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कांगो में इबोला का कहर, 7,022 मामले और 3,398 मौतें

Harish Qureshi 2026-09-12 12:22:36
कांगो में इबोला का कहर, 7,022 मामले और 3,398 मौतें

कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य में इबोला के पुष्ट मामलों की संख्या 7,022 हो गई है और 3,398 मौतें दर्ज हुई हैं। संक्रमण नए प्रांत तक फैलने से क्षेत्रीय प्रसार की आशंका बढ़ी है।


किंशासा | 12 सितंबर 2026

By Mohd Haris


कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य में इबोला का प्रकोप लगातार गंभीर होता जा रहा है। 11 सितंबर 2026 तक सरकारी आंकड़ों के अनुसार देश में इबोला के 7,022 पुष्ट मामले सामने आए हैं और 3,398 लोगों की मौत हुई है। संक्रमण अब 7 प्रांतों तक पहुंच गया है।


यहां एक महत्वपूर्ण तथ्य स्पष्ट करना जरूरी है। 7,000 का आंकड़ा मौतों का नहीं, बल्कि पुष्ट संक्रमणों का है। मौतों की संख्या फिलहाल 3,398 है।


नया प्रांत भी संक्रमण की चपेट में


इबोला संक्रमण अब साउथ उबांगी प्रांत तक पहुंच गया है। यह क्षेत्र देश के उत्तर-पश्चिम में स्थित है और पहले से प्रभावित पूर्वी हिस्से से काफी दूर है।


स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक वहां 23 वर्षीय एक व्यक्ति की मौत के बाद जांच में बुंडिबुग्यो वायरस की पुष्टि हुई। बताया गया है कि वह 10 जुलाई को साउथ किवु से रवाना हुआ था और बाद में विदेश यात्रा के बाद साउथ उबांगी पहुंचा।


स्वास्थ्य अधिकारी अब उसके संपर्क में आए लोगों की पहचान और निगरानी कर रहे हैं।


बुंडिबुग्यो वायरस बना बड़ी चुनौती


मौजूदा प्रकोप बुंडिबुग्यो प्रजाति के इबोला वायरस से जुड़ा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक इस वायरस के खिलाफ अभी कोई ऐसा लाइसेंस प्राप्त टीका या विशिष्ट उपचार उपलब्ध नहीं है, जिसे नियमित तौर पर इस्तेमाल के लिए स्थापित माना जाए। संभावित वैक्सीन उम्मीदवारों पर शोध जारी है।


विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 7 सितंबर तक कांगो में 6,757 पुष्ट मामले और 3,267 मौतें दर्ज की थीं। इसके बाद के दिनों में मामलों और मौतों में और इजाफा हुआ।


इटुरी अब भी सबसे ज्यादा प्रभावित


इटुरी प्रांत इस प्रकोप का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार 7 सितंबर तक इटुरी में 5,406 पुष्ट मामले दर्ज किए गए थे।


नॉर्थ किवु दूसरा सबसे ज्यादा प्रभावित प्रांत है। यहां 1,066 पुष्ट मामले दर्ज किए गए थे। संक्रमण का प्रसार ऐसे इलाकों में भी चुनौती पैदा कर रहा है, जहां सुरक्षा स्थिति कमजोर है और लोगों का विस्थापन जारी है।


स्वास्थ्य व्यवस्था पर दबाव


विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चेतावनी दी है कि प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों, संचालन से जुड़े साझेदारों और वित्तीय संसाधनों की कमी इबोला नियंत्रण अभियान को प्रभावित कर रही है। संक्रमण का भौगोलिक दायरा बढ़ने के साथ निगरानी, जांच, संपर्कों की पहचान और मरीजों के इलाज की जरूरत भी बढ़ रही है।


कांगो पहले से ही मानवीय संकट, असुरक्षा और बड़े पैमाने पर विस्थापन से जूझ रहा है। इन परिस्थितियों में प्रभावित इलाकों तक स्वास्थ्य टीमों की पहुंच मुश्किल होती है।


