महाराष्ट्र के नवी मुंबई स्थित खारघर में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR से जुड़े 3,404 मूल फॉर्म एक निजी फोटोकॉपी सेंटर पर मिलने के बाद चुनावी दस्तावेजों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। अधिकारियों के मुताबिक इन फॉर्मों में मतदाताओं की तस्वीरें, निजी जानकारी और बूथ लेवल अधिकारियों के आधिकारिक हस्ताक्षर मौजूद थे। मामला खारघर के सेक्टर 19 की एक फोटोकॉपी दुकान से सामने आया। पुलिस और चुनाव अधिकारियों के अनुसार सूरज पाटिल नाम का व्यक्ति वहां पनवेल विधानसभा क्षेत्र के SIR फॉर्म की प्रतियां तैयार करा रहा था। प्रशासन ने दस्तावेज जब्त किए और बाद में उसके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की।
दस्तावेजों की जांच के बाद रायगढ़ जिला प्रशासन ने 5 बूथ लेवल अधिकारियों को निलंबित कर दिया। अब 2 सदस्यीय जांच समिति यह पता लगा रही है कि मतदाताओं से भरे मूल फॉर्म संबंधित अधिकारियों की हिरासत से निजी फोटोकॉपी सेंटर तक कैसे पहुंचे।
खारघर, नवी मुंबई, महाराष्ट्र|29 अगस्त 2026|शाह टाइम्स
By Mohd Haris
मामला गुरुवार शाम सामने आया, जब खारघर के सेक्टर 19 स्थित एक फोटोकॉपी सेंटर में बड़ी संख्या में SIR फॉर्म होने की जानकारी निर्वाचन अधिकारियों तक पहुंची। शिकायत के बाद सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों ने मौके पर जाकर दस्तावेजों की जांच की। रायगढ़ के जिलाधिकारी किशन जावले के मुताबिक दुकान से कुल 3,404 फॉर्म मिले। ये पनवेल विधानसभा क्षेत्र के 11 मतदान केंद्रों से संबंधित थे। इनमें 11 खाली फॉर्म भी शामिल बताए गए हैं। अधिकारियों ने दस्तावेजों को जब्त कर सील किया और पुलिस के सुपुर्द कर दिया। बरामद फॉर्मों की प्रमाणिकता की जांच भी की गई। प्रशासन के मुताबिक ये मूल SIR फॉर्म थे।
पुलिस ने सूरज पाटिल के खिलाफ मामला दर्ज किया है। उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 314 और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 128 के तहत कार्रवाई की गई है। अधिकारियों के अनुसार पाटिल को फॉर्मों की फोटोकॉपी कराते हुए पकड़ा गया। पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया और कानूनी प्रक्रिया के तहत नोटिस देने के बाद रिहा किए जाने की जानकारी दी है। यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि FIR दर्ज होना आरोप की कानूनी शुरुआत है। पाटिल के खिलाफ लगाए गए आरोप अदालत में साबित होना बाकी हैं।
मामले ने राजनीतिक रंग तब लिया जब शिवसेना यूबीटी के स्थानीय कार्यकर्ताओं ने दावा किया कि सूरज पाटिल भाजपा की युवा शाखा से जुड़े पदाधिकारी हैं। दूसरी ओर, भाजपा नेताओं ने घटना में पार्टी कार्यकर्ताओं की भूमिका से इनकार किया है। पनवेल के भाजपा नेता और नगर निगम के मेयर नितिन पाटिल ने कहा कि भाजपा कार्यकर्ताओं का इस मामले से कोई संबंध नहीं है। इसलिए पाटिल की संगठनात्मक भूमिका और SIR फॉर्म तक उनकी पहुंच के बीच संबंध जांच का विषय है। फिलहाल इसे किसी राजनीतिक संगठन की आधिकारिक गतिविधि के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा।
रायगढ़ जिला प्रशासन ने कहा कि जब्त किए गए फॉर्म संबंधित BLO की जिम्मेदारी में थे। जांच में यह सामने आने के बाद कि बड़ी संख्या में मूल दस्तावेज उनकी हिरासत से बाहर पहुंचे, 5 BLO को निलंबित कर दिया गया। इनमें निजी कंपनी से जुड़े 3 डेटा एंट्री ऑपरेटर भी शामिल बताए गए हैं, जिन्हें BLO की जिम्मेदारी दी गई थी। उनके खिलाफ विभागीय जांच भी आगे बढ़ रही है। पनवेल के सब-डिविजनल अधिकारी पवन चांडक के मुताबिक संबंधित फॉर्म 17 अगस्त को अपलोड किए गए थे। जांच में यह देखा जा रहा है कि इसके बाद मूल फॉर्म किस प्रक्रिया के तहत निजी दुकान तक पहुंचे।
