भारतीय मूल की वेंकटा वासमसेट्टी को अमेरिका में ICE ने हिरासत में लिया है। वह 27 साल से वहां रह रही थीं और ग्रीन कार्ड धारक हैं। उनका पुराना डिपोर्टेशन मामला मई में समाप्त हो चुका था। विवाद भारत में सात महीने रहने के दौरान स्थायी निवास छोड़ने के कथित इरादे को लेकर शुरू हुआ था।
अमेरिका, जॉर्जिया | 18 अगस्त 2026 | शाह टाइम्स
भारतीय मूल की वेंकटा नरसमांबा वासमसेट्टी का मामला अमेरिकी इमिग्रेशन सिस्टम में ग्रीन कार्ड धारकों की कानूनी स्थिति को लेकर नई बहस पैदा कर रहा है। 27 साल से अमेरिका में रह रहीं वासमसेट्टी को यूएस इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट यानी ICE ने 11 अगस्त को हिरासत में लिया। वह एक तय ICE चेक-इन के लिए पहुंची थीं।
मामले की खास बात यह है कि उनके खिलाफ चल रही पिछली रिमूवल प्रोसीडिंग्स को एक इमिग्रेशन जज ने 19 मई 2026 को समाप्त कर दिया था। इसके बावजूद अगस्त में उन्हें हिरासत में लिया गया। इस घटनाक्रम ने उनके परिवार और कानूनी टीम को अदालत का रुख करने पर मजबूर किया है।
उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक वासमसेट्टी वर्ष 2013 से अमेरिका की लॉफुल परमानेंट रेजिडेंट यानी एलपीआर हैं। वह नॉर्थ कैरोलिना में स्पेशल-नीड्स बच्चों के साथ काम करने वाली टीचर रही हैं और उनके दो अमेरिकी नागरिक बच्चे तथा दो अमेरिकी नागरिक पोते हैं। उनकी बेटी यशस्विनी वासमसेट्टी खुद इमिग्रेशन अटॉर्नी हैं। परिवार की अनुमति से मामले पर सार्वजनिक जानकारी साझा करने वाली इमिग्रेशन अटॉर्नी ज़ो विल्सन के मुताबिक वेंकटा का अमेरिका में घर, परिवार और पेशेवर जीवन लंबे समय से स्थापित है।
एक अहम तथ्य यह भी है कि उपलब्ध रिपोर्टों में उनके खिलाफ किसी क्रिमिनल हिस्ट्री का उल्लेख नहीं है। हालांकि, उनके इमिग्रेशन केस की पूरी सरकारी फाइल सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है, इसलिए हिरासत के हर कानूनी आधार की स्वतंत्र पुष्टि अभी सीमित है।
इस मामले की जड़ 2022-23 में उनकी भारत यात्रा से जुड़ी है। रिपोर्टों के अनुसार वासमसेट्टी जुलाई 2022 में अपने गंभीर रूप से बीमार माता-पिता की देखभाल के लिए भारत गई थीं। इस दौरान उन्हें कोविड-19 संक्रमण और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ा।
उनकी कानूनी टीम का कहना है कि भारत में उनकी मौजूदगी स्थायी रूप से अमेरिका छोड़ने के इरादे से नहीं थी। रिपोर्ट के मुताबिक बीमारी के कारण उनकी वापसी में देरी हुई और वह फरवरी 2023 में अमेरिका लौटीं। कुल मिलाकर वह करीब सात महीने अमेरिका से बाहर रहीं।
यही अवधि अमेरिकी अधिकारियों की इमिग्रेशन दलील का अहम हिस्सा बनी। डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी ने कथित तौर पर यह सवाल उठाया कि इतनी लंबी अनुपस्थिति से क्या उन्होंने अपनी लॉफुल परमानेंट रेजिडेंसी छोड़ने का इरादा दिखाया था।
ग्रीन कार्ड अमेरिका में स्थायी निवास का अधिकार देता है, लेकिन यह अधिकार हर परिस्थिति में बिना शर्त नहीं होता। यूएससीआईएस के मुताबिक लॉफुल परमानेंट रेजिडेंट अपना स्टेटस खो सकते हैं यदि उसे कानूनी प्रक्रिया के तहत समाप्त किया जाए या यह साबित हो कि उन्होंने अमेरिका में अपना स्थायी निवास छोड़ दिया।
