मध्य प्रदेश में ‘नो यूपीआई डे’, 2000 रुपये से ज्यादा भुगतान पर शुल्क के विरोध में व्यापारी
Mohammad Naved
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2026-09-23 15:35:42
मध्य प्रदेश में व्यापारियों ने 2000 रुपये से अधिक के यूपीआई भुगतान पर प्रस्तावित एमडीआर के खिलाफ ‘नो यूपीआई डे’ मनाया। भोपाल और इंदौर में क्यूआर स्कैनर ढककर विरोध हुआ।
📍 भोपाल, मध्य प्रदेश 🗓️ 23 सितंबर 2026 ✍️ Mohd Naved
यूपीआई शुल्क के विरोध में व्यापारी मैदान में
मध्य प्रदेश में यूपीआई भुगतान पर प्रस्तावित शुल्क को लेकर व्यापारिक संगठनों का विरोध तेज हो गया है। भोपाल, इंदौर और प्रदेश के दूसरे कारोबारी केंद्रों में व्यापारियों ने 23 सितंबर को ‘नो यूपीआई डे’ के तहत सांकेतिक प्रदर्शन किया।
विरोध का मुख्य मुद्दा 2000 रुपये से अधिक के पात्र मर्चेंट यूपीआई लेनदेन पर प्रस्तावित 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी एमडीआर है। व्यापारिक संगठनों का कहना है कि इससे खासकर कम मार्जिन वाले कारोबार पर अतिरिक्त लागत आएगी।
भोपाल और इंदौर में क्यूआर स्कैनर ढके
इंदौर में 100 से अधिक व्यापारिक संगठनों ने अभियान में भाग लिया। कई दुकानदारों ने यूपीआई क्यूआर स्कैनर और पेमेंट डिवाइस को काले कपड़े से ढककर विरोध दर्ज कराया।
अहिल्या चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के मुताबिक, अभियान का मकसद यूपीआई व्यवस्था का विरोध करना नहीं, बल्कि बड़े मूल्य के मर्चेंट लेनदेन पर प्रस्तावित शुल्क को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज कराना है।
भोपाल में भी व्यापारियों ने इसी मुद्दे पर विरोध दर्ज कराया। व्यापारिक संगठनों ने सरकार के सामने शुल्क व्यवस्था पर पुनर्विचार की मांग रखी है।
प्रस्तावित शुल्क व्यवस्था क्या है
मौजूदा विवाद 2000 रुपये से अधिक के पात्र व्यक्ति से व्यापारी यूपीआई लेनदेन पर प्रस्तावित एमडीआर से जुड़ा है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार नई व्यवस्था 15 अक्टूबर 2026 से प्रभावी होने का प्रस्ताव है।
सामान्य श्रेणी में 2000 रुपये से अधिक के पात्र मर्चेंट लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर प्रस्तावित है। 2000 रुपये तक के पात्र मर्चेंट भुगतान इस प्रस्तावित शुल्क के दायरे से बाहर रहेंगे।
व्यक्ति से व्यक्ति यानी पीयर-टू-पीयर यूपीआई भुगतान भी इस व्यवस्था में शामिल नहीं है। व्यापारियों की चिंता मुख्य रूप से कारोबारी भुगतान से जुड़ी है।
शुल्क ग्राहक देगा या व्यापारी
एमडीआर एक मर्चेंट-साइड शुल्क है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक प्रस्तावित व्यवस्था में इसका भार व्यापारी पर रहेगा और इसे ग्राहक से अलग यूपीआई शुल्क के रूप में वसूलने का प्रावधान नहीं बताया गया है।
यही वजह है कि व्यापारिक संगठन अपनी लागत और मार्जिन पर इसके असर को लेकर चिंता जता रहे हैं।
व्यापारियों का कहना है कि थोक कारोबार, कपड़ा, किराना, सराफा और वाहन जैसे क्षेत्रों में 2000 रुपये से अधिक के भुगतान आम हैं। ऐसे कारोबार में लगातार बड़े डिजिटल भुगतान होने पर शुल्क की कुल लागत बढ़ सकती है। यह व्यापारिक संगठनों का पक्ष है, जिसे सरकार की ओर से प्रस्तावित व्यवस्था के व्यापक प्रभाव के साथ देखा जाना जरूरी है।
इंदौर में 125 से ज्यादा संगठनों की भागीदारी
इंदौर में 125 से अधिक व्यापारिक संगठनों ने ‘नो यूपीआई डे’ के अभियान का समर्थन किया। स्थानीय व्यापारिक संगठनों ने दुकानदारों और ग्राहकों को प्रस्तावित शुल्क व्यवस्था की जानकारी देने के लिए पोस्टर और सोशल मीडिया अभियान भी चलाया।
व्यापारिक संगठनों ने साफ किया है कि उनकी आपत्ति डिजिटल भुगतान की व्यवस्था से नहीं है। उनका कहना है कि यूपीआई अब रोजमर्रा के कारोबार का अहम माध्यम बन चुका है और बड़े भुगतान पर अतिरिक्त लागत कम मार्जिन वाले कारोबारियों के लिए चुनौती पैदा कर सकती है।
भोपाल में भी विरोध और ज्ञापन की तैयारी
