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नेपाल बाढ़ में हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स के 933 कर्मियों का सुराग नहीं

Harish Qureshi • 2026-08-31 11:29:21
नेपाल बाढ़ में हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स के 933 कर्मियों का सुराग नहीं

नेपाल में फ्लैश फ्लड के बाद करीब 933 हाइड्रोपावर कर्मियों का सुराग नहीं है। कई टनल में फंसे लोगों को निकालने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है।


रसुवा, नेपाल | 31 अगस्त 2026 | शाह टाइम्स

By Mohd Haris


नेपाल में तबाही के बाद 933 हाइड्रोपावर कर्मियों की तलाश


नेपाल में 26 अगस्त को आई भीषण फ्लैश फ्लड के बाद हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स में काम करने वाले कम से कम 933 लोगों का अभी तक पता नहीं चल पाया है। नेपाल की आपदा प्रबंधन व्यवस्था के हवाले से रिपोर्ट ने 31 अगस्त को बताया कि ये कर्मचारी करीब आधा दर्जन हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स से जुड़े हैं।


इनमें से कुछ लोगों के टनल के भीतर फंसे होने की आशंका है। राहत और बचाव दल मलबे से बंद टनल तक पहुंचने के लिए ड्रिलिंग मशीन, एक्सकेवेटर और दूसरे भारी उपकरणों का इस्तेमाल कर रहे हैं। खराब मौसम, तेज बहाव और क्षतिग्रस्त सड़कों ने रेस्क्यू ऑपरेशन को और मुश्किल बना दिया है।


रेस्क्यू ऑपरेशन में भारत और चीन की मदद


नेपाल सरकार ने हाइड्रोपावर टनल में फंसे लोगों तक पहुंचने के लिए विदेशी विशेषज्ञों की मदद ली है। नेपाल के विदेश मंत्रालय के 30 अगस्त के आधिकारिक ब्रीफिंग के मुताबिक भारत के 11 और चीन के 9 टनल-रेस्क्यू विशेषज्ञ नेपाल में अभियान में सहयोग कर रहे हैं। दक्षिण कोरिया के विशेषज्ञों की मदद भी ली जा रही है।


नेपाल सरकार के मुताबिक करीब 19,000 सुरक्षा कर्मियों और 16 हेलीकॉप्टरों को प्रभावित इलाकों में तैनात किया गया है। राहत एजेंसियां रसुवा, नुवाकोट, धादिंग, गोरखा और चितवन समेत प्रभावित इलाकों में खोज और बचाव अभियान चला रही हैं।


टनल में फंसे लोगों तक पहुंचने की चुनौती


हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स के कई हिस्से पहाड़ी और दुर्गम इलाकों में हैं। फ्लैश फ्लड और भूस्खलन ने सड़क संपर्क और संचार व्यवस्था को नुकसान पहुंचाया है। इस वजह से रेस्क्यू टीमों को घटनास्थल तक पहुंचने और अंदर फंसे लोगों की सही स्थिति जानने में परेशानी हो रही है।


Trishuli 3A और Trishuli 3B जैसे प्रोजेक्ट्स पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इससे पहले रेस्क्यू टीमों ने एक टनल के हिस्से तक पहुंच बनाने के बाद अंदर हवा पहुंचाने और कैमरा भेजने की कोशिश की थी। बाद में बारिश और नदी का जलस्तर बढ़ने से अभियान प्रभावित हुआ।


933 का आंकड़ा क्या बताता है?


यहां एक अहम फर्क समझना जरूरी है। 933 का आंकड़ा उन हाइड्रोपावर कर्मियों का है जिनका संपर्क नहीं हो पाया या जो लापता बताए गए हैं। इसका अर्थ यह नहीं है कि सभी 933 लोग एक ही टनल में फंसे हैं।


नेपाल में अलग-अलग हाइड्रोपावर साइट्स पर काम कर रहे लोगों की स्थिति अलग-अलग है। कुछ लोगों को बचाया जा चुका है, कुछ से संपर्क स्थापित होने की रिपोर्ट आई है और कुछ अब भी लापता हैं। इसलिए “933 लोग टनल में फंसे हैं” कहना उपलब्ध प्रमाण से अधिक निश्चित दावा होगा।


