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विदेश में पढ़ाई का प्लान बदलेगा? ऑस्ट्रेलिया ने छात्रों के परिवार पर कसा शिकंजा

Harish Qureshi 2026-09-17 11:23:50
विदेश में पढ़ाई का प्लान बदलेगा? ऑस्ट्रेलिया ने छात्रों के परिवार पर कसा शिकंजा

ऑस्ट्रेलिया सरकार ने अंतरराष्ट्रीय छात्रों के परिवार को लेकर नई इमिग्रेशन नीति घोषित की है। अधिकांश छात्रों के पार्टनर और बच्चों को साथ लाने पर रोक होगी, जबकि प्रशांत और आसियान देशों तथा पीएचडी जैसे कुछ पाठ्यक्रमों के छात्रों को विशेष छूट मिलेगी।


कैनबरा | 17 सितंबर 2026

By Mohd Haris


ऑस्ट्रेलिया में विदेशी छात्रों के लिए बदले इमिग्रेशन नियम


ऑस्ट्रेलिया ने अंतरराष्ट्रीय छात्रों और अस्थायी प्रवासियों के लिए इमिग्रेशन व्यवस्था में बड़े बदलाव का ऐलान किया है। नई नीति के तहत अधिकांश विदेशी छात्रों को पढ़ाई के दौरान अपने पार्टनर और बच्चों को ऑस्ट्रेलिया लाने की अनुमति नहीं होगी। हालांकि, कुछ खास श्रेणियों को इस नियम से छूट दी जाएगी।


ऑस्ट्रेलिया के गृह मामलों के मंत्री टोनी बर्क ने नई नीति को देश के नेट ओवरसीज माइग्रेशन को कम करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा बताया है। सरकार का लक्ष्य 2028 तक वार्षिक नेट ओवरसीज माइग्रेशन को करीब 300000 से घटाकर 225000 करना है।


परिवार साथ लाने पर क्या बदलेगा


मौजूदा व्यवस्था में अंतरराष्ट्रीय छात्र अपने पति या पत्नी, डी-फैक्टो पार्टनर और 18 वर्ष से कम उम्र के आश्रित बच्चों को छात्र वीजा के तहत साथ ला सकते हैं। ऑस्ट्रेलिया की आधिकारिक स्टडी वेबसाइट के मुताबिक परिवार के सदस्यों को बाद में भी सब्सिक्वेंट एंट्रेंट के तौर पर आवेदन करने की व्यवस्था रही है,

बशर्ते उन्हें मूल छात्र वीजा आवेदन में घोषित किया गया हो।


नई नीति में अधिकांश अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए यह रास्ता बंद किया जाएगा। सरकार के मुताबिक इसका मकसद अस्थायी वीजा धारकों की संख्या नियंत्रित करना और माइग्रेशन सिस्टम पर दबाव कम करना है।


सभी छात्रों पर एक जैसा प्रतिबंध नहीं


नई नीति पूरी तरह सार्वभौमिक नहीं होगी। ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने कुछ अपवादों का प्रावधान रखा है।


प्रशांत क्षेत्र और आसियान देशों से आने वाले कुछ छात्रों को परिवार साथ लाने की अनुमति जारी रहेगी। इसके अलावा पीएचडी जैसे कुछ विशेष पाठ्यक्रमों में पढ़ने वाले छात्रों को भी छूट मिलेगी।


इसका मतलब है कि भारत सहित सभी देशों के छात्रों पर एक समान नियम लागू होने की तस्वीर अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। अंतिम पात्रता संबंधित वीजा नियमों और सरकार द्वारा तय की जाने वाली श्रेणियों पर निर्भर करेगी।


पहले क्या नियम था


ऑस्ट्रेलिया की मौजूदा आधिकारिक जानकारी के अनुसार छात्र वीजा आवेदन में पार्टनर और 18 वर्ष से कम उम्र के आश्रित बच्चों को शामिल किया जा सकता है। परिवार के सदस्यों के लिए रिश्ते का प्रमाण, स्वास्थ्य और चरित्र संबंधी शर्तें तथा आर्थिक क्षमता का प्रमाण देना होता है।


छात्रों को परिवार के सदस्यों को बाद में ऑस्ट्रेलिया बुलाने का विकल्प भी उपलब्ध रहा है। इसके लिए परिवार के सदस्यों को शुरुआती छात्र वीजा आवेदन में घोषित करना जरूरी है।


नई नीति इस व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव करेगी।


सरकार का बड़ा लक्ष्य, माइग्रेशन कम करना


ऑस्ट्रेलिया सरकार अस्थायी प्रवासियों की संख्या कम करने और वीजा सिस्टम में नियमों के पालन को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।


सरकार के अनुसार अस्थायी वीजा धारकों की संख्या करीब 3 मिलियन तक पहुंच चुकी है। नई रणनीति में वीजा अवधि खत्म होने के बाद लोगों की वापसी सुनिश्चित करने और अलग-अलग अस्थायी वीजा के बीच अनुचित तरीके से बदलाव रोकने पर भी जोर है।


अंतरराष्ट्रीय छात्रों की संख्या को फिलहाल सीधे कम करने के बजाय सरकार परिवार के साथ आने वाले लोगों की संख्या को सीमित करने पर ध्यान दे रही है।


2025 में बड़ी संख्या में डिपेंडेंट वीजा


इस बदलाव का असर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अंतरराष्ट्रीय शिक्षा ऑस्ट्रेलिया की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा है। रिपोर्ट के अनुसार 2025 में 337000 से ज्यादा छात्र वीजा जारी किए गए थे। इनमें करीब 45000 वीजा आश्रित परिवार के सदस्यों से जुड़े थे।


