उत्तर प्रदेश के हापुड़ में बदनौली गांव में दीपक की मौत के बाद राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और राज्यसभा सांसद रामजी लाल सुमन बुधवार को पीड़ित परिवार से मुलाकात करने पहुंचे, लेकिन पुलिस ने उनके काफिले को गांव के बाहर ही रोक दिया। इसके बाद सपा कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक हुई और मोदीनगर रोड पर कुछ समय के लिए यातायात प्रभावित रहा।
रामजी लाल सुमन का दौरा ऐसे समय हुआ, जब घटना के बाद गांव में पुलिस बल तैनात है और प्रशासन बाहरी लोगों की आवाजाही को नियंत्रित कर रहा है। पुलिस ने तनावपूर्ण माहौल का हवाला देते हुए गांव के भीतर प्रवेश पर रोक लगाई थी।
रिपोर्ट के मुताबिक बदनौली में दो पक्षों के बीच विवाद के दौरान गोली लगने से दीपक घायल हुआ था। इलाज के बाद उसकी मौत हो गई। घटना के बाद पुलिस ने मामले में 13 नामजद और 20 अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया। पुलिस के अनुसार 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका था, जबकि अन्य आरोपियों की तलाश जारी थी।
पुलिस अधीक्षक ज्ञानंजय सिंह के अनुसार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए 5 पुलिस टीमें दबिश दे रही हैं। पुलिस का कहना है कि शेष आरोपियों तक पहुंचने के लिए कार्रवाई जारी है।
रामजी लाल सुमन के बदनौली पहुंचने की सूचना मिलने के बाद पुलिस और प्रशासन पहले से सतर्क था। छिजारसी टोल के पास भी पुलिस बल तैनात किया गया था। हालांकि सुमन दिल्ली से मेरठ बाईपास होते हुए भोजपुर पहुंचे और वहां से मोदीनगर रोड के रास्ते बदनौली पहुंचे।
गांव के बाहर पुलिस ने बैरिकेडिंग कर उनका काफिला रोक दिया। सुमन पीड़ित परिवार से सीधे मुलाकात करना चाहते थे। इसको लेकर सपा कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच कहासुनी हुई।
बाद में प्रशासन ने मृतक के पिता, भाई और चाचा को गांव के बाहर बुलाया। इन परिजनों ने रामजी लाल सुमन से मुलाकात की। इस तरह सांसद की पीड़ित परिवार से मुलाकात गांव के भीतर जाने के बजाय मुख्य सड़क के पास ही हुई।
मुलाकात के दौरान रामजी लाल सुमन ने पीड़ित परिवार को सांत्वना दी। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी पीड़ित परिवार के साथ खड़ी है। उन्होंने परिवार को पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव से मिलवाने और आर्थिक मदद का आश्वासन भी दिया।
सुमन ने उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने प्रदेश में जंगलराज होने और कानून-व्यवस्था चौपट होने का आरोप लगाया। यह उनका राजनीतिक आरोप है, जिसे स्वतंत्र रूप से सरकारी निष्कर्ष के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता।
घटना के बाद बदनौली में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई है। रिपोर्ट के अनुसार घटना के छठे दिन भी गांव में भारी पुलिस बल तैनात था। बाहरी लोगों को पीड़ित परिवार की गली की ओर जाने से रोका जा रहा था। मीडिया की आवाजाही भी बैरिकेड तक सीमित रखी गई थी।
प्रशासन का मुख्य फोकस फिलहाल इलाके में तनाव नियंत्रित रखने और किसी संभावित टकराव को रोकने पर है। ऐसे माहौल में राजनीतिक नेताओं की आवाजाही भी पुलिस के लिए कानून-व्यवस्था की चुनौती बन रही है।
मामले में 13 नामजद और 20 अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। पुलिस 6 आरोपियों की गिरफ्तारी की पुष्टि कर चुकी है और बाकी आरोपियों की तलाश के लिए 5 टीमें काम कर रही हैं।
पीड़ित परिवार की ओर से बाकी आरोपियों की गिरफ्तारी को लेकर नाराजगी की बात सामने आई है। दूसरी तरफ पुलिस का कहना है कि गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दी जा रही है और जांच आगे बढ़ रही है।
घटना ने स्थानीय कानून-व्यवस्था के साथ-साथ उत्तर प्रदेश की राजनीति में भी बहस को तेज किया है। सपा सांसद का पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचना पार्टी की राजनीतिक सक्रियता का हिस्सा भी है। दूसरी ओर पुलिस द्वारा उन्हें गांव के भीतर जाने से रोकने का फैसला प्रशासन की ओर से सुरक्षा और तनाव नियंत्रण से जुड़ा बताया गया है।
इस पूरे प्रकरण में दो अलग-अलग नैरेटिव सामने आ रहे हैं। समाजवादी पार्टी इसे पीड़ित परिवार के साथ खड़े होने और कानून-व्यवस्था का सवाल बता रही है। प्रशासन की कार्रवाई का केंद्र गांव में तनाव को नियंत्रित रखना और किसी अप्रिय स्थिति को रोकना है।
अब निगाह पुलिस जांच और बाकी आरोपियों की गिरफ्तारी पर है। साथ ही यह भी महत्वपूर्ण रहेगा कि घटना की जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है और पुलिस आरोपियों के खिलाफ क्या कानूनी कार्रवाई करती है।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी में पुलिस की कार्रवाई जारी है। इसलिए घटना के पीछे की पूरी वजह, सभी आरोपियों की भूमिका और विवाद की अंतिम कानूनी स्थिति जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
हापुड़ की यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि किसी स्थानीय आपराधिक घटना के बाद कानून-व्यवस्था, राजनीतिक प्रतिनिधियों की आवाजाही और पीड़ित परिवार तक पहुंच जैसे मुद्दे तेजी से बड़े सार्वजनिक विवाद का रूप ले सकते हैं। ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच और तथ्य आधारित कार्रवाई ही आगे की स्थिति स्पष्ट करेगी।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।