नेपाल के त्रिभुवन विश्वविद्यालय की एमबीएस प्रथम सेमेस्टर परीक्षा का प्रश्नपत्र परीक्षा शुरू होने के कुछ मिनट बाद कथित रूप से ऑनलाइन प्रसारित हो गया। पुलिस ने कई संदिग्धों को हिरासत में लिया है और विश्वविद्यालय ने मामले की जांच के लिए समिति गठित कर दी है। हालांकि परीक्षा रद्द नहीं की गई है।
📍 Location: काठमांडू, नेपाल
📰 Date: 26 जुलाई 2026
✍️ Byline: Apurva Choudhary
नेपाल में MBS परीक्षा का कथित पेपर लीक, जांच शुरू; कई संदिग्ध हिरासत में
परीक्षा के दौरान सामने आया मामला
नेपाल में त्रिभुवन विश्वविद्यालय की मास्टर्स ऑफ बिजनेस स्टडीज (MBS) प्रथम सेमेस्टर परीक्षा के दौरान प्रश्नपत्र कथित रूप से ऑनलाइन प्रसारित होने का मामला सामने आया है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, 'ऑर्गनाइजेशनल बिहेवियर' विषय का प्रश्नपत्र परीक्षा शुरू होने के कुछ मिनट बाद सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर साझा किया गया।
पुलिस की त्वरित कार्रवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए नेपाल पुलिस के केंद्रीय अनुसंधान ब्यूरो (CIB) ने जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों ने कई संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि प्रश्नपत्र किस माध्यम से और किन लोगों की भूमिका से बाहर आया।
विश्वविद्यालय ने बनाई जांच समिति
त्रिभुवन विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रण विभाग ने तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की है। समिति को निर्धारित समय सीमा के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है ताकि घटना के कारणों और जिम्मेदार लोगों की पहचान की जा सके।
परीक्षा रद्द क्यों नहीं हुई?
विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि जब तक प्रश्नपत्र ऑनलाइन प्रसारित हुआ, तब तक अधिकांश परीक्षार्थी परीक्षा केंद्रों पर प्रश्नपत्र प्राप्त कर चुके थे और परीक्षा शुरू हो चुकी थी। इसी आधार पर प्रशासन ने परीक्षा निरस्त न करने का निर्णय लिया है।
शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
इस घटना ने नेपाल की परीक्षा सुरक्षा व्यवस्था और डिजिटल निगरानी प्रणाली को लेकर नई बहस छेड़ दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जांच में लीक की पुष्टि होती है, तो भविष्य में प्रश्नपत्रों की सुरक्षा के लिए और कड़े तकनीकी उपाय अपनाने की आवश्यकता होगी।
आगे क्या होगा?
अब सभी की निगाहें जांच समिति की रिपोर्ट और पुलिस की कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि लीक की पुष्टि होती है, तो दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के साथ परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए नए कदम उठाए जा सकते हैं।