सीमा पार फैलाव की आशंका


साउथ उबांगी का संक्रमण सामने आना इसलिए भी अहम है क्योंकि यह प्रांत कांगो गणराज्य और मध्य अफ्रीकी गणराज्य की सीमा के करीब है। इससे क्षेत्रीय स्तर पर निगरानी और सीमा पार स्वास्थ्य समन्वय की जरूरत बढ़ गई है।


विश्व स्वास्थ्य संगठन ने हवाई अड्डों, बंदरगाहों और आधिकारिक सीमा चौकियों पर निगरानी जारी रखने की बात कही है। हालांकि अनौपचारिक सीमा मार्गों से आवाजाही संक्रमण नियंत्रण के लिए चुनौती बनी हुई है।


मौतों की संख्या क्यों बढ़ रही है


विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार समय पर बीमारी की पहचान नहीं होना और उपचार तक देर से पहुंचना मृत्यु दर को बढ़ाने वाले अहम कारक हैं।


7 सितंबर तक उपलब्ध आंकड़ों में पुष्टि किए गए मामलों की मृत्यु दर करीब 48.3 प्रतिशत थी। संगठन ने कहा है कि लगातार ऊंची मृत्यु दर इस प्रकोप की गंभीरता और समय पर चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने की चुनौती को दिखाती है।


टीकाकरण को लेकर स्थिति


कांगो में स्वास्थ्यकर्मियों और फ्रंटलाइन कर्मचारियों के बीच Ervebo वैक्सीन का इस्तेमाल शुरू किया गया है। लेकिन विश्व स्वास्थ्य संगठन ने स्पष्ट किया है कि इस वैक्सीन की बुंडिबुग्यो वायरस के खिलाफ मानवों में प्रभावशीलता अभी स्थापित नहीं हुई है।


इसी वजह से संगठन ने इसके इस्तेमाल को फिलहाल शोध प्रोटोकॉल के दायरे में रखने की सिफारिश की है।


6 सितंबर तक कांगो में 2,007 लोगों को टीका दिया जा चुका था।


2018-2020 के प्रकोप से भी बड़ा संकट


मौजूदा प्रकोप ने कांगो में 2018-2020 के इबोला संकट को पीछे छोड़ दिया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार यह अब देश का सबसे बड़ा और सबसे घातक इबोला प्रकोप बन चुका है।


वैश्विक स्तर पर यह 2014-2016 के पश्चिम अफ्रीकी इबोला प्रकोप के बाद दूसरा सबसे बड़ा प्रकोप बन गया है। उस संकट में गिनी, लाइबेरिया और सिएरा लियोन में 28,600 से अधिक मामले और 11,000 से ज्यादा मौतें दर्ज हुई थीं।


आगे क्या चुनौती है


अब सबसे बड़ी चुनौती संक्रमण के नए क्षेत्रों में फैलाव रोकना है। साउथ उबांगी में मामला सामने आने के बाद संपर्कों की निगरानी और सीमा पार स्वास्थ्य समन्वय अधिक महत्वपूर्ण हो गया है।


इटुरी और नॉर्थ किवु जैसे पहले से प्रभावित इलाकों में सुरक्षा संकट और विस्थापन के बीच मरीजों तक समय पर पहुंचना भी बड़ी चुनौती बना हुआ है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक जल्द पहचान, जांच, बेहतर उपचार और प्रभावी संपर्क निगरानी संक्रमण की रफ्तार कम करने के लिए अहम हैं।


निष्कर्ष


कांगो में इबोला संकट अब केवल एक स्थानीय स्वास्थ्य आपातस्थिति नहीं रह गया है। 7,022 पुष्ट मामलों और 3,398 मौतों के साथ संक्रमण 7 प्रांतों तक पहुंच चुका है। नए प्रांत में मामला सामने आने से क्षेत्रीय प्रसार की चिंता और बढ़ी है।


फिलहाल सबसे बड़ी जरूरत समय पर पहचान, मरीजों तक चिकित्सा सहायता, संपर्कों की निगरानी और प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने की है। आने वाले दिनों में संक्रमण का भौगोलिक विस्तार इस संकट की दिशा तय करने वाला अहम कारक रहेगा।

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Harish Qureshi

Harish Qureshi

Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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