पीएम मोदी से मुलाकात के बाद जमीन विवाद में नया मोड़, भाजपा विधायक नरेंद्र मेहता ने कब्जा छोड़ने की बात कही
Mohammad Naved
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2026-09-16 11:08:56
भायंदर के पुराने जमीन विवाद में नया मोड़ आया है। पीएम मोदी से मुलाकात के बाद भाजपा विधायक नरेंद्र मेहता ने विवादित जमीन का कब्जा छोड़ने और निर्माण अनुमति सरेंडर करने की जानकारी दी।
📍 भायंदर, महाराष्ट्र 🗓️ 16 सितंबर 2026 ✍️ मोहम्मद नावेद
जमीन विवाद में आया नया मोड़
महाराष्ट्र के मीरा-भायंदर में लंबे समय से चले आ रहे जमीन विवाद में 16 सितंबर को नया मोड़ सामने आया। 81 वर्षीय असगर अली वोहरा के मुताबिक, उन्होंने 1989 में भायंदर ईस्ट के नवघर इलाके में करीब 2,810 वर्ग मीटर जमीन खरीदी थी और बाद में इस जमीन को लेकर विवाद खड़ा हो गया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से 8 सितंबर को मुलाकात के बाद इस मामले में प्रशासनिक स्तर पर गतिविधियां तेज हुईं। इसके बाद भाजपा विधायक नरेंद्र मेहता ने विवादित प्लॉट का कब्जा छोड़ने और उससे संबंधित निर्माण अनुमति सरेंडर करने की जानकारी दी।
असगर अली वोहरा ने पीएम मोदी से क्या कहा
असगर अली वोहरा का दावा है कि उन्होंने 1989 में नवघर में करीब 2,810 वर्ग मीटर जमीन एक पंजीकृत समझौते के जरिए खरीदी थी। उनके मुताबिक, उन्होंने जमीन को कभी बेचा या हस्तांतरित नहीं किया।
वोहरा ने आरोप लगाया कि 2011 में जमीन से संबंधित दस्तावेजों में कथित तौर पर हेरफेर हुआ और जमीन को 2 हिस्सों में दिखाया गया। उनके अनुसार, एक हिस्सा स्वयं बिल्डर्स और दूसरा हिस्सा सेवन इलेवन कंस्ट्रक्शंस से जुड़ा था।
इन आरोपों की स्वतंत्र न्यायिक पुष्टि इस रिपोर्ट के लिए उपलब्ध सामग्री में नहीं हुई है। इसलिए इन्हें स्थापित तथ्य के बजाय वोहरा के दावे के तौर पर देखा जाना चाहिए।
प्रधानमंत्री से 8 सितंबर को हुई मुलाकात
वोहरा ने 8 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी। दोनों के वडनगर स्थित बीएन स्कूल में साथ पढ़ने की जानकारी कई रिपोर्टों में सामने आई है।
मुलाकात के दौरान वोहरा ने जमीन विवाद में हस्तक्षेप की मांग की। उन्होंने कथित दस्तावेजी जालसाजी और जमीन विवाद की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो से कराने की मांग भी रखी थी।
वोहरा का कहना है कि उन्होंने इस मामले को लेकर वर्षों तक अलग-अलग सरकारी विभागों से संपर्क किया, लेकिन विवाद का समाधान नहीं हुआ।
मंत्रालय में हुई अहम बैठक
प्रधानमंत्री से मुलाकात के बाद महाराष्ट्र सरकार के स्तर पर मामले की समीक्षा हुई। मंगलवार को मंत्रालय में मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव श्रीकर परदेशी की अध्यक्षता में बैठक हुई।
बैठक में असगर अली वोहरा और नरेंद्र मेहता के अलावा मीरा-भायंदर नगर निगम के आयुक्त राधा बिनोद शर्मा और टाउन प्लानर पुरुषोत्तम शिंदे मौजूद रहे।
इस बैठक में जमीन और उससे संबंधित निर्माण अनुमति का मुद्दा सामने रखा गया।
नरेंद्र मेहता ने क्या फैसला लिया
बैठक के दौरान नरेंद्र मेहता ने टाउन प्लानिंग विभाग को पत्र सौंपा। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, पत्र में उन्होंने विवादित जमीन का कब्जा छोड़ने और प्लॉट से जुड़ी निर्माण अनुमति वापस करने की जानकारी दी।
मेहता ने अपने पत्र में यह भी कहा कि उन्होंने संबंधित जमीन 2019 में मर्विन फर्नांडिस से खरीदी थी। यह उनका पक्ष है और जमीन के स्वामित्व से जुड़े पुराने विवाद का अंतिम कानूनी निर्धारण इससे अलग प्रक्रिया का विषय है।
पुलिस शिकायत भी वापस लेने की जानकारी
नरेंद्र मेहता ने पुलिस आयुक्त को अलग पत्र भेजकर असगर अली वोहरा के खिलाफ पहले की गई शिकायत वापस लेने की जानकारी दी। रिपोर्टों के मुताबिक, मेहता ने दोनों पक्षों के बीच समझौता होने का हवाला दिया है।
