अफगानिस्तान में 2026 के दौरान करीब 37 लाख बच्चों के एक्यूट कुपोषण से प्रभावित होने का अनुमान है। सेव द चिल्ड्रन के मुताबिक मानवीय फंडिंग में भारी गिरावट के बीच जरूरी स्वास्थ्य सेवाएं बंद हुई हैं। यूनिसेफ और डब्ल्यूएचओ भी बच्चों में कुपोषण के गंभीर संकट की पुष्टि करते हैं।
काबुल, अफगानिस्तान | 13 अगस्त 2026 | शाह टाइम्स
अफगानिस्तान में बच्चों का कुपोषण संकट 2026 में और गंभीर होता दिख रहा है। 13 अगस्त की रिपोर्ट में सेव द चिल्ड्रन के हवाले से कहा गया है कि देश में पांच साल से कम उम्र के करीब 37 लाख बच्चे एक्यूट कुपोषण से प्रभावित हैं। संगठन के मुताबिक पिछले चार वर्षों में इस स्थिति में 14 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।
यूनिसेफ और विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़े भी इस संकट की गंभीर तस्वीर पेश करते हैं। यूनिसेफ के अनुसार 2026 में पांच साल से कम उम्र के 37 लाख बच्चे वेस्टिंग या कुपोषण के बढ़े हुए खतरे में हैं, जबकि डब्ल्यूएचओ ने भी करीब 37 लाख बच्चों में एक्यूट कुपोषण का अनुमान लगाया है।
इस संकट की एक अहम वजह स्वास्थ्य और मानवीय सेवाओं के लिए फंडिंग में भारी कमी बताई जा रही है। सेव द चिल्ड्रन के मुताबिक मानवीय सहायता में गिरावट के कारण करीब 600 जरूरी स्वास्थ्य केंद्र बंद हुए, जिन पर लगभग 40 लाख लोग निर्भर थे। इनमें करीब आधे बच्चे थे।
यहां एक महत्वपूर्ण अंतर भी समझना जरूरी है। विश्व खाद्य कार्यक्रम के आंकड़ों पर आधारित एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक केवल 2025 में फंडिंग कटौती के कारण 142 स्वास्थ्य केंद्र बंद हुए और 13,000 से अधिक बच्चों की न्यूट्रिशन ट्रीटमेंट तक पहुंच प्रभावित हुई। इसलिए 600 का आंकड़ा व्यापक आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं के बंद होने से जुड़ा है, जबकि 142 का आंकड़ा डब्ल्यूएफपी द्वारा बताए गए 2025 के स्वास्थ्य केंद्र बंद होने से संबंधित है।
एक्यूट कुपोषण को वेस्टिंग भी कहा जाता है। इसमें बच्चे का वजन उसकी लंबाई के मुकाबले खतरनाक रूप से कम हो जाता है और शरीर तेजी से फैट तथा मांसपेशियां खोने लगता है।
रिपोर्ट के मुताबिक यह स्थिति कम भोजन मिलने या गंभीर बीमारी के कारण पैदा हो सकती है और गंभीर मामलों में जानलेवा बन जाती है।
डब्ल्यूएचओ के मुताबिक 2026 में अफगानिस्तान में एक्यूट कुपोषण से प्रभावित बच्चों की संख्या करीब 37 लाख रहने का अनुमान है। इसके साथ 12 लाख गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं के भी एक्यूट कुपोषण से प्रभावित होने का अनुमान है।
सेव द चिल्ड्रन के मुताबिक 2026 की दूसरी तिमाही में अफगानिस्तान के दो-तिहाई प्रांतों में बच्चों में एक्यूट कुपोषण का स्तर पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले बिगड़ा है।
यह आंकड़ा बताता है कि समस्या कुछ इलाकों तक सीमित नहीं है। देश के बड़े हिस्से में बच्चों की पोषण स्थिति पर दबाव बढ़ रहा है।
डब्ल्यूएफपी के अनुसार 12 अफगान प्रांतों में बच्चों का एक्यूट कुपोषण क्रिटिकल स्तर तक पहुंच गया है। एजेंसी ने इसे रिकॉर्ड संख्या बताया है।
अफगानिस्तान की मानवीय सहायता में पिछले कुछ वर्षों में तेज गिरावट आई है। सेव द चिल्ड्रन के अनुसार 2022 में मानवीय सहायता करीब 3.27 अरब डॉलर थी, जो 2025 में घटकर करीब 1 अरब डॉलर रह गई। यानी इस अवधि में लगभग 70 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई।
2026 में भी फंडिंग की स्थिति चिंताजनक है। संगठन के मुताबिक साल के आधे से ज्यादा हिस्से के गुजरने के बावजूद केवल 438 मिलियन डॉलर की मानवीय सहायता सुरक्षित हुई थी। इससे 74 प्रतिशत का फंडिंग गैप बनता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी अफगानिस्तान की स्वास्थ्य व्यवस्था पर अंतरराष्ट्रीय सहायता में कटौती के असर को रेखांकित किया है। उसके मुताबिक 2026 में देश की मानवीय जरूरतें और स्वास्थ्य संबंधी जोखिम दोनों बढ़े हैं।
