नए वीडियो में उमर अल-बायौमी को अनवर अल-अवलाकी और सऊदी अधिकारियों के साथ दिखाए जाने से 9/11 जांच पर सवाल उठे हैं। सऊदी सरकार ने मिलीभगत से इनकार किया है।
Location: Washington, United States
Date: 08 September 2026
By: Mohd Naved
9/11 की जांच में फिर क्यों उठा उमर अल-बायौमी का नाम
अमेरिका में 11 सितंबर 2001 के आतंकी हमलों की जांच से जुड़ा एक पुराना नाम करीब 25 साल बाद फिर अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में है। सऊदी नागरिक उमर अल-बायौमी से जुड़े नए वीडियो और पुराने जांच दस्तावेज़ों ने उसके सऊदी सरकारी अधिकारियों तथा बाद में अल-कायदा के वरिष्ठ नेता बने अनवर अल-अवलाकी से संपर्क को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
नए खुलासे का केंद्र कुछ ऐसे वीडियो हैं, जिनके बारे में रिपोर्टिंग में कहा गया है कि अमेरिकी संघीय जांच ब्यूरो के पास 2001 के हमलों के कुछ ही दिनों बाद मौजूद थे। ये सामग्री अब 9/11 पीड़ितों के परिवारों की सऊदी अरब के खिलाफ चल रही दीवानी कार्रवाई में अहम साक्ष्य के तौर पर सामने आई है।
वीडियो में क्या दिखाई देता है
ताज़ा जांच रिपोर्ट के मुताबिक एक वीडियो में उमर अल-बायौमी को अनवर अल-अवलाकी के साथ देखा गया है। एक अन्य फुटेज में दोनों सैन डिएगो के आसपास पेंटबॉल गतिविधि में शामिल दिखाई देते हैं। उसी दृश्य में सऊदी अरब के इस्लामिक मामलों के मंत्रालय से जुड़े एक अधिकारी की मौजूदगी का भी उल्लेख किया गया है।
अवलाकी उस समय वह शख्स नहीं था जिसकी बाद के वर्षों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनी। आगे चलकर वह अरब प्रायद्वीप में अल-कायदा का प्रमुख चेहरा बना। इसलिए पुराने वीडियो में उसकी मौजूदगी को लेकर जांच एजेंसियों और अदालत में चल रही कानूनी बहस का महत्व बढ़ गया है।
हालांकि केवल किसी व्यक्ति के साथ तस्वीर या वीडियो में दिखाई देना अपने आप में आतंकी साजिश में भागीदारी साबित नहीं करता। असली सवाल यह है कि संपर्क की प्रकृति क्या थी, उसकी जानकारी किस स्तर तक थी और क्या इन संबंधों का 9/11 की साजिश से कोई प्रत्यक्ष संबंध स्थापित होता है।
अल-बायौमी और 9/11 के दो अपहरणकर्ता
उमर अल-बायौमी का नाम पहले से 9/11 जांच में मौजूद रहा है। अमेरिकी सरकारी दस्तावेज़ों के मुताबिक उसने नवाफ अल-हज़मी और खालिद अल-मिहधर को सैन डिएगो में शुरुआती दिनों में मदद दी थी।
जांच रिकॉर्ड में दर्ज है कि दोनों अपहरणकर्ता अमेरिका पहुंचने के बाद अल-बायौमी के संपर्क में आए। उसने उनके लिए रहने की व्यवस्था कराने, किराये के मकान से जुड़े इंतजाम और अन्य व्यावहारिक सहायता में भूमिका निभाई थी। अमेरिकी जांच रिकॉर्ड में उसकी ओर से अनुवाद, यात्रा, आवास और आर्थिक मदद जैसी सहायता का भी उल्लेख मिलता है।
अल-बायौमी ने दोनों से अपनी मुलाकात को लंबे समय तक संयोग बताया। लेकिन जांच एजेंसियों ने इस दावे पर सवाल उठाए थे। 2021 में सार्वजनिक किए गए एक संघीय दस्तावेज़ में भी जांचकर्ताओं की दिलचस्पी इस बात में दिखाई देती है कि क्या दोनों पक्षों की मुलाकात वास्तव में अचानक हुई थी या पहले से तय थी।
