अमेरिका के नए वीज़ा नियम के खिलाफ यूनियनों का मुकदमा
विदेशी छात्रों और पत्रकारों पर वीज़ा पाबंदी को अदालत में चुनौती
ट्रंप प्रशासन की वीज़ा नीति पर बढ़ा कानूनी विवाद
अमेरिका में यूनियनों और एडवोकेसी समूहों ने विदेशी छात्रों, एक्सचेंज विज़िटर्स और पत्रकारों के वीज़ा की अवधि सीमित करने वाले नए नियम को अदालत में चुनौती दी है। नियम 15 सितंबर से लागू होना है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इससे शिक्षा, पत्रकारिता और अंतरराष्ट्रीय प्रतिभा प्रभावित होगी, जबकि प्रशासन इसे वीज़ा धोखाधड़ी रोकने की पहल बताता है।
वॉशिंगटन |19 अगस्त 2026 |शाह टाइम्स
By Mohd Haris
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन की नई वीज़ा नीति अब संघीय अदालत की जांच के दायरे में आ गई है। यूनियनों और एडवोकेसी संगठनों के एक गठबंधन ने विदेशी छात्रों, एक्सचेंज विज़िटर्स और अंतरराष्ट्रीय पत्रकारों के अमेरिका में रहने की अवधि सीमित करने वाले नियम को रोकने की मांग करते हुए मुकदमा दायर किया है। मामला मैसाचुसेट्स की संघीय जिला अदालत में दायर किया गया है। प्रस्तावित नियम 15 सितंबर से प्रभावी होना है और इसके तहत कुछ प्रमुख गैर-आप्रवासी वीज़ा श्रेणियों के लिए पहले से तय अधिकतम अवधि लागू होगी। इस विवाद का असर अमेरिका की यूनिवर्सिटी सिस्टम, विदेशी छात्रों की पढ़ाई, अंतरराष्ट्रीय एक्सचेंज प्रोग्राम और विदेशी मीडिया संगठनों पर पड़ सकता है। खास तौर पर पत्रकारों के लिए प्रस्तावित कम अवधि ने प्रेस फ्रीडम और अमेरिका में विदेशी मीडिया की कामकाजी स्वतंत्रता को लेकर बहस तेज कर दी है।
मौजूदा व्यवस्था में विदेशी छात्रों और एक्सचेंज विज़िटर्स के वीज़ा की अवधि उनके अध्ययन या प्रोग्राम की अवधि से जुड़ी रहती थी। पत्रकारों के वीज़ा की अवधि भी उनके रोजगार या पेशेवर गतिविधि से जुड़ सकती थी। नए नियम में इस व्यवस्था की जगह निर्धारित अधिकतम अवधि लाने का प्रस्ताव है। एफ वीज़ा पर आने वाले विदेशी छात्रों के लिए अधिकतम अवधि चार साल तय की गई है। जे वीज़ा वाले एक्सचेंज विज़िटर्स के लिए भी अधिकतम अवधि चार साल होगी। वहीं आई वीज़ा, जो विदेशी पत्रकारों और मीडिया प्रतिनिधियों के लिए इस्तेमाल होता है, उसकी अवधि अधिकतम 240 दिन रखी गई है। चीनी नागरिकों के लिए पत्रकार वीज़ा की प्रस्तावित सीमा और भी कम है। उनके लिए आई वीज़ा की अधिकतम अवधि 90 दिन बताई गई है। इस बदलाव का अर्थ यह है कि लंबी अवधि की पढ़ाई या पेशेवर असाइनमेंट वाले लोगों को अमेरिका में बने रहने के लिए निर्धारित अवधि खत्म होने से पहले एक्सटेंशन या नई इमिग्रेशन प्रक्रिया का सहारा लेना पड़ सकता है।
मुकदमा दायर करने वाले संगठनों का तर्क है कि नई समय-सीमा लंबे समय से चली आ रही व्यवस्था में बड़ा बदलाव है। उनका कहना है कि विदेशी छात्रों और शोधकर्ताओं को पढ़ाई पूरी होने से पहले अपनी कानूनी इमिग्रेशन स्थिति को लेकर अनिश्चितता का सामना करना पड़ सकता है।
याचिकाकर्ताओं ने अदालत में तर्क दिया है कि इससे अंतरराष्ट्रीय छात्रों का अमेरिका आने का रुझान प्रभावित हो सकता है। उनके मुताबिक विश्वविद्यालयों के लिए वैश्विक प्रतिभा को आकर्षित करना कठिन होगा और अमेरिकी शिक्षा क्षेत्र को आर्थिक नुकसान हो सकता है।
पत्रकार संगठनों ने इस पहल को अलग नज़रिये से देखा है। न्यूज़गिल्ड-सीडब्ल्यूए ने इसे पत्रकारों पर दबाव बढ़ाने वाला कदम बताया है। संगठन का कहना है कि छोटी वीज़ा अवधि विदेशी पत्रकारों के लिए अमेरिका में लंबे समय तक रिपोर्टिंग करना कठिन बनाएगी।
डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी ने मुकदमे को खारिज करने की कोशिश की है। विभाग के एक प्रवक्ता ने इस कानूनी चुनौती को “परफॉर्मेटिव” बताया और कहा कि सरकार का उद्देश्य वीज़ा सिस्टम में कथित धोखाधड़ी पर कार्रवाई करना है।