कुपोषण का इलाज केवल भोजन उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है। गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों को स्क्रीनिंग, चिकित्सकीय निगरानी, न्यूट्रिशन सपोर्ट और समय पर स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंच की जरूरत होती है।
जब स्वास्थ्य केंद्र बंद होते हैं या फंडिंग की कमी से सेवाएं सीमित होती हैं, तो परिवारों के लिए इलाज तक पहुंच और कठिन हो जाती है। खासकर पहाड़ी और दूरदराज इलाकों में यह समस्या ज्यादा गंभीर हो सकती है।
सेव द चिल्ड्रन ने बताया कि वह उत्तरी अफगानिस्तान के पहाड़ी इलाकों में 14 स्वास्थ्य क्लीनिक संचालित रखे हुए है और वहां करीब 10,000 लोगों को स्वास्थ्य सेवा देने वाला प्रमुख संगठन है।
अफगान बच्चों में कुपोषण बढ़ने की वजह केवल भोजन की कमी नहीं है। डब्ल्यूएचओ ने आर्थिक मुश्किलों, खाद्य असुरक्षा, बार-बार फैलने वाली बीमारियों, जलवायु संबंधी झटकों और स्वास्थ्य एवं पोषण सेवाओं तक सीमित पहुंच को प्रमुख कारकों में शामिल किया है।
डब्ल्यूएफपी ने भी संघर्ष, बेरोजगारी, बढ़ती खाद्य कीमतों, बीमारी के प्रकोप, खराब पानी और स्वच्छता व्यवस्था तथा मानवीय फंडिंग में कमी को संकट से जोड़ा है।
इसका मतलब यह है कि बच्चों का कुपोषण एक बहुस्तरीय मानवीय संकट का नतीजा है। केवल खाद्य वितरण बढ़ाने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा।
अफगानिस्तान पर एक और दबाव पड़ोसी देशों से लौटने वाले लोगों की बढ़ती संख्या का है। रिपोर्ट के मुताबिक सितंबर 2023 के बाद पाकिस्तान और ईरान से 60 लाख से अधिक अफगान लौट चुके हैं। इससे आबादी और सार्वजनिक सेवाओं पर अतिरिक्त दबाव पड़ा है।
लौटने वाले परिवारों में बच्चों की बड़ी संख्या है। ऐसे परिवार अक्सर पहले से कमजोर आर्थिक हालात में लौटते हैं और उन्हें भोजन, आवास, स्वास्थ्य सेवा तथा साफ पानी जैसी बुनियादी जरूरतों की तत्काल आवश्यकता होती है।
यूनिसेफ ने भी पड़ोसी देशों से बड़ी संख्या में लौटे अफगानों को अफगानिस्तान की पहले से दबाव में चल रही सार्वजनिक सेवाओं के लिए अतिरिक्त चुनौती बताया है।
अफगानिस्तान की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सामाजिक और प्रशासनिक पाबंदियों का भी असर पड़ रहा है। अल जज़ीरा की रिपोर्ट के मुताबिक तालिबान द्वारा महिला मानवीय कर्मचारियों पर लगाए गए प्रतिबंधों ने एजेंसियों के लिए महिलाओं और बच्चों तक सहायता पहुंचाने की क्षमता को सीमित किया है।
डब्ल्यूएचओ ने भी महिलाओं और लड़कियों की स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच को लेकर बढ़ती बाधाओं को अफगानिस्तान के व्यापक स्वास्थ्य संकट का हिस्सा बताया है।
यह पहलू इसलिए अहम है क्योंकि मातृ और बाल स्वास्थ्य सेवाओं में महिला स्वास्थ्यकर्मियों की भूमिका कई इलाकों में महत्वपूर्ण रहती है।
स्वास्थ्य सेवाओं के साथ खाद्य सहायता भी दबाव में है। एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक डब्ल्यूएफपी ने अगस्त से अक्टूबर के बीच सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में कुछ जीवनरक्षक खाद्य वितरण रोकने की चेतावनी दी थी। एजेंसी ने अगले छह महीनों के लिए 540 मिलियन डॉलर की तत्काल जरूरत बताई।
डब्ल्यूएफपी के मुताबिक 2026 में करीब 37 लाख अफगान बच्चों के एक्यूट कुपोषण से प्रभावित होने का अनुमान है। साथ ही 12 लाख गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाएं भी इस संकट की चपेट में हैं।
इस स्थिति में खाद्य सहायता और स्वास्थ्य सेवाओं के बीच तालमेल और ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाता है।
