सुप्रीम कोर्ट ने अभिषेक बनर्जी को विदेश में इलाज की अनुमति दी। पहले हाई कोर्ट ने याचिका खारिज की थी। यह फैसला व्यक्तिगत स्वतंत्रता और न्यायिक प्रक्रिया पर नई बहस खड़ी करता है।
📍 नई दिल्ली / कोलकाता
📰 10 अगस्त 2026
✍️ By Mohd Haris
अभिषेक बनर्जी विदेश यात्रा पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी को बड़ी राहत देते हुए विदेश यात्रा की अनुमति दे दी है। अदालत ने उन्हें आंख के इलाज के लिए तीन हफ्ते के लिए बाहर जाने की इजाजत दी।
यह फैसला उस समय आया जब कुछ दिन पहले ही कलकत्ता हाई कोर्ट ने उनकी इसी मांग को खारिज कर दिया था। ऐसे में मामला सीधे सुप्रीम कोर्ट पहुंचा और अब शीर्ष अदालत ने अलग रुख अपनाया है।
अभिषेक बनर्जी के खिलाफ एक आपराधिक मामला लंबित है। इसी केस के चलते उनके विदेश जाने पर पाबंदी लगी हुई थी।
उन्होंने अदालत से दलील दी कि उन्हें विशेष चिकित्सा सुविधा की जरूरत है, जो भारत में उपलब्ध नहीं है। इसी आधार पर उन्होंने विदेश यात्रा की अनुमति मांगी।
कलकत्ता हाई कोर्ट ने इस दलील को तुरंत स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने कहा कि पहले राज्य के सरकारी अस्पताल में मेडिकल बोर्ड से जांच कराई जाए।
हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि भारत में भी उन्नत चिकित्सा सुविधाएं मौजूद हैं। इसलिए विदेश जाने की अनुमति देने से पहले स्थानीय चिकित्सा मूल्यांकन जरूरी है।
एक अहम बिंदु यह भी था कि बनर्जी मेडिकल बोर्ड के सामने पेश नहीं हुए थे। इसे प्रक्रिया का उल्लंघन माना गया।
यही वजह रही कि उनकी याचिका खारिज कर दी गई।
हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई। याचिका में कहा गया कि व्यक्ति को अपनी पसंद के इलाज का अधिकार है।
सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार करते हुए उन्हें सीमित अवधि के लिए विदेश जाने की अनुमति दी।
फैसले में यह साफ संकेत है कि अदालत ने व्यक्तिगत स्वतंत्रता और चिकित्सा जरूरतों को प्राथमिकता दी।
जून 2026 में पहली बार हाई कोर्ट में अनुमति मांगी गई।
जुलाई में कोर्ट ने सख्त शर्तें रखीं।
अगस्त की शुरुआत में याचिका खारिज हुई।
इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल हुई।
10 अगस्त 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने अनुमति दी।
यह क्रम दिखाता है कि मामला तेजी से उच्च न्यायिक स्तर तक पहुंचा।
यह मामला एक महत्वपूर्ण संवैधानिक बहस को सामने लाता है।
एक तरफ अदालतों की यह जिम्मेदारी है कि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।
दूसरी तरफ व्यक्ति का स्वास्थ्य और इलाज का अधिकार भी उतना ही अहम है।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला इन दोनों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
अभिषेक बनर्जी पश्चिम बंगाल की सियासत में अहम चेहरा हैं। वे मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के करीबी माने जाते हैं।
इस फैसले का राजनीतिक असर भी हो सकता है। विपक्ष पहले से ही उनके खिलाफ चल रहे मामलों को मुद्दा बना रहा है।
हालांकि अदालत का यह फैसला सीधे तौर पर राजनीतिक नहीं, बल्कि कानूनी आधार पर दिया गया है।
कुछ कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि
क्या मेडिकल बोर्ड की प्रक्रिया को दरकिनार करना सही है
क्या इससे भविष्य में मिसाल बनेगी
दूसरी तरफ, कई लोग इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता की जीत मान रहे हैं।
यह बहस आगे भी जारी रहने की संभावना है।
आम जनता के बीच यह मामला दो नजरियों से देखा जा रहा है।
पहला, एक जनप्रतिनिधि को भी समान अधिकार मिलने चाहिए।
दूसरा, क्या आम नागरिक को भी ऐसी राहत आसानी से मिलती
यह सवाल न्यायिक समानता पर चर्चा को जन्म देता है।
इस तरह के मामलों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी यह सिद्धांत माना जाता है कि
मरीज को अपनी पसंद के इलाज का अधिकार होना चाहिए
सुप्रीम कोर्ट का फैसला इसी वैश्विक कानूनी सोच के अनुरूप दिखता है।
अभिषेक बनर्जी अब निर्धारित समय के लिए विदेश यात्रा कर सकते हैं।
संभावना है कि
वह तय अवधि में लौटेंगे
जांच एजेंसियों के साथ सहयोग जारी रहेगा
मामला आगे भी अदालत में चलता रहेगा
अभिषेक बनर्जी विदेश यात्रा मामला अब एक अहम कानूनी मिसाल की तरह उभर रहा है।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला दिखाता है कि न्यायपालिका व्यक्तिगत अधिकारों को प्राथमिकता देने के लिए तैयार है, लेकिन साथ ही प्रक्रिया को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
यह फैसला भविष्य के कई मामलों में संदर्भ बिंदु बन सकता है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।