राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने गोमती नदी के किनारे और सक्रिय बाढ़ क्षेत्र में चल रहे निर्माण कार्यों पर अंतरिम रोक लगाते हुए संबंधित एजेंसियों से जवाब मांगा है। ट्रिब्यूनल ने प्रथम दृष्टया पर्यावरणीय नियमों के संभावित उल्लंघन पर चिंता जताई है। मामले की अगली सुनवाई 25 अगस्त को होगी।
📍 Location: लखनऊ, उत्तर प्रदेश
📰 Date: 14 जुलाई 2026
✍️ Apurva Choudhary
गोमती नदी किनारे निर्माण पर NGT का बड़ा हस्तक्षेप
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने गोमती नदी के किनारे और सक्रिय बाढ़ क्षेत्र में चल रहे निर्माण कार्यों पर अंतरिम रोक लगाते हुए लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) सहित संबंधित विभागों को चार सप्ताह के भीतर विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। इस आदेश से लगभग 2,500 करोड़ रुपये की विभिन्न परियोजनाओं पर असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।
याचिका में क्या लगाए गए आरोप?
पर्यावरण कार्यकर्ता एवं अधिवक्ता आलोक सिंह की ओर से दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि गोमती नदी के दोनों किनारों पर तटबंध चौड़ीकरण, फोर-लेन सड़क निर्माण और बहुमंजिला इमारतों का विकास पर्यावरणीय नियमों का पालन किए बिना किया जा रहा है। याचिका में पिपराघाट पुल से शहीद पथ और शहीद पथ से किसान पथ तक की परियोजनाओं का भी उल्लेख किया गया है।
NGT ने किन नियमों का दिया हवाला?
ट्रिब्यूनल ने अपने आदेश में कहा कि गंगा नदी (संरक्षण, संरक्षण एवं प्रबंधन) प्राधिकरण आदेश, 2016 केवल गंगा की मुख्य धारा तक सीमित नहीं है, बल्कि उसकी सहायक नदियों पर भी लागू होता है। चूंकि गोमती गंगा नदी तंत्र का हिस्सा है, इसलिए उसके सक्रिय बाढ़ क्षेत्र और तटीय हिस्सों में निर्माण कार्यों पर भी वही पर्यावरणीय प्रावधान लागू होंगे।
2,500 करोड़ की परियोजनाओं पर असर
NGT के अंतरिम आदेश का प्रभाव ग्रीन कॉरिडोर के तीसरे और चौथे चरण, तटबंध चौड़ीकरण, फोर-लेन सड़क परियोजनाओं तथा गोमती नगर एक्सटेंशन में प्रस्तावित कई बहुमंजिला निर्माण कार्यों पर पड़ सकता है। यदि निर्माण नियमों के अनुरूप नहीं पाए गए तो इन परियोजनाओं में देरी या बदलाव संभव है।
एजेंसियों से मांगा गया जवाब
ट्रिब्यूनल ने संबंधित विभागों से पूछा है कि क्या परियोजनाओं के लिए आवश्यक पर्यावरणीय स्वीकृतियां प्राप्त की गई थीं और क्या राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (NMCG) से पूर्व अनुमति ली गई थी। सभी संबंधित एजेंसियों को चार सप्ताह के भीतर अपना पक्ष प्रस्तुत करना होगा।
पर्यावरण और विकास के बीच संतुलन का सवाल
यह मामला एक बार फिर विकास परियोजनाओं और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन की आवश्यकता को सामने लाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि नदी तंत्र और बाढ़ क्षेत्र में किसी भी निर्माण से पहले पर्यावरणीय प्रभावों का व्यापक मूल्यांकन आवश्यक है ताकि भविष्य में प्राकृतिक जोखिमों और पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान से बचाया जा सके!
अगली सुनवाई पर रहेगी नजर
मामले की अगली सुनवाई 25 अगस्त को निर्धारित की गई है। तब तक संबंधित एजेंसियों के जवाब और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर NGT आगे का निर्णय लेगा।
गोमती निर्माण रोक से जुड़ा यह मामला उत्तर प्रदेश की बड़ी अवसंरचना परियोजनाओं और पर्यावरणीय संरक्षण के बीच संतुलन की अहम परीक्षा बन गया है। अब निगाहें NGT की अगली सुनवाई और संबंधित विभागों के जवाब पर टिकी रहेंगी।