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अल-अक्सा में बेन-ग्वीर ने ऐसा क्या किया कि बढ़ गया तनाव?

Harish Qureshi 2026-09-01 12:40:54
अल-अक्सा में बेन-ग्वीर ने ऐसा क्या किया कि बढ़ गया तनाव?

इजरायल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-ग्वीर 31 अगस्त को अल-अक्सा परिसर में पहुंचे और वहां प्रार्थना की। जॉर्डन ने इसे ऐतिहासिक और कानूनी यथास्थिति का उल्लंघन बताया।


पूर्वी यरुशलम | 1 सितंबर 2026 | शाह टाइम्स
By Mohd Haris


अल-अक्सा परिसर में बेन-ग्वीर का प्रवेश


इजरायल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-ग्वीर 31 अगस्त 2026 को पूर्वी यरुशलम स्थित अल-अक्सा मस्जिद परिसर में पहुंचे। उनके साथ रब्बी, इजरायली बाशिंदे और सुरक्षा कर्मी मौजूद थे। कई रिपोर्टों के मुताबिक, बेन-ग्वीर ने परिसर के पूर्वी हिस्से में यहूदी धार्मिक प्रार्थना और रस्में निभाईं।


यह दौरा ऐसे वक्त हुआ है जब अल-अक्सा परिसर की धार्मिक और प्रशासनिक यथास्थिति को लेकर पहले से गहरी तनातनी बनी हुई है।


बेन-ग्वीर ने क्या किया?


फ़िलिस्तीनी समाचार एजेंसी वाफा के मुताबिक, बेन-ग्वीर ने इजरायली सुरक्षा बलों की सुरक्षा में परिसर में प्रवेश किया और पूर्वी हिस्से में तालमूदी प्रार्थना तथा धार्मिक रस्में निभाईं। यरुशलम गवर्नरेट ने उनके प्रवेश को गंभीर उकसावे और मौजूदा यथास्थिति में बदलाव की कोशिश बताया।


अनादोलु एजेंसी ने भी अधिकारियों के हवाले से बताया कि बेन-ग्वीर पुलिस सुरक्षा में परिसर में पहुंचे और वहां प्रार्थना करते हुए दिखाई दिए।


यह जगह इतनी संवेदनशील क्यों है?


अल-अक्सा मस्जिद परिसर मुसलमानों के लिए इस्लाम का तीसरा सबसे पवित्र धार्मिक स्थल है। यहूदियों के लिए इसी परिसर को टेंपल माउंट के नाम से जाना जाता है।


यह इलाका यरुशलम के पुराने शहर में स्थित है और दशकों से इजरायल-फ़िलिस्तीन विवाद के सबसे संवेदनशील केंद्रों में शामिल रहा है। धार्मिक गतिविधियों और परिसर तक पहुंच को लेकर किसी भी बदलाव को व्यापक क्षेत्रीय तनाव से जोड़कर देखा जाता है।


1967 से चली आ रही यथास्थिति क्या है?


अल-अक्सा परिसर में धार्मिक गतिविधियों को लेकर दशकों से एक संवेदनशील व्यवस्था चली आ रही है। रॉयटर्स के अनुसार, मौजूदा व्यवस्था के तहत यहूदी और अन्य गैर-मुस्लिम लोग परिसर में जा सकते हैं, लेकिन वहां गैर-मुस्लिम धार्मिक प्रार्थना की अनुमति नहीं है।


परिसर का धार्मिक प्रशासन जॉर्डन से जुड़े इस्लामी वक्फ के तहत चलता है। इस व्यवस्था में किसी बड़े बदलाव की आशंका लंबे समय से विवाद का कारण रही है।


जॉर्डन ने जताई कड़ी आपत्ति


जॉर्डन के विदेश मंत्रालय ने बेन-ग्वीर और इजरायली बाशिंदों के परिसर में प्रवेश की कड़ी निंदा की।


जॉर्डन की सरकारी समाचार एजेंसी पेट्रा के अनुसार, मंत्रालय ने इसे अल-हरम अल-शरीफ की ऐतिहासिक और कानूनी यथास्थिति का स्पष्ट उल्लंघन, पवित्रता का अपमान और अस्वीकार्य उकसावा बताया।


