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नेपाल में तबाही के बीच सुरंगों में फंसे सैकड़ों मजदूर, मौतों का आंकड़ा 1,000 पार

Harish Qureshi • 2026-09-01 13:06:54
नेपाल में तबाही के बीच सुरंगों में फंसे सैकड़ों मजदूर, मौतों का आंकड़ा 1,000 पार

 नेपाल में विनाशकारी बाढ़ के बाद मौतों का आंकड़ा 987 तक पहुंच गया है। करीब 500 जलविद्युत कर्मियों के सुरंगों में फंसे होने की आशंका है और बचाव दल मलबे से भरी सुरंगों में तलाश कर रहे हैं।


नेपाल | 1 सितंबर 2026 | शाह टाइम्स
By Mohd Haris


नेपाल में तबाही, सुरंगों में जिंदगी की तलाश


नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ और मलबे के बाद राहत और बचाव अभियान तेज कर दिया गया है। मंगलवार तक नेपाल में 987 लोगों की मौत की पुष्टि हुई थी, जबकि 3,916 लोग अब भी लापता बताए गए हैं। चीन में 16 मौतों की सूचना के बाद दोनों देशों में आपदा से जुड़ी मौतों का आंकड़ा 1,000 पार हो गया है।


सबसे बड़ी चिंता नेपाल की जलविद्युत परियोजनाओं में काम करने वाले सैकड़ों मजदूरों को लेकर है। अधिकारियों के अनुसार 12 क्षतिग्रस्त जलविद्युत परियोजनाओं से करीब 900 कर्मचारी लापता हैं। इनमें लगभग 500 के सुरंगों के भीतर फंसे होने की आशंका है।


कीचड़ और मलबे के बीच पहुंच रहे बचावकर्मी


नेपाली सेना के बचाव दल मलबे और पानी से भरी सुरंगों में दाखिल होकर लापता लोगों की तलाश कर रहे हैं। सुरंगों के भीतर कीचड़, पत्थर और पानी जमा है, जिससे अभियान बेहद मुश्किल हो गया है।


बचावकर्मी सर्चलाइट, ड्रोन और दूसरे उपकरणों की मदद से सुरंगों में रास्ता तलाश रहे हैं। कुछ स्थानों पर मलबा हटाने और रास्ता खोलने के लिए भारी मशीनरी तथा नियंत्रित विस्फोटों का इस्तेमाल भी किया जा रहा है।


खराब मौसम और बुरी तरह क्षतिग्रस्त सड़कों तथा पुलों ने राहत अभियान की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। कई प्रभावित इलाकों तक पहुंचने के लिए हेलीकॉप्टरों का इस्तेमाल किया जा रहा है।


जलविद्युत परियोजनाएं बनीं बचाव अभियान का केंद्र


नेपाल में बाढ़ से कई जलविद्युत परियोजनाओं को भारी नुकसान हुआ है। इनमें रासुवा और नुवाकोट जिलों की परियोजनाएं सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में शामिल हैं।


रिपोर्ट के मुताबिक, अपर त्रिशूली-1 परियोजना में सप्ताहांत के दौरान करीब 250 लोगों को बचाया गया। अपर त्रिशूली-3ए में 42 लोग अब भी लापता बताए गए हैं। अपर त्रिशूली-3बी परियोजना में 122 लोगों के लापता होने की आशंका है।


इन परियोजनाओं की सुरंगों में जमा मलबा बचाव दल के सामने सबसे बड़ी बाधाओं में शामिल है।


करीब 12 हजार लोगों को बचाया गया


नेपाल के अधिकारियों के अनुसार अब तक कम से कम 11,814 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। राहत दल उन इलाकों तक भी पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं जहां बाढ़ ने सड़क और पुलों को बहा दिया है।


हेलीकॉप्टरों और दूसरे विमानों के जरिए प्रभावित समुदायों तक राहत सामग्री और बचाव दल पहुंचाए जा रहे हैं।


कुछ इलाकों में बिजली और संचार सेवाएं भी धीरे-धीरे बहाल की जा रही हैं। रॉयटर्स के अनुसार, बचाव दल दूरदराज के हिमालयी क्षेत्रों तक पहुंचने में सफल रहे हैं।


आपदा की शुरुआत कैसे हुई?


