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सूडान के दक्षिण कोरडोफान में दो हमले, 26 लोगों की मौत, दर्जनों घायल

Harish Qureshi • 2026-09-05 13:12:21
सूडान के दक्षिण कोरडोफान में दो हमले, 26 लोगों की मौत, दर्जनों घायल

सूडान के दक्षिण कोरडोफान में दो अलग-अलग हमलों में कम से कम 26 लोग मारे गए। डेबि और लुवेरी में 21 और डिलिंग में तोपों की गोलाबारी से पांच मौतें हुईं।


दक्षिण कोरडोफान, सूडान | 5 सितंबर 2026 | शाह टाइम्स

By Mohd Haris


दक्षिण कोरडोफान में दो हमलों से दहशत


सूडान के दक्षिण कोरडोफान राज्य में दो अलग-अलग हमलों में कम से कम 26 लोगों की मौत हो गई और दर्जनों लोग घायल हुए हैं। मृतकों में महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। सूडान डॉक्टर्स

नेटवर्क के मुताबिक दोनों घटनाएं अलग-अलग इलाकों में हुईं।


पहला हमला गुरुवार दोपहर काउडा के दक्षिण और पश्चिम में स्थित डेबि और लुवेरी इलाकों में हुआ। यहां कम से कम 21 लोगों के मारे जाने की जानकारी सामने आई है।


डेबि और लुवेरी में 21 लोगों की मौत


सूडान डॉक्टर्स नेटवर्क ने आरोप लगाया है कि इस हमले को सूडान पीपुल्स लिबरेशन मूवमेंट-नॉर्थ यानी एसपीएलएम-एन की सेनाओं ने अंजाम दिया।


चिकित्सा संगठन के अनुसार हमले में महिलाओं और बच्चों समेत कम से कम 21 लोग मारे गए। कई अन्य लोग घायल हुए और बड़ी संख्या में नागरिक इलाके से निकलने को मजबूर हुए।


डेबि के एक ग्रामीण अस्पताल में 20 से ज्यादा शव और 11 घायल लोगों के पहुंचने की जानकारी भी सामने आई है। स्थानीय लोगों में आगे हिंसा बढ़ने और मानवीय हालात बिगड़ने की आशंका

बनी हुई है।


डिलिंग में तोपों की गोलाबारी


दूसरी घटना शुक्रवार सुबह डिलिंग शहर में हुई। सूडान डॉक्टर्स नेटवर्क के मुताबिक एसपीएलएम-एन से जुड़ी सेनाओं की तोपों की गोलाबारी रिहायशी इलाकों तक पहुंची।


इस घटना में कम से कम पांच लोग मारे गए, जिनमें एक बच्चा भी शामिल है। सात से अधिक लोगों के घायल होने की जानकारी दी गई है। एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि गोलाबारी रिहायशी

इलाकों में हुई।


हमले की जिम्मेदारी पर विवाद


सूडान डॉक्टर्स नेटवर्क ने दोनों घटनाओं के लिए एसपीएलएम-एन पर आरोप लगाया है। संगठन ने डेबि और लुवेरी में हुए हमले को नागरिकों को निशाना बनाने वाला कदम बताया है।


एसपीएलएम-एन की ओर से इन आरोपों पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इसलिए हमले की जिम्मेदारी को फिलहाल आरोप के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।


जातीय तनाव का भी पहलू


डेबि और लुवेरी में रहने वाले लोगों में ओटोरो समुदाय के लोग शामिल हैं। चिकित्सा संगठन ने आरोप लगाया है कि हमले में इस समुदाय को जातीय आधार पर निशाना बनाया गया।


यह आरोप ऐसे समय आया है जब दक्षिण कोरडोफान में एसपीएलएम-एन और ओटोरो समुदाय से जुड़े एक समूह के बीच संघर्ष चल रहा है। भूमि और सीमा निर्धारण से जुड़े विवादों ने हाल के

