सुप्रीम कोर्ट ने असम एनआरसी से जुड़े लंबित मुद्दों पर केंद्र और राज्य से जवाब मांगा है। आईडी कार्ड जारी करने और अपील प्रक्रिया शुरू करने की मांग उठी है। यह मामला नागरिकता और अधिकारों की बहस को फिर तेज कर रहा है।
📍 नई दिल्ली / असम
📰 10 अगस्त 2026
✍️ By Mohd Haris
सुप्रीम कोर्ट ने असम के एनआरसी आईडी कार्ड मुद्दे पर अहम कदम उठाया है। अदालत ने केंद्र सरकार, असम सरकार और संबंधित संस्थाओं से जवाब तलब किया है। मामला उन लोगों से जुड़ा है जिनके नाम एनआरसी में शामिल हैं, लेकिन अब तक उन्हें आधिकारिक पहचान पत्र नहीं मिला।
यह याचिका असम स्टेट जमीयत उलेमा की तरफ से दाखिल की गई है। इसमें दो मुख्य मांगें रखी गईं। पहली, एनआरसी में शामिल नागरिकों को आईडी कार्ड जारी किए जाएं। दूसरी, जिन लोगों के नाम सूची से बाहर रह गए, उनके लिए अपील प्रक्रिया शुरू की जाए।
असम का एनआरसी एक सुप्रीम कोर्ट मॉनिटर प्रक्रिया थी। इसका मकसद राज्य में वैध भारतीय नागरिकों की पहचान करना था। यह प्रक्रिया 24 मार्च 1971 की कट-ऑफ तारीख पर आधारित रही।
31 अगस्त 2019 को अंतिम सूची जारी हुई। करीब 3.3 करोड़ आवेदनों में से 3.11 करोड़ लोगों को शामिल किया गया। करीब 19 लाख लोग बाहर रह गए।
कानून के मुताबिक, इस प्रक्रिया के बाद दो कदम जरूरी थे।
पहला, शामिल लोगों को राष्ट्रीय पहचान पत्र देना।
दूसरा, बाहर हुए लोगों के लिए अपील का सिस्टम शुरू करना।
लेकिन सात साल बाद भी ये दोनों कदम अधूरे हैं।
2014 में सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में प्रक्रिया शुरू हुई।
2018 में ड्राफ्ट सूची आई।
2019 में फाइनल एनआरसी प्रकाशित हुआ।
2020 के बाद प्रक्रिया ठहर गई।
2026 में मामला फिर सुप्रीम कोर्ट के सामने सक्रिय हुआ।
यह टाइमलाइन दिखाती है कि प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर लगातार देरी हुई।
यह सिर्फ एक प्रशासनिक मसला नहीं है। यह नागरिकता, पहचान और संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा सवाल है।
आईडी कार्ड न होने से शामिल नागरिकों की वैधता अधूरी रहती है। वे कई सरकारी सेवाओं में बाधा झेल सकते हैं। दूसरी तरफ, बाहर हुए लोगों को अपील का मौका न मिलना कानूनी न्याय के खिलाफ माना जा रहा है।
याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि इससे लाखों लोग अनिश्चितता में जी रहे हैं।
सरकारी पक्ष ने अब तक औपचारिक जवाब सार्वजनिक नहीं किया है। लेकिन पहले कई मौकों पर प्रशासनिक जटिलताओं, डेटा सुरक्षा और राजनीतिक संवेदनशीलता का हवाला दिया गया है।
असम में एनआरसी डेटा सुरक्षा सिस्टम पर काम जारी रहने की बात भी सामने आई थी।
इसके अलावा, नागरिकता पहचान से जुड़े फैसले राजनीतिक रूप से संवेदनशील रहे हैं। इससे प्रक्रिया धीमी पड़ी।
कई मानवाधिकार संगठनों और सिविल सोसाइटी ग्रुप्स ने इस देरी को गंभीर बताया है। उनका कहना है कि यह “स्टेटलेसनेस” का खतरा पैदा करता है।
कुछ आलोचकों का आरोप है कि एनआरसी प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी रही। कई लोगों को दस्तावेजी आधार पर बाहर कर दिया गया।
हालांकि, इन दावों पर आधिकारिक स्तर पर कोई एकमत निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
एनआरसी के समर्थक इसे राष्ट्रीय सुरक्षा और अवैध प्रवासन के खिलाफ जरूरी कदम बताते हैं।
उनका तर्क है कि असम लंबे समय से सीमा पार घुसपैठ से प्रभावित रहा है। इसलिए नागरिकता सत्यापन जरूरी है।
वे यह भी कहते हैं कि प्रक्रिया कोर्ट की निगरानी में हुई, इसलिए इसकी वैधता मजबूत है।
जिनका नाम सूची में है, वे पहचान की आधी स्थिति में हैं।
जिनका नाम नहीं है, वे कानूनी अनिश्चितता में हैं।
कई रिपोर्ट्स में सामने आया कि परिवारों के भीतर भी विभाजन हुआ। कुछ सदस्य सूची में शामिल हुए, कुछ बाहर रह गए।
इससे सामाजिक तनाव और मानसिक दबाव बढ़ा।
एनआरसी का मुद्दा असम की सियासत का केंद्र रहा है। यह पहचान, भाषा और प्रवासन की राजनीति से जुड़ा है।
राष्ट्रीय स्तर पर भी यह बहस Citizenship Amendment Act (CAA) से जुड़कर और तीखी हुई।
विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच इस पर गहरी राजनीतिक ध्रुवीकरण देखने को मिला।
एनआरसी प्रक्रिया पर भारी खर्च हुआ। लाखों दस्तावेज जांचे गए।
लेकिन प्रक्रिया अधूरी रहने से निवेश और प्रशासनिक भरोसे पर असर पड़ा।
डेटा प्रबंधन, सुरक्षा और कानूनी ढांचे पर भी सवाल उठे।
अंतरराष्ट्रीय मीडिया और संगठनों ने पहले भी एनआरसी को लेकर चिंता जताई है।
मुख्य चिंता यह रही कि कहीं बड़े पैमाने पर लोग बिना नागरिकता के न रह जाएं।
हालांकि भारत सरकार ने हमेशा इसे आंतरिक मामला बताया है।
सुप्रीम कोर्ट अब इस मामले में अगली सुनवाई करेगा।
केंद्र और असम सरकार के जवाब के बाद कोर्ट दिशा तय करेगा।
संभावना है कि
आईडी कार्ड जारी करने पर टाइमलाइन तय हो
अपील प्रक्रिया शुरू करने का आदेश आए
एनआरसी आईडी कार्ड मामला अब निर्णायक चरण में पहुंच रहा है।
सुप्रीम कोर्ट की दखल से लंबे समय से रुकी प्रक्रिया फिर सक्रिय हुई है।
आने वाला फैसला न सिर्फ असम बल्कि पूरे देश में नागरिकता बहस की दिशा तय कर सकता है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।