कांगो में इबोला का कहर तेज, मौतों का आंकड़ा 3 हजार के पार
Harish Qureshi
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2026-09-02 14:18:14
कांगो में इबोला संक्रमण से मौतों का आंकड़ा 3,007 पहुंच गया है। 6,186 पुष्ट मामलों के साथ बीमारी छह प्रांतों के 60 स्वास्थ्य क्षेत्रों तक फैल चुकी है।
बुनिया, कांगो | 2 सितंबर 2026 | शाह टाइम्स
By Mohd Haris
कांगो में इबोला का प्रकोप तेज
डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में इबोला का प्रकोप लगातार गंभीर होता जा रहा है। स्वास्थ्य अधिकारियों के नवीनतम आंकड़ों के मुताबिक संक्रमण से मौतों का आंकड़ा 3,007 पहुंच गया है। देश में अब तक इबोला के 6,186 पुष्ट मामले दर्ज किए जा चुके हैं।
मौजूदा प्रकोप को कांगो के इतिहास का सबसे बड़ा और सबसे घातक इबोला प्रकोप बताया जा रहा है। संक्रमण की रफ्तार ने स्वास्थ्य अधिकारियों और अंतरराष्ट्रीय राहत एजेंसियों के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है।
मई में घोषित हुआ था प्रकोप
कांगो ने मौजूदा इबोला प्रकोप को औपचारिक रूप से 15 मई 2026 को इतुरी प्रांत में घोषित किया था। हालांकि कुछ स्वास्थ्य अधिकारियों और विशेषज्ञों का मानना है कि संक्रमण इससे पहले ही फैलना शुरू हो गया था।
शुरुआत में संक्रमण इतुरी तक सीमित था, लेकिन बाद में इसका दायरा बढ़ता गया। अब बीमारी छह प्रांतों के 60 स्वास्थ्य क्षेत्रों तक पहुंच चुकी है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार 26 अगस्त तक इतुरी इस प्रकोप का मुख्य केंद्र बना हुआ था। अकेले इतुरी में 4,802 पुष्ट मामले दर्ज किए गए थे।
मौतों का आंकड़ा 3 हजार के पार
नवीनतम सरकारी आंकड़ों के अनुसार 6,186 पुष्ट मामलों में 3,007 लोगों की मौत हुई है। इसका मतलब है कि पुष्ट मामलों में मृत्यु दर करीब 48.6 प्रतिशत है।
आंकड़ों में हर दिन बदलाव हो रहा है। स्वास्थ्य अधिकारियों की रिपोर्टिंग के साथ पुराने आंकड़ों का समायोजन भी किया जा रहा है। इसलिए आने वाले दिनों में कुल मामलों और मौतों की संख्या में संशोधन संभव है।
फिर भी मौजूदा तस्वीर बेहद गंभीर है। डब्ल्यूएचओ ने पहले ही इस प्रकोप को सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल की अंतरराष्ट्रीय चिंता की स्थिति में बनाए रखने की बात कही है।
छह प्रांतों तक पहुंचा संक्रमण
इबोला अब इतुरी के अलावा नॉर्थ किवु, साउथ किवु, हाउट-उएले, त्शोपो और बास-उएले प्रांतों तक पहुंच चुका है। डब्ल्यूएचओ के मुताबिक 60 स्वास्थ्य क्षेत्र प्रभावित हैं।
इतुरी में सबसे अधिक मामले दर्ज किए गए हैं। नॉर्थ किवु दूसरा सबसे प्रभावित क्षेत्र है। बास-उएले में अगस्त में नए मामले सामने आने के बाद प्रभावित प्रांतों की संख्या बढ़कर छह हो गई थी।
बीमारी के भौगोलिक विस्तार ने निगरानी और संपर्कों की पहचान के काम को मुश्किल बना दिया है।
इबोला की यह प्रजाति क्यों चिंता बढ़ा रही है?