प्रशासन का तर्क है कि वास्तविक छात्र और वैध आवेदकों को नियमों के अनुपालन में समस्या नहीं होनी चाहिए। सरकार नई व्यवस्था को इमिग्रेशन सिस्टम पर निगरानी मजबूत करने और ऐसे लोगों को रोकने की नीति के रूप में देख रही है जो वीज़ा की मूल शर्तों का पालन नहीं करते।
हालांकि प्रशासन ने कथित वीज़ा फ्रॉड के पैमाने को साबित करने वाले विशिष्ट आंकड़े इस मुकदमे के संदर्भ में सार्वजनिक नहीं किए हैं। इसलिए इस दावे को सरकारी नीति का आधार मानकर रिपोर्ट करना उचित है, लेकिन इसे स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य के तौर पर पेश करना सही नहीं होगा।
अमेरिका की यूनिवर्सिटियां लंबे समय से विदेशी छात्रों पर निर्भर रही हैं। विदेशी विद्यार्थी उच्च शिक्षा के साथ रिसर्च, टेक्नोलॉजी और कई अन्य क्षेत्रों में अमेरिकी संस्थानों से जुड़ते हैं। नई व्यवस्था में चार साल की अधिकतम सीमा कई छात्रों के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है। खासकर उन कार्यक्रमों में जहां डिग्री, रिसर्च या अकादमिक प्रशिक्षण चार साल से अधिक समय लेता है, छात्रों को अतिरिक्त इमिग्रेशन प्रक्रिया का सामना करना पड़ सकता है।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि ऐसी अनिश्चितता अमेरिका की वैश्विक शिक्षा प्रणाली की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति को प्रभावित कर सकती है।
लेकिन दूसरी तरफ यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि नया नियम विदेशी छात्रों पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगाता। मुख्य बदलाव अमेरिका में रहने की अवधि को निर्धारित सीमा से जोड़ने और लंबी अवधि के लिए अतिरिक्त अनुमति की आवश्यकता पैदा करने से संबंधित है।
विदेशी पत्रकारों की स्थिति अलग है। आई वीज़ा की प्रस्तावित 240 दिन की सीमा लंबे समय तक अमेरिका में तैनात संवाददाताओं के लिए प्रशासनिक दबाव बढ़ा सकती है। चीन के नागरिकों के लिए 90 दिन की सीमा इस विवाद को और संवेदनशील बनाती है। किसी अंतरराष्ट्रीय पत्रकार के लिए अमेरिका में राजनीतिक, आर्थिक और विदेश नीति से जुड़े घटनाक्रमों की लगातार रिपोर्टिंग के लिए लंबी अवधि की मौजूदगी महत्वपूर्ण होती है। बार-बार वीज़ा एक्सटेंशन या स्टेटस प्रक्रिया पत्रकार और मीडिया संस्थान दोनों के लिए अतिरिक्त लागत और अनिश्चितता पैदा कर सकती है।
यही वजह है कि पत्रकार संगठनों ने इसे केवल इमिग्रेशन पॉलिसी का मुद्दा नहीं माना है। उनके लिए यह प्रेस फ्रीडम, विदेशी मीडिया की स्वतंत्र रिपोर्टिंग और अमेरिका में अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता के भविष्य से जुड़ा मामला है।
नहीं। मौजूदा जानकारी के अनुसार नियम 15 सितंबर 2026 से प्रभावी होने के लिए निर्धारित है। लेकिन अब संघीय अदालत में इसकी कानूनी चुनौती शुरू हो चुकी है। अदालत इस मामले में नियम को अस्थायी रूप से रोक सकती है, सरकार के पक्ष में फैसला दे सकती है या बाद में इसकी वैधानिकता पर विस्तृत सुनवाई कर सकती है। इसलिए 15 सितंबर की तारीख को अंतिम और अपरिवर्तनीय स्थिति मानना जल्दबाजी होगी।
इस मामले में अदालत के शुरुआती आदेश खास महत्व रखेंगे। अगर अदालत नियम के लागू होने पर रोक लगाती है तो नई व्यवस्था की समयसीमा बदल सकती है। अगर रोक नहीं लगती, तो प्रभावित लोगों को नई प्रक्रिया के तहत अपनी स्थिति संभालनी पड़ सकती है।
