गरबा-डांडिया को लेकर वीएचपी का ऐलान, मुस्लिमों की भागीदारी पर रोक की घोषणा
Asif Khan
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2026-09-06 13:12:08
महाराष्ट्र में आगामी नवरात्रि उत्सव के दौरान गरबा और डांडिया आयोजनों में मुस्लिम समुदाय की भागीदारी को लेकर विश्व हिंदू परिषद ने अपना रुख स्पष्ट किया है। वीएचपी ने कहा है कि वह इन आयोजनों में मुसलमानों की भागीदारी की अनुमति नहीं देने के पक्ष में है। संगठन ने इसके साथ आयोजकों के लिए कुछ दिशानिर्देश भी जारी किए हैं, जिनमें प्रतिभागियों के आधार कार्ड की जांच और माथे पर तिलक लगाने जैसे उपाय शामिल हैं। कुछ रिपोर्टों में कलाई में कलावा बांधने का भी उल्लेख है।
📍महाराष्ट्र, भारत
🗓️६ सितंबर २०२६
✍️ Asif Khan
महाराष्ट्र में आगामी नवरात्रि उत्सव से पहले गरबा और डांडिया आयोजनों में प्रवेश को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। विश्व हिंदू परिषद ने घोषणा की है कि वह राज्य में होने वाले इन आयोजनों में मुस्लिम समुदाय के लोगों की भागीदारी के खिलाफ है। संगठन ने आयोजकों से प्रतिभागियों की हिंदू पहचान की पुष्टि के लिए कुछ प्रक्रियाएं अपनाने को भी कहा है।
नवरात्रि इस वर्ष ११ अक्टूबर से शुरू होने की रिपोर्ट है और महाराष्ट्र में इस दौरान बड़े पैमाने पर गरबा तथा डांडिया कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
वीएचपी ने क्या कहा?
वीएचपी के प्रवक्ता और संयुक्त सचिव श्रीराज नायर के मुताबिक संगठन ने नवरात्रि के दौरान गरबा-डांडिया कार्यक्रमों में मुसलमानों की भागीदारी की अनुमति नहीं देने का फैसला किया है।
नायर ने इस रुख को नवरात्रि की धार्मिक प्रकृति से जोड़ते हुए कहा कि यह उत्सव केवल मनोरंजन या नृत्य का कार्यक्रम नहीं, बल्कि देवी की पूजा से जुड़ा धार्मिक आयोजन है।
आयोजकों के लिए क्या दिशानिर्देश?
वीएचपी ने कार्यक्रम आयोजकों से प्रतिभागियों की पहचान की जांच करने के लिए आधार कार्ड देखने का सुझाव दिया है। इसके अलावा माथे पर तिलक लगाने और कलाई में कलावा बांधने जैसे उपायों का भी उल्लेख किया गया है। संगठन का दावा है कि इन उपायों से आयोजनों में शामिल लोगों की हिंदू पहचान की पुष्टि की जा सकेगी।
यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि उपलब्ध रिपोर्टों में इन निर्देशों को वीएचपी की गाइडलाइन बताया गया है। इन्हें महाराष्ट्र सरकार की ओर से जारी राज्यव्यापी सरकारी आदेश के रूप में प्रस्तुत नहीं किया गया है।
वीएचपी ने फैसले की क्या वजह बताई?
श्रीराज नायर ने कहा कि संगठन इन उपायों को हिंदू त्योहारों की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान की सुरक्षा से जोड़ता है। उन्होंने कहा कि संगठन के मुताबिक ये पाबंदियां किसी विशेष समुदाय के खिलाफ नहीं, बल्कि एहतियाती कदम हैं।
वीएचपी ने यह भी कहा है कि वह हिंदू सांस्कृतिक विरासत से जुड़े आयोजनों की पहचान को कमजोर नहीं होने देना चाहती। संगठन ने धर्म परिवर्तन और गोहत्या-विरोध जैसे अपने प्रमुख मुद्दों का भी उल्लेख किया है।
मोहन भागवत के बयान का भी संदर्भ
यह घटनाक्रम राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत के हालिया विदेश दौरे के दौरान दिए गए एक बयान के बाद सामने आया है, जिसमें उन्होंने सभी लोगों के सम्मान और व्यापक सामाजिक एकता की बात की थी।
वीएचपी से जब भागवत की टिप्पणी के संदर्भ में सवाल किया गया, तो श्रीराज नायर ने उस पर टिप्पणी करने से इनकार किया। उन्होंने सामाजिक सद्भाव और शांति में विश्वास की बात कही, लेकिन साथ ही नवरात्रि से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं को आधार बनाकर अपने संगठन के रुख का बचाव किया।
आगे क्या?
नवरात्रि के दौरान महाराष्ट्र में गरबा और डांडिया आयोजनों के लिए स्थानीय आयोजकों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। वीएचपी की अपील के अलावा किसी कार्यक्रम में प्रवेश की वास्तविक शर्तें संबंधित आयोजक, आयोजन स्थल और लागू स्थानीय नियमों पर निर्भर करेंगी।
मामला धार्मिक आयोजनों में प्रवेश, पहचान की जांच और सामाजिक समावेश जैसे संवेदनशील मुद्दों से जुड़ा है। इसलिए आयोजनों के दौरान कानून-व्यवस्था, नागरिक अधिकारों और स्थानीय प्रशासन के निर्देशों की स्थिति पर भी नजर रहेगी।
सम्पादकीय दृष्टिकोण
महाराष्ट्र में गरबा और डांडिया को लेकर वीएचपी की घोषणा ने धार्मिक आयोजन और सार्वजनिक भागीदारी के सवाल को फिर चर्चा में ला दिया है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी में मुस्लिमों की भागीदारी पर रोक वीएचपी के घोषित संगठनात्मक रुख के रूप में सामने आई है, न कि महाराष्ट्र सरकार के किसी राज्यव्यापी प्रतिबंध के रूप में। आने वाले दिनों में आयोजकों और प्रशासन की ओर से इस मुद्दे पर स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।
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Asif Khan
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक,
अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।