लेह/धर्मशाला | 2 सितंबर 2026 | शाह टाइम्स
By Mohd Haris
तिब्बती आध्यात्मिक नेता दलाई लामा ने नेपाल और तिब्बत में आई विनाशकारी बाढ़ में जान गंवाने वाले लोगों के प्रति गहरी संवेदना जताई है। उन्होंने नेपाल के रासुवा क्षेत्र और तिब्बत के क्यिरोंग में हुई भारी तबाही पर दुख व्यक्त करते हुए मृतकों के लिए प्रार्थना की।
दलाई लामा के कार्यालय की ओर से 27 अगस्त को जारी संदेश में कहा गया कि बाढ़ के कारण लोगों की जान गई और बड़े पैमाने पर ढांचागत नुकसान हुआ। उन्होंने शोक संतप्त परिवारों और इस त्रासदी से प्रभावित सभी लोगों के प्रति सहानुभूति व्यक्त की।
26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में अचानक आई बाढ़ और भूस्खलन ने बड़े इलाके को प्रभावित किया। नेपाल का रासुवा जिला और तिब्बत का क्यिरोंग क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में रहे।
रिपोर्ट के अनुसार शुरुआती जांच में इस आपदा का संबंध हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर और चट्टान के ढहने से जोड़ा गया। इससे नदी में भारी मात्रा में मलबा पहुंचा और तेज बहाव ने नीचे के इलाकों को प्रभावित किया।
अपने संवेदना संदेश में दलाई लामा ने इस क्षेत्र में पहले भी प्राकृतिक आपदाएं आने का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाएं किसी गहरे मूल कारण, जैसे जलवायु परिवर्तन या अन्य कारकों, का संकेत हो सकती हैं।
उन्होंने भविष्य में ऐसी आपदाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए जहां संभव हो, उचित कदम उठाने की उम्मीद जताई।
यह दलाई लामा का आपदा के संभावित पर्यावरणीय और जलवायु संबंधी पहलुओं पर ध्यान आकर्षित करने वाला बयान था। हालांकि किसी एक कारण को इस आपदा की अंतिम वजह घोषित करना अभी जल्दबाजी होगी।
दलाई लामा ने 30 अगस्त को लेह के शेवात्सेल टीचिंग ग्राउंड में नेपाल और तिब्बत के बाढ़ पीड़ितों के लिए विशेष प्रार्थना में हिस्सा लिया।
उनके कार्यालय के अनुसार इस प्रार्थना में मृतकों, लापता लोगों, प्रभावित परिवारों और जीवित बचे लोगों को ध्यान में रखा गया। कार्यक्रम के दौरान अवलोकितेश्वर की प्रार्थना और छह अक्षरों वाले मंत्र का पाठ किया गया।
बाढ़ के बाद नेपाल में राहत और बचाव अभियान जारी है। 2 सितंबर की रिपोर्ट के मुताबिक आपदा में नेपाल में कम से कम 1,050 लोगों की मौत हो चुकी थी और करीब 4,000 लोग अब भी लापता थे। कई इलाकों में मलबा हटाने और लापता लोगों की तलाश का काम जारी था।
रिपोर्ट के मुताबिक नेपाल में हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है, जबकि कई हाइड्रोपावर परियोजनाओं और सुरंगों में फंसे लोगों की तलाश चुनौती बनी हुई है।
इस आपदा ने हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर, भूस्खलन और अचानक आने वाली बाढ़ के जोखिम को लेकर फिर बहस तेज कर दी है।
विशेषज्ञों ने हालिया रिपोर्टों में बढ़ते तापमान और ग्लेशियरों में बदलाव को ऐसे खतरों से जोड़कर देखा है। हालांकि किसी खास आपदा में जलवायु
परिवर्तन की भूमिका तय करने के लिए वैज्ञानिक अध्ययन जरूरी होते हैं।
दलाई लामा ने भी अपने संदेश में इसी व्यापक चिंता की ओर संकेत किया। उनका संदेश फिलहाल मानवीय संवेदना और आपदा से प्रभावित लोगों के प्रति समर्थन पर केंद्रित है।
नेपाल और तिब्बत में आई बाढ़ ने बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान किया है। बचाव अभियान के बीच बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता हैं और कई परिवार अपने परिजनों की तलाश कर रहे हैं।
ऐसे समय में दलाई लामा ने मृतकों के लिए प्रार्थना और प्रभावित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की है। 30 अगस्त की प्रार्थना में भी उन्होंने मृतकों और जीवित बचे लोगों को याद करते हुए पीड़ितों के लिए दुआ की।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।