Upper Trishuli-1 पर गंभीर चिंता


बाढ़ से प्रभावित परियोजनाओं में Upper Trishuli-1 को लेकर खास चिंता सामने आई है। 28 अगस्त की रिपोर्ट में Independent Power Producers' Association Nepal के हवाले से बताया था कि इस प्रोजेक्ट से जुड़े 576 लोग संपर्क से बाहर थे। उस समय करीब 1,350 लोग परियोजना में काम कर रहे थे।


हालांकि, विकसित हो रही आपदा स्थिति में अलग-अलग समय पर आंकड़े बदल रहे हैं। नेपाल सरकार ने भी आधिकारिक तौर पर मीडिया और जनता से अपील की है कि अपुष्ट आंकड़ों को प्रसारित न किया जाए और सरकारी अपडेट पर भरोसा किया जाए।


पूरे नेपाल में बढ़ता मानवीय संकट


हाइड्रोपावर कर्मियों की तलाश नेपाल में चल रहे व्यापक राहत अभियान का एक हिस्सा है। 26 अगस्त की फ्लैश फ्लड ने घरों, सड़कों, पुलों और बिजली परियोजनाओं समेत बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाया।


30 अगस्त तक नेपाल के विदेश मंत्रालय ने 734 शव बरामद होने और करीब 2,498 लोगों के अब भी लापता होने की जानकारी दी थी। मंत्रालय ने साथ ही कहा था कि आंकड़े खोज और सत्यापन अभियान के साथ बदल रहे हैं।


31 अगस्त की रिपोर्टिंग में नेपाल में मृतकों और लापता लोगों की संख्या इससे अधिक बताई गई। रिपोर्ट के मुताबिक नेपाल की आपदा एजेंसी ने 903 मौतों और 4,247 लोगों के लापता होने की जानकारी दी। आंकड़ों में यह अंतर बताता है कि बचाव और पहचान अभियान अभी जारी है और casualty figures को लगातार अपडेट किया जा रहा है।


आपदा की वजह और तबाही का दायरा


यह फ्लैश फ्लड नेपाल-तिब्बत सीमा के हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर से जुड़े बड़े भू-धंसाव के बाद आया। शुरुआती आकलनों में घटना के ट्रिगर को लेकर अलग-अलग संभावनाएं सामने आई थीं। बाद की वैज्ञानिक समीक्षा में ग्लेशियर और चट्टानों के बड़े हिस्से के खिसकने को प्रमुख कारणों से जोड़ा गया।


बाढ़ का पानी और मलबा तेजी से नीचे की ओर आया। इससे नदी घाटियों में बसे इलाकों, सड़क नेटवर्क और हाइड्रोपावर इंफ्रास्ट्रक्चर को भारी नुकसान हुआ। कई जगहों पर मलबे और तेज पानी ने सामान्य रेस्क्यू रूट को बंद कर दिया।


अभी सबसे बड़ी चुनौती समय है


टनल में फंसे लोगों के मामले में हर घंटा महत्वपूर्ण है। लेकिन रेस्क्यू टीमों को लगातार बारिश, नदी के बदलते जलस्तर, भारी मलबे और पहाड़ी इलाके की भौगोलिक मुश्किलों से जूझना पड़ रहा है।


नेपाल सरकार ने कहा है कि उसका तत्काल फोकस लोगों की जान बचाने, लापता लोगों का पता लगाने और प्रभावित आबादी को राहत पहुंचाने पर है। सरकार ने भारत, चीन और दूसरे देशों से तकनीकी तथा मानवीय सहायता भी स्वीकार की है।


फिलहाल 933 हाइड्रोपावर कर्मियों का आंकड़ा इस आपदा के सबसे गंभीर पहलुओं में से एक है। लेकिन जब तक हर व्यक्ति की स्थिति की पुष्टि नहीं होती, इस संख्या को “लापता या संपर्क से बाहर” के रूप में ही रिपोर्ट करना अधिक सटीक है। टनल में फंसे लोगों को बचाने का अभियान जारी है और आने वाले आधिकारिक अपडेट तस्वीर को और स्पष्ट करेंगे।

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Harish Qureshi

Harish Qureshi

Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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