अमेरिका से लंबी अवधि तक बाहर रहना अपने आप ग्रीन कार्ड खत्म नहीं करता। लेकिन 180 दिनों से अधिक की अनुपस्थिति पर अधिकारी यह जांच कर सकते हैं कि व्यक्ति का अमेरिका में स्थायी रूप से रहने का इरादा बरकरार था या नहीं। इस तरह के मामलों में यात्रा की वजह, अमेरिका से पारिवारिक और आर्थिक संबंध तथा वापस लौटने की परिस्थितियां महत्वपूर्ण हो सकती हैं। यही कानूनी अंतर वासमसेट्टी मामले को जटिल बनाता है। केवल यह तथ्य कि वह सात महीने भारत में रहीं, अपने आप यह साबित नहीं करता कि उन्होंने ग्रीन कार्ड छोड़ दिया था। दूसरी तरफ, अमेरिकी इमिग्रेशन अधिकारियों को उनके इरादे और परिस्थितियों की कानूनी समीक्षा करने का अधिकार मौजूद है।
वासमसेट्टी के मामले में सबसे अहम मोड़ 19 मई 2026 को आया। उनकी कानूनी टीम के मुताबिक डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी अदालत द्वारा तय समयसीमा में अपने पक्ष के समर्थन में जरूरी सबूत पेश नहीं कर सका। इसके बाद इमिग्रेशन जज ने रिमूवल प्रोसीडिंग्स समाप्त कर दीं। इसके बावजूद वासमसेट्टी ने ICE के तय चेक-इन्स जारी रखे। 11 अगस्त को वह नॉर्थ कैरोलिना के शार्लट ऑफिस में निर्धारित चेक-इन के लिए पहुंचीं, जहां उन्हें हिरासत में ले लिया गया। बाद में उन्हें जॉर्जिया की ICE डिटेंशन फैसिलिटी में रखा गया। यहीं से मामला और पेचीदा हो गया। एक तरफ पुरानी रिमूवल प्रोसीडिंग्स समाप्त हो चुकी थीं, दूसरी तरफ ICE ने उनकी हिरासत जारी रखी। रिपोर्ट के अनुसार ICE की तरफ से यह दावा किया गया कि वासमसेट्टी मौजूदा स्थिति में ग्रीन कार्ड होल्डर नहीं हैं। इस दावे का अंतिम कानूनी निर्धारण अभी स्पष्ट नहीं है।
हिरासत के बाद वासमसेट्टी की कानूनी टीम ने 13 अगस्त को इमरजेंसी हैबियस कॉर्पस पिटीशन दायर की। याचिका में उनकी हिरासत को चुनौती दी गई। रिपोर्ट के मुताबिक एक फेडरल जज ने इमिग्रेशन अधिकारियों से तीन दिनों के भीतर हिरासत के कानूनी आधार की व्याख्या करने को कहा। यह आदेश अपने आप उनकी रिहाई का आदेश नहीं था। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार सरकारी पक्ष की दलील और अदालत के आगे के आदेश पर निर्भर करेगा कि उन्हें बॉन्ड हियरिंग मिलेगी या हिरासत जारी रहेगी।
अमेरिकी कानून में इमिग्रेशन डिटेंशन क्रिमिनल सजा से अलग प्रक्रिया है। ICE के मुताबिक एजेंसी कुछ मामलों में रिमूवल प्रोसीडिंग्स के दौरान लोगों को हिरासत में रख सकती है। साथ ही, किसी व्यक्ति को हटाने के लिए लागू कानूनी प्रक्रिया और अंतिम रिमूवल आदेश महत्वपूर्ण होते हैं।
यही इस पूरे मामले का सबसे अहम सवाल है। उपलब्ध कानूनी जानकारी के आधार पर इसका जवाब सीधा हां या ना नहीं है।
यूएससीआईएस की गाइडेंस के मुताबिक स्थायी निवासी अमेरिका से बाहर यात्रा कर सकते हैं। छोटी या अस्थायी यात्रा सामान्य तौर पर एलपीआर स्टेटस को प्रभावित नहीं करती। लेकिन अगर तथ्यों से यह साबित हो कि व्यक्ति ने अमेरिका को अपना स्थायी घर मानना छोड़ दिया था, तो स्टेटस छोड़ने का सवाल उठ सकता है।