अंतरराष्ट्रीय शिक्षा क्षेत्र ने ऑस्ट्रेलियाई अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। रॉयटर्स के अनुसार इस सेक्टर का आर्थिक योगदान करीब 53.6 अरब ऑस्ट्रेलियाई डॉलर रहा है।


इसलिए सरकार के लिए चुनौती यह है कि माइग्रेशन कम करने के साथ अंतरराष्ट्रीय शिक्षा क्षेत्र पर अत्यधिक दबाव न पड़े।


विश्वविद्यालयों और शिक्षा क्षेत्र की चिंता


ऑस्ट्रेलिया में विश्वविद्यालयों और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधियों ने पहले ही चेतावनी दी है कि विदेशी छात्रों के लिए नियम लगातार सख्त होने से देश की अंतरराष्ट्रीय शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।


परिवार के साथ पढ़ाई करने की सुविधा कई छात्रों के लिए विश्वविद्यालय और देश चुनने का अहम कारक होती है। ऐसे में नए नियम ऑस्ट्रेलिया को लेकर छात्रों के फैसले को प्रभावित कर सकते हैं। इसका वास्तविक असर आने वाले वर्षों में आवेदन संख्या और अंतरराष्ट्रीय छात्र बाजार के आंकड़ों से अधिक स्पष्ट होगा।


भारत से जाने वाले छात्रों के लिए क्या मायने हैं


भारत ऑस्ट्रेलिया के अंतरराष्ट्रीय छात्र बाजार में महत्वपूर्ण देशों में शामिल है। नई व्यवस्था में भारतीय छात्रों पर लागू होने वाली सटीक शर्तें इस बात पर निर्भर करेंगी कि अंतिम नियमों में किन देशों, पाठ्यक्रमों और वीजा श्रेणियों को अपवाद बनाया जाता है।


खास तौर पर विवाहित छात्रों और बच्चों वाले परिवारों के लिए पढ़ाई की योजना पर इसका सीधा असर पड़ सकता है। ऐसे आवेदकों को छात्र वीजा के नए नियमों में अपने परिवार की पात्रता और संभावित अपवादों की जानकारी लेकर ही योजना बनानी होगी।


पहले से ऑस्ट्रेलिया में रह रहे परिवारों का क्या होगा


ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने स्पष्ट किया है कि नए बदलाव भविष्य के वीजा पर लागू होंगे। जो परिवार पहले से वैध वीजा के साथ ऑस्ट्रेलिया में मौजूद हैं, उन्हें नई नीति के कारण अलग नहीं किया जाएगा।


यह बिंदु मौजूदा भारतीय और अन्य विदेशी छात्रों के लिए अहम है। नए नियमों का मुख्य असर भविष्य में जारी होने वाले वीजा और नई पारिवारिक एंट्री पर पड़ेगा।


सिर्फ छात्र वीजा ही निशाने पर नहीं


इमिग्रेशन सुधारों का दायरा छात्र वीजा तक सीमित नहीं है। सरकार ने वर्किंग हॉलिडे वीजा, वीजा बदलने की प्रक्रिया और वीजा अवधि समाप्त होने के बाद देश में रुकने वाले लोगों के खिलाफ भी सख्ती की घोषणा की है।


वर्किंग हॉलिडे वीजा के दूसरे और तीसरे साल के लिए भी नई सीमाएं और बैलेट व्यवस्था प्रस्तावित की गई है। इससे स्पष्ट है कि सरकार अस्थायी प्रवासन की पूरी व्यवस्था में नियंत्रण बढ़ाने की कोशिश कर रही है।


आगे क्या होगा


नई नीति के बाद सबसे महत्वपूर्ण सवाल इसके विस्तृत नियमों और लागू होने की तारीख से जुड़े हैं। छात्रों और उनके परिवारों को यह देखना होगा कि सरकार किन पाठ्यक्रमों, देशों और वीजा श्रेणियों को अपवाद में रखती है।


भारत से ऑस्ट्रेलिया पढ़ाई के लिए जाने वाले छात्रों के लिए वीजा आवेदन से पहले आधिकारिक ऑस्ट्रेलियाई इमिग्रेशन नियमों की जांच करना जरूरी होगा। खासकर परिवार साथ ले जाने की योजना रखने वाले छात्रों को नई पात्रता शर्तों पर ध्यान देना होगा।


निष्कर्ष


ऑस्ट्रेलिया ने अंतरराष्ट्रीय छात्रों के परिवार को लेकर अपनी इमिग्रेशन नीति में बड़ा बदलाव किया है। अधिकांश नए विदेशी छात्रों के लिए पार्टनर और बच्चों को साथ लाने की सुविधा खत्म करने का फैसला देश के माइग्रेशन नियंत्रण अभियान का हिस्सा है।


हालांकि यह प्रतिबंध सभी छात्रों पर समान रूप से लागू नहीं होगा। प्रशांत और आसियान क्षेत्र के कुछ छात्रों तथा पीएचडी जैसे विशेष पाठ्यक्रमों के लिए अपवाद रखे गए हैं।


भारतीय छात्रों के लिए अगला अहम सवाल विस्तृत पात्रता नियम और उनकी लागू होने की तारीख है। फिलहाल यह बदलाव उन परिवारों के लिए सबसे अधिक महत्वपूर्ण है जो ऑस्ट्रेलिया में उच्च शिक्षा के साथ पति, पत्नी या बच्चों को भी साथ ले जाने की योजना बना रहे हैं।


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Harish Qureshi

Harish Qureshi

Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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