयान है, कार्यक्रम रद्द करने का प्रशासनिक फैसला नहीं। मोहन भागवत का 29 अगस्त का न्यूयॉर्क कार्यक्रम आयोजकों की योजना के मुताबिक आगे बढ़ रहा है, हालांकि आयोजन स्थल को लेकर आधिकारिक वेबसाइट और मीडिया रिपोर्टों में अंतर मौजूद है। मामले की असली अहमियत न्यूयॉर्क के एक कार्यक्रम से आगे जाती है। यह भारतीय डायस्पोरा की बदलती सियासत, आरएसएस की वैश्विक पहुंच, भारत की बहुलतावादी छवि और अमेरिका में धार्मिक तथा राजनीतिक अभिव्यक्ति की सीमाओं पर चल रही बहस को एक ही मंच पर ले आया है। ममदानी का विरोध और आयोजकों का एकता पर जोर, दोनों इस विवाद के अलग-अलग नज़रिये हैं। आगे की तस्वीर 29 अगस्त के आयोजन, भागवत के संबोधन और उसके बाद अमेरिकी तथा भारतीय सार्वजनिक विमर्श में आने वाली प्रतिक्रियाओं से ज्यादा साफ होगी।

वीडियो देखें

ADVERTISEMENT
Shah Times

Shah Times

Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

ताज़ा ख़बरें
BREAKING NEWS
ADVERTISEMENT

Your Ad Here
TRENDING
आज का ई-पेपर
मुजफ्फरनगर (12 पेज)
बिजनौर (10 पेज)
सहारनपुर (11 पेज)
मुरादाबाद (14 पेज)
Home Video Epaper Reel Menu
Chat With Us
SHAH TIMES
ख़बरें छुपाता नहीं, छापता है
🏠 होम ⚡ ब्रेकिंग न्यूज़ 📰 ताज़ा खबरें 🇮🇳 देश 🌍 दुनिया 🏛 राजनीति 🚔 क्राइम 📈 बिजनेस 🏏 स्पोर्ट्स 🎓 शिक्षा ❤️ स्वास्थ्य 📰 ई-पेपर