3% वोट से इटली की PM, अब मेलोनी के नाम होगा बड़ा रिकॉर्ड
मेलोनी का सियासी सफर, 3% वाली पार्टी से सत्ता के शिखर तक
सितंबर में मेलोनी रचेंगी इतिहास, सबसे लंबा PM कार्यकाल
जॉर्जिया मेलोनी सितंबर 2026 में इटली की गणराज्य काल की सबसे लंबे समय तक सत्ता में रहने वाली प्रधानमंत्री बनने जा रही हैं। उनकी पार्टी ब्रदर्स ऑफ इटली कभी करीब 3% वोट तक सीमित थी। 2022 में सत्ता में आने के बाद मेलोनी ने सरकार की स्थिरता कायम रखी और अब नया रिकॉर्ड बनाने की दहलीज पर हैं।
इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी सितंबर 2026 में एक ऐसा राजनीतिक रिकॉर्ड बनाने जा रही हैं, जो देश के गणराज्य काल से जुड़ा है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक 4 सितंबर को उनकी सरकार 1,413 दिन पूरे कर इटली गणराज्य की सबसे लंबे समय तक चलने वाली सरकार बन जाएगी।
यह उपलब्धि इसलिए भी अहम है क्योंकि मेलोनी की सियासी शुरुआत आज की सत्ता से बिल्कुल अलग स्तर पर हुई थी। उनकी पार्टी ब्रदर्स ऑफ इटली यानी फ्रातेली द'इतालिया की स्थापना 2012 में हुई और शुरुआती वर्षों में उसका समर्थन करीब 3% के आसपास रहा।
आज वही पार्टी इटली की सत्ता का नेतृत्व कर रही है और मेलोनी यूरोप की सबसे चर्चित दक्षिणपंथी नेताओं में शामिल हैं।
ब्रदर्स ऑफ इटली की स्थापना 16 दिसंबर 2012 को हुई थी। शुरुआती दौर में पार्टी को राष्ट्रीय राजनीति में सीमित समर्थन मिला और कई वर्षों तक उसका वोट शेयर लगभग 3% के आसपास बना रहा। मेलोनी ने हालांकि कम उम्र में राजनीति में अपनी जगह बनानी शुरू कर दी थी। 31 साल की उम्र में वह इटली की सबसे युवा मंत्रियों में शामिल हुईं। इसके बाद उन्होंने पार्टी संगठन को मजबूत करने और अपनी सियासी पहचान को विस्तार देने पर ध्यान दिया। 2022 तक तस्वीर बदल चुकी थी। चुनाव के बाद मेलोनी प्रधानमंत्री बनीं और इटली की पहली महिला प्रधानमंत्री होने का रिकॉर्ड भी उनके नाम दर्ज हुआ।
मेलोनी की सरकार के सत्ता में आने को इटली की राजनीति में महत्वपूर्ण मोड़ माना गया। उन्होंने अवैध प्रवासन पर सख्त नीति, न्याय व्यवस्था में बदलाव और संविधान से जुड़े सुधारों को अपने एजेंडे में प्रमुखता दी। उनकी सरकार ने यूरोपीय संघ के भीतर इटली के राष्ट्रीय हितों को ज्यादा मुखर तरीके से रखने की कोशिश की। मेलोनी का रुख यूरोपीय राजनीति में दक्षिणपंथी और राष्ट्रवादी राजनीति के व्यापक उभार से भी जुड़ा रहा है।
लेकिन उनकी सबसे बड़ी राजनीतिक उपलब्धि अब तक सरकार की निरंतरता रही है। इटली लंबे समय से सरकारों के जल्दी बदलने के लिए जाना जाता रहा है। ऐसे माहौल में लगभग चार साल तक एक ही सरकार का बने रहना अपने आप में महत्वपूर्ण है।
द्वितीय विश्व युद्ध के बाद इटली में प्रधानमंत्री और सरकारें बार-बार बदली हैं। द टाइम्स के मुताबिक मेलोनी की सरकार अब इटली के गणराज्य काल की सबसे लंबे समय तक चलने वाली सरकार बनने से केवल कुछ समय दूर है। इससे मेलोनी के रिकॉर्ड का संदर्भ समझ आता है। यह रिकॉर्ड केवल व्यक्तिगत राजनीतिक लोकप्रियता से जुड़ा नहीं है। यह उस देश में सरकार की अवधि से जुड़ा है जहां गठबंधन राजनीति और संसदीय अस्थिरता ने लंबे समय तक कार्यपालिका को प्रभावित किया। इसीलिए मेलोनी समर्थक इस उपलब्धि को राजनीतिक स्थिरता के प्रमाण के तौर पर पेश कर रहे हैं।