यह आपदा 26 अगस्त को हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर के ढहने से शुरू हुई। इसके बाद बड़ी मात्रा में चट्टान, बर्फ और पिघला हुआ पानी नीचे की घाटियों में पहुंचा।

तेज बहाव ने नदियों का जलस्तर अचानक बढ़ा दिया। पानी के साथ चट्टान और मलबा भी नीचे आया, जिसने घरों, सड़कों, पुलों और दूसरी बुनियादी सुविधाओं को भारी 

नुकसान पहुंचाया।


वैज्ञानिकों द्वारा उपग्रह तस्वीरों की प्रारंभिक जांच में ग्लेशियर के नीचे चट्टानी संरचना के ढहने की संभावना जताई गई है। इस घटना से 5.2 तीव्रता का भूकंपीय संकेत भी दर्ज हुआ था।


भारत, चीन और दक्षिण कोरिया की मदद


बचाव अभियान अब अंतरराष्ट्रीय सहयोग का रूप ले चुका है। नेपाल के बचाव दलों के साथ भारत, चीन और दक्षिण कोरिया से जुड़े विशेषज्ञ भी सहायता दे रहे हैं।


भारत और चीन की टीमों ने प्रभावित इलाकों में बचाव उपकरण और तकनीकी सहायता पहुंचाई है। कुछ स्थानों पर पुल और सड़क संपर्क बहाल करने का काम भी चल रहा है।


लापता लोगों की संख्या अभी भी बड़ी चुनौती


नेपाल में 3,916 लोगों के लापता होने की सूचना है। चीन के साथ आंकड़ा जोड़ने पर दोनों देशों में लापता लोगों की संख्या 4,400 से अधिक हो जाती है।


इनमें बड़ी संख्या में विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। नेपाल की आपदा एजेंसी के अनुसार उसके लापता लोगों में 583 विदेशी नागरिक हैं।


हालांकि लापता लोगों का आंकड़ा अंतिम मृतक संख्या नहीं है। संपर्क टूटने और कई इलाकों तक पहुंच बाधित होने के कारण कुछ लोगों का बाद में सुरक्षित मिलना भी संभव है।


क्या सुरंगों में फंसे मजदूर जिंदा हैं?


इस सवाल का अभी कोई पुख्ता जवाब नहीं है।


बचाव दल सुरंगों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन पानी, कीचड़, मलबे और क्षतिग्रस्त ढांचे के कारण अभियान बेहद जोखिमपूर्ण है। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट नहीं किया है कि सुरंगों में मौजूद सभी लापता कर्मी बाढ़ के समय सुरंग के भीतर ही थे या नहीं।


इसलिए “500 मजदूर सुरंगों में फंसे हैं” के बजाय “करीब 500 के सुरंगों में फंसे होने की आशंका है” कहना अधिक सटीक है।


नेपाल के सामने राहत से बड़ी चुनौती


बचाव अभियान के साथ नेपाल को विस्थापित लोगों के लिए भोजन, पानी, स्वास्थ्य सेवाओं और अस्थायी आश्रय की व्यवस्था भी करनी पड़ रही है।


क्षतिग्रस्त सड़कें और पुल राहत पहुंचाने की रफ्तार को प्रभावित कर रहे हैं। कई पहाड़ी इलाकों में मौसम भी लगातार चुनौती बना हुआ है।


सरकार के सामने अब तत्काल राहत के साथ बुनियादी ढांचे की बहाली और प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की बड़ी जिम्मेदारी है।


अब सबसे अहम है सुरंगों तक पहुंचना


फिलहाल बचाव अभियान की प्राथमिकता जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगों में फंसे लोगों तक पहुंचना है। सेना और विशेषज्ञ टीमें मलबा हटाकर अंदर जाने का रास्ता बनाने में जुटी हैं।


मौतों का आंकड़ा तेजी से बदल रहा है और हजारों लोग अब भी लापता हैं। इसलिए आने वाले घंटों में नेपाल की आधिकारिक संख्या में फिर बदलाव संभव है।

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Harish Qureshi

Harish Qureshi

Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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