काबुल स्कूल धमाके में 50 से ज्यादा घायल
काबुल में स्कूल के पास विस्फोट, कई छात्र घायल
अफगानिस्तान: स्कूल धमाके ने फिर बढ़ाई सुरक्षा चिंता
काबुल के पश्चिमी इलाके में एक निजी स्कूल के पास विस्फोट में 50 से ज्यादा लोग घायल हुए। शुरुआती रिपोर्टों में कई छात्रों के घायल होने की बात सामने आई। धमाके की वजह और जिम्मेदार पक्ष की पुष्टि अभी बाकी है। अफगान सुरक्षा अधिकारियों ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
काबुल, अफगानिस्तान | 18 अगस्त 2026 | शाह टाइम्स
By Mohd Haris
अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में एक निजी स्कूल के पास हुए विस्फोट में 50 से ज्यादा लोगों के घायल होने की खबर है। घटना पश्चिमी काबुल के दश्त-ए-बरची इलाके में सामने आई, जहां स्कूल परिसर और आसपास मौजूद लोगों के बीच अफरा-तफरी मच गई। रिपोर्ट में कई छात्रों, जिनमें ज्यादातर लड़कियां बताई गई हैं, के गंभीर रूप से घायल होने की जानकारी दी गई है। बाद की स्थानीय और क्षेत्रीय रिपोर्टों में घायलों की संख्या 52 से अधिक बताई गई। हालांकि अलग-अलग रिपोर्टों में शुरुआती आंकड़ों को लेकर अंतर है। इसलिए फिलहाल 50 से अधिक घायलों का आंकड़ा सबसे सुरक्षित तरीके से सामने आता है, जबकि अंतिम आधिकारिक संख्या की स्वतंत्र पुष्टि का इंतजार है।
रिपोर्टों के मुताबिक विस्फोट सोमवार शाम पश्चिमी काबुल के दश्त-ए-बरची इलाके में हुआ। यह क्षेत्र राजधानी के उन हिस्सों में शामिल है जहां अतीत में भी हिंसक घटनाएं दर्ज हुई हैं। स्थानीय रिपोर्टों में घटना का समय लगभग शाम 5 बजे के आसपास बताया गया है। घटना एक निजी स्कूल के आसपास हुई। एरियाना न्यूज़ ने स्कूल का नाम शाम-ए हेदायत प्राइवेट स्कूल बताया है और कहा है कि धमाका महदिया टाउनशिप में हुआ। वहीं अन्य रिपोर्टों में स्कूल परिसर के भीतर या उसके नज़दीक ग्रेनेड विस्फोट का जिक्र किया गया है। इन विवरणों में कुछ अंतर मौजूद है। शुरुआती रिपोर्टिंग में करीब 30 लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई थी। बाद में घायलों का आंकड़ा 52 से ज्यादा बताया गया। इससे संकेत मिलता है कि राहत और अस्पतालों में पहुंचने वाले घायलों की संख्या के साथ शुरुआती अनुमान बदला।
सबसे अहम सवाल यह है कि विस्फोट किस तरह हुआ और इसके पीछे कौन था। कुछ अफगान मीडिया रिपोर्टों ने इसे हैंड ग्रेनेड से जुड़ा हादसा या विस्फोट बताया है। अनादोलु एजेंसी ने स्थानीय मीडिया के हवाले से कहा कि एक छात्र के हाथ में मौजूद हैंड ग्रेनेड फट गया था। दूसरी तरफ कुछ स्थानीय रिपोर्टों में ग्रेनेड स्कूल के परिसर में फेंके जाने की बात कही गई है। इन दोनों विवरणों के बीच महत्वपूर्ण अंतर है। एक स्थिति में घटना दुर्घटना या अनजाने विस्फोट की दिशा में जाती है, जबकि दूसरी स्थिति में जानबूझकर विस्फोट किए जाने की आशंका बनती है। उपलब्ध रिपोर्टों के आधार पर अभी किसी एक निष्कर्ष को अंतिम तथ्य के रूप में पेश करना उचित नहीं होगा।
आईएएनएस की रिपोर्ट के अनुसार पुलिस ने घटना की पुष्टि करते हुए जांच शुरू कर दी है। इसलिए विस्फोट की प्रकृति, इस्तेमाल किए गए विस्फोटक या ग्रेनेड का स्रोत और जिम्मेदार व्यक्ति की पहचान जांच पूरी होने के बाद ही अधिक स्पष्ट हो सकेगी।