कुपोषण का असर बच्चे के मौजूदा स्वास्थ्य से आगे जाता है। शुरुआती उम्र में गंभीर कुपोषण शारीरिक विकास और सीखने की क्षमता को प्रभावित कर सकता है।
इसलिए 37 लाख का आंकड़ा केवल इस साल इलाज की जरूरत वाले बच्चों की संख्या नहीं है। यह अफगानिस्तान की आने वाली पीढ़ी के स्वास्थ्य और मानव पूंजी से जुड़ा सवाल भी है।
यही वजह है कि यूनिसेफ ने पांच साल से कम उम्र के बच्चों, खासकर दो साल से कम उम्र के बच्चों के आहार और शुरुआती पोषण सेवाओं को प्राथमिकता देने की जरूरत बताई है।
अफगानिस्तान में कुपोषण को केवल तालिबान शासन या केवल विदेशी सहायता में कटौती के एकल कारण से समझना अधूरा होगा।
देश पहले से दशकों के संघर्ष, गरीबी, कमजोर बुनियादी ढांचे और खाद्य असुरक्षा से जूझ रहा है। 2021 के बाद विदेशी सहायता में कमी, स्वास्थ्य सेवाओं की कमजोर स्थिति, महिलाओं पर प्रतिबंध, जलवायु संकट, विस्थापन और लौटने वाली आबादी ने इन दबावों को और बढ़ाया है।
इसलिए मौजूदा संकट को समझने के लिए इन सभी कारकों को एक साथ देखना जरूरी है।
उपलब्ध आंकड़े बताते हैं कि तत्काल राहत की जरूरत बनी हुई है। जुलाई से अक्टूबर के बीच कुपोषण का पीक सीजन आने के कारण दबाव बढ़ने की आशंका रहती है। यूनिसेफ ने जुलाई में भी चेतावनी दी थी कि इस अवधि में बच्चों के लिए पोषण सेवाओं को मजबूत करना जरूरी है।
डब्ल्यूएफपी ने भी फंडिंग की कमी के कारण खाद्य वितरण पर असर पड़ने की चेतावनी दी है।
लेकिन भविष्य के बारे में निश्चित निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगा। फंडिंग, स्वास्थ्य सेवाओं की बहाली, खाद्य सहायता और प्रभावित परिवारों तक पहुंच में सुधार स्थिति की दिशा बदल सकते हैं।
अफगानिस्तान की मानवीय जरूरतों और उपलब्ध फंडिंग के बीच बड़ा अंतर बना हुआ है। संयुक्त राष्ट्र की व्यापक मानवीय अपील भी पर्याप्त रूप से वित्तपोषित नहीं हो सकी है। अगस्त की शुरुआत में एपी ने बताया कि 1.71 अरब डॉलर की अफगानिस्तान मानवीय अपील केवल करीब 26 प्रतिशत फंडेड थी।
इस स्थिति में सबसे बड़ा सवाल केवल कितना पैसा उपलब्ध होगा, यह नहीं है। सवाल यह भी है कि सहायता किस तरह उन बच्चों और परिवारों तक पहुंचेगी जिन्हें इसकी सबसे ज्यादा जरूरत है।
अफगानिस्तान में बच्चों के कुपोषण का संकट आने वाले महीनों में तीन चीजों पर काफी हद तक निर्भर करेगा। पहली, स्वास्थ्य और पोषण सेवाओं के लिए नई फंडिंग कितनी मिलती है। दूसरी, खाद्य सहायता कितनी नियमित रहती है। तीसरी, दूरदराज इलाकों में बच्चों तक इलाज और पोषण सामग्री पहुंचाने की क्षमता कितनी बनी रहती है।
अगर स्वास्थ्य केंद्र दोबारा सक्रिय होते हैं और पोषण कार्यक्रमों की पहुंच बढ़ती है, तो गंभीर मामलों की समय पर पहचान और इलाज बेहतर हो सकता है। इसके विपरीत फंडिंग में और कमी आई तो पहले से कमजोर स्वास्थ्य व्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है।
अफगानिस्तान में 2026 का बाल कुपोषण संकट एक गंभीर मानवीय चेतावनी है। करीब 37 लाख बच्चों के एक्यूट कुपोषण से प्रभावित होने का अनुमान यूनिसेफ, डब्ल्यूएचओ और डब्ल्यूएफपी के अलग-अलग आकलनों में सामने आया है।
स्वास्थ्य केंद्रों का बंद होना इस संकट का एक महत्वपूर्ण पहलू है, लेकिन पूरी तस्वीर इससे बड़ी है। मानवीय फंडिंग में कमी, खाद्य असुरक्षा, गरीबी, बीमारी, जलवायु संकट, विस्थापन और स्वास्थ्य सेवाओं तक सीमित पहुंच ने बच्चों की स्थिति को ज्यादा नाज़ुक बनाया है।
फिलहाल सबसे अहम जरूरत समय पर पोषण उपचार, स्वास्थ्य सेवाओं की बहाली और पर्याप्त मानवीय फंडिंग की है। उपलब्ध संकेत बताते हैं कि देरी का असर सबसे पहले उन बच्चों पर पड़ेगा जो पहले से एक्यूट कुपोषण के जोखिम में हैं।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।