इस मामले में तारीख खास महत्व रखती है। इतालवी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार 4 सितंबर 2026 को मेलोनी की सरकार 1,413 दिनों का कार्यकाल पूरा करेगी और गणराज्य काल की सबसे लंबे समय तक चलने वाली सरकार बन जाएगी। इसका अर्थ यह नहीं है कि मेलोनी इटली के पूरे आधुनिक इतिहास में सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रही हैं। आज तक की रिपोर्ट भी स्पष्ट करती है कि 1946 के बाद रिकॉर्ड की बात हो रही है।
1946 से पहले के इटली के राजनीतिक इतिहास में बेनिटो मुसोलिनी का कार्यकाल इससे काफी लंबा था। आज तक की रिपोर्ट के अनुसार मुसोलिनी करीब 20 साल 8 महीने तक प्रधानमंत्री रहे थे।
यहां एक अहम ऐतिहासिक अंतर समझना जरूरी है। मेलोनी का नया रिकॉर्ड इटली के गणराज्य काल से संबंधित है, जिसकी शुरुआत 1946 में हुई। इसलिए इसे मुसोलिनी के शासनकाल से सीधे तुलना करना ऐतिहासिक और संवैधानिक रूप से सही नहीं होगा। मुसोलिनी का शासन फासीवादी दौर से जुड़ा था। मेलोनी लोकतांत्रिक संसदीय व्यवस्था के तहत प्रधानमंत्री हैं। इसलिए मौजूदा रिकॉर्ड का सही अर्थ है, 1946 के बाद इटली की गणराज्य व्यवस्था में सबसे लंबे समय तक चलने वाली सरकार।
प्रधानमंत्री बनने के बाद मेलोनी की सबसे प्रमुख नीतियों में अवैध प्रवासन पर सख्ती रही है। उनकी सरकार ने अवैध प्रवासियों की हिरासत अवधि बढ़ाने और समुद्री रास्तों से होने वाले अनियमित प्रवासन को रोकने के लिए कई उपाय किए। प्रवासन का मुद्दा यूरोप की राजनीति में लगातार केंद्रीय विषय बना हुआ है। मेलोनी ने इस मुद्दे पर अपनी राजनीतिक पहचान को और मजबूत किया है और यूरोपीय स्तर पर भी सख्त प्रवासन नियंत्रण की पैरवी की है। हालांकि उनकी नीतियों की आलोचना भी हुई है। यूरोप में प्रवासन, शरण और मानवाधिकार को लेकर उनकी सरकार के रुख पर लगातार बहस जारी है।
मेलोनी का राजनीतिक असर अब इटली की सीमाओं तक सीमित नहीं है। वह यूरोपीय राजनीति में दक्षिणपंथी खेमे की महत्वपूर्ण आवाज बन चुकी हैं।
हालिया घटनाक्रम में उन्होंने यूरोप में प्रवासन नियंत्रण को लेकर डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन के साथ मिलकर सख्त नीति की मांग की। इससे यह संकेत मिलता है कि मेलोनी यूरोपीय स्तर पर प्रवासन नीति को प्रभावित करने की कोशिश कर रही हैं। ले मोंड के विश्लेषण के मुताबिक मेलोनी खुद को यूरोपीय स्तर पर प्रवासन के मुद्दे पर प्रभावशाली नेता के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रही हैं।
रिकॉर्ड कार्यकाल के बावजूद मेलोनी की सियासत पूरी तरह चुनौतीमुक्त नहीं है। उनकी पार्टी के दाईं ओर से भी दबाव बढ़ रहा है।
पूर्व जनरल रॉबर्टो वन्नाची की नई पार्टी फुतूरो नाज़ियोनाले हालिया सर्वेक्षणों में करीब 7% समर्थन तक पहुंचने की बात रिपोर्टों में सामने आई है। यह मेलोनी के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि उनकी सियासी जगह के दाईं ओर एक नया प्रतिद्वंद्वी उभर रहा है। इसका मतलब है कि मेलोनी को केवल विपक्ष से मुकाबला नहीं करना है। उन्हें दक्षिणपंथी मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ भी बनाए रखनी होगी।
