रायबरेली के फिरोज गांधी डिग्री कॉलेज में सपा छात्र सभा और एबीवीपी के सदस्यता अभियानों को लेकर विवाद हुआ। पुलिस के हस्तक्षेप के बाद मामला सियासी आरोप-प्रत्यारोप तक पहुंच गया।
📍 रायबरेली, उत्तर प्रदेश
🗓️ 18 सितंबर 2026
✍️ Mohd Naved
रायबरेली में कॉलेज परिसर से शुरू हुआ छात्र संगठनों का विवाद अब राजनीतिक बयानबाजी तक पहुंच गया है। फिरोज गांधी डिग्री कॉलेज के गेट पर सदस्यता अभियान के दौरान समाजवादी छात्र सभा और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं के बीच कहासुनी हुई। इसके बाद सपा नेताओं और पुलिस के बीच भी तीखी नोकझोंक सामने आई। सपा विधायक राहुल लोधी ने पुलिस पर मारपीट का आरोप लगाया, जबकि पुलिस ने इन आरोपों को असत्य और भ्रामक बताया है।
विवाद की शुरुआत कैसे हुई
घटना 17 सितंबर को रायबरेली शहर कोतवाली क्षेत्र स्थित फिरोज गांधी डिग्री कॉलेज के गेट पर हुई। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक समाजवादी छात्र सभा की ओर से सदस्यता और छात्र जागरूकता अभियान चलाया जा रहा था। इसी दौरान अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़े कार्यकर्ता भी वहां पहुंचे। दोनों पक्षों के बीच अभियान और काउंटर को लेकर कहासुनी शुरू हुई, जो बाद में झड़प में बदल गई।
विवाद बढ़ने की सूचना के बाद समाजवादी पार्टी के स्थानीय पदाधिकारी और विधायक मौके पर पहुंचे। पुलिस भी वहां पहुंची और स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की गई। इसी दौरान सपा जिलाध्यक्ष वीरेंद्र यादव और शहर कोतवाली प्रभारी शिवशंकर सिंह के बीच तीखी बहस हुई। इस बहस का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने की बात भी रिपोर्ट में कही गई है।
मामला पुलिस कार्यालय तक पहुंचा
कॉलेज गेट पर विवाद के बाद सपा कार्यकर्ता पुलिस अधीक्षक कार्यालय की ओर गए। वहां भी प्रदर्शन और हंगामे की स्थिति बनी। रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस ने भीड़ को हटाने के लिए हल्का बल प्रयोग किया। हालांकि इस कार्रवाई को लेकर सपा नेताओं और पुलिस के दावों में स्पष्ट अंतर है।
सपा विधायक ने पुलिस पर क्या आरोप लगाया
हरचंदपुर से सपा विधायक राहुल लोधी ने दावा किया कि पुलिस ने उनके साथ मारपीट की। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक आवाज पर बल प्रयोग बताते हुए विरोध दर्ज कराया। उनके बयान में पीडीए समुदाय और राजनीतिक संघर्ष का भी उल्लेख था।
विधायक के आरोप की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध रिपोर्ट में नहीं हुई है। यही वजह है कि इस हिस्से को आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए। पुलिस ने भी इस दावे को स्वीकार नहीं किया है।
पुलिस ने क्या सफाई दी
रायबरेली पुलिस की ओर से क्षेत्राधिकारी नगर के बयान में कहा गया कि कॉलेज में एक कार्यक्रम को लेकर समाजवादी छात्र सभा और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के सदस्यों के बीच बहस और कहासुनी हुई थी। सूचना मिलने के बाद पुलिस और क्षेत्राधिकारी मौके पर पहुंचे और दोनों पक्षों को समझाकर शांत कराया गया।
पुलिस के मुताबिक दोनों पक्षों ने कॉलेज प्रशासन और अधिकारियों के सामने अपनी शिकायतें और मांगें रखीं। पुलिस ने सोशल मीडिया पर छात्रों के साथ मारपीट के आरोपों को असत्य, भ्रामक और निराधार बताया। पुलिस का कहना है कि उसकी भूमिका कानून-व्यवस्था बनाए रखने तक सीमित रही और फिलहाल स्थिति सामान्य है।
दोनों पक्षों के दावे अलग
समाजवादी छात्र सभा से जुड़े अखिलेश यादव ‘माही’ के अनुसार सितंबर में संगठन की ओर से हर साल सदस्यता अभियान चलाया जाता है। उनके मुताबिक इसी अभियान के तहत कॉलेज गेट पर काउंटर लगाया गया था। उनका दावा है कि बाद में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ता वहां पहुंचे और काउंटर तथा पोस्टर-बैनर को लेकर विवाद शुरू हुआ।
दूसरी ओर, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़े अनुराग शुक्ला ने अलग पक्ष रखा। उनके अनुसार उनका संगठन पहले से सदस्यता अभियान चला रहा था और काउंटर के लिए अनुमति ली गई थी। उनका आरोप है कि दूसरे पक्ष ने उस काउंटर का इस्तेमाल करने की कोशिश की, जिसके बाद विवाद बढ़ा। उन्होंने सपा नेताओं पर अभद्रता का आरोप भी लगाया और शिकायत दिए जाने की बात कही।
