राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत के अमेरिका दौरे के दौरान न्यूयॉर्क में दिए गए संबोधन को भारतीय-अमेरिकी समुदाय के कुछ नेताओं ने प्रभावशाली बताया है। समुदाय के प्रतिनिधियों के मुताबिक भागवत ने अपनी बात सरल भाषा में रखते हुए परिवार, सांस्कृतिक विरासत, सामाजिक सेवा और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी पर जोर दिया। भारतीय-अमेरिकी समुदाय के नेताओं ने कहा कि भाषण में स्थानीय स्तर पर समस्याओं का समाधान तलाशने और समुदायों के बीच सहयोग बढ़ाने की बात खास तौर पर ध्यान खींचने वाली रही। आरएसएस के कामकाज को समझाने के दौरान भागवत ने जमीनी स्तर पर क्षमता निर्माण और सामूहिक प्रयास की जरूरत पर बात की।
यह दौरा आरएसएस की स्थापना के 100 वर्ष पूरे होने के मौके पर चल रहे वैश्विक संपर्क कार्यक्रमों के बीच हो रहा है। भागवत की अमेरिका यात्रा में भारतीय-अमेरिकी समुदाय के लोगों के साथ संवाद के अलावा हिंदू दर्शन, सेवा और सामाजिक एकता से जुड़े कार्यक्रम भी शामिल हैं।
न्यूयॉर्क, अमेरिका|29 अगस्त 2026|शाह टाइम्स
By Mohd Haris
न्यूयॉर्क में भागवत को सुनने वाले भारतीय-अमेरिकी नेताओं ने उनके भाषण के अलग-अलग पहलुओं को रेखांकित किया। अमेरिकन इंडिया पब्लिक अफेयर्स कमेटी के अध्यक्ष जगदीश सेहवानी ने इसे अपने लंबे अमेरिकी प्रवास के दौरान यादगार अनुभव बताया। सेहवानी के मुताबिक भागवत ने भारत, सनातन परंपराओं, हिंदुत्व और भारतीय प्रवासियों की सामाजिक भूमिका पर बात की। उन्होंने कहा कि संबोधन में जटिल विषयों को अपेक्षाकृत सरल तरीके से समझाने की कोशिश की गई। सेवा इंटरनेशनल की जनसंपर्क उपाध्यक्ष राखी इसरानी ने युवा पीढ़ी तक सांस्कृतिक ज्ञान और मूल्यों को पहुंचाने की जिम्मेदारी पर दिए गए जोर को महत्वपूर्ण बताया। उनके मुताबिक माता-पिता के लिए बच्चों के साथ समय बिताना और उन्हें अपनी सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराना अहम है।
भागवत के संबोधन में स्थानीय स्तर पर समस्याओं के समाधान के लिए समुदाय की अपनी क्षमता विकसित करने पर भी जोर रहा। सेहवानी ने खास तौर पर इस हिस्से को रेखांकित किया। उनके अनुसार भागवत का संदेश था कि समस्याओं के समाधान के लिए हर स्तर पर स्थानीय क्षमता विकसित करनी चाहिए और केवल ऊपर से आने वाले निर्देशों पर निर्भरता पर्याप्त नहीं होती। यह दृष्टिकोण प्रवासी समुदायों के लिए स्थानीय सामाजिक भागीदारी के सवाल से जुड़ता है। अमेरिका में भारतीय-अमेरिकी संगठन शिक्षा, स्वास्थ्य, आपदा राहत और सामुदायिक सेवा जैसे क्षेत्रों में पहले से सक्रिय हैं।
आरएसएस से लंबे समय से जुड़े चिकित्सक नरसिम्हम देसिका ने भागवत के भाषण में परिवार, सांस्कृतिक परंपरा और पर्यावरण से जुड़े दायित्वों को प्रमुख बताया।
उन्होंने भारतीय परंपरा में बताए गए तीन ऋणों या जिम्मेदारियों के संदर्भ में भागवत की बात को महत्वपूर्ण बताया। उनके मुताबिक संबोधन में व्यक्तिगत जीवन और सामाजिक दायित्वों को एक साथ देखने की कोशिश की गई। पर्यावरण और टिकाऊ जीवनशैली का मुद्दा भी भाषण के प्रमुख हिस्सों में रहा। प्रवासी भारतीय समुदाय के लिए ऐसे मुद्दे सामाजिक भागीदारी और स्थानीय समुदायों के साथ जुड़ाव के संदर्भ में अहम हैं।
