मंगलवार, 15 September 2026
GOLD ₹0 ▼ 0%
SENSEX 0 ▼ 0%
BITCOIN $0 ▼ 0%
38°C मुजफ्फरनगर
EDITION:
BREAKING
#ShahTimes #Muzaffarnagar #Bijnor #Moradabad #BreakingNews #Politics #Education #Crime #Sports #Business
Book Your Ads With Shah Times
India

जयपुर रियासत की पुरानी संपत्तियों पर राजस्थान का दावा, आगरा की करीब 100 बीघा जमीन भी शामिल

Harish Qureshi 2026-09-15 16:41:44
जयपुर रियासत की पुरानी संपत्तियों पर राजस्थान का दावा, आगरा की करीब 100 बीघा जमीन भी शामिल

राजस्थान सरकार ने यूपी में जयपुर रियासत की कई संपत्तियों पर दावा किया है। आगरा के जयपुर हाउस क्षेत्र में दो कोठियां और करीब 100 बीघा जमीन भी सूची में बताई गई है।


आगरा | 15 सितंबर 2026

By Mohd Haris


राजस्थान सरकार का यूपी की संपत्तियों पर दावा


राजस्थान सरकार ने उत्तर प्रदेश में जयपुर रियासत से जुड़ी बताई जा रही कई संपत्तियों पर मालिकाना हक का दावा किया है। इस दावे ने खास तौर पर आगरा, वाराणसी, प्रयागराज और मथुरा की पुरानी रियासती संपत्तियों को लेकर नई कानूनी और प्रशासनिक चर्चा शुरू कर दी है।


मामले में राजस्थान के मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास की ओर से उत्तर प्रदेश सरकार को पत्र भेजे जाने की जानकारी सामने आई है। इसके बाद उत्तर प्रदेश राजस्व परिषद के आयुक्त ने संबंधित जिलाधिकारियों से रिपोर्ट मांगी है।


यानी फिलहाल यह मामला दावा और दस्तावेजों की जांच के चरण में है। इसे संपत्तियों पर अंतिम मालिकाना हक का फैसला मानना सही नहीं होगा।


1952 के विलय समझौते का हवाला


राजस्थान सरकार ने अपने दावे के लिए 1952 में हुए विलय समझौते के एक प्रावधान का हवाला दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक समझौते के अनुच्छेद 6 के उपबंध 2-सी में पूर्ववर्ती जयपुर रियासत की राज्य से बाहर स्थित संपत्तियों को लेकर प्रावधान किया गया था।


राजस्थान सरकार की ओर से 16 फरवरी 1952 के राजपत्र का भी हवाला दिया गया है। इस राजपत्र में जयपुर रियासत की उन संपत्तियों का विवरण बताया गया है जो अलग-अलग शहरों में स्थित थीं।


यही दस्तावेज मौजूदा दावे का प्रमुख आधार बताया जा रहा है। हालांकि इन पुराने दस्तावेजों की वर्तमान राजस्व रिकॉर्ड, स्वामित्व और बाद के हस्तांतरणों के साथ किस तरह कानूनी संगति बैठती है, यह जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा।


आगरा के जयपुर हाउस में क्या है दावा


आगरा इस पूरे मामले का महत्वपूर्ण हिस्सा है। रिपोर्ट के अनुसार जयपुर हाउस क्षेत्र में दो ऐतिहासिक कोठियों, करीब 100 बीघा जमीन, सदाशिव मनःकामेश्वर मंदिर से जुड़े क्षेत्र और सड़क की एक प्रमुख पट्टी को जयपुर रियासत की संपत्ति बताया गया है।


जयपुर हाउस आज आगरा का प्रमुख शहरी इलाका है। आगरा विकास प्राधिकरण का आधिकारिक पता भी जयपुर हाउस कॉलोनी में दर्ज है।

इसलिए राजस्थान सरकार का दावा केवल किसी एक पुराने भवन तक सीमित नहीं है। यदि पुराने राजपत्र और मौजूदा भू-अभिलेखों में सामंजस्य स्थापित होता है तो इसका दायरा कई अलग-अलग संपत्तियों तक जा सकता है।


वाराणसी में 44 मकान और मानमंदिर घाट


इस विवाद का सबसे स्पष्ट हिस्सा वाराणसी से जुड़ा है। राजस्थान सरकार ने मानमंदिर मोहल्ले के 44 मकानों और प्रसिद्ध मानमंदिर घाट पर भी मालिकाना हक का दावा किया है।