इस तरह घटनाक्रम की शुरुआत को लेकर दोनों संगठनों की व्याख्या अलग है। उपलब्ध सामग्री में किसी स्वतंत्र जांच के निष्कर्ष का उल्लेख नहीं है, इसलिए किसी एक पक्ष के दावे को अंतिम तथ्य के रूप में पेश करना उचित नहीं होगा।
अखिलेश यादव की प्रतिक्रिया
विवाद के बाद समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने घटना को पीडीए समाज पर प्रहार बताया और समाजवादी छात्र सभा के कार्यकर्ताओं के समर्थन में बयान दिया। उन्होंने पुलिस पर दमन का आरोप लगाते हुए इसे राजनीतिक और सामाजिक मुद्दे से जोड़कर पेश किया।
यह बयान समाजवादी पार्टी का राजनीतिक पक्ष है। पुलिस ने इसी घटनाक्रम में मारपीट के आरोपों से इनकार किया है। इसलिए दोनों पक्षों के बयानों को अलग-अलग संदर्भ में देखना जरूरी है।
मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने भी प्रतिक्रिया दी
उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने सपा जिलाध्यक्ष और कोतवाली प्रभारी के बीच हुई बहस से जुड़े वीडियो पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने अपने बयान में सपा जिलाध्यक्ष के व्यवहार पर सवाल उठाया। उनका बयान भी राजनीतिक प्रतिक्रिया के तौर पर सामने आया है।
छात्र राजनीति और कानून-व्यवस्था का सवाल
रायबरेली की घटना में दो स्तरों पर विवाद सामने आया है। पहला विवाद कॉलेज परिसर में छात्र संगठनों के सदस्यता अभियानों से जुड़ा था। दूसरा विवाद पुलिस के हस्तक्षेप और उसके बाद सामने आए राजनीतिक आरोपों से संबंधित है।
कॉलेज परिसरों में छात्र संगठनों की गतिविधियां लंबे समय से राजनीतिक भागीदारी का एक माध्यम रही हैं। ऐसे आयोजनों में अलग-अलग संगठनों के काउंटर, पोस्टर, सदस्यता अभियान और कार्यक्रमों को लेकर टकराव की स्थिति बनने पर कॉलेज प्रशासन की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है।
इस मामले में भी दोनों पक्षों ने अपने-अपने दावे रखे हैं। पुलिस के अनुसार दोनों पक्षों की शिकायतें अधिकारियों और कॉलेज प्रशासन तक पहुंची हैं। आगे की कार्रवाई इन शिकायतों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर तय होगी।
क्या अभी स्थिति सामान्य है
पुलिस के आधिकारिक स्पष्टीकरण के मुताबिक मौजूदा स्थिति सामान्य और नियंत्रण में है। उपलब्ध रिपोर्ट में किसी बड़ी निरंतर हिंसा या व्यापक कानून-व्यवस्था संकट की पुष्टि नहीं की गई है।
फिर भी मामला राजनीतिक रूप से संवेदनशील हो गया है। एक तरफ सपा नेता पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठा रहे हैं, दूसरी तरफ पुलिस आरोपों को खारिज कर रही है। भाजपा से जुड़े नेताओं की ओर से भी सपा नेताओं के व्यवहार पर सवाल उठाए गए हैं।
आगे क्या होगा
इस विवाद में आगे की स्थिति मुख्य रूप से पुलिस और प्रशासन के स्तर पर दर्ज शिकायतों तथा उपलब्ध वीडियो या अन्य साक्ष्यों की जांच पर निर्भर करेगी। फिलहाल सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी में दोनों पक्षों के आरोप मौजूद हैं, लेकिन आरोपों की अंतिम पुष्टि या खंडन करने वाली किसी स्वतंत्र जांच का निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
इसलिए रायबरेली की घटना को फिलहाल छात्र संगठनों के बीच विवाद, पुलिस हस्तक्षेप और उसके बाद उभरे राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के रूप में देखना अधिक तथ्यपरक होगा। किसी भी पक्ष पर अंतिम निष्कर्ष जांच के आधिकारिक नतीजे के बाद ही निकाला जाना चाहिए।
फिरोज गांधी डिग्री कॉलेज से शुरू हुआ विवाद अब स्थानीय प्रशासन, पुलिस और राजनीतिक दलों के बीच बहस का विषय बन गया है। सपा विधायक और पार्टी नेतृत्व ने पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं, जबकि पुलिस ने छात्रों या नेताओं के साथ मारपीट के आरोपों को खारिज किया है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद और समाजवादी छात्र सभा ने भी विवाद की शुरुआत को लेकर अलग-अलग दावे किए हैं।
मामले की वास्तविक तस्वीर शिकायतों, उपलब्ध साक्ष्यों और प्रशासनिक जांच से और स्पष्ट होगी। तब तक सभी दावों को उनके संबंधित पक्षों के बयान के रूप में देखना ही निष्पक्ष पत्रकारिता का तकाज़ा है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।