ट्रंप प्रशासन के दूसरे कार्यकाल में विदेशी छात्रों और विश्वविद्यालयों से जुड़ी इमिग्रेशन नीतियां पहले भी कानूनी विवाद का विषय रही हैं। 2025 में कई अंतरराष्ट्रीय छात्रों के वीज़ा रद्द होने और विश्वविद्यालयों की इमिग्रेशन स्थिति को लेकर अदालतों में मामले पहुंचे थे। मौजूदा मुकदमा उन पुराने विवादों से अलग है। यहां मुख्य सवाल छात्रों या पत्रकारों के व्यक्तिगत वीज़ा रद्द करने का नहीं, बल्कि एक व्यापक संघीय नियम द्वारा वीज़ा की अधिकतम अवधि निर्धारित करने का है। इस अंतर को समझना जरूरी है। नई नीति का अंतिम प्रभाव अदालत के फैसले, प्रशासन की अगली गाइडलाइन और प्रभावित लोगों के लिए उपलब्ध एक्सटेंशन प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।
अमेरिका के लिए विदेशी छात्रों और अंतरराष्ट्रीय पत्रकारों का मुद्दा केवल इमिग्रेशन का मामला नहीं है। यह उसकी शिक्षा व्यवस्था, रिसर्च क्षमता और वैश्विक मीडिया प्रभाव से भी जुड़ा है। याचिकाकर्ताओं का दावा है कि अगर विदेशी छात्रों को लंबी पढ़ाई के दौरान बार-बार इमिग्रेशन स्टेटस की चिंता करनी पड़ेगी तो कुछ विद्यार्थी दूसरे देशों का रुख कर सकते हैं। इसी तरह विदेशी मीडिया संस्थान लंबे असाइनमेंट के लिए अमेरिका में पत्रकार भेजने को लेकर अधिक सतर्क हो सकते हैं। हालांकि अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि नया नियम वास्तव में कितने छात्रों या पत्रकारों को अमेरिका से दूर करेगा। इसके लिए आगे के वीज़ा आंकड़ों, विश्वविद्यालयों की प्रतिक्रिया और अदालत के फैसले का इंतजार करना होगा।
चीनी पत्रकारों के लिए प्रस्तावित 90 दिन की सीमा इस नीति में सबसे स्पष्ट भेद पैदा करती है। यह अमेरिका और चीन के बीच पहले से मौजूद मीडिया और कूटनीतिक तनाव की पृष्ठभूमि में सामने आई है। अगर यह प्रावधान लागू रहता है तो चीनी मीडिया संस्थानों के लिए अमेरिका में लंबे समय तक रिपोर्टिंग करने की व्यवस्था अधिक जटिल हो सकती है। इससे दोनों देशों के मीडिया संबंधों पर भी असर पड़ने की आशंका है।
फिर भी इसे केवल अमेरिका-चीन विवाद के रूप में देखना पर्याप्त नहीं होगा। नियम एफ, जे और आई तीन अलग वीज़ा श्रेणियों पर लागू होता है और इसका व्यापक असर अंतरराष्ट्रीय छात्रों, एक्सचेंज विज़िटर्स तथा पत्रकारों पर पड़ेगा।
अब सबसे महत्वपूर्ण घटनाक्रम संघीय अदालत में होगा। याचिकाकर्ताओं को यह साबित करना होगा कि सरकार का नया नियम कानूनी अधिकारों या मौजूदा इमिग्रेशन कानून की सीमा का उल्लंघन करता है। सरकार दूसरी तरफ यह तर्क देगी कि उसे गैर-आप्रवासी वीज़ा की शर्तें निर्धारित करने और इमिग्रेशन सिस्टम में धोखाधड़ी रोकने के लिए पर्याप्त प्रशासनिक अधिकार हासिल हैं। अदालत के सामने यही मूल टकराव होगा। एक तरफ सरकार की इमिग्रेशन पॉलिसी बनाने की शक्ति है, दूसरी तरफ प्रभावित छात्रों, पत्रकारों और संस्थानों के अधिकार तथा स्थापित प्रक्रियाओं में बदलाव का कानूनी आधार।
अमेरिका की नई वीज़ा नीति अब एक बड़े कानूनी और नीतिगत विवाद में बदल गई है। ट्रंप प्रशासन ने विदेशी छात्रों और एक्सचेंज विज़िटर्स के लिए चार साल तथा पत्रकारों के लिए 240 दिन की अधिकतम अवधि प्रस्तावित की है, जबकि चीनी पत्रकारों के लिए सीमा 90 दिन रखी गई है।
स्थापित तथ्य यह है कि यूनियनों और एडवोकेसी समूहों ने नियम के खिलाफ संघीय अदालत में मुकदमा दायर कर दिया है। सरकार इसे वीज़ा फ्रॉड रोकने की कोशिश बता रही है, जबकि विरोधी संगठन इसे शिक्षा, अंतरराष्ट्रीय प्रतिभा और प्रेस पर नकारात्मक असर डालने वाला कदम मानते हैं।
अब असली फैसला अदालत और आगे की प्रशासनिक प्रक्रिया पर निर्भर करेगा। 15 सितंबर की प्रस्तावित लागू तारीख से पहले आने वाला कोई भी न्यायिक आदेश इस नीति की दिशा बदल सकता है। इसीलिए फिलहाल सबसे अहम सवाल यह नहीं है कि नियम कितना सख्त है, बल्कि यह है कि अदालत अमेरिकी सरकार को इतनी व्यापक समय-सीमा लागू करने का अधिकार देती है या नहीं।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।