मुजफ्फरनगर के ग्राम हबीबपुर सीकरी में भारी वर्षा के दौरान मकान गिरने से एक ही परिवार के पांच सदस्यों की मौत के बाद जमीयत उलमा-ए-हिंद बुढ़ाना ने घटनास्थल पहुंचकर शोक व्यक्त किया। संगठन ने घायलों के बेहतर इलाज, पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता तथा सभी सरकारी राहत योजनाओं का लाभ तत्काल उपलब्ध कराने की मांग की।
📍 हबीबपुर सीकरी, बुढ़ाना (मुजफ्फरनगर)
📰 दिनांक: 20 जुलाई 2026
✍️ वसी सिद्दीकी
हबीबपुर सीकरी हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर दिया
मुजफ्फरनगर जनपद के बुढ़ाना क्षेत्र स्थित ग्राम हबीबपुर सीकरी में लगातार हो रही भारी वर्षा के बीच एक मकान ढह जाने से एक ही परिवार के पांच सदस्यों की मौत ने पूरे इलाके को गहरे सदमे में डाल दिया। यह हादसा केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं बल्कि मानसून के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में कमजोर आवासों और आपदा प्रबंधन की चुनौतियों को भी सामने लाता है।
इस दर्दनाक घटना के बाद जमीयत उलमा-ए-हिंद बुढ़ाना के पदाधिकारी वरिष्ठ जिला उपाध्यक्ष मौलाना आसिफ कुरैशी के नेतृत्व में गांव पहुंचे और पीड़ित परिजनों से मुलाकात कर संवेदना व्यक्त की।
पीड़ित परिवार के प्रति संवेदना और हमदर्दी का इज़हार
जमीयत उलमा-ए-हिंद बुढ़ाना ने अपने शोक संदेश में कहा कि मकान मालिक इस्लामुद्दीन और उनके चार मासूम बच्चों की मृत्यु अत्यंत दुखद और हृदयविदारक है। संगठन ने दिवंगतों की मग़फिरत तथा शोकाकुल परिवार को इस कठिन समय में सब्र और हिम्मत प्रदान करने की दुआ की।
प्रतिनिधिमंडल ने परिजनों को भरोसा दिलाया कि संगठन इस मुश्किल घड़ी में उनके साथ खड़ा रहेगा और हरसंभव सामाजिक सहयोग उपलब्ध कराने का प्रयास करेगा।
घायलों के इलाज में लापरवाही न हो
संगठन ने इस हादसे में घायल बच्चों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की दुआ करते हुए जिला प्रशासन, पुलिस और स्वास्थ्य विभाग द्वारा राहत एवं बचाव कार्य शुरू करने की सराहना की। साथ ही यह मांग भी रखी कि घायलों के उपचार में किसी भी स्तर पर लापरवाही न बरती जाए और उन्हें सर्वोत्तम चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।
आपदा की परिस्थितियों में समय पर चिकित्सा सहायता कई बार जीवन और मृत्यु के बीच का अंतर साबित होती है। ऐसे मामलों में लगातार मेडिकल मॉनिटरिंग भी उतनी ही महत्वपूर्ण मानी जाती है।
सरकार से आर्थिक सहायता और राहत पैकेज की मांग
जमीयत उलमा-ए-हिंद बुढ़ाना ने उत्तर प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन से मांग की कि पीड़ित परिवार को शासन की निर्धारित आर्थिक सहायता, आवास संबंधी राहत तथा अन्य सभी पात्र सरकारी सुविधाएं बिना किसी विलंब के उपलब्ध कराई जाएं।
संगठन का कहना है कि प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित परिवारों को केवल तत्काल राहत ही नहीं बल्कि दीर्घकालिक पुनर्वास की भी आवश्यकता होती है ताकि वे सामान्य जीवन की ओर लौट सकें।
मानसून में बढ़ते हादसों पर भी उठे सवाल
विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार हो रही बारिश के दौरान पुराने और जर्जर मकानों में रहने वाले परिवार सबसे अधिक जोखिम में रहते हैं। ग्रामीण इलाकों में कई मकान वर्षों पुराने हैं, जिनकी समय-समय पर तकनीकी जांच नहीं हो पाती। ऐसे हादसे प्रशासन और स्थानीय निकायों के लिए भी चेतावनी हैं कि संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान कर समय रहते आवश्यक कदम उठाए जाएं।
हालांकि इस मामले में मकान गिरने के तकनीकी कारणों की आधिकारिक जांच और प्रशासनिक रिपोर्ट का इंतजार किया जाना चाहिए। जांच पूरी होने से पहले किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।
आपदा प्रबंधन की तैयारी कितनी प्रभावी
हर वर्ष मानसून के दौरान उत्तर प्रदेश के कई जिलों में मकान गिरने की घटनाएं सामने आती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि स्थानीय स्तर पर जोखिम वाले मकानों की सूची तैयार करना, लोगों को समय रहते सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना और त्वरित राहत व्यवस्था को मजबूत करना भविष्य में ऐसे हादसों की गंभीरता कम कर सकता है।
इसके साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षित आवास योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन भी ऐसी त्रासदियों की पुनरावृत्ति रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
समाज और प्रशासन दोनों की जिम्मेदारी
ऐसे हादसों के बाद केवल सरकारी सहायता ही पर्याप्त नहीं होती। सामाजिक संगठनों, स्वयंसेवी संस्थाओं और स्थानीय समुदाय की भागीदारी भी प्रभावित परिवारों को मानसिक और सामाजिक संबल प्रदान करती है। जमीयत उलमा-ए-हिंद बुढ़ाना का घटनास्थल पहुंचना इसी सामाजिक जिम्मेदारी का एक उदाहरण माना जा सकता है।
इस दौरान हाफिज अब्दुल गफ्फार, हाफिज तहसीन, मौलाना उमर, शाहिद कुरैशी और कारी कुतुबुद्दीन सहित अन्य पदाधिकारी भी मौजूद रहे।
संपदकिया दृष्टिकॉन
✍️ वसी सिद्दीकीहबीबपुर सीकरी की यह त्रासदी एक परिवार के अपूरणीय नुकसान की कहानी है, लेकिन इसके साथ ही यह मानसून के दौरान ग्रामीण सुरक्षा, कमजोर आवासों और प्रभावी आपदा प्रबंधन की आवश्यकता की भी याद दिलाती है। अब निगाहें इस बात पर होंगी कि प्रशासन पीड़ित परिवार को कितनी शीघ्र राहत उपलब्ध कराता है और भविष्य में ऐसे हादसों की रोकथाम के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।