भोपाल चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री समेत कारोबारी संगठनों ने प्रस्तावित एमडीआर व्यवस्था पर आपत्ति दर्ज कराई है। व्यापारिक प्रतिनिधियों की ओर से केंद्र और राज्य सरकार को ज्ञापन देने तथा शुल्क व्यवस्था पर पुनर्विचार की मांग किए जाने की जानकारी सामने आई है।
व्यापारी संगठनों का तर्क है कि डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लंबे दौर के बाद मर्चेंट शुल्क लागू होने से कारोबारियों की भुगतान लागत बढ़ सकती है।
पेट्रोल पंप भी अलग विरोध की तैयारी में
मध्य प्रदेश के पेट्रोल पंप डीलर्स ने भी प्रस्तावित एमडीआर व्यवस्था पर आपत्ति जताई है। रिपोर्टों के अनुसार राज्य के करीब 4700 पेट्रोल पंपों से जुड़े संगठन ने 2000 रुपये से अधिक के ईंधन भुगतान पर यूपीआई स्वीकार नहीं करने की घोषणा की है।
ईंधन कारोबार के लिए प्रस्तावित ढांचे में अलग शुल्क व्यवस्था बताई गई है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार 2000 रुपये से अधिक के ईंधन लेनदेन पर 5 रुपये का फ्लैट एमडीआर प्रस्तावित है। इस पर जीएसटी का असर भी अलग से जुड़ सकता है।
सरकार और व्यापारियों के बीच मुख्य मतभेद
इस पूरे विवाद में दो प्रमुख दृष्टिकोण सामने आते हैं। व्यापारिक संगठन शुल्क को कारोबार की अतिरिक्त लागत के रूप में देख रहे हैं। उनका कहना है कि छोटे मार्जिन वाले कारोबार में लगातार बड़े यूपीआई भुगतान होने पर इसका असर वित्तीय बोझ के रूप में सामने आएगा।
दूसरी ओर, उपलब्ध रिपोर्टों में सरकारी पक्ष से यह बात सामने आई है कि लगभग 96 प्रतिशत मर्चेंट यूपीआई लेनदेन इस प्रस्तावित बदलाव से प्रभावित नहीं होंगे। व्यक्ति से व्यक्ति भुगतान भी शुल्क व्यवस्था से बाहर रहेगा।
इसलिए मौजूदा विवाद को सभी यूपीआई भुगतानों पर शुल्क के रूप में देखना सही नहीं होगा। प्रस्तावित व्यवस्था खास श्रेणी के बड़े मूल्य वाले मर्चेंट लेनदेन पर केंद्रित है।
यूपीआई का कारोबार में बढ़ता इस्तेमाल
यूपीआई भारतीय डिजिटल भुगतान व्यवस्था का प्रमुख माध्यम बन चुका है। एनपीसीआई के आंकड़ों के मुताबिक अगस्त 2026 में यूपीआई पर करीब 24,508.96 मिलियन लेनदेन हुए, जिनकी कुल राशि लगभग 29,82,355.95 करोड़ रुपये रही।
इस बड़े भुगतान नेटवर्क में व्यापारिक लेनदेन की अहम भूमिका है। इसलिए मर्चेंट भुगतान की लागत में किसी भी बदलाव का असर बैंक, भुगतान सेवा प्रदाता, व्यापारी और ग्राहक के बीच पूरे भुगतान तंत्र पर पड़ सकता है।
आगे क्या होगा
23 सितंबर का ‘नो यूपीआई डे’ व्यापारिक संगठनों के विरोध का सांकेतिक चरण है। इसके बाद व्यापारी संगठन केंद्र सरकार और संबंधित संस्थाओं के सामने अपनी मांग रखने की तैयारी में हैं।
मुख्य मांग 2000 रुपये से अधिक के पात्र मर्चेंट यूपीआई भुगतान पर प्रस्तावित एमडीआर व्यवस्था की समीक्षा और शून्य एमडीआर की मांग है। दूसरी ओर, प्रस्तावित व्यवस्था के समर्थक पक्ष का तर्क है कि बड़े मूल्य के कुछ मर्चेंट लेनदेन को शुल्क ढांचे में शामिल करने से भुगतान तंत्र की लागत संरचना को संतुलित करने का प्रयास किया जा रहा है।
मामले का अगला अहम पड़ाव 15 अक्टूबर 2026 से प्रस्तावित व्यवस्था का क्रियान्वयन होगा। तब यह स्पष्ट होगा कि अंतिम नियम क्या रहते हैं और व्यापारिक संगठनों की आपत्तियों के बाद कोई बदलाव किया जाता है या नहीं।
पाठकों के लिए जरूरी बात
फिलहाल विवाद को इस रूप में समझना जरूरी है कि प्रस्तावित शुल्क सभी यूपीआई भुगतानों पर लागू नहीं बताया गया है। मुद्दा मुख्य रूप से 2000 रुपये से अधिक के पात्र मर्चेंट लेनदेन से जुड़ा है।
मध्य प्रदेश के व्यापारियों का विरोध इस बात पर केंद्रित है कि ऐसी लागत कारोबारियों पर कितनी पड़ेगी और उसका असर डिजिटल भुगतान के इस्तेमाल पर कितना होगा। अंतिम प्रभाव प्रस्तावित व्यवस्था के अंतिम नियम, शुल्क की वास्तविक वसूली और बाजार में व्यापारियों की प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगा।
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Mohammad Naved
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक,
अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।