नाइजीरिया में अपहरण का संकट गहराता जा रहा है। सुरक्षा रिपोर्ट में एक साल में 7,825 अपहरण और 1,142 मौतों का उल्लेख है। फिरौती के बढ़ते कारोबार ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं।
अबुजा, नाइजीरिया | 27 अगस्त 2026 | शाह टाइम्स
By Mohd Haris
नाइजीरिया में अपहरण का संकट
नाइजीरिया में अपहरण अब अलग-अलग आपराधिक घटनाओं तक सीमित नहीं रहा है। देश के कई हिस्सों में हथियारबंद गिरोह लोगों को निशाना बनाकर फिरौती वसूल रहे हैं। हालिया सुरक्षा आंकड़े बताते हैं कि इस संकट का पैमाना लगातार बढ़ा है। नाइजीरियाई सुरक्षा कंसल्टेंसी एसबीएम इंटेलिजेंस की रिपोर्ट के मुताबिक जुलाई 2025 से जून 2026 के बीच देश में 7,825 लोगों के अपहरण की जानकारी दर्ज हुई। रिपोर्ट में कम से कम 1,142 लोगों के मारे जाने की भी बात कही गई है। इसी अवधि में पुष्टि की गई फिरौती की रकम करीब 7,78 अरब नायरा, यानी लगभग 5.8 मिलियन डॉलर रही। रिपोर्ट के मुताबिक अपहरण के मामलों में पिछले साल की तुलना में ६६ प्रतिशत इज़ाफा हुआ। एसबीएम इंटेलिजेंस ने यह भी कहा है कि उसके आंकड़े संभवतः वास्तविक स्थिति से कम हैं, क्योंकि कई मामलों में फिरौती की रकम सार्वजनिक नहीं की जाती।
भागने की कोशिश पर गोली का डर
नाइजीरिया के अलग-अलग इलाकों से सामने आए प्रत्यक्षदर्शी और पीड़ितों के बयान संकट की गंभीरता बताते हैं। कई मामलों में अपहरणकर्ताओं ने लोगों को जंगलों और दूरदराज इलाकों में ले जाकर बंधक बनाया। जून में एक रिपोर्ट में ओयो राज्य के एक स्कूल पर हुए हमले का विवरण सामने आया था। एक स्थानीय व्यक्ति के मुताबिक एक व्यक्ति ने भागने की कोशिश की और उसे गोली मार दी गई। ऐसे घटनाक्रमों ने ग्रामीण इलाकों में भय का माहौल पैदा किया है। अबुजा के बाहरी इलाके में भी जुलाई में एक पूर्व सैनिक ने अपने अपहरण और हमले की भयावह कहानी सुनाई थी। गार्जियन की रिपोर्ट के अनुसार, संदिग्ध आतंकवादियों ने उसे गोली मारी और मृत समझकर जंगल में छोड़ दिया। वह जिंदा बच गया।
मस्जिद से सैकड़ों लोगों के अपहरण का दावा
अगस्त में नाइजर राज्य में हुई एक घटना ने पूरे देश की सुरक्षा व्यवस्था पर नई बहस छेड़ दी। शुक्रवार की नमाज़ के दौरान कई गांवों में हथियारबंद समूहों ने हमले किए। स्थानीय लोगों और अधिकारियों के हवाले से करीब 600 लोगों के अपहरण का दावा सामने आया। इनमें महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग शामिल बताए गए। हालांकि रॉयटर्स ने स्पष्ट किया कि 600 लोगों की संख्या की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
एसोसिएटेड प्रेस के मुताबिक उसी हमले से जुड़े स्थानीय अनुमान इससे काफी कम थे। वहां 60 से 80 लोगों के अपहरण की बात कही गई। पुलिस ने भी तत्काल सटीक संख्या की पुष्टि नहीं की थी। यही अंतर बताता है कि नाइजीरिया में अपहरण की घटनाओं का वास्तविक आंकड़ा जुटाना कितना मुश्किल है। दूरदराज इलाकों में संचार व्यवस्था कमजोर है और कई परिवार सुरक्षा कारणों से जानकारी सार्वजनिक नहीं करते।