मौजूदा प्रकोप बुंडिबुग्यो वायरस के कारण है। यह इबोला वायरस की अलग प्रजाति है।
इस प्रजाति के लिए फिलहाल कोई स्वीकृत वैक्सीन या विशिष्ट उपचार उपलब्ध नहीं है। हालांकि कई वैक्सीन उम्मीदवारों और उपचारों पर शोध जारी है।
कांगो ने अग्रिम मोर्चे पर काम कर रहे स्वास्थ्यकर्मियों के लिए एरवेबो वैक्सीन का इस्तेमाल शुरू किया है। यह वैक्सीन इबोला की जायरे प्रजाति के
खिलाफ लाइसेंस प्राप्त है। अधिकारियों को उम्मीद है कि इससे बुंडिबुग्यो वायरस के खिलाफ कुछ सुरक्षा मिल सकती है।
डब्ल्यूएचओ ने 31 अगस्त को बुंडिबुग्यो वायरस के प्रकोप के दौरान लाइसेंस प्राप्त इबोला वैक्सीन के संभावित इस्तेमाल को लेकर आपातकालीन मार्गदर्शन भी जारी किया।
स्वास्थ्यकर्मियों के सामने बड़ा खतरा
इबोला की रोकथाम में स्वास्थ्यकर्मियों की भूमिका सबसे अहम है। उन्हें संक्रमित मरीजों की पहचान, उपचार, संपर्कों की निगरानी और सुरक्षित दफन प्रक्रिया में काम करना पड़ता है।
लेकिन पूर्वी कांगो में सुरक्षा स्थिति बेहद चुनौतीपूर्ण है। संघर्ष, स्वास्थ्यकर्मियों पर हमले और कमजोर स्वास्थ्य ढांचा बीमारी की रोकथाम को प्रभावित कर रहे हैं।
इलाके में बड़ी संख्या में लोग लगातार एक जगह से दूसरी जगह जाते हैं। खनन क्षेत्र में काम करने वाले लोगों की आवाजाही भी संक्रमण की निगरानी को कठिन बनाती है।
इलाज केंद्रों के बाहर हो रही मौतें
इस प्रकोप का एक गंभीर पहलू यह है कि बड़ी संख्या में मरीज अस्पताल या उपचार केंद्र तक पहुंचने से पहले दम तोड़ रहे हैं।
डब्ल्यूएचओ के आकलन के मुताबिक करीब 60 प्रतिशत मौतें उपचार केंद्रों के बाहर हो रही हैं। इससे समय पर बीमारी की पहचान और उपचार शुरू करने में आ रही मुश्किलों का अंदाजा मिलता है।
इबोला में शुरुआती पहचान बेहद अहम होती है। देर से पहचान होने पर संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आए लोगों की निगरानी भी देर से शुरू होती है, जिससे संक्रमण की श्रृंखला लंबी हो सकती है।
स्कूल खुलने से भी बढ़ी चिंता
कांगो में नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत ऐसे समय हुई है जब इबोला का प्रकोप जारी है। स्कूलों में छात्रों की स्वास्थ्य जांच और तापमान की निगरानी की जा रही है।
लेकिन बड़ी संख्या में बच्चों और शिक्षकों का रोजाना एक जगह इकट्ठा होना संक्रमण नियंत्रण के लिए अतिरिक्त चुनौती पैदा करता है। एसोसिएटेड प्रेस के मुताबिक स्कूलों के दोबारा खुलने से बीमारी के प्रसार को लेकर चिंता बढ़ी है।
कांगो के इतिहास का सबसे घातक प्रकोप
मौजूदा इबोला प्रकोप ने 2018 से 2020 के कांगो प्रकोप को पीछे छोड़ दिया है। अब यह देश में दर्ज सबसे बड़ा और सबसे घातक इबोला प्रकोप बन गया है।
वैश्विक स्तर पर हालांकि 2014 से 2016 के पश्चिमी अफ्रीका प्रकोप का पैमाना इससे बड़ा था। उस दौरान गिनी, लाइबेरिया और सिएरा लियोन में 28,600 से अधिक मामले और 11,000 से ज्यादा मौतें दर्ज हुई थीं।
मौजूदा कांगो प्रकोप की गंभीरता इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि संक्रमण तेजी से बढ़ रहा है और प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य तथा सुरक्षा से जुड़ी समस्याएं पहले से मौजूद हैं।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मदद की अपील
संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य संगठनों ने कांगो में इबोला के खिलाफ अभियान के लिए अधिक संसाधन और वित्तीय मदद की जरूरत पर जोर दिया है।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने कहा है कि जमीन पर पैदा हो रहे संकट की तुलना में अंतरराष्ट्रीय ध्यान और संसाधन पीछे हैं। उन्होंने वैश्विक समुदाय से प्रतिक्रिया तेज करने की अपील की है।
यह चिंता ऐसे समय सामने आई है जब स्वास्थ्य एजेंसियों को बीमारी की निगरानी, मरीजों के उपचार, स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा और समुदायों के बीच जागरूकता के लिए अतिरिक्त संसाधनों की जरूरत है।
पड़ोसी देशों पर भी नजर
इबोला के सीमा पार फैलने की आशंका को देखते हुए पड़ोसी देशों में निगरानी बढ़ाई जा रही है। कांगो से जुड़े कई देशों में सीमा स्वास्थ्य जांच और निगरानी व्यवस्था महत्वपूर्ण हो गई है।
डब्ल्यूएचओ के मुताबिक कांगो के बाहर इबोला के कुछ आयातित मामले सामने आए थे, लेकिन अब तक कांगो के बाहर लगातार संक्रमण की श्रृंखला स्थापित नहीं हुई है।
इसका मतलब है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जोखिम पर नजर रखने की जरूरत बनी हुई है, लेकिन मौजूदा संकट का मुख्य केंद्र अभी कांगो ही है।
सबसे बड़ी चुनौती संक्रमण की श्रृंखला तोड़ना
कांगो में इबोला के खिलाफ अभियान के सामने सबसे बड़ी चुनौती नए संक्रमणों की पहचान और उनकी श्रृंखला को समय रहते रोकना है।
इसके लिए संक्रमित मरीजों की जल्द पहचान, संपर्कों की निगरानी, सुरक्षित उपचार, स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा और प्रभावित समुदायों का भरोसा बनाए रखना जरूरी है।
मौजूदा आंकड़े बताते हैं कि बीमारी की रफ्तार अभी भी चिंता का विषय है। छह प्रांतों में संक्रमण और 3 हजार से अधिक मौतों के बाद आने वाले दिनों में निगरानी और उपचार व्यवस्था पर दबाव और बढ़ सकता है।
कांगो के लिए चुनौती केवल मौतों का आंकड़ा रोकना नहीं है। उसे संक्रमण की नई श्रृंखलाओं का पता लगाकर समय रहते तोड़ना होगा। इसके लिए स्थानीय स्वास्थ्य व्यवस्था, अंतरराष्ट्रीय सहायता और प्रभावित समुदायों के सहयोग, तीनों की जरूरत होगी।
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Harish Qureshi
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक,
अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।