आरएसएस की स्थापना 1925 में नागपुर में हुई थी और संगठन इस वर्ष अपनी शताब्दी मना रहा है। संगठन और उससे जुड़े संस्थान शिक्षा, स्वास्थ्य, आपदा राहत तथा सामुदायिक सेवा सहित कई क्षेत्रों में गतिविधियां चलाते हैं। मोहन भागवत 2009 से आरएसएस के सरसंघचालक हैं। उनके मौजूदा अमेरिका दौरे को संगठन के वैश्विक संपर्क कार्यक्रम के संदर्भ में देखा जा रहा है। दौरे का एक अहम पहलू भारतीय-अमेरिकी समुदाय के प्रभावशाली वर्गों के साथ सीधे संवाद का प्रयास है। आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक स्तर पर भारतीय प्रवासियों की भूमिका बढ़ने के साथ ऐसे संपर्कों का महत्व भी बढ़ा है।
भागवत की अमेरिका यात्रा और न्यूयॉर्क कार्यक्रम को लेकर सभी प्रतिक्रियाएं सकारात्मक नहीं रही हैं। न्यूयॉर्क में प्रस्तावित कार्यक्रम से पहले कुछ नागरिक अधिकार और अंतरधार्मिक संगठनों ने विरोध दर्ज कराया। न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी ने भी आरएसएस की विचारधारा को लेकर सार्वजनिक आपत्ति जताई है। दूसरी ओर कार्यक्रम के समर्थकों का कहना है कि इसका मकसद भारतीय मूल के लोगों को जोड़ना और सार्वभौमिक एकता का संदेश देना है। इसलिए भागवत के संबोधन को लेकर भारतीय-अमेरिकी समुदाय में प्रतिक्रिया एकरूप नहीं है। जहां कुछ समुदाय नेताओं ने परिवार, सेवा और सामाजिक जिम्मेदारी से जुड़े संदेश की सराहना की है, वहीं आलोचक आरएसएस की विचारधारा और उसके सामाजिक-राजनीतिक प्रभाव पर सवाल उठाते रहे हैं।
भागवत का अमेरिका दौरा आरएसएस के शताब्दी वर्ष में हो रहा है। संगठन के लिए यह अवधि अपनी विचारधारा और सामाजिक गतिविधियों को भारत से बाहर मौजूद भारतीय समुदायों के सामने रखने का अवसर भी है। अमेरिका में भारतीय मूल की आबादी लंबे समय से शिक्षा, तकनीक, कारोबार, चिकित्सा और सार्वजनिक जीवन में सक्रिय है। ऐसे में प्रवासी समुदाय के साथ संवाद किसी भी भारतीय सामाजिक संगठन के लिए व्यापक संपर्क रणनीति का हिस्सा बन सकता है। भागवत के कार्यक्रमों में सामाजिक सेवा और सांस्कृतिक पहचान के साथ मानव एकता की बात भी सामने आई है। न्यूयॉर्क के इस्कॉन मंदिर में उन्होंने कृष्ण चेतना को सामाजिक विभाजन और टकराव के बीच एकता से जोड़कर संदेश दिया।
न्यूयॉर्क में भागवत का एक प्रमुख कार्यक्रम मैडिसन स्क्वायर गार्डन परिसर में आयोजित होने वाला है। कार्यक्रम को सार्वभौमिक एकता के संदेश से जोड़ा गया है और इसमें भारतीय-अमेरिकी समुदाय के बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की तैयारी है। कार्यक्रम के समर्थक इसे भारतीय संस्कृति, सेवा और वैश्विक एकता का मंच बता रहे हैं। आलोचक आरएसएस की विचारधारा को लेकर अपनी आपत्तियां दर्ज करा रहे हैं। इस लिहाज से भागवत का अमेरिका दौरा केवल प्रवासी भारतीयों से संवाद तक सीमित नहीं है। यह आरएसएस की वैश्विक सार्वजनिक छवि, भारतीय मूल के समुदायों के साथ उसके संपर्क और संगठन की वैचारिक प्रस्तुति से भी जुड़ा हुआ है।
न्यूयॉर्क में दिए गए भाषण पर समुदाय के कुछ नेताओं की सकारात्मक प्रतिक्रिया इस संपर्क अभियान के लिए महत्वपूर्ण है। हालांकि व्यापक प्रतिक्रिया का आकलन करते समय समर्थन और आलोचना, दोनों पक्षों को ध्यान में रखना जरूरी होगा। आने वाले कार्यक्रमों में भागवत की ओर से भारतीय संस्कृति, सामाजिक सेवा, परिवार, पर्यावरण और मानव एकता से जुड़े मुद्दों पर आगे भी संदेश दिए जाने की संभावना है। इस बीच उनकी यात्रा को लेकर अमेरिका में चल रही राजनीतिक और सामाजिक बहस भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बनी हुई है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।