करंट से ठेका कर्मी की मौत, नगर पालिका पर लापरवाही के आरोप
स्ट्रीट लाइट मरम्मत के दौरान हेल्पर की मौत, जिला अस्पताल में हंगामा
मुजफ्फरनगर में स्ट्रीट लाइट कर्मी की मौत, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
मुजफ्फरनगर में नगर पालिका के पथ प्रकाश विभाग में कार्यरत एक ठेका कर्मी की स्ट्रीट लाइट ठीक करते समय करंट लगने से मौत हो गई। घटना ने ठेका कर्मचारियों की सुरक्षा व्यवस्था, कार्यस्थल पर सुरक्षा प्रोटोकॉल और जवाबदेही को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले में आधिकारिक जांच के बाद ही लापरवाही की पुष्टि होगी।
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📍 मुजफ्फरनगर | 📰 24 जुलाई 2026 | ✍️ वसी सिद्धीकी
करंट से ठेका कर्मी की मौत के बाद सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
स्ट्रीट लाइट की मरम्मत के दौरान हादसा
मुजफ्फरनगर नगर पालिका परिषद के पथ प्रकाश विभाग में कार्यरत 24 वर्षीय ठेका कर्मी हर्ष की शुक्रवार सुबह करंट लगने से मौत हो गई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार वह रेदासपुरी क्षेत्र में स्ट्रीट लाइट की मरम्मत कर रहा था, तभी विद्युत करंट की चपेट में आ गया। साथियों ने उसे तत्काल जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
घटना के बाद अस्पताल परिसर में परिजनों और ग्रामीणों ने नगर पालिका प्रशासन के खिलाफ नाराज़गी जताई। उनका आरोप है कि पर्याप्त सुरक्षा इंतज़ाम और आवश्यक सावधानियों के अभाव में यह हादसा हुआ।
कौन था मृतक कर्मी
मृतक हर्ष पुत्र धारा सिंह नई मंडी क्षेत्र के गांव रथेड़ी का निवासी था। वह नगर पालिका के पथ प्रकाश विभाग में ठेका कंपनी अल्संस के माध्यम से हेल्पर के रूप में कार्यरत था। परिवार के अनुसार वह लगभग एक वर्ष से इस कार्य से जुड़ा हुआ था और इसी आय से परिवार का सहारा था।
हादसे के बाद पूरे गांव में शोक का माहौल है। परिजनों का कहना है कि परिवार ने अपना कमाने वाला युवा सदस्य खो दिया।
लापरवाही के आरोप, लेकिन जांच बाकी
परिजनों ने नगर पालिका और संबंधित ठेका कंपनी पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि यदि बिजली आपूर्ति पूरी तरह बंद कराकर कार्य कराया जाता और सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराए जाते, तो हादसा टाला जा सकता था।
हालांकि समाचार लिखे जाने तक प्रशासन की ओर से इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई थी। यह स्पष्ट होना अभी बाकी है कि कार्य शुरू होने से पहले विद्युत लाइन को सुरक्षित घोषित किया गया था या नहीं तथा सुरक्षा मानकों का पालन किस स्तर तक हुआ।
कार्यस्थल सुरक्षा क्यों बनी चिंता का विषय
नगर निकायों में स्ट्रीट लाइट, विद्युत पोल और सार्वजनिक प्रकाश व्यवस्था के रखरखाव का कार्य अक्सर ठेका प्रणाली के माध्यम से कराया जाता है। ऐसे कार्यों में बिजली के सीधे संपर्क का जोखिम हमेशा बना रहता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के कार्यों से पहले विद्युत आपूर्ति पूरी तरह बंद कराना, लाइन का परीक्षण करना, इंसुलेटेड उपकरणों का उपयोग, हेलमेट, दस्ताने, सेफ्टी बेल्ट और अन्य सुरक्षा संसाधन उपलब्ध कराना आवश्यक होता है। यदि इनमें किसी स्तर पर कमी रह जाए तो दुर्घटना की आशंका बढ़ जाती है।
क्या कहते हैं सुरक्षा मानक
विद्युत संबंधी कार्यों में सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। कार्यस्थल पर जोखिम का आकलन, अधिकृत तकनीकी निगरानी, पर्याप्त प्रशिक्षण और आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था किसी भी संस्था की जिम्मेदारी मानी जाती है।
यदि जांच में यह सामने आता है कि निर्धारित सुरक्षा प्रक्रियाओं का पालन नहीं हुआ, तो संबंधित पक्षों की जवाबदेही तय की जा सकती है। वहीं यदि सभी सुरक्षा मानकों का पालन हुआ हो और दुर्घटना किसी अन्य कारण से हुई हो, तो जांच उसी दिशा में आगे बढ़ेगी।
प्रशासनिक जांच से तय होगी जिम्मेदारी
फिलहाल यह मामला प्रारंभिक चरण में है। घटना के वास्तविक कारणों का पता प्रशासनिक जांच, तकनीकी परीक्षण और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान के आधार पर ही चल सकेगा। पुलिस और संबंधित विभाग की रिपोर्ट के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि हादसा तकनीकी खराबी, मानवीय भूल या सुरक्षा व्यवस्था में कमी के कारण हुआ।
ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच इसलिए भी आवश्यक होती है ताकि भविष्य में इसी प्रकार की दुर्घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
भविष्य के लिए बड़ा सबक
यह हादसा केवल एक परिवार की व्यक्तिगत त्रासदी नहीं है, बल्कि नगर निकायों में कार्यरत हजारों ठेका कर्मचारियों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। सार्वजनिक सेवाओं को सुचारु रखने वाले कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना किसी भी प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
यदि इस घटना से सीख लेते हुए सुरक्षा मानकों की समीक्षा की जाती है, नियमित प्रशिक्षण दिया जाता है और सभी कर्मचारियों को आवश्यक सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराए जाते हैं, तो भविष्य में ऐसी दुखद घटनाओं की संभावना कम हो सकती है।
निष्कर्ष
करंट से ठेका कर्मी की मौत ने नगर पालिका की कार्यप्रणाली, ठेका व्यवस्था और कार्यस्थल सुरक्षा पर नई बहस शुरू कर दी है। फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता निष्पक्ष जांच, पारदर्शी कार्रवाई और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की है। जांच पूरी होने तक किसी भी पक्ष की जिम्मेदारी को अंतिम रूप से तय करना उचित नहीं होगा, लेकिन यह घटना सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने की आवश्यकता अवश्य दर्शाती है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।