यूपी राजस्व परिषद ने इसी मामले में वाराणसी के जिलाधिकारी से रिपोर्ट तलब की है। प्रशासन अब पुराने दस्तावेजों और मौजूदा राजस्व रिकॉर्ड का मिलान करेगा।


यह प्रक्रिया इसलिए अहम है क्योंकि दशकों पुराने रियासती रिकॉर्ड और वर्तमान स्वामित्व रिकॉर्ड के बीच कई स्तरों पर बदलाव हो चुके हो सकते हैं।


प्रयागराज में 35.25 एकड़ जमीन


राजस्थान सरकार के दावे का दायरा प्रयागराज तक भी बताया गया है। रिपोर्ट के अनुसार कटरा सवाई जयसिंह इलाके में 35.25 एकड़ जमीन को जयपुर रियासत के नाम दर्ज बताया जा रहा है।


यह जमीन आज किसके कब्जे और इस्तेमाल में है, उसके मौजूदा राजस्व रिकॉर्ड क्या कहते हैं और पुराने रियासती दस्तावेजों की कानूनी स्थिति क्या है, यह प्रशासनिक जांच के महत्वपूर्ण सवाल होंगे।


मथुरा में धर्मशाला परिसर


मथुरा का जसवंतगंज धर्मशाला परिसर भी इस सूची में बताया गया है। यहां 2.16 एकड़ भूमि पर बनी 6 कोठरियों को जयपुर रियासत की संपत्तियों में शामिल बताया गया है।


इससे पता चलता है कि मामला केवल आवासीय जमीन तक सीमित नहीं है। पुराने रियासती उपयोग से जुड़ी धार्मिक, सामाजिक और सार्वजनिक प्रकृति की संपत्तियां भी इस दावे के दायरे में आ सकती हैं।


क्या राजस्थान सरकार को तुरंत मालिकाना हक मिल जाएगा


नहीं। किसी पुराने राजपत्र में संपत्ति का उल्लेख होना अपने आप में वर्तमान स्वामित्व का अंतिम फैसला नहीं है।


मामले में पुराने दस्तावेज, विलय समझौता, राजस्व रिकॉर्ड, बाद के हस्तांतरण, अधिग्रहण, नगर निकाय के रिकॉर्ड और वर्तमान कब्जे की स्थिति जैसे कई पहलुओं की जांच जरूरी होगी।


यदि संबंधित पक्षों के बीच स्वामित्व को लेकर विवाद बना रहता है तो मामला राजस्व न्यायालय या सक्षम अदालत तक भी जा सकता है। राजस्थान के राजस्व न्यायालयों में जमीन पर मालिकाना हक की घोषणा से जुड़े मुकदमों के लिए अलग न्यायिक प्रक्रिया मौजूद है।


आगरा में मामला क्यों संवेदनशील है


आगरा का जयपुर हाउस आज केवल ऐतिहासिक संदर्भ वाला इलाका नहीं है। यह एक विकसित शहरी क्षेत्र है, जहां सरकारी कार्यालयों और दूसरी संपत्तियों का इस्तेमाल लंबे समय से होता रहा है।


पुराने रिकॉर्ड में किसी संपत्ति का रियासती स्वामित्व दर्ज होना और आज उस जमीन पर किसी अन्य संस्था या व्यक्ति का अधिकार होना दो अलग कानूनी सवाल हैं।

इसी वजह से राजस्थान के दावे के बाद सबसे महत्वपूर्ण भूमिका प्रशासनिक रिकॉर्ड की जांच की होगी।


पुराने रियासती अधिकारों की आधुनिक कानूनी स्थिति


भारत में रियासतों के एकीकरण के बाद पूर्व रियासतों की संपत्तियों, निजी संपत्ति और राज्य संपत्ति को लेकर कई अलग-अलग कानूनी व्यवस्थाएं बनीं। इसलिए किसी पुराने समझौते की एक धारा को वर्तमान स्वामित्व के संदर्भ में लागू करने के लिए उसके पूरे कानूनी संदर्भ को देखना जरूरी है।


यही वजह है कि इस मामले में 1952 के दस्तावेजों के साथ बाद के भूमि रिकॉर्ड और सरकारी आदेश भी अहम होंगे।


क्या यह सिर्फ रिकॉर्ड सुधार का मामला है


अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि राजस्थान सरकार का दावा केवल रिकॉर्ड सुधार के लिए है या वास्तविक कब्जे और स्वामित्व परिवर्तन की दिशा में आगे बढ़ेगा।