सऊदी सरकारी संपर्कों का मुद्दा
अमेरिकी जांच दस्तावेज़ों में अल-बायौमी के सऊदी सरकारी संस्थानों से संपर्क का उल्लेख पहले भी हुआ है। एक अमेरिकी कांग्रेस जांच रिकॉर्ड में कहा गया था कि एफबीआई के पास ऐसे संकेत थे कि अल-बायौमी के सऊदी सरकार से व्यापक संबंध थे। दस्तावेज़ों में उसके सऊदी सरकारी प्रतिष्ठानों से संपर्क और आर्थिक सहायता से जुड़े विवरण भी दर्ज हैं।
एक पूर्व एफबीआई अधिकारी से जुड़े बयान में यह भी दावा सामने आया था कि अल-बायौमी सऊदी खुफिया तंत्र से संबद्ध हो सकता है और उसके संपर्क अनवर अल-अवलाकी से थे। हालांकि ऐसे दावे जांच सामग्री और गवाहों के बयानों का हिस्सा हैं, इन्हें अपने आप में अदालत का अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जा सकता।
यही फर्क इस पूरे मामले में बेहद अहम है। दस्तावेज़ में किसी व्यक्ति को संदिग्ध मानना और अदालत में उसकी जिम्मेदारी साबित होना दो अलग बातें हैं।
वॉशिंगटन की यात्रा ने भी बढ़ाई बहस
अल-बायौमी से जुड़ा एक अन्य वीडियो पहले से 9/11 मुकदमे में चर्चा का विषय रहा है। 1999 में उसने वॉशिंगटन की यात्रा के दौरान अमेरिकी कैपिटल और आसपास के इलाकों की रिकॉर्डिंग की थी। इस यात्रा में उसके साथ दो सऊदी सरकारी धार्मिक अधिकारी भी थे।
पीड़ित परिवारों के वकीलों का दावा है कि वीडियो में कैपिटल भवन, उसके प्रवेश मार्ग और सुरक्षा व्यवस्था पर जिस तरह ध्यान दिया गया, वह सामान्य पर्यटक रिकॉर्डिंग से आगे की गतिविधि हो सकती है। दूसरी ओर सऊदी पक्ष ने इस व्याख्या को चुनौती दी और इसे सामान्य यात्रा से जुड़ी रिकॉर्डिंग बताया है।
यानी एक ही सामग्री की दो अलग कानूनी व्याख्याएं सामने हैं। अंतिम फैसला इसी बात पर निर्भर करेगा कि अदालत साक्ष्यों को किस संदर्भ में स्वीकार करती है।
9/11 आयोग का पुराना निष्कर्ष क्या था
यहां पुराने आधिकारिक निष्कर्ष को समझना जरूरी है। 9/11 आयोग की रिपोर्ट ने कहा था कि उसे सऊदी सरकार या उसके वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा अल-कायदा को संस्थागत तौर पर वित्तीय समर्थन देने का प्रमाण नहीं मिला। आयोग ने यह भी माना था कि सऊदी अरब में निजी और धार्मिक नेटवर्क से जुड़े धन का अल-कायदा तक पहुंचना एक गंभीर समस्या थी।
आयोग ने उमर अल-बायौमी की भूमिका पर भी विचार किया था। उपलब्ध सामग्री के आधार पर उस समय आयोग ने उसे गुप्त रूप से इस्लामी चरमपंथियों की मदद करने वाला संभावित व्यक्ति नहीं माना था।
लेकिन बाद के वर्षों में कई दस्तावेज़ सार्वजनिक हुए। इसके अलावा ब्रिटिश अधिकारियों से प्राप्त सामग्री और अमेरिकी अदालत में पेश किए गए नए साक्ष्यों ने इस मामले की कानूनी तस्वीर को अधिक जटिल बना दिया है।
पीड़ित परिवारों का मुकदमा