फिरौती बना अपराध का बड़ा कारोबार
एसबीएम इंटेलिजेंस के आंकड़ों ने अपहरण के आर्थिक पहलू को भी सामने रखा है। रिपोर्ट के अनुसार जुलाई 2025 से जून 2026 के बीच पुष्टि की गई फिरौती की रकम करीब 7,78 अरब नायरा रही। यह पिछले साल की तुलना में तीन गुने से ज्यादा है। रिपोर्ट के मुताबिक पूर्वोत्तर नाइजीरिया में सक्रिय बोको हराम से जुड़े मामलों में दर्ज फिरौती का करीब 90 प्रतिशत हिस्सा आया। वहीं उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र में अपहरण की घटनाओं की संख्या ज्यादा रही। इससे सुरक्षा एजेंसियों के सामने दोहरी चुनौती है। एक तरफ हथियारबंद समूहों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई करनी है। दूसरी तरफ उस आर्थिक नेटवर्क को कमजोर करना है, जिसमें अपहरण से हासिल रकम अपराधी समूहों की गतिविधियों को वित्तीय मदद देती है।
स्कूल भी बने निशाना
नाइजीरिया में अपहरण का असर शिक्षा व्यवस्था पर भी पड़ा है। मई में बोर्नो राज्य के मुस्सा इलाके में कक्षा से बच्चों के अपहरण के बाद परिवारों ने सरकार से उनकी सुरक्षित वापसी की मांग की थी। रॉयटर्स के मुताबिक करीब 100 दिन बाद भी कई बच्चे लापता थे। जून में पास के लासा इलाके से भी 36 छात्र और एक शिक्षक अगवा किए गए थे। दक्षिण-पश्चिमी ओयो राज्य में भी स्कूलों को निशाना बनाए जाने की घटनाएं सामने आईं। जून में एक हमले के दौरान 30 से ज्यादा छात्रों और एक शिक्षक के अपहरण की रिपोर्ट हुई थी। ग्रामीण क्षेत्रों में मोबाइल नेटवर्क और सुरक्षा संसाधनों की कमी ने प्रतिक्रिया को और मुश्किल बनाया।
सरकार की कार्रवाई
नाइजीरियाई सरकार ने सुरक्षा अभियानों के जरिए अपहृत लोगों को छुड़ाने की कोशिश तेज की है। अगस्त की शुरुआत में नाइजीरियाई सरकार ने 308 अपहृत नागरिकों को बचाने की घोषणा की। राष्ट्रपति बोला अहमद टिनूबू के कार्यालय के मुताबिक इनमें क्वारा राज्य के वोरो समुदाय से अगवा किए गए 163 लोग और नाइजर राज्य से अगवा किए गए १४५ लोग शामिल थे। यह अभियान सेना, पुलिस, सुरक्षा सेवा और राष्ट्रीय आतंकवाद निरोधी केंद्र के बीच समन्वय से चलाया गया। सरकार ने इसे एक बड़े संयुक्त बचाव अभियान के रूप में पेश किया। राष्ट्रपति कार्यालय ने सुरक्षा एजेंसियों की खुफिया क्षमता और आपसी तालमेल की सराहना की। लेकिन लगातार हो रहे नए अपहरण यह सवाल भी खड़ा करते हैं कि बचाव अभियानों के साथ रोकथाम की रणनीति कितनी प्रभावी है।
सुरक्षा बलों पर भी दबाव
नाइजीरिया एक साथ कई सुरक्षा चुनौतियों से जूझ रहा है। पूर्वोत्तर में बोको हराम और इस्लामिक स्टेट वेस्ट अफ्रीका प्रोविंस जैसे उग्रवादी संगठन सक्रिय हैं। उत्तर-पश्चिम में हथियारबंद गिरोह और अपहरणकर्ता सक्रिय हैं। उत्तर-मध्य क्षेत्र में भी सामूहिक अपहरण की घटनाएं चिंता बढ़ा रही हैं।
