27 जुलाई 2026देश की सार्वजनिक परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और विश्वसनीयता को लेकर जारी बहस के बीच केंद्र सरकार सोमवार को लोकसभा में सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पेश करने जा रही है। सरकार का कहना है कि प्रस्तावित संशोधन का उद्देश्य संगठित पेपर लीक नेटवर्क, परीक्षा माफिया और तकनीक आधारित धोखाधड़ी पर अधिक प्रभावी अंकुश लगाना है।
यह पहल ऐसे समय सामने आई है जब NEET-UG परीक्षा को लेकर देशभर में व्यापक बहस हुई, विपक्ष ने सरकार की जवाबदेही पर सवाल उठाए और लाखों अभ्यर्थियों के भविष्य को लेकर गंभीर चिंताएं व्यक्त की गईं। इसी पृष्ठभूमि में संसद का मौजूदा सत्र शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा सुधार पर केंद्रित होता दिखाई दे रहा है।
सरकार का पक्ष है कि वर्ष 2024 में लागू सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम ने कानूनी आधार उपलब्ध कराया, लेकिन हाल की घटनाओं ने संकेत दिया कि संगठित परीक्षा अपराधों से निपटने के लिए कानून को और अधिक प्रभावी बनाने की आवश्यकता है।
सरकारी सूत्रों और सार्वजनिक रिपोर्टों के अनुसार, संशोधन विधेयक में दंडात्मक प्रावधानों को और कठोर बनाने, जांच प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने तथा राज्यों को विशेष न्यायिक व्यवस्था विकसित करने जैसे प्रस्ताव शामिल हैं। हालांकि अंतिम प्रावधान संसद में पेश किए गए आधिकारिक विधेयक के पाठ और बहस के बाद ही स्पष्ट होंगे।
विपक्षी दलों ने संकेत दिया है कि वे केवल कठोर दंड के बजाय परीक्षा एजेंसियों की जवाबदेही, प्रशासनिक विफलताओं और छात्रों पर हुई कथित पुलिस कार्रवाई जैसे मुद्दे भी संसद में उठाएंगे।
कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों ने दोनों सदनों में चर्चा की मांग करते हुए कहा है कि परीक्षा प्रणाली में विश्वास बहाल करने के लिए संस्थागत सुधार, पारदर्शिता और जवाबदेही भी उतनी ही आवश्यक है जितनी कठोर सजा।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी सहित विपक्षी नेताओं ने इस विषय पर साझा रणनीति बनाने के लिए बैठक भी की। विपक्ष का कहना है कि करोड़ों युवाओं के भविष्य से जुड़े इस विषय पर व्यापक चर्चा होनी चाहिए।
NEET-UG परीक्षा को लेकर सामने आए विवाद ने देशभर में परीक्षा संचालन व्यवस्था पर नए सवाल खड़े किए। अभ्यर्थियों, अभिभावकों और शिक्षा विशेषज्ञों ने परीक्षा सुरक्षा, डिजिटल निगरानी, गोपनीयता व्यवस्था और परीक्षा एजेंसियों की कार्यप्रणाली में सुधार की मांग की।
इसी दौरान विभिन्न छात्र संगठनों ने प्रदर्शन किए और कई राजनीतिक दलों ने सरकार से व्यापक परीक्षा सुधार नीति लाने की मांग की। सरकार का कहना है कि प्रस्तावित संशोधन इन्हीं चिंताओं के समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
विधेयक लोकसभा में पेश होने के बाद उस पर विस्तृत चर्चा होगी। यदि सदन इसे पारित करता है तो इसे राज्यसभा भेजा जाएगा। दोनों सदनों से पारित होने और राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद संशोधित कानून लागू हो सकेगा।
संसदीय बहस के दौरान यह भी स्पष्ट होगा कि प्रस्तावित संशोधनों में कौन-कौन से प्रावधान अंतिम रूप से शामिल किए गए हैं और उनका क्रियान्वयन किस प्रकार किया जाएगा। शिक्षा जगत, अभ्यर्थियों और राज्यों की निगाहें अब संसद की इस बहस पर टिकी हुई हैं, क्योंकि इसका प्रभाव भविष्य की सार्वजनिक परीक्षाओं की विश्वसनीयता और संचालन व्यवस्था पर पड़ सकता है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।