इस घटना का सबसे संवेदनशील पहलू स्कूल से जुड़ा होना है। टेलंगाना टुडे ने आईएएनएस के हवाले से बताया कि घायल लोगों में कई छात्र शामिल हैं और इनमें ज्यादातर लड़कियां बताई गई हैं। स्थानीय रिपोर्टों में अस्पतालों तक बड़ी संख्या में घायलों को पहुंचाए जाने की बात भी सामने आई है स्कूल में विस्फोट होने की खबर इसलिए भी गंभीर है क्योंकि ऐसे स्थानों पर बच्चे और किशोर मौजूद होते हैं। किसी भी सुरक्षा घटना में उनकी संवेदनशील स्थिति राहत और मेडिकल प्रतिक्रिया को अधिक चुनौतीपूर्ण बनाती है। फिलहाल उपलब्ध रिपोर्टों में मृतकों की पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए घटना को लेकर किसी संभावित मौत का आंकड़ा जोड़ना या अपुष्ट संख्या प्रकाशित करना संपादकीय रूप से उचित नहीं होगा।
दश्त-ए-बरची पश्चिमी काबुल का ऐसा इलाका है जहां पहले भी बड़े हमले हो चुके हैं। यह क्षेत्र हजारा समुदाय की बड़ी आबादी के लिए जाना जाता है और अतीत में स्कूलों तथा शिक्षा केंद्रों को निशाना बनाकर हमले हुए हैं। 2021 में इसी क्षेत्र के एक स्कूल के पास हुए कई विस्फोटों में बड़ी संख्या में लोग मारे गए और घायल हुए थे। 2022 में भी काज एजुकेशन सेंटर पर आत्मघाती हमला हुआ था। इन घटनाओं ने पश्चिमी काबुल में शिक्षा संस्थानों की सुरक्षा को लंबे समय से एक अहम सुरक्षा मुद्दा बनाए रखा है।
हालांकि मौजूदा घटना को पुराने हमलों की कड़ी के रूप में जोड़ना अभी जल्दबाजी होगी। इसके लिए हमलावर की मंशा, संगठन और लक्ष्य की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।
अफगानिस्तान में अगस्त 2021 में तालिबान के सत्ता में लौटने के बाद देश के कई हिस्सों में बड़े पैमाने की युद्ध गतिविधियों में कमी आई है। लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि सुरक्षा संबंधी सभी खतरे खत्म हो गए हैं। हाल के वर्षों में इस्लामिक स्टेट खुरासान प्रांत से जुड़े हमलों ने खास तौर पर धार्मिक अल्पसंख्यकों, शिक्षा संस्थानों और सार्वजनिक स्थलों की सुरक्षा पर सवाल खड़े किए हैं। संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं भी अफगानिस्तान में सुरक्षा, मानवाधिकार और मानवीय हालात पर लगातार चिंता जताती रही हैं। अगस्त 2026 में तालिबान के सत्ता में लौटने के पांच साल पूरे हुए हैं। इस मौके पर अफगान प्रशासन ने सुरक्षा में सुधार को अपनी उपलब्धियों में शामिल किया, लेकिन अंतरराष्ट्रीय संस्थानों ने सुरक्षा के साथ मानवाधिकार और शिक्षा से जुड़े गंभीर मुद्दों को भी रेखांकित किया है।
तालिबान प्रशासन के समर्थक यह तर्क देते हैं कि 2021 के बाद देश में व्यापक युद्ध और मोर्चाबंदी का स्तर कम हुआ है। काबुल के कई इलाकों में आम नागरिकों ने भी पहले की तुलना में रोजमर्रा की सुरक्षा बेहतर होने की बात कही है। लेकिन स्कूल जैसे संवेदनशील स्थान पर विस्फोट यह सवाल उठाता है कि सुरक्षा व्यवस्था हर इलाके और हर नागरिक तक समान रूप से कितनी प्रभावी पहुंच बना पाई है। खास तौर पर पश्चिमी काबुल जैसे क्षेत्रों में स्थानीय आबादी को बार-बार सुरक्षा जोखिमों का सामना करना पड़ा है। यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि एक घटना से पूरे अफगानिस्तान की सुरक्षा स्थिति का अंतिम आकलन नहीं किया जा सकता। इसके लिए अलग-अलग प्रांतों में हिंसा, नागरिक हताहत, आतंकी गतिविधियों और सुरक्षा अभियानों के व्यापक डेटा की जरूरत होगी।
स्कूल में विस्फोट की घटना ऐसे समय सामने आई है जब अफगानिस्तान में लड़कियों की शिक्षा पहले से ही गंभीर संकट का सामना कर रही है। रॉयटर्स ने यूनेस्को के हवाले से रिपोर्ट किया है कि लगभग 24 लाख अफगान लड़कियां माध्यमिक शिक्षा से बाहर हैं और अफगानिस्तान दुनिया का एकमात्र देश है जहां महिलाओं और लड़कियों को माध्यमिक तथा उच्च शिक्षा से औपचारिक रूप से रोका गया है। इस व्यापक संदर्भ में किसी स्कूल में सुरक्षा घटना का असर केवल घायल छात्रों तक सीमित नहीं रहता। इससे परिवारों की सुरक्षा संबंधी चिंताएं बढ़ सकती हैं और पहले से दबाव झेल रही शिक्षा व्यवस्था पर अतिरिक्त असर पड़ सकता है। फिर भी मौजूदा विस्फोट को सीधे लड़कियों की शिक्षा पर लक्षित हमला घोषित करने के लिए अभी पर्याप्त प्रमाण सामने नहीं आए हैं। घटना की मंशा और लक्ष्य की जांच पूरी होना जरूरी है।