जून में कडुना में अपहृत लोगों को बचाने के बाद लौट रही पुलिस टीम पर घात लगाकर हमला किया गया था। पुलिस के अनुसार दो अधिकारियों की मौत हुई। सरकार ने सुरक्षा बलों की क्षमता बढ़ाने के लिए सैन्य वेतन में भी बड़ा इज़ाफा मंजूर किया है। सितंबर से निचले सैन्य रैंकों में वेतन 80 प्रतिशत तक बढ़ाने की घोषणा की गई है। सरकार का तर्क है कि इससे जवानों का मनोबल और सुरक्षा अभियानों की क्षमता मजबूत होगी।
क्यों बढ़ रहा है संकट विशेषज्ञों के लिए सबसे बड़ा सवाल यह है कि सैन्य कार्रवाई के बावजूद अपहरण का कारोबार क्यों बढ़ रहा है। ग्रामीण इलाकों में कमजोर राज्य उपस्थिति, जंगलों और दुर्गम क्षेत्रों का इस्तेमाल, हथियारबंद गिरोहों के बीच नेटवर्क और फिरौती से मिलने वाली रकम समस्या को जटिल बनाते हैं। एसबीएम इंटेलिजेंस ने भी चेतावनी दी है कि अगर अपराध से होने वाला आर्थिक लाभ नहीं रोका गया और मूल कारणों पर काम नहीं हुआ तो अपहरण संगठित हिंसक समूहों के लिए नियमित वित्तीय स्रोत बन सकता है।
जनता का भरोसा भी प्रभावित
अपहरण की बढ़ती घटनाओं का असर केवल पीड़ित परिवारों तक सीमित नहीं है। ग्रामीण इलाकों में लोगों का आवागमन, बच्चों की शिक्षा और स्थानीय कारोबार प्रभावित होते हैं। जब परिवारों को यह डर रहे कि स्कूल, सड़क, मस्जिद या घर भी सुरक्षित नहीं है, तो सरकारी सुरक्षा व्यवस्था पर भरोसा कमजोर होता है। यही वजह है कि नाइजीरिया में अपहरण अब कानून-व्यवस्था के साथ-साथ सामाजिक और आर्थिक संकट का मुद्दा बन चुका है।
आगे की चुनौती
नाइजीरिया के सामने अब केवल अपहृत लोगों को बचाने की चुनौती नहीं है। सुरक्षा एजेंसियों को अपहरण के पूरे नेटवर्क को निशाना बनाना होगा, जिसमें हथियार, धन, स्थानीय मददगार और फिरौती की व्यवस्था शामिल है। अगस्त में 308 लोगों की रिहाई यह दिखाती है कि संयुक्त सुरक्षा अभियान परिणाम दे सकते हैं। लेकिन उसी महीने सैकड़ों लोगों के संभावित सामूहिक अपहरण की खबर बताती है कि खतरा अभी खत्म नहीं हुआ है।
नाइजीरिया में अपहरण संकट का अगला चरण इस बात से तय होगा कि सरकार बचाव अभियानों को कितनी प्रभावी रोकथाम रणनीति में बदल पाती है। ग्रामीण इलाकों में सुरक्षा, खुफिया तंत्र, स्थानीय समुदायों का भरोसा और फिरौती के आर्थिक नेटवर्क पर कार्रवाई, इन सभी मोर्चों पर एक साथ काम करना होगा। फिलहाल तस्वीर साफ है। अपहरण नाइजीरिया के सामने मौजूद सबसे गंभीर आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों में शामिल है। आंकड़े, पीड़ितों की गवाही और हाल की सामूहिक घटनाएं संकेत देती हैं कि संकट का दायरा बड़ा है और इसका समाधान केवल सैन्य कार्रवाई से नहीं होगा।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।