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डीआर कांगो में इबोला का कहर, सबसे घातक प्रकोप बनने की चेतावनी

Shah Times 2026-08-13 12:19:35
डीआर कांगो में इबोला का कहर, सबसे घातक प्रकोप बनने की चेतावनी

  1. डीआर कांगो में इबोला का कहर, सबसे घातक प्रकोप बनने की चेतावनी
  2. इबोला से 2,000 से ज्यादा मौतें, डब्ल्यूएचओ ने जताई बड़ी चिंता
  3. डीआर कांगो में इबोला बेकाबू, रिकॉर्ड तोड़ने की आशंका


डीआर कांगो में इबोला का मौजूदा प्रकोप तेजी से फैल रहा है और 2,000 से अधिक मौतें दर्ज हो चुकी हैं। डब्ल्यूएचओ प्रमुख टेड्रोस एडनॉम घेब्रेयसस ने चेताया कि मौजूदा रफ्तार जारी रही तो यह 2014-16 के पश्चिम अफ्रीका प्रकोप से ज्यादा घातक हो सकता है। संक्रमण पांच प्रांतों तक पहुंच चुका है।


किन्शासा / पूर्वी डीआर कांगो | 13 अगस्त 2026 | शाह टाइम्स

By Mohd Haris


डीआर कांगो में इबोला का प्रकोप क्यों बना बड़ी चिंता

डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में इबोला का मौजूदा प्रकोप तेजी से फैल रहा है और विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसे लेकर गंभीर चेतावनी दी है। डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक टेड्रोस एडनॉम घेब्रेयसस ने कहा है कि मौजूदा रफ्तार बनी रही तो यह 2014-16 के पश्चिम अफ्रीकी इबोला प्रकोप को पीछे छोड़कर इतिहास का सबसे घातक प्रकोप बन सकता है। उस प्रकोप में 11,000 से अधिक लोगों की मौत हुई थी।

11 अगस्त तक डीआर कांगो की रिपोर्टिंग के आधार पर 4,449 पुष्ट मामले और 2,061 संबंधित मौतें दर्ज की गई थीं। पांच प्रांतों के 140 हेल्थ ज़ोन में से 53 में संक्रमण की पुष्टि हो चुकी थी। आंकड़ों की समीक्षा और सामंजस्य की प्रक्रिया जारी है।

इबोला की रफ्तार ने पुराने रिकॉर्ड को पीछे छोड़ा

डब्ल्यूएचओ के मुताबिक यह प्रकोप अब तक सामने आए इबोला प्रकोपों में सबसे तेज गति से बढ़ रहा है। रिपोर्ट के अनुसार मौजूदा प्रकोप में 4,300 से ज्यादा मामले और 2,000 से अधिक मौतें दर्ज हो चुकी थीं, जबकि 2014-16 का पश्चिम अफ्रीकी प्रकोप 1,000 मौतों तक पहुंचने में करीब आठ महीने ले गया था।

यह तुलना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पश्चिम अफ्रीका का 2014-16 प्रकोप अब तक का सबसे घातक इबोला संकट रहा है। मौजूदा डीआर कांगो प्रकोप में मौतों की रफ्तार और संक्रमण के विस्तार ने अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है।

प्रकोप कब शुरू हुआ

डीआर कांगो में मौजूदा इबोला प्रकोप की आधिकारिक घोषणा 15 मई 2026 को हुई थी। लेकिन बाद की जेनेटिक सीक्वेंसिंग से संकेत मिला कि वायरस फरवरी से ही फैलना शुरू हो गया था। यानी सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रतिक्रिया शुरू होने से पहले संक्रमण को कई महीने का शुरुआती बढ़त मिल चुकी थी।

टेड्रोस ने इसी स्थिति को प्रकोप की प्रतिक्रिया के लिए बड़ी चुनौती बताया। डब्ल्यूएचओ के मुताबिक बीमारी ऐसे इलाके में फैल रही है जहां मानवीय संकट, असुरक्षा, सीमित बुनियादी ढांचा और बड़ी आबादी की आवाजाही पहले से मौजूद है।

इस बार कौन सा वायरस जिम्मेदार है

मौजूदा प्रकोप दुर्लभ बंडिबुग्यो वायरस से जुड़ा है। यह इबोला वायरस की एक अलग प्रजाति है और इस वायरस के खिलाफ अभी कोई स्वीकृत वैक्सीन या विशिष्ट उपचार उपलब्ध नहीं है।

