अमेरिकी इमिग्रेशन सिस्टम में भारतीय पेशेवरों के लिए EB-1 Green Card श्रेणी पर दबाव बढ़ गया है। U.S. Department of State ने मांग बढ़ने पर इस कैटेगरी के अस्थायी रूप से unavailable होने की संभावना जताई है।
📍 वॉशिंगटन डीसी, अमेरिका
📰 3 अगस्त 2026
✍️ By Mohd Haris
अमेरिका में स्थायी निवास यानी Green Card का इंतजार कर रहे भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए नई चिंता सामने आई है। अमेरिकी विदेश विभाग के अगस्त 2026 Visa Bulletin में EB-1 India श्रेणी को लेकर संकेत दिया गया है कि बढ़ती मांग के कारण आने वाले हफ्तों में यह कैटेगरी अस्थायी रूप से unavailable हो सकती है।
EB-1 कैटेगरी अमेरिका की रोजगार आधारित इमिग्रेशन व्यवस्था की पहली प्राथमिकता वाली श्रेणी है। इसमें उच्च क्षमता वाले प्रोफेशनल्स, रिसर्चर्स, प्रोफेसर्स और कुछ विशेष श्रेणी के विशेषज्ञ शामिल होते हैं।
अमेरिकी इमिग्रेशन सिस्टम में हर साल वीजा संख्या की सीमा तय होती है। इसके साथ ही देशों के लिए भी कुछ सीमाएं निर्धारित होती हैं, जिससे अधिक मांग वाले देशों में प्रतीक्षा समय बढ़ जाता है।
U.S. Department of State ने अपने Visa Bulletin में कहा है कि भारत से EB-1 श्रेणी में अधिक मांग और तेजी से वीजा इस्तेमाल होने के कारण वार्षिक सीमा पूरी होने की स्थिति बन सकती है।
अगर भारत के लिए तय EB-1 सीमा वित्त वर्ष समाप्त होने से पहले पूरी हो जाती है, तो इस श्रेणी को अस्थायी रूप से रोकना पड़ सकता है। ऐसी स्थिति में नए वीजा जारी नहीं किए जाएंगे और नई वित्त वर्ष सीमा शुरू होने तक प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
अगस्त 2026 Visa Bulletin के अनुसार EB-1 India की Final Action Date 15 अक्टूबर 2022 पर बनी हुई है।
Employment-Based श्रेणियों में EB-1, EB-2, EB-3 जैसी कैटेगरी शामिल हैं। इनमें आवेदक की योग्यता, नौकरी की प्रकृति और प्राथमिकता तारीख महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
जब किसी कैटेगरी में आवेदन संख्या तय सीमा से अधिक हो जाती है, तो आवेदकों को लंबा इंतजार करना पड़ सकता है।
भारतीय आवेदकों के लिए यह समस्या इसलिए अधिक दिखाई देती है क्योंकि भारत से बड़ी संख्या में टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग, रिसर्च और मैनेजमेंट क्षेत्र के लोग अमेरिका जाते हैं।
अमेरिका में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक टेक सेक्टर, रिसर्च और उच्च कौशल वाले क्षेत्रों में काम करते हैं।
Green Card मिलने से उन्हें स्थायी निवास, नौकरी बदलने की अधिक स्वतंत्रता और लंबे समय की सुरक्षा मिलती है।
Visa प्रक्रिया में देरी का असर करियर योजना, परिवारिक फैसलों और आर्थिक रणनीति पर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे इंतजार के कारण कई पेशेवरों को अमेरिका में अपने भविष्य को लेकर अनिश्चितता का सामना करना पड़ता है।
EB-1 के अलावा EB-2 श्रेणी को लेकर भी अमेरिकी प्रशासन ने दबाव की स्थिति का संकेत दिया है।
Visa Bulletin में बताया गया है कि अधिक मांग के कारण कुछ रोजगार आधारित श्रेणियों में आगे चलकर retrogression यानी तारीख पीछे जाने या उपलब्धता सीमित होने की स्थिति बन सकती है।
भारतीय आवेदकों के लिए EB-2 श्रेणी पहले से ही लंबी प्रतीक्षा सूची का सामना कर रही है।
अमेरिका में Green Card बैकलॉग लंबे समय से चर्चा का विषय रहा है।
भारतीय और चीनी आवेदकों को देश आधारित सीमा के कारण अधिक प्रतीक्षा करनी पड़ती है। समर्थकों का तर्क है कि उच्च कौशल वाले लोगों के लिए प्रक्रिया तेज होनी चाहिए।
दूसरी तरफ नीति विशेषज्ञों का कहना है कि वीजा संख्या और देश आधारित सीमाएं अमेरिकी इमिग्रेशन कानून का हिस्सा हैं, जिनमें बदलाव के लिए कांग्रेस की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।
टेक इंडस्ट्री और इमिग्रेशन विशेषज्ञ मानते हैं कि अमेरिका को वैश्विक प्रतिभाओं को आकर्षित रखने के लिए रोजगार आधारित वीजा प्रणाली में सुधार की जरूरत है।
वहीं नीति समर्थकों का कहना है कि मौजूदा व्यवस्था देशवार संतुलन बनाए रखने के लिए बनाई गई है।
इस बहस का केंद्र यही है कि अमेरिका अपनी आर्थिक जरूरतों और इमिग्रेशन नियंत्रण के बीच संतुलन कैसे बनाए।
आवेदकों के लिए Visa Bulletin की तारीखों पर नजर रखना महत्वपूर्ण है।
जिन लोगों की प्राथमिकता तारीख उपलब्ध सीमा के अंदर आती है, उन्हें अपने दस्तावेज और आवेदन प्रक्रिया को समय पर पूरा रखने की सलाह दी जाती है।
हालांकि हर आवेदक की स्थिति अलग होती है और निर्णय व्यक्तिगत केस रिकॉर्ड पर निर्भर करता है।
वित्त वर्ष समाप्त होने से पहले अमेरिकी प्रशासन वीजा इस्तेमाल और मांग की निगरानी करेगा। अगर सीमा पूरी होती है तो कुछ समय के लिए EB-1 India प्रभावित हो सकती है।
नई वित्त वर्ष सीमा शुरू होने के बाद स्थिति में बदलाव संभव है।
लंबी अवधि में यह मुद्दा अमेरिका की इमिग्रेशन नीति और वैश्विक प्रतिभा प्रतिस्पर्धा से जुड़ा रहेगा।
EB-1 India Green Card श्रेणी को लेकर अमेरिकी चेतावनी भारतीय पेशेवरों के लिए महत्वपूर्ण संकेत है। बढ़ती मांग और सीमित वीजा संख्या ने इमिग्रेशन प्रक्रिया पर दबाव बढ़ाया है।
यह मामला केवल वीजा प्रक्रिया का नहीं है, बल्कि अमेरिका में काम कर रहे हजारों भारतीय प्रोफेशनल्स के करियर और भविष्य की योजना से जुड़ा बड़ा मुद्दा है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।