इस घटनाक्रम से विवाद में आपसी सहमति के आधार पर समाधान की दिशा में बढ़ने के संकेत मिलते हैं। हालांकि, जमीन के स्वामित्व, पुराने दस्तावेजों और कथित जालसाजी से जुड़े सभी कानूनी सवालों का निपटारा संबंधित प्रशासनिक और न्यायिक प्रक्रिया के अनुसार ही होगा।
विवाद कितना पुराना है
असगर अली वोहरा का कहना है कि वह लगभग 15 वर्षों से इस मामले को अलग-अलग सरकारी विभागों के सामने उठा रहे थे।
मामले में 2015 में कथित दस्तावेजी जालसाजी को लेकर प्राथमिकी दर्ज होने की जानकारी भी सामने आई है। वोहरा ने जांच में देरी पर सवाल उठाए हैं और पूरे मामले की सीबीआई जांच की मांग की है।
दूसरी तरफ, नरेंद्र मेहता ने जमीन को 2019 में मर्विन फर्नांडिस से खरीदने की बात कही है। इसलिए विवाद में पुराने स्वामित्व दस्तावेज, बाद के हस्तांतरण और निर्माण अनुमति से जुड़े रिकॉर्ड अहम बने हुए हैं।
अप्रैल में भी सामने आया था मामला
यह विवाद सितंबर से पहले भी सार्वजनिक चर्चा में आ चुका था। अप्रैल 2026 में महाराष्ट्र के मंत्री प्रताप सरनाईक के लोकदरबार में वोहरा की ओर से जमीन पर कथित अतिक्रमण की शिकायत उठाई गई थी।
उस समय राजस्व विभाग द्वारा रिकॉर्ड से संबंधित नाम हटाए जाने और नगर निगम स्तर पर कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठाए गए थे। स्थानीय प्रशासन ने उस समय अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई किए जाने की जानकारी दी थी।
नरेंद्र मेहता ने तब शिकायतों को लेकर अलग पक्ष रखा था और आरोपों को खारिज किया था। इसलिए पूरे मामले में दोनों पक्षों के दावों को अलग-अलग समझना जरूरी है।
पीएम से मुलाकात और प्रशासनिक कार्रवाई का क्रम
घटनाक्रम में 8 सितंबर को असगर अली वोहरा की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात हुई।
इसके बाद राज्य स्तर पर संबंधित अधिकारियों के बीच मामले की समीक्षा हुई। 16 सितंबर से पहले मंत्रालय में संबंधित पक्षों और अधिकारियों की बैठक हुई।
बैठक के बाद नरेंद्र मेहता ने विवादित जमीन से कब्जा छोड़ने, निर्माण अनुमति सरेंडर करने और वोहरा के खिलाफ अपनी शिकायत वापस लेने की जानकारी दी।
अब आगे क्या होगा
मामले में समझौते की घोषणा के बावजूद जमीन के रिकॉर्ड, स्वामित्व और कथित दस्तावेजी अनियमितताओं से जुड़े सवाल महत्वपूर्ण रहेंगे।
यदि किसी जमीन के स्वामित्व पर विवाद हो, तो अंतिम स्थिति संबंधित राजस्व रिकॉर्ड, पंजीकृत दस्तावेज, न्यायिक आदेश और प्रशासनिक कार्रवाई से तय होती है। इस मामले में भी इन दस्तावेजों की स्थिति आगे की प्रक्रिया के लिए अहम होगी।
असगर अली वोहरा ने सीबीआई जांच की मांग की है। वहीं नरेंद्र मेहता ने दोनों पक्षों के बीच समझौते का हवाला देते हुए अपनी शिकायत वापस लेने और निर्माण अनुमति सरेंडर करने की बात कही है।
पाठकों के लिए अहम बात
इस पूरे घटनाक्रम को केवल प्रधानमंत्री से हुई मुलाकात के बाद जमीन मिलने के रूप में देखना अधूरा होगा। विवाद कई वर्षों से प्रशासनिक और कानूनी स्तर पर चल रहा था और दोनों पक्षों ने जमीन के स्वामित्व को लेकर अलग-अलग दावे किए हैं।
ताजा घटनाक्रम में महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि नरेंद्र मेहता ने विवादित जमीन का कब्जा छोड़ने, निर्माण अनुमति वापस करने और असगर अली वोहरा के खिलाफ अपनी शिकायत वापस लेने की जानकारी दी है। जमीन के मूल स्वामित्व और कथित दस्तावेजी हेरफेर से जुड़े बाकी सवाल संबंधित रिकॉर्ड और कानूनी प्रक्रिया से स्पष्ट होंगे।
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Mohammad Naved
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक,
अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।