यही स्थिति इस प्रकोप को पिछले कई इबोला संकटों से अलग बनाती है। डब्ल्यूएचओ और उसके साझेदार संभावित वैक्सीन और उपचार विकल्पों पर काम कर रहे हैं, लेकिन उनके इस्तेमाल और प्रभावशीलता को लेकर रिसर्च अभी जारी है।

पांच प्रांतों में फैला संक्रमण

डीआर कांगो में संक्रमण इटुरी, नॉर्थ किवू, साउथ किवू, हाउट-उएले और त्शोपो प्रांतों में दर्ज किया गया है। 11 अगस्त के उपलब्ध आंकड़ों में 716 मरीज आइसोलेशन में अस्पताल में भर्ती थे। संक्रमित लोगों के संपर्क में आए लोगों में से 82.7 प्रतिशत की फॉलो-अप निगरानी हो रही थी।

यह निगरानी व्यवस्था संक्रमण की चेन तोड़ने के लिए अहम है। लेकिन जिन इलाकों में स्वास्थ्यकर्मियों की पहुंच सीमित है, वहां हर संभावित संपर्क का समय पर पता लगाना मुश्किल हो जाता है।

सबसे बड़ी चुनौती, दूरदराज और संघर्ष प्रभावित इलाके

प्रकोप का बड़ा हिस्सा पूर्वी डीआर कांगो के ऐसे इलाकों में सामने आया है जहां वर्षों से सुरक्षा संकट और सशस्त्र संघर्ष की स्थिति बनी हुई है। स्वास्थ्य केंद्रों की क्षमता सीमित है और कई समुदायों तक पहुंच आसान नहीं है।

रिपोर्ट के मुताबिक कई नए मामले और मौतें उन समुदायों में सामने आ रही हैं जो स्वास्थ्यकर्मियों की पहुंच से बाहर हैं। स्वास्थ्यकर्मियों की कमी और वेतन को लेकर कर्मचारियों की हड़ताल ने भी प्रतिक्रिया को प्रभावित किया है। कुछ इलाकों में बीमारी को लेकर गलत सूचना और बाहरी स्वास्थ्य टीमों के प्रति अविश्वास भी मौजूद है।

संक्रमण रोकने में कम्युनिटी ट्रस्ट क्यों अहम है

इबोला जैसी बीमारी की रोकथाम केवल अस्पताल और प्रयोगशाला तक सीमित नहीं रहती। संक्रमित लोगों की पहचान, संपर्कों की निगरानी, सुरक्षित दफन, आइसोलेशन और समुदायों का सहयोग इसके अहम हिस्से हैं।

डब्ल्यूएचओ ने भी कम्युनिटी एंगेजमेंट को प्रतिक्रिया की सफलता के लिए केंद्रीय बताया है। संगठन के अनुसार जब स्थानीय समुदाय स्वास्थ्यकर्मियों और निगरानी व्यवस्था के साथ सहयोग करते हैं, तभी संक्रमण की चेन को प्रभावी तरीके से तोड़ा जा सकता है।

वैक्सीन और इलाज की स्थिति क्या है

बंडिबुग्यो वायरस के लिए अभी स्वीकृत वैक्सीन या विशिष्ट उपचार मौजूद नहीं है। हालांकि स्थिति बदलने की दिशा में वैज्ञानिक काम तेज किया गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक इस वायरस के लिए विकसित दो संभावित वैक्सीन का पहली बार इंसानों में परीक्षण शुरू हुआ है। डब्ल्यूएचओ एक मौजूदा इबोला वैक्सीन की भी जांच करना चाहता है, क्योंकि जानवरों पर किए गए अध्ययनों में इसके संभावित असर के संकेत मिले हैं।

इसी तरह संभावित उपचारों के क्लिनिकल ट्रायल भी इटुरी में शुरू किए गए हैं, जो पांच प्रभावित प्रांतों में सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में शामिल है।

क्या यह दुनिया के लिए भी खतरा है

मौजूदा प्रकोप मुख्य रूप से डीआर कांगो में केंद्रित है। पड़ोसी युगांडा में भी बंडिबुग्यो वायरस के मामले सामने आए थे, लेकिन 28 जुलाई को युगांडा ने अपने इबोला प्रकोप के अंत की घोषणा कर दी थी। 28 जुलाई तक वहां 20 पुष्ट मामले और दो मौतें दर्ज हुई थीं।

यूरोपीय सेंटर फॉर डिजीज प्रिवेंशन एंड कंट्रोल ने 12 अगस्त तक उपलब्ध जानकारी के आधार पर यूरोपीय संघ और यूरोपीय आर्थिक क्षेत्र में संक्रमण के जोखिम को बहुत कम आंका था।