अफगानिस्तान में अतीत के कई हमलों के बाद अलग-अलग संगठनों पर शक जताया गया है। कई मामलों में बाद में जिम्मेदारी के दावे भी सामने आए, जबकि कुछ घटनाओं में हमलावर की पहचान लंबे समय तक स्पष्ट नहीं हो सकी। मौजूदा मामले में उपलब्ध ताजा रिपोर्टों में किसी संगठन द्वारा जिम्मेदारी लेने की पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इस विस्फोट को किसी विशेष आतंकी संगठन से जोड़ना अभी तथ्यात्मक रूप से सुरक्षित नहीं होगा। यही वजह है कि खबर में घटना, घायलों की संख्या और पुलिस जांच को प्राथमिकता देना जरूरी है। जिम्मेदारी से जुड़े दावों को तभी प्रमुखता दी जानी चाहिए जब उनकी स्वतंत्र पुष्टि हो।
पुलिस के लिए अब तीन सवाल अहम होंगे। पहला, विस्फोट में इस्तेमाल सामग्री कहां से आई। दूसरा, घटना दुर्घटनावश हुई या किसी ने जानबूझकर विस्फोट किया। तीसरा, यदि यह हमला था तो इसका लक्ष्य स्कूल या वहां मौजूद छात्र क्यों थे। जांच में घटनास्थल की फोरेंसिक पड़ताल, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अस्पतालों से मिले मेडिकल रिकॉर्ड अहम भूमिका निभा सकते हैं। स्कूल परिसर और आसपास मौजूद निगरानी कैमरों की फुटेज उपलब्ध होने पर उससे भी घटना की कड़ी जोड़ने में मदद मिल सकती है। इनमें से किसी भी जांच परिणाम की सार्वजनिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है। इसलिए संभावित कारणों को तथ्य के तौर पर पेश करना उचित नहीं होगा।
सबसे पहले घायलों की अंतिम संख्या और उनकी हालत को लेकर अधिक स्पष्ट जानकारी सामने आने की उम्मीद है। अस्पतालों और सुरक्षा अधिकारियों से मिलने वाले अपडेट से यह पता चलेगा कि शुरुआती 50 से अधिक का आंकड़ा अंतिम संख्या है या इसमें और बदलाव होता है। इसके बाद जांच एजेंसियां विस्फोट की प्रकृति और जिम्मेदारी के सवाल पर आगे बढ़ेंगी। यदि घटना को जानबूझकर किया गया हमला साबित किया जाता है, तो सुरक्षा व्यवस्था और स्कूलों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन पर दबाव बढ़ सकता है। अगर जांच इसे दुर्घटनावश हुआ ग्रेनेड विस्फोट बताती है, तो ध्यान हथियारों की उपलब्धता, नागरिक इलाकों में विस्फोटक सामग्री की मौजूदगी और सुरक्षा नियंत्रण पर जाएगा। दोनों परिस्थितियों में स्कूलों और बच्चों की सुरक्षा एक केंद्रीय मुद्दा बनी रहेगी।
काबुल स्कूल विस्फोट में 50 से ज्यादा लोगों के घायल होने की खबर फिलहाल इस घटना का सबसे महत्वपूर्ण स्थापित तथ्य है। शुरुआती और बाद की रिपोर्टों में घायलों की संख्या तथा विस्फोट के तरीके को लेकर अंतर है, इसलिए अंतिम आधिकारिक जांच का इंतजार जरूरी है। काबुल स्कूल विस्फोट का महत्व केवल इसलिए नहीं है कि इसमें छात्र घायल हुए हैं। यह घटना अफगानिस्तान में शिक्षा संस्थानों की सुरक्षा, पश्चिमी काबुल के संवेदनशील इलाकों और तालिबान शासन के सुरक्षा दावों के बीच मौजूद जटिल अंतर को फिर सामने लाती है। अभी यह कहना जल्दबाजी होगा कि घटना के पीछे कौन था या इसका मकसद क्या था। लेकिन एक बात स्पष्ट है, स्कूलों और बच्चों की सुरक्षा अफगानिस्तान के लिए गंभीर सार्वजनिक हित का मुद्दा बनी हुई है। जांच के निष्कर्ष ही तय करेंगे कि यह घटना सुरक्षा चूक, दुर्घटना या जानबूझकर की गई हिंसक कार्रवाई थी।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।