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भारत-EFTA ट्रेड एग्रीमेंट को एक साल, PM मोदी ने बताया साझा विकास का आधार

Wasi Siddiqui • 2026-10-05 14:17:15
भारत-EFTA ट्रेड एग्रीमेंट को एक साल, PM मोदी ने बताया साझा विकास का आधार

भारत-EFTA TEPA 1 अक्टूबर 2025 से लागू है। समझौते में 15 साल में $100 अरब निवेश और 10 लाख प्रत्यक्ष रोजगार का लक्ष्य है।


📍

नई दिल्ली

🗓️

5 अक्टूबर 2026

✍️

Wasi Siddiqui


भारत-EFTA समझौते की पहली वर्षगांठ

भारत और यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ यानी EFTA के बीच Trade and Economic Partnership Agreement, TEPA, को लागू हुए एक साल पूरा हो चुका है। यह समझौता 1 अक्टूबर 2025 से प्रभावी हुआ था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मई 2026 में इसे भारत और EFTA देशों के बीच साझा विकास और समृद्धि के लिए महत्वपूर्ण आधार बताया था।

EFTA में स्विट्जरलैंड, नॉर्वे, आइसलैंड और लिकटेंस्टीन शामिल हैं। भारत और इन चार देशों के बीच TEPA का उद्देश्य वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार को आसान बनाना, बाजार पहुंच बढ़ाना, निवेश को प्रोत्साहित करना और आर्थिक सहयोग का दायरा बढ़ाना है। 


समझौता कब हुआ था

भारत और EFTA देशों ने TEPA पर 10 मार्च 2024 को नई दिल्ली में हस्ताक्षर किए थे। करीब 18 महीने बाद यह समझौता 1 अक्टूबर 2025 से लागू हुआ। सरकारी रिकॉर्ड इसे भारत के ऐसे पहले FTA के रूप में रेखांकित करते हैं जिसमें निवेश और रोजगार सृजन से जुड़ी प्रतिबद्धता को समझौते के साथ जोड़ा गया है।

समझौते में 14 अध्याय हैं। इनमें वस्तुओं का बाजार पहुंच, Rules of Origin, Trade Facilitation, Trade Remedies, Sanitary and Phytosanitary Measures, Technical Barriers to Trade, निवेश प्रोत्साहन, सेवाओं का बाजार पहुंच, Intellectual Property Rights और Trade and Sustainable Development जैसे विषय शामिल हैं। 


$100 अरब निवेश और 10 लाख रोजगार का लक्ष्य

TEPA की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में निवेश और रोजगार से जुड़ी प्रतिबद्धता है। EFTA देशों की ओर से भारत में अगले 15 साल में $100 अरब निवेश को प्रोत्साहित करने और इससे 10 लाख प्रत्यक्ष रोजगार सृजित करने का लक्ष्य रखा गया है।

यहां एक जरूरी संपादकीय फर्क समझना जरूरी है। $100 अरब निवेश और 10 लाख रोजगार तत्काल हासिल हो चुके आंकड़े नहीं हैं। ये समझौते से जुड़े दीर्घकालिक लक्ष्य और प्रतिबद्धताएं हैं। इनके वास्तविक परिणाम निवेश के प्रवाह, परियोजनाओं के क्रियान्वयन और रोजगार सृजन की गति पर निर्भर करेंगे।


भारतीय निर्यातकों के लिए क्या बदला

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक EFTA देशों ने 92.2% टैरिफ लाइनों पर बाजार पहुंच की पेशकश की है, जो भारत के 99.6% निर्यात को कवर करती है। इसमें गैर-कृषि उत्पादों का 100% कवरेज और कुछ Processed Agricultural Products पर टैरिफ रियायतें शामिल हैं।

इसका सीधा मतलब यह है कि भारतीय उत्पादकों और निर्यातकों को EFTA बाजार में कई उत्पाद श्रेणियों के लिए पहले की तुलना में बेहतर शुल्क परिस्थितियां मिलती हैं।