9/11 पीड़ितों के परिवार लंबे समय से सऊदी अरब के खिलाफ कानूनी कार्रवाई कर रहे हैं। उनका आरोप है कि सऊदी अधिकारियों और उनसे जुड़े व्यक्तियों ने हमले के लिए जिम्मेदार कुछ अपहरणकर्ताओं को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष मदद दी।
2025 में न्यूयॉर्क की एक संघीय अदालत ने सऊदी अरब की मामले को खारिज करने की कोशिश को अस्वीकार कर दिया था। इसके बाद मुकदमे को आगे बढ़ने का रास्ता मिला। अदालत के रिकॉर्ड में अल-बायौमी से जुड़े वीडियो, विमान का चित्र और सऊदी अधिकारियों से उसके संपर्क जैसे साक्ष्यों पर विस्तार से चर्चा हुई।
नए वीडियो इसी व्यापक कानूनी लड़ाई का हिस्सा हैं। रिपोर्टों के मुताबिक पीड़ित परिवारों की ओर से सऊदी सरकार की कथित भूमिका को स्थापित करने के लिए इन सामग्रियों पर भरोसा किया जा रहा है। सऊदी अरब ने 9/11 हमलों में किसी भी तरह की सरकारी मिलीभगत से इनकार किया है।
एफबीआई पर क्यों उठ रहे सवाल
सबसे गंभीर सवाल जांच एजेंसी की भूमिका को लेकर है। यदि वीडियो और अन्य सामग्री वास्तव में हमलों के तुरंत बाद एफबीआई के पास मौजूद थी, तो उसे सार्वजनिक होने में इतना लंबा वक्त क्यों लगा।
यह सवाल दो स्तरों पर है। पहला, क्या जांच एजेंसियों ने उपलब्ध साक्ष्यों की पर्याप्त पड़ताल की। दूसरा, क्या राष्ट्रीय सुरक्षा और अमेरिका-सऊदी कूटनीतिक संबंधों ने जांच की दिशा को प्रभावित किया।
लेकिन यहां भी सावधानी जरूरी है। उपलब्ध रिपोर्टिंग से यह निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी कि एफबीआई ने जानबूझकर सऊदी सरकार को बचाने के लिए सबूत दबाए। ऐसा आरोप तभी स्थापित माना जाएगा जब उसके समर्थन में स्पष्ट दस्तावेज़ी और न्यायिक प्रमाण सामने आएं।
आगे क्या होगा
मामला अब अमेरिकी अदालतों में जारी कानूनी प्रक्रिया से जुड़ा है। 9/11 पीड़ित परिवारों के वकील नए वीडियो और पुराने जांच रिकॉर्ड को सऊदी सरकार की कथित जिम्मेदारी साबित करने के लिए इस्तेमाल करना चाहते हैं। दूसरी तरफ सऊदी पक्ष इन साक्ष्यों की व्याख्या और उनके कानूनी महत्व को चुनौती देता रहा है।
इस पूरे प्रकरण का सबसे अहम पहलू यह है कि 9/11 की आधिकारिक जांच और बाद में सामने आए दस्तावेज़ों के बीच कई सवाल अब भी बहस का विषय हैं। नए वीडियो पुराने निष्कर्षों को स्वतः निरस्त नहीं करते, लेकिन वे उन कड़ियों की दोबारा जांच की जरूरत जरूर सामने रखते हैं जिन्हें शुरुआती दौर में अलग तरीके से देखा गया था।
निष्कर्ष
उमर अल-बायौमी से जुड़े नए वीडियो 9/11 की जांच के इतिहास में एक महत्वपूर्ण नया अध्याय जोड़ते हैं। वे सऊदी अधिकारियों, अल-बायौमी और अनवर अल-अवलाकी के बीच संपर्क को लेकर पहले से मौजूद रिकॉर्ड को नई रोशनी में देखने का आधार देते हैं। साथ ही, 9/11 आयोग के पुराने निष्कर्ष और मौजूदा अदालत में पेश किए जा रहे नए साक्ष्यों के बीच अंतर को समझना भी जरूरी है।
फिलहाल सबसे जिम्मेदार निष्कर्ष यही है कि नए साक्ष्य गंभीर सवाल उठाते हैं, लेकिन सऊदी सरकार की 9/11 में प्रत्यक्ष मिलीभगत को अंतिम रूप से साबित करने के लिए न्यायिक प्रक्रिया और साक्ष्यों की व्यापक जांच का इंतजार करना होगा।