महीनों में हिंसा को बढ़ाया है।


पहले भी हो चुकी हैं बड़ी झड़पें


दक्षिण कोरडोफान में हिंसा नई नहीं है। 20 अगस्त को एसपीएलएम-एन ने काउडा पर नियंत्रण हासिल करने का दावा किया था। इसके बाद 20 से 26 अगस्त के बीच ओटोरो समुदाय से जुड़े

इलाकों में कई हमलों और विस्थापन की घटनाएं सामने आईं।


सूडान डॉक्टर्स नेटवर्क ने अगस्त में भी दक्षिण कोरडोफान के दो इलाकों में हमलों में 27 लोगों की मौत का दावा किया था। मई में काउडा क्षेत्र में एसपीएलएम-एन और ओटोरो समूह के बीच

संघर्ष में 61 से अधिक लोगों के मारे जाने की जानकारी दी गई थी।


एसपीएलएम-एन और आरएसएफ का संबंध


एसपीएलएम-एन लंबे समय से दक्षिण कोरडोफान और ब्लू नाइल क्षेत्र में सक्रिय सशस्त्र संगठन है। इसके नेता अब्देल अज़ीज़ अल-हिलू हैं।


हालिया संघर्ष में एसपीएलएम-एन का रैपिड सपोर्ट फोर्सेज यानी आरएसएफ के साथ गठजोड़ भी महत्वपूर्ण है। अल-हिलू के नेतृत्व वाला संगठन आरएसएफ के साथ जुड़े समानांतर प्रशासनिक

ढांचे में शामिल हुआ है।


सूडान का युद्ध और जटिल हुआ


सूडान में व्यापक युद्ध अप्रैल 2023 में सूडानी सशस्त्र बलों और आरएसएफ के बीच शुरू हुआ था। बाद में कई क्षेत्रीय और स्थानीय सशस्त्र समूह भी संघर्ष में शामिल हो गए।


दक्षिण कोरडोफान में जारी हिंसा इसी व्यापक युद्ध से जुड़ी है, लेकिन यहां स्थानीय और जातीय विवाद भी संघर्ष को और जटिल बना रहे हैं।


नागरिकों पर बढ़ता मानवीय दबाव


दक्षिण कोरडोफान में लगातार हिंसा का सबसे बड़ा असर आम नागरिकों पर पड़ रहा है। घर छोड़कर भागने वाले लोगों की संख्या बढ़ रही है और स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव बना हुआ है।


मानवीय संकट पहले से गंभीर है। संयुक्त राष्ट्र से जुड़े हालिया आकलनों के अनुसार सूडान का युद्ध बड़े पैमाने पर विस्थापन, भूख और नागरिकों के खिलाफ हिंसा का कारण बना हुआ है।


युद्धविराम की कोशिशों के बीच नई हिंसा


दक्षिण कोरडोफान में ताजा हमले ऐसे समय हुए हैं जब सूडान में मानवीय युद्धविराम की कोशिशें चल रही हैं। अगस्त के अंत में आरएसएफ की ओर से युद्धविराम पहल की घोषणा की गई थी,

लेकिन एसपीएलएम-एन ने उसमें प्रतिबद्धता नहीं जताई थी।


ताजा घटनाएं दिखाती हैं कि स्थानीय सशस्त्र संघर्षों को रोकना सूडान में व्यापक युद्धविराम की दिशा में बड़ी चुनौती बना हुआ है।


आगे की चुनौती


दक्षिण कोरडोफान में हिंसा अगर जारी रहती है तो इससे स्थानीय समुदायों के बीच तनाव और बढ़ सकता है। नागरिकों का विस्थापन बढ़ने से पहले से कमजोर मानवीय व्यवस्था पर अतिरिक्त

दबाव पड़ने की आशंका है।


फिलहाल 26 मौतों की जानकारी सामने आई है, लेकिन घायलों और विस्थापित लोगों की संख्या बढ़ सकती है। हमलों की जिम्मेदारी और घटनाओं की पूरी परिस्थितियों की स्वतंत्र पुष्टि अभी

सीमित है।

वीडियो देखें

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Harish Qureshi

Harish Qureshi

Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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