वासमसेट्टी के परिवार का कहना है कि उनकी भारत यात्रा अस्थायी थी। उनका दावा है कि वह बीमार माता-पिता की देखभाल और अपनी बीमारी के कारण भारत में रुकीं। परिवार यह भी कहता है कि अमेरिका लौटने के बाद उन्होंने अपना घर, नौकरी और पारिवारिक जीवन जारी रखा। दूसरी तरफ, सरकार की कथित दलील यह रही कि सात महीने की अनुपस्थिति ने उनके स्थायी निवास के इरादे पर सवाल खड़ा किया। इस विवाद का अंतिम जवाब अदालत के रिकॉर्ड और संबंधित इमिग्रेशन आदेशों से ही स्पष्ट होगा।
मामले में स्वास्थ्य का पहलू भी सामने आया है। ज़ो विल्सन ने सार्वजनिक बयान में कहा कि वासमसेट्टी गंभीर डायबिटीज से जूझ रही हैं और उन्हें ग्लूकोज़ मॉनिटरिंग तथा मेडिकल केयर की जरूरत है। इस दावे की जानकारी परिवार की तरफ से सामने आई है। ऐसी स्थिति में हिरासत के दौरान मेडिकल केयर की उपलब्धता भी कानूनी और मानवीय चिंता का हिस्सा बनती है। ICE का कहना है कि हिरासत में रखे गए लोगों की स्वास्थ्य और सुरक्षा संबंधी जरूरतों का प्रबंधन एजेंसी की जिम्मेदारी है।
यह मामला भारतीय और दूसरे अप्रवासी ग्रीन कार्ड धारकों के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह स्थायी निवास और लंबे समय तक अमेरिका से बाहर रहने के बीच कानूनी जोखिम को सामने लाता है। ग्रीन कार्ड धारक होने का अर्थ स्थायी निवास का अधिकार है, लेकिन इमिग्रेशन कानून कुछ परिस्थितियों में उस स्टेटस की समीक्षा की अनुमति देता है। इस मामले से एक और अहम सवाल निकलता है। यदि किसी व्यक्ति के खिलाफ रिमूवल केस अदालत में समाप्त हो चुका हो, तो उसके बाद हुई हिरासत का कानूनी आधार क्या होगा। इसका जवाब वासमसेट्टी मामले में आगे की फेडरल कोर्ट कार्रवाई और सरकारी दस्तावेजों से सामने आना बाकी है।
यह भी जरूरी है कि इस मामले को व्यापक अमेरिकी इमिग्रेशन पॉलिसी के हर पहलू का प्रतिनिधि मामला न माना जाए। उपलब्ध जानकारी एक विशिष्ट व्यक्ति, उसकी यात्रा, उसके एलपीआर स्टेटस और लंबित कानूनी विवाद से जुड़ी है।
अगला महत्वपूर्ण पड़ाव फेडरल कोर्ट में उनकी हिरासत को लेकर चल रही कानूनी प्रक्रिया है। यदि अदालत सरकारी पक्ष के रुख को स्वीकार करती है, तो उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार वासमसेट्टी को बॉन्ड हियरिंग का अवसर मिल सकता है। यदि अदालत अलग निष्कर्ष पर पहुंचती है, तो उनकी रिहाई या हिरासत की स्थिति पर नया आदेश आ सकता है। साथ ही, इस मामले में यह स्पष्ट होना बाकी है कि ICE किस मौजूदा कानूनी आधार पर उन्हें हिरासत में रख रहा है और मई के इमिग्रेशन कोर्ट आदेश के बाद उनकी एलपीआर स्थिति को लेकर सरकार का आधिकारिक रुख क्या है।
वेंकटा वासमसेट्टी की हिरासत को केवल ग्रीन कार्ड होने या न होने के सवाल तक सीमित करना अधूरा होगा। स्थापित तथ्य यह हैं कि वह लंबे समय से अमेरिका में रह रही थीं, उनके खिलाफ पिछली रिमूवल प्रोसीडिंग्स मई में समाप्त हुईं और इसके बाद 11 अगस्त को ICE ने उन्हें हिरासत में लिया। विवाद का केंद्र भारत में उनकी करीब सात महीने की अनुपस्थिति और अमेरिका में स्थायी निवास छोड़ने के कथित इरादे पर है। परिवार इसे बीमारी और माता-पिता की देखभाल से जुड़ी अस्थायी यात्रा बताता है, जबकि सरकारी पक्ष ने इसी अवधि को एलपीआर स्टेटस पर सवाल उठाने के लिए आधार बनाया है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।