नेपाल में बाढ़ और उससे जुड़ी आपदा के बाद राहत एवं बचाव अभियान के साथ अब अज्ञात शवों की पहचान और अंतिम संस्कार की चुनौती सामने आ गई है। चितवन के देवघाट क्षेत्र में जिन शवों की तत्काल पहचान नहीं हो सकी, उनके अंतिम संस्कार की प्रक्रिया शुरू की गई है। अधिकारियों की कोशिश है कि DNA सैंपल, दस्तावेजी रिकॉर्ड और GPS लोकेशन सुरक्षित रखकर भविष्य में इन शवों की पहचान संभव बनाई जा सके। भारत की ओर से भी राहत सामग्री के साथ फॉरेंसिक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।
Location: चितवन, नेपाल
Date: 30 अगस्त 2026
Byline: Apurva Choudhary
अज्ञात शवों की पहचान बनी बड़ी चुनौती
नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ ने बड़ी मानवीय त्रासदी पैदा की है। राहत और बचाव अभियान के बीच प्रशासन के सामने अब उन शवों की पहचान करना बड़ी चुनौती बन गया है, जिन्हें उनके परिवारों तक पहुंचाना तत्काल संभव नहीं हो पा रहा है।
चितवन के देवघाट क्षेत्र में ऐसे अज्ञात शवों के सामूहिक अंतिम संस्कार की प्रक्रिया शुरू किए जाने की जानकारी सामने आई है। यह कदम लगातार बढ़ती आपदा और शवों की पहचान में आ रही मुश्किलों के बीच उठाया गया है।
DNA रिकॉर्ड से भविष्य में पहचान की कोशिश
अधिकारियों के सामने सबसे बड़ी चिंता यह है कि अंतिम संस्कार के बाद भी यदि किसी परिवार को अपने लापता परिजन की जानकारी मिले, तो पहचान की प्रक्रिया कैसे पूरी की जाए।
इसी वजह से शवों से जुड़े DNA सैंपल, उपलब्ध रिकॉर्ड और GPS लोकेशन सुरक्षित रखने की व्यवस्था की जा रही है। इसका उद्देश्य यह है कि भविष्य में किसी परिवार के DNA मिलान या अन्य प्रमाण के आधार पर पहचान की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सके।
यह व्यवस्था आपदा के बाद शव प्रबंधन को सिर्फ तत्काल अंतिम संस्कार तक सीमित नहीं रखती, बल्कि भविष्य में परिवारों को जवाब देने की संभावना भी बनाए रखती है।
मौत और लापता लोगों का आंकड़ा लगातार चिंता बढ़ा रहा
ताजा रिपोर्टों में आपदा से मरने वालों की संख्या करीब 750 बताई गई है, जबकि 2,500 से ज्यादा लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं।
हालांकि बड़े पैमाने पर राहत एवं बचाव अभियान जारी है और आंकड़ों में लगातार बदलाव संभव है। अलग-अलग इलाकों से मिलने वाली जानकारी और पहचान प्रक्रिया पूरी होने के बाद मृतकों तथा लापता लोगों की संख्या में बदलाव हो सकता है।
खराब मौसम से रेस्क्यू अभियान प्रभावित
नेपाल के कई प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्य आसान नहीं है। लगातार जलस्तर बढ़ने, क्षतिग्रस्त सड़कों और पुलों तथा खराब मौसम के कारण बचाव दलों को प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
ऐसे हालात में शवों को सुरक्षित निकालना, उनकी पहचान करना और परिजनों तक जानकारी पहुंचाना भी एक लंबी प्रक्रिया बन गई है।
भारत की फॉरेंसिक मदद भी जारी
भारत ने नेपाल में राहत अभियान के तहत सहायता बढ़ाई है। चौथी राहत उड़ान से 11 टन अतिरिक्त राहत सामग्री भेजे जाने की जानकारी सामने आई है।
राहत सामग्री के अलावा भारतीय तकनीकी और फॉरेंसिक विशेषज्ञ भी नेपाल की सहायता कर रहे हैं। DNA आधारित पहचान जैसे मामलों में विशेषज्ञता आपदा के बाद लापता भारतीयों और अन्य पीड़ितों की पहचान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
सामूहिक अंतिम संस्कार क्यों जरूरी हुआ?
बड़ी प्राकृतिक आपदाओं के बाद शवों की संख्या अचानक बढ़ने से उन्हें लंबे समय तक सुरक्षित रखना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। गर्म मौसम, स्वास्थ्य संबंधी जोखिम और सीमित संसाधनों के कारण शव प्रबंधन के लिए तत्काल व्यवस्था करना जरूरी हो जाता है।
लेकिन अज्ञात शवों के मामले में चुनौती सिर्फ अंतिम संस्कार तक सीमित नहीं रहती। परिवारों को बाद में अपने लापता परिजनों के बारे में जानकारी देने के लिए पर्याप्त वैज्ञानिक और प्रशासनिक रिकॉर्ड रखना भी जरूरी होता है।
नेपाल में DNA सैंपल और GPS रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की प्रक्रिया इसी जरूरत से जुड़ी महत्वपूर्ण कड़ी है।
परिवारों के लिए सबसे बड़ा सवाल
आपदा के बाद हजारों लोगों के लापता होने से परिवारों की चिंता लगातार बढ़ रही है। कई परिवार अपने परिजनों की तलाश में प्रशासन और राहत एजेंसियों से संपर्क कर रहे हैं।
ऐसे में शवों की पहचान की वैज्ञानिक प्रक्रिया बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। सिर्फ तस्वीर, कपड़े या व्यक्तिगत सामान के आधार पर पहचान हमेशा विश्वसनीय नहीं हो सकती। DNA मिलान जैसे वैज्ञानिक तरीके ज्यादा पुख्ता प्रमाण उपलब्ध करा सकते हैं।
आगे की चुनौती क्या है?
नेपाल के सामने अब एक साथ कई मोर्चों पर काम करने की चुनौती है। राहत एवं बचाव अभियान जारी रखने के साथ लापता लोगों की तलाश, शवों की पहचान, परिवारों तक सूचना पहुंचाना और प्रभावित बुनियादी ढांचे को बहाल करना जरूरी है।
इसके अलावा जिन अज्ञात शवों का अंतिम संस्कार किया जा रहा है, उनके सभी उपलब्ध रिकॉर्ड सुरक्षित रखना भी लंबे समय के लिए महत्वपूर्ण रहेगा।
संपादकीय निष्कर्ष
नेपाल की विनाशकारी बाढ़ के बाद सामने आया अज्ञात शवों की पहचान का संकट आपदा की गंभीरता का एक और मानवीय पहलू है। देवघाट में सामूहिक अंतिम संस्कार की प्रक्रिया शुरू होने के साथ प्रशासन के सामने यह सुनिश्चित करने की चुनौती है कि किसी परिवार की अपने लापता सदस्य की तलाश भविष्य में पूरी तरह बंद न हो।
DNA सैंपल, GPS लोकेशन और अन्य रिकॉर्ड सुरक्षित रखना इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। वहीं भारत की राहत और फॉरेंसिक सहायता नेपाल के लिए तत्काल मानवीय सहयोग को मजबूत कर रही है। आने वाले दिनों में बचाव अभियान के साथ शवों की पहचान और परिवारों तक सही जानकारी पहुंचाना सबसे अहम प्राथमिकताओं में रहेगा।