इसलिए मौजूदा संकट का सबसे बड़ा असर अभी डीआर कांगो और उसके आसपास के क्षेत्र में है। लेकिन सीमा पार आवाजाही और व्यापारिक संपर्कों के कारण निगरानी महत्वपूर्ण बनी हुई है।

क्या यह सचमुच इतिहास का सबसे घातक प्रकोप बनेगा

अभी इसे निश्चित रूप से कहना जल्दबाजी होगी। डब्ल्यूएचओ की चेतावनी मौजूदा संक्रमण और मृत्यु दर की रफ्तार पर आधारित है, भविष्य की निश्चित भविष्यवाणी नहीं।

डब्ल्यूएचओ के स्वास्थ्य आपातकालीन संचालन विभाग के निदेशक अब्दिरहमान महामूद के अनुसार मध्यम परिदृश्य में प्रकोप लगभग छह महीने में अपने पीक तक पहुंच सकता है। खराब स्थिति में यह नौ से 12 महीने तक चल सकता है।

इसलिए "सबसे घातक" फिलहाल एक जोखिम आकलन है। अंतिम रिकॉर्ड तभी तय होगा जब प्रकोप समाप्त होगा और कुल मामलों तथा मौतों का अंतिम आंकड़ा सामने आएगा।

ग्राउंड रियलिटी क्या बताती है

मौजूदा संकट की गंभीरता केवल संक्रमण के आंकड़ों से नहीं समझी जा सकती। पूर्वी डीआर कांगो में स्वास्थ्य व्यवस्था पहले से कमजोर है। संघर्ष, खराब सड़क और परिवहन व्यवस्था, स्वास्थ्यकर्मियों की कमी और लोगों का विस्थापन बीमारी की निगरानी और इलाज को कठिन बनाते हैं।

डब्ल्यूएचओ ने भी इस प्रकोप के संदर्भ में मानवीय संकट, असुरक्षा, दूरदराज के इलाकों और बड़ी आबादी तथा व्यापारिक आवाजाही को चुनौती के रूप में चिन्हित किया है।

यही वजह है कि सिर्फ मेडिकल सप्लाई भेजना पर्याप्त नहीं होगा। स्थानीय स्वास्थ्य व्यवस्था, संपर्क निगरानी, सामुदायिक भरोसा और सीमा पार तैयारियों को एक साथ मजबूत करना होगा।

आगे क्या होगा

अगले कुछ महीने इस प्रकोप के लिए निर्णायक हो सकते हैं। डब्ल्यूएचओ निगरानी, कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग, क्लिनिकल मैनेजमेंट, मेडिकल सप्लाई और कम्युनिटी एंगेजमेंट को मजबूत कर रहा है। साथ ही बंडिबुग्यो वायरस के लिए वैक्सीन और उपचार के क्लिनिकल परीक्षण आगे बढ़ रहे हैं।

अगर संक्रमित लोगों की जल्दी पहचान होती है, संपर्कों की निगरानी मजबूत रहती है और समुदाय स्वास्थ्य टीमों के साथ सहयोग करते हैं, तो संक्रमण की रफ्तार कम करने की गुंजाइश है।

लेकिन अगर स्वास्थ्यकर्मियों की कमी, सुरक्षा संकट, गलत सूचना और इलाज तक सीमित पहुंच बनी रहती है, तो डब्ल्यूएचओ द्वारा जताया गया सबसे खराब परिदृश्य ज्यादा गंभीर हो सकता है।

निष्कर्ष

डीआर कांगो का मौजूदा इबोला प्रकोप अब वैश्विक स्वास्थ्य समुदाय के लिए गंभीर चेतावनी बन चुका है। 4,449 पुष्ट मामलों और 2,061 मौतों के आंकड़े के साथ यह डीआर कांगो का अब तक का सबसे बड़ा इबोला प्रकोप बन चुका है।

डब्ल्यूएचओ प्रमुख की चेतावनी इससे भी आगे जाती है। मौजूदा रफ्तार जारी रहने पर यह 2014-16 के पश्चिम अफ्रीकी प्रकोप को पीछे छोड़ सकता है, जिसमें 11,000 से अधिक लोगों की जान गई थी।

लेकिन यह रिकॉर्ड अभी तय नहीं हुआ है। आने वाले महीनों में स्वास्थ्य प्रतिक्रिया की गति, सामुदायिक सहयोग, सुरक्षा हालात और बंडिबुग्यो वायरस के खिलाफ विकसित हो रहे वैक्सीन और उपचार इस संकट की दिशा तय करेंगे

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शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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