फिलहाल सामने आई जानकारी के मुताबिक यूपी प्रशासन से रिपोर्ट मांगी गई है। यानी सरकारी स्तर पर तथ्य और दस्तावेज जुटाने की प्रक्रिया शुरू हुई है।

आगे की कार्रवाई संबंधित जिलों से मिलने वाली रिपोर्ट और दोनों राज्यों के राजस्व रिकॉर्ड के परीक्षण पर निर्भर करेगी।


आगे क्या हो सकता है


सबसे पहले संबंधित जिलों के प्रशासन पुराने राजपत्र और वर्तमान भू-अभिलेखों का मिलान करेंगे। इसके बाद यह देखा जाएगा कि दावा की गई संपत्तियों का वर्तमान स्वामित्व किसके नाम दर्ज है।


यदि पुराने और मौजूदा रिकॉर्ड में अंतर मिलता है तो संबंधित पक्षों से दस्तावेज और आपत्तियां मांगी जा सकती हैं।


यदि मामला विवादित स्वामित्व में बदलता है तो कानूनी प्रक्रिया लंबी हो सकती है। इसलिए अभी इसे राजस्थान सरकार की ओर से किया गया दावा कहना अधिक सटीक है, न कि संपत्तियों पर राजस्थान के अंतिम मालिकाना हक की स्थापना।


निष्कर्ष


राजस्थान सरकार ने उत्तर प्रदेश में जयपुर रियासत से जुड़ी बताई जा रही संपत्तियों पर दावा कर एक पुराने इतिहास को मौजूदा राजस्व व्यवस्था के सामने ला दिया है।


वाराणसी के 44 मकानों और मानमंदिर घाट से लेकर आगरा के जयपुर हाउस क्षेत्र, प्रयागराज की जमीन और मथुरा के धर्मशाला परिसर तक कई संपत्तियां इस दावे में शामिल बताई गई हैं।


अब असली सवाल दस्तावेजों की प्रमाणिकता और मौजूदा राजस्व रिकॉर्ड से उनके ताल्लुक का है। आने वाले दिनों में जिलाधिकारियों की रिपोर्ट यह तय करने में अहम होगी कि यह दावा प्रशासनिक स्तर पर कितना मजबूत है और मामला आगे किस कानूनी दिशा में जाता है।

वीडियो देखें

ADVERTISEMENT
Harish Qureshi

Harish Qureshi

Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

BREAKING NEWS

संबंधित खबरें

दिल्ली से पटना करीब 1000 किलोमीटर का सफर 5 घंटे से कम में, बुलेट ट्रेन से बदलेगी यूपी-बिहार की कनेक्टिविटी

2026-09-01 11:25:34

10 अगस्त को यूपी में फिर बदलेगा मौसम का मिजाज

2026-08-09 22:12:20

वाराणसी में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने वृद्धाश्रम और बालिका गृह का किया निरीक्षण, दिए अहम निर्देश

2026-07-29 13:42:48

प्रयागराज बैठक में राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर कड़ा प्रस्ताव, दोषियों को फांसी की सजा की मांग

2026-07-26 20:45:29

एएसपी ग्रामीण सुरेश चंद्र रावत बने IPS, मथुरा में पीपिंग सेरेमनी में सजे कंधों पर स्टार

2026-07-05 07:43:12

गंगा एक्सप्रेसवे किनारे लगेंगे 12 हजार पौधे, गुलमोहर-अमलतास से बढ़ेगी हरियाली

2026-06-29 05:26:55

काशी में योगी का बड़ा ऐलान, आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चों को मिलेंगी दो यूनिफॉर्म

2026-09-09 15:49:58

मथुरा विवाद पर योगी का पुराना बयान फिर चर्चा में, अदालत के आदेश पर टिकी है अगली राह

2026-09-04 14:37:17

TRENDING

ताज़ा ख़बरें
BREAKING NEWS
ADVERTISEMENT

Your Ad Here
TRENDING
आज का ई-पेपर
मुजफ्फरनगर (12 पेज)
बिजनौर (10 पेज)
सहारनपुर (11 पेज)
मुरादाबाद (14 पेज)
Home Video Epaper Reel Menu
Chat With Us
SHAH TIMES
ख़बरें छुपाता नहीं, छापता है
🏠 होम ⚡ ब्रेकिंग न्यूज़ 📰 ताज़ा खबरें 🇮🇳 देश 🌍 दुनिया 🏛 राजनीति 🚔 क्राइम 📈 बिजनेस 🏏 स्पोर्ट्स 🎓 शिक्षा ❤️ स्वास्थ्य 📰 ई-पेपर