मेलोनी सरकार अपने कार्यकाल की स्थिरता को आर्थिक नीति और निवेश के लिए सकारात्मक कारक के तौर पर पेश करती रही है। अगस्त में इटली के कृषि मंत्री फ्रांसेस्को लोलोब्रिजिदा ने सरकार की लंबी अवधि को आर्थिक योजना और निवेश के लिए महत्वपूर्ण बताया। सरकार के समर्थकों का तर्क है कि राजनीतिक स्थिरता से लंबे समय की नीतियां लागू करना आसान होता है। लेकिन किसी सरकार के लंबे समय तक बने रहने और उसकी हर नीति की सफलता को एक ही पैमाने से नहीं मापा जा सकता। इसलिए रिकॉर्ड कार्यकाल को सरकार के सभी फैसलों की स्वतः सफलता के रूप में देखना उचित नहीं होगा।
मेलोनी की विदेश नीति का एक अहम पहलू अमेरिका के साथ उनका संबंध भी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ उनकी नजदीकी को लेकर अंतरराष्ट्रीय मीडिया में काफी चर्चा हुई है। हालांकि कुछ मौकों पर दोनों के बीच मतभेद भी सामने आए। आज तक की रिपोर्ट के मुताबिक G7 के दौरान ट्रंप के एक दावे पर मेलोनी ने कड़ा जवाब दिया और अपनी स्वतंत्र राजनीतिक स्थिति पर जोर दिया। यह मेलोनी की विदेश नीति का एक महत्वपूर्ण पहलू दिखाता है। वह अमेरिका के साथ संबंधों को महत्व देती हैं, लेकिन इटली के हितों पर अपनी स्वतंत्र स्थिति बनाए रखने की कोशिश भी करती हैं।
मेलोनी के राजनीतिक सफर को केवल एक वजह से समझना मुश्किल है। पार्टी संगठन, दक्षिणपंथी मतदाताओं का समेकन, प्रवासन जैसे मुद्दों पर स्पष्ट रुख और सरकार के गठबंधन को बनाए रखने की क्षमता, इन सभी ने भूमिका निभाई है। 2012 में करीब 3% समर्थन वाली पार्टी का 2022 में प्रधानमंत्री पद तक पहुंचना इटली की राजनीतिक व्यवस्था में बड़े बदलाव का संकेत था। चार साल बाद सरकार का रिकॉर्ड अवधि तक बने रहना इस सफर का दूसरा बड़ा पड़ाव है। लेकिन आगे की चुनौती अलग है। अब सवाल केवल सत्ता में बने रहने का नहीं, बल्कि बदलते दक्षिणपंथी राजनीतिक मैदान में अपनी केंद्रीय भूमिका बनाए रखने का है।
सितंबर में रिकॉर्ड बनने के बाद मेलोनी के सामने अगली बड़ी चुनौती चुनावी राजनीति होगी। मौजूदा राजनीतिक समीकरणों में उनकी पार्टी को अपने गठबंधन, आर्थिक प्रदर्शन और प्रवासन नीति पर जनता का समर्थन बनाए रखना होगा। साथ ही वन्नाची जैसे नेताओं का उभार दक्षिणपंथी वोटों के भीतर नई प्रतिस्पर्धा पैदा कर रहा है। इसलिए मेलोनी के लिए नया रिकॉर्ड एक महत्वपूर्ण राजनीतिक उपलब्धि जरूर है, लेकिन यह उनके सियासी सफर का अंतिम पड़ाव नहीं है।
जॉर्जिया मेलोनी का सफर इटली की राजनीति में एक असाधारण बदलाव को दिखाता है। 2012 में बनी और शुरुआती वर्षों में करीब 3% वोट तक सीमित रही पार्टी की नेता आज इटली की पहली महिला प्रधानमंत्री हैं और सितंबर 2026 में उनकी सरकार गणराज्य काल की सबसे लंबे समय तक चलने वाली सरकार बनने जा रही है। इस रिकॉर्ड का असली महत्व इटली की राजनीतिक अस्थिरता के संदर्भ में है। मेलोनी ने लगभग चार साल तक सरकार को कायम रखा है, लेकिन आगे उन्हें आर्थिक प्रदर्शन, प्रवासन नीति, यूरोपीय राजनीति और अपनी पार्टी के दाईं ओर उभरती चुनौती का सामना करना होगा। इसलिए 3% से प्रधानमंत्री और फिर रिकॉर्ड तक का सफर मेलोनी की सियासी कामयाबी की कहानी जरूर है, लेकिन आने वाले चुनाव और बदलता दक्षिणपंथी समीकरण तय करेंगे कि यह कामयाबी कितनी टिकाऊ साबित होती है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।