सेवाओं के क्षेत्र में भी समझौता महत्वपूर्ण है। IT, Business Services, Education, Cultural and Entertainment Services तथा Audio-Visual Services जैसे क्षेत्रों में भारतीय सेवा प्रदाताओं के लिए अवसर बढ़ाने का प्रावधान किया गया है।


प्रधानमंत्री मोदी का रुख

मई 2026 में नॉर्वे यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि भारत और EFTA देशों के बीच ऐतिहासिक TEPA पिछले वर्ष प्रभावी हुआ और यह भारत-नॉर्वे के साझा विकास और समृद्धि के लिए मजबूत आधार बनेगा। उन्होंने समझौते के तहत $100 अरब निवेश और 10 लाख रोजगार के लक्ष्य का भी उल्लेख किया था। 

इससे साफ है कि सरकार TEPA को केवल टैरिफ कटौती वाले व्यापार समझौते के रूप में नहीं देख रही है। इसका फोकस निवेश, रोजगार, सेवाओं और आर्थिक साझेदारी के व्यापक एजेंडा पर है।


व्यापारिक तस्वीर क्या कहती है

वाणिज्य मंत्रालय के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार अप्रैल 2025 से सितंबर 2025 के बीच भारत और EFTA के बीच कुल द्विपक्षीय माल व्यापार $11.64 अरब रहा। इसी अवधि में भारत का EFTA को निर्यात $0.98 अरब और आयात $10.66 अरब रहा। 

ये आंकड़े यह भी दिखाते हैं कि भारत-EFTA व्यापार में आयात का हिस्सा काफी बड़ा है। इसलिए समझौते की सफलता का आकलन केवल बाजार पहुंच के आधार पर नहीं होगा। भारत के लिए असली चुनौती निर्यात क्षमता बढ़ाने और निवेश को उत्पादन तथा रोजगार में बदलने की होगी।


स्विट्जरलैंड की भूमिका

EFTA में स्विट्जरलैंड भारत के लिए महत्वपूर्ण आर्थिक साझेदार है। अक्टूबर 2026 में स्विस राष्ट्रपति गाइ पार्मेलिन की भारत यात्रा भी इसी व्यापक आर्थिक संदर्भ में हो रही है। यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, तकनीक और आर्थिक सहयोग से जुड़े मुद्दे एजेंडे में हैं।

भारत-EFTA TEPA की पहली वर्षगांठ ऐसे समय आई है जब दोनों पक्ष समझौते के क्रियान्वयन और उसके वास्तविक आर्थिक असर की समीक्षा कर रहे हैं।


कॉफी से सेवाओं तक अवसर

TEPA के तहत स्विट्जरलैंड, नॉर्वे और आइसलैंड ने भारत से कॉफी आयात के लिए 0% शुल्क का प्रावधान किया है। सरकारी जानकारी के मुताबिक इससे भारतीय कॉफी के लिए प्रीमियम बाजारों में पहुंच का अवसर बढ़ता है। Roasted और Instant Coffee जैसे Value-Added Products के लिए भी संभावना बताई गई है। 

इसी तरह IT, बिजनेस सर्विसेज, शिक्षा और अन्य सेवा क्षेत्रों में बाजार पहुंच भारत के Service Export Sector के लिए अहम हो सकती है।


समझौते की असली परीक्षा अब

TEPA के लागू होने के बाद पहला चरण कानूनी और संस्थागत क्रियान्वयन का था। अब ध्यान इसके व्यावहारिक परिणामों पर है।

भारत के लिए प्रमुख सवाल यह है कि कितनी भारतीय कंपनियां EFTA बाजार में उपलब्ध टैरिफ रियायतों का इस्तेमाल कर रही हैं। दूसरा सवाल यह है कि EFTA से आने वाला निवेश कितनी तेजी से वास्तविक परियोजनाओं में बदलता है।

