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राष्ट्रीय हथकरघा दिवस: मोदी ने बुनकरों को सलाम

Asif Khan • 2026-08-07 11:38:05
राष्ट्रीय हथकरघा दिवस: मोदी ने बुनकरों को सलाम
  • राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर मोदी का बड़ा संदेश
  • हैंडलूम सेक्टर को आत्मनिर्भर भारत की ताकत बताया
  • बुनकरों के हुनर पर पीएम मोदी का खास फोकस

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर बुनकरों के योगदान को सराहा। उन्होंने इस सेक्टर को ग्रामीण रोजगार और महिला सशक्तिकरण का अहम आधार बताया। सरकार ने हैंडलूम को मजबूत करने के लिए कई योजनाओं पर जोर दिया।



    📍 नई दिल्ली
    📰 7 अगस्त 2026
    ✍️ By Asif Khan



    ## राष्ट्रीय हथकरघा दिवस: मोदी का फोकस

    राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संदेश स्पष्ट रहा। उन्होंने हैंडलूम सेक्टर को भारत की सांस्कृतिक पहचान और आर्थिक मजबूती का अहम हिस्सा बताया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर साझा संदेश में उन्होंने बुनकरों की मेहनत और हुनर को सलाम किया।

    पीएम ने कहा कि पीढ़ियों से चली आ रही यह परंपरा देश की विरासत को जिंदा रखे हुए है। यह बयान ऐसे समय आया है जब सरकार ‘आत्मनिर्भर भारत’ एजेंडा को तेजी से आगे बढ़ा रही है।


    ## हैंडलूम सेक्टर की अहमियत

    भारत का हथकरघा सेक्टर सिर्फ परंपरा नहीं, बल्कि बड़ा रोजगार स्रोत भी है। कृषि के बाद यह देश का दूसरा सबसे बड़ा रोजगार देने वाला क्षेत्र माना जाता है। इसमें लाखों लोग सीधे जुड़े हैं।

    खास बात यह है कि इस सेक्टर में महिलाओं की भागीदारी काफी ज्यादा है। सरकार इसे महिला-नेतृत्व विकास का मजबूत आधार मानती है।


    ## ऐतिहासिक संदर्भ और स्वदेशी आंदोलन

    7 अगस्त की तारीख का अपना ऐतिहासिक महत्व है। 1905 में इसी दिन स्वदेशी आंदोलन की शुरुआत हुई थी। इसका मकसद विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार और स्वदेशी उद्योगों को बढ़ावा देना था।

    हैंडलूम इसी आंदोलन का प्रमुख प्रतीक रहा। आज भी यह भारत की आर्थिक और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा हुआ है।


    ## सरकारी नीतियां और योजनाएं

    पिछले कुछ वर्षों में केंद्र सरकार ने हैंडलूम सेक्टर के लिए कई पहल शुरू की हैं। इनमें वित्तीय सहायता, स्किल डेवलपमेंट और मार्केट एक्सेस बढ़ाने पर जोर दिया गया है।

    टेक्सटाइल मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, डिजिटल प्लेटफॉर्म और ई-कॉमर्स के जरिए बुनकरों को नए बाजार मिले हैं। इससे उनकी आय में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।

    सरकार ब्रांडिंग और एक्सपोर्ट को भी बढ़ावा दे रही है। इससे भारतीय हैंडलूम को ग्लोबल मार्केट में पहचान मिल रही है।


    ## ग्राउंड रियलिटी और चुनौतियां

    हालांकि, जमीनी स्तर पर कई चुनौतियां बनी हुई हैं। छोटे बुनकरों को कच्चे माल की लागत और बाजार तक पहुंच में दिक्कत होती है।

    कई विशेषज्ञ मानते हैं कि पावरलूम इंडस्ट्री से मुकाबला भी एक बड़ा मुद्दा है। सस्ते मशीन-मेड कपड़े हैंडलूम के लिए प्रतिस्पर्धा बढ़ाते हैं।

    इसके अलावा, युवा पीढ़ी का इस पेशे से दूर जाना भी चिंता का विषय है।


    ## अलग-अलग नज़रिये

    सरकार का दावा है कि योजनाओं से सेक्टर मजबूत हुआ है। लेकिन कुछ इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का कहना है कि लाभ सभी तक बराबर नहीं पहुंच रहा।

    कुछ बुनकर संगठनों का मानना है कि स्कीम्स का इम्प्लीमेंटेशन बेहतर होना चाहिए। वहीं, पॉलिसी एनालिस्ट कहते हैं कि टेक्नोलॉजी और मार्केट लिंकिंग पर और काम करने की जरूरत है।


    ## आर्थिक और सामाजिक असर

    हैंडलूम सेक्टर ग्रामीण इकोनॉमी को सपोर्ट करता है। यह माइग्रेशन को कम करने में भी मदद करता है।

    महिलाओं की भागीदारी इसे सामाजिक रूप से भी मजबूत बनाती है। इससे घरेलू आय बढ़ती है और स्थानीय विकास को गति मिलती है।


    ## अंतरराष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य

    वैश्विक स्तर पर ‘सस्टेनेबल फैशन’ का ट्रेंड बढ़ रहा है। इसमें हैंडलूम प्रोडक्ट्स की मांग भी बढ़ी है।

    भारत इस मौके का फायदा उठा सकता है। एक्सपोर्ट बढ़ाने के लिए क्वालिटी और ब्रांडिंग पर फोकस जरूरी माना जा रहा है।


    ## आगे का रास्ता

    एक्सपर्ट्स का मानना है कि हैंडलूम सेक्टर को टेक्नोलॉजी, फाइनेंस और मार्केट सपोर्ट की जरूरत है।

    डिजिटल प्लेटफॉर्म, डिजाइन इनोवेशन और ग्लोबल मार्केट एक्सेस से इस सेक्टर को नई दिशा मिल सकती है।


     राष्ट्रीय हथकरघा दिवस का संदेश

    राष्ट्रीय हथकरघा दिवस सिर्फ एक प्रतीक नहीं है। यह भारत की परंपरा, रोजगार और आत्मनिर्भरता का मजबूत संकेत है।

    पीएम मोदी का संदेश इस सेक्टर की अहमियत को फिर सामने लाता है। अब चुनौती यह है कि नीतियों का फायदा हर बुनकर तक पहुंचे और यह विरासत आने वाली पीढ़ियों तक बनी रहे।

  • वीडियो देखें

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    Asif Khan

    Asif Khan

    Shah Times Reporter

    शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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