जॉर्डन ने यह भी कहा कि ऐसे कदम परिसर की धार्मिक व्यवस्था को बदलने और वहां नए हालात थोपने की कोशिश हैं।


फ़िलिस्तीनी पक्ष ने भी विरोध किया


यरुशलम गवर्नरेट ने बेन-ग्वीर की यात्रा को खतरनाक बढ़ोतरी बताया। उसके मुताबिक, परिसर में धार्मिक रस्में निभाना मौजूदा ऐतिहासिक और कानूनी व्यवस्था को बदलने की कोशिश है।


फ़िलिस्तीनी पक्ष ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अल-अक्सा परिसर की मौजूदा स्थिति की रक्षा करने और ऐसी गतिविधियों को रोकने के लिए कदम उठाने की अपील की है।


बेन-ग्वीर का मंदिर निर्माण को लेकर रुख


इस यात्रा का एक और संवेदनशील पहलू बेन-ग्वीर का यहूदी मंदिर से जुड़ा रुख है।


रिपोर्ट के मुताबिक, यात्रा के दौरान बेन-ग्वीर ने परिसर में यहूदी मंदिर के निर्माण की वकालत की और इसे धीरे-धीरे आगे बढ़ाने की बात कही।


हालांकि इसे बेन-ग्वीर की राजनीतिक और व्यक्तिगत मांग के रूप में देखना चाहिए। उपलब्ध रिपोर्टों के आधार पर इसे इजरायल सरकार द्वारा औपचारिक रूप से घोषित नीति के रूप में पेश करना उचित नहीं होगा।


पहले भी कई बार अल-अक्सा पहुंचे हैं बेन-ग्वीर


बेन-ग्वीर इससे पहले भी अल-अक्सा परिसर का दौरा कर चुके हैं। अप्रैल 2026 में उनकी एक यात्रा के दौरान उन्होंने यहूदी श्रद्धालुओं के लिए परिसर में अधिक पहुंच और प्रार्थना की अनुमति की मांग की थी। उस समय जॉर्डन और फ़िलिस्तीनी अधिकारियों ने भी आपत्ति जताई थी।


जुलाई 2026 में भी वह परिसर में पहुंचे थे। उस दौरान भी उनकी यात्रा और वहां यहूदी धार्मिक गतिविधियों को लेकर विवाद हुआ था।


क्षेत्रीय तनाव पर असर की आशंका


अल-अक्सा परिसर में किसी भी तरह की धार्मिक या राजनीतिक गतिविधि का असर यरुशलम से बाहर भी पड़ सकता है। अतीत में परिसर को लेकर तनाव ने इजरायल और फ़िलिस्तीन के बीच हिंसा को बढ़ाया है।


इसी वजह से जॉर्डन, फ़िलिस्तीनी प्राधिकरण और दूसरे अरब देशों की प्रतिक्रियाएं इस घटनाक्रम को लेकर महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। रॉयटर्स के अनुसार, अप्रैल में बेन-ग्वीर की यात्रा पर भी जॉर्डन ने इसे यथास्थिति का उल्लंघन बताया था।


फिलहाल 31 अगस्त की घटना के बाद किसी बड़े सैन्य टकराव की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट के समय उपलब्ध नहीं है। इसलिए आगे की स्थिति पर अनुमान लगाना उचित नहीं होगा।


क्या बदला है और क्या अभी स्पष्ट नहीं?


पुष्ट जानकारी यह है कि बेन-ग्वीर अल-अक्सा परिसर में गए, उनके साथ सुरक्षा कर्मी और अन्य लोग थे और उन्होंने वहां धार्मिक प्रार्थना की। जॉर्डन तथा फ़िलिस्तीनी पक्ष ने इसका विरोध किया।


अभी यह स्पष्ट नहीं है कि इस घटना के बाद इजरायल सरकार की आधिकारिक नीति में कोई औपचारिक बदलाव होगा या नहीं।


यही वजह है कि बेन-ग्वीर के बयान और उनकी व्यक्तिगत राजनीतिक मांगों को इजरायल सरकार की अंतिम नीति से अलग रखना जरूरी है।

वीडियो देखें

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Harish Qureshi

Harish Qureshi

Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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