तीसरा सवाल रोजगार का है। $100 अरब निवेश का लक्ष्य तभी व्यापक आर्थिक असर पैदा करेगा जब निवेश विनिर्माण, ऊर्जा, स्वास्थ्य, समुद्री क्षेत्र, वित्तीय सेवाओं, तकनीक और अन्य उत्पादक गतिविधियों में नई क्षमता तैयार करे।


निवेश के संभावित क्षेत्र

सरकारी दस्तावेजों में समुद्री क्षेत्र, ऊर्जा, स्वास्थ्य, वित्तीय सेवाएं, शिक्षा, Audio-Visual Services, फार्मास्यूटिकल्स, Mechanical and Electrical Engineering, Renewable Energy और Food Processing जैसे क्षेत्रों को महत्वपूर्ण संभावित क्षेत्र बताया गया है। 

इन क्षेत्रों में निवेश भारत की उत्पादन क्षमता और वैश्विक Value Chains से जुड़ाव को प्रभावित कर सकता है। लेकिन इसका असर परियोजनाओं की गुणवत्ता, स्थानीय उत्पादन, तकनीकी हस्तांतरण और रोजगार सृजन पर निर्भर करेगा।


एक साल बाद स्थिति

सरकारी जानकारी के मुताबिक अक्टूबर 2025 में TEPA लागू होने के बाद भारतीय निर्यातकों ने टैरिफ रियायतों का इस्तेमाल शुरू किया है। एक आधिकारिक अपडेट में 7,885 Certificates of Origin जारी होने की जानकारी दी गई है। 

Certificate of Origin का इस्तेमाल यह साबित करने के लिए होता है कि निर्यातित वस्तु संबंधित देश में बनी है और समझौते के तहत preferential tariff का लाभ लेने की पात्रता रखती है।

यह आंकड़ा समझौते के उपयोग का संकेत देता है, लेकिन इससे अकेले TEPA के व्यापक आर्थिक प्रभाव या $100 अरब निवेश लक्ष्य की उपलब्धि का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।


आगे क्या होगा

भारत और EFTA के सामने अब प्राथमिकता समझौते के प्रभावी क्रियान्वयन की है। भारतीय कंपनियों को बाजार पहुंच का इस्तेमाल बढ़ाना होगा। EFTA देशों से निवेश को वास्तविक परियोजनाओं में बदलना होगा।

सरकार के लिए भी चुनौती यह होगी कि छोटे और मध्यम उद्यमों को नए बाजारों तक पहुंच, प्रमाणन, गुणवत्ता मानकों और निर्यात प्रक्रियाओं में पर्याप्त सहायता मिले।

आने वाले वर्षों में TEPA का आकलन केवल द्विपक्षीय व्यापार की कुल रकम से नहीं होगा। निवेश, रोजगार, भारतीय निर्यात की हिस्सेदारी, सेवाओं का कारोबार और नई उत्पादन क्षमता इसके प्रमुख संकेतक होंगे।


भारत-EFTA TEPA 1 अक्टूबर 2025 से लागू है। 5 अक्टूबर 2026 की तारीख पर इसे लागू होने की नई घटना के रूप में पेश करना तथ्यात्मक रूप से सही नहीं होगा। मौजूदा घटनाक्रम इसकी पहली वर्षगांठ और समझौते के अगले चरण पर केंद्रित है।

समझौते में $100 अरब निवेश और 10 लाख प्रत्यक्ष रोजगार का दीर्घकालिक लक्ष्य भारत के लिए बड़ा आर्थिक अवसर पेश करता है। लेकिन लक्ष्य और उपलब्धि के बीच वास्तविक अंतर निवेश के क्रियान्वयन, निर्यात प्रदर्शन और रोजगार सृजन से तय होगा।

वीडियो देखें

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Wasi Siddiqui

Wasi Siddiqui

Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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