प्रशासन ने मामले की विस्तृत जांच के लिए 2 सदस्यीय समिति बनाई है। इसमें पनवेल के उप नगर आयुक्त नानासाहेब कामथे और सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी शामिल हैं। समिति के सामने मुख्य सवाल यह है कि मूल SIR फॉर्म निर्धारित सुरक्षा प्रक्रिया से बाहर कैसे गए। साथ ही यह भी जांचा जाएगा कि फॉर्मों की फोटोकॉपी क्यों कराई जा रही थी और इसकी अनुमति किसने दी थी। जांच में यह भी देखा जाएगा कि केवल BLO स्तर पर लापरवाही हुई या दस्तावेजों की आवाजाही में किसी दूसरे स्तर की भूमिका थी।
SIR फॉर्म में मतदाता की व्यक्तिगत जानकारी और तस्वीर जैसे संवेदनशील विवरण होते हैं। ऐसे दस्तावेजों का अनधिकृत तरीके से निजी परिसर तक पहुंचना चुनावी प्रक्रिया में दस्तावेज सुरक्षा को लेकर चिंता पैदा करता है। रायगढ़ कलेक्टर ने भी बरामद दस्तावेजों को गंभीर और गोपनीय चुनावी रिकॉर्ड बताया है। इसी वजह से प्रशासन ने फॉर्म जब्त करने के साथ संबंधित अधिकारियों के खिलाफ तत्काल विभागीय कार्रवाई की। हालांकि अभी तक यह सामने नहीं आया है कि इन फॉर्मों की प्रतियों का इस्तेमाल किसी मतदाता का नाम हटाने, जोड़ने या चुनावी नतीजे को प्रभावित करने के लिए किया गया था। ऐसी किसी कार्रवाई की पुष्टि जांच के बिना नहीं की जा सकती।
फॉर्म मिलने के बाद खारघर में शिवसेना यूबीटी और भाजपा से जुड़े कार्यकर्ताओं के बीच विवाद और झड़प की स्थिति भी बनी। शिवसेना यूबीटी के नेताओं ने सवाल उठाया कि मतदाताओं द्वारा भरे गए मूल दस्तावेज निजी व्यक्ति तक कैसे पहुंचे। शिवसेना यूबीटी के स्थानीय पदाधिकारी बालेश भोजने ने इस मामले में प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि चुनावी दस्तावेजों की सुरक्षा को लेकर पहले भी शिकायतें की गई थीं। दूसरी ओर भाजपा ने राजनीतिक आरोपों को खारिज किया है और कहा है कि पार्टी के कार्यकर्ताओं का इस मामले से कोई संबंध नहीं है।
एनसीपी शरदचंद्र पवार के विधायक रोहित पवार ने 5 BLO के निलंबन को पर्याप्त नहीं बताया। उन्होंने निर्वाचन आयोग से मामले पर विस्तृत जवाब देने की मांग की।
पवार ने आरोप लगाया कि SIR प्रक्रिया का इस्तेमाल राजनीतिक फायदे के लिए किया जा रहा है। हालांकि यह एक राजनीतिक आरोप है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी एस चोक्कलिंगम ने मामले को स्थानीय घटना बताया और कहा कि रायगढ़ कलेक्टर ने जरूरी कार्रवाई की है।
इस पूरे मामले में कुछ सवालों के जवाब जांच से मिलना बाकी हैं। सबसे पहला सवाल है कि 3,404 मूल फॉर्म संबंधित BLO की हिरासत से निजी फोटोकॉपी सेंटर तक कैसे पहुंचे। दूसरा सवाल यह है कि फॉर्मों की प्रतियां किस उद्देश्य से तैयार की जा रही थीं। तीसरा सवाल यह है कि क्या सभी दस्तावेजों की प्रतियां बनाई गईं या केवल कुछ फॉर्मों को चुना गया। इसके अलावा जांच एजेंसियों को यह भी देखना होगा कि बरामद दस्तावेजों में मौजूद व्यक्तिगत जानकारी का कहीं और इस्तेमाल तो नहीं हुआ।
SIR जैसी प्रक्रिया में मतदाता सूची का पुनरीक्षण महत्वपूर्ण प्रशासनिक काम है। इसकी विश्वसनीयता दस्तावेजों की सुरक्षा, BLO की जवाबदेही और निर्वाचन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर निर्भर करती है। नवी मुंबई की घटना में प्रशासन ने FIR और निलंबन के जरिए शुरुआती कार्रवाई की है। लेकिन चुनावी भरोसा बहाल करने के लिए जांच का निष्कर्ष और यह स्पष्ट होना जरूरी है कि दस्तावेज सुरक्षा की चूक कहां हुई। राजनीतिक दलों के आरोपों से अलग प्रशासनिक और पुलिस जांच को साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ाना महत्वपूर्ण होगा। इससे यह भी साफ होगा कि मामला केवल दस्तावेजों की अनधिकृत फोटोकॉपी तक सीमित था या इसके पीछे कोई व्यापक उद्देश्य था।
फिलहाल 3,404 SIR फॉर्म जब्त हैं, 5 BLO निलंबित किए गए हैं और सूरज पाटिल के खिलाफ FIR दर्ज है। भाजपा ने पार्टी की भूमिका से इनकार किया है, जबकि विपक्षी दलों ने SIR प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। अब जांच समिति और पुलिस की कार्रवाई से यह स्पष्ट होगा कि इन मूल मतदाता फॉर्मों के निजी फोटोकॉपी सेंटर तक पहुंचने की असल वजह क्या थी।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।