वाराणसी के शिवाला क्षेत्र में सीवर ओवरफ्लो से जलभराव पर अखिलेश यादव ने योगी सरकार को घेरा। नगर निगम ने खराब पंपों की मरम्मत कर प्रभावित इलाकों से पानी हटाया।
📍 वाराणसी, उत्तर प्रदेश
🗓️ 12 सितंबर 2026
✍️ Mohd Naved
पूर्ण समाचार
वाराणसी में सीवर ओवरफ्लो और जलभराव को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। भेलूपुर के शिवाला क्षेत्र में सीवर का पानी सड़कों और आसपास की गलियों में भरने की शिकायतों के बाद समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने योगी आदित्यनाथ सरकार पर निशाना साधा है।
अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा करते हुए वाराणसी की जलनिकासी व्यवस्था को लेकर सरकार पर तंज किया। उन्होंने काशी के विकास मॉडल को लेकर सवाल उठाते हुए जलभराव की तस्वीरों को राजनीतिक बहस से जोड़ दिया।
शिवाला में सीवर ओवरफ्लो से परेशानी
मामला वाराणसी के भेलूपुर क्षेत्र के शिवाला वार्ड का है। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक यहां रत्नाकर पार्क के आसपास और कुछ गलियों में सीवर ओवरफ्लो की स्थिति बनी थी। इसके चलते सड़क और आसपास के हिस्सों में गंदा पानी जमा हो गया।
रिपोर्ट के अनुसार अस्सी क्षेत्र की कुछ सड़कों पर भी जलजमाव की समस्या सामने आई। कुछ स्थानों पर सीवर का पानी घरों तक पहुंचने की बात सामने आई, जिससे स्थानीय लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
वाराणसी आने वाले पर्यटकों को भी दिक्कत
शिवाला और आसपास का इलाका वाराणसी के प्रमुख पर्यटक क्षेत्रों में शामिल है। जलभराव के दौरान यहां आने-जाने वाले लोगों को गंदे पानी से होकर गुजरना पड़ा।
उपलब्ध रिपोर्ट में विदेशी पर्यटकों के भी प्रभावित होने का उल्लेख है। इसी पहलू को अखिलेश यादव ने अपने राजनीतिक हमले में प्रमुखता से उठाया और वाराणसी की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े किए।
अखिलेश यादव का राजनीतिक हमला
अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए योगी सरकार की आलोचना की। उन्होंने वाराणसी के जलभराव को सरकार के विकास संबंधी दावों से जोड़ते हुए तंज किया।
उनके बयान का स्वर राजनीतिक था और इसमें वाराणसी की मौजूदा जलनिकासी समस्या को सरकार की प्रशासनिक प्राथमिकताओं से जोड़ने की कोशिश की गई। उनके आरोपों को विपक्षी राजनीतिक प्रतिक्रिया के तौर पर देखा जाना चाहिए।
नगर निगम ने क्या कार्रवाई की
मामला सामने आने के बाद जलकल विभाग की टीम ने शिवाला वार्ड में सीवर ओवरफ्लो की स्थिति का निरीक्षण किया। नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल के निर्देश पर विभागीय अभियंताओं ने मौके का जायजा लिया।
नगर निगम के अनुसार क्षेत्र से गुजर रही पुरानी सीवर लाइन और कोनिया मुख्य सीवेज पंपिंग स्टेशन की स्थिति की जांच की गई। निर्माण खंड प्रथम के समन्वय से बंद और खराब पंपों को दुरुस्त कराया गया।
पंप चालू होने के बाद जलनिकासी
नगर निगम के बयान के मुताबिक खराब पंपों को ठीक करने के बाद करीब 1 से 1.5 घंटे के भीतर प्रभावित स्थानों और गलियों में जमा सीवर का पानी हटा दिया गया।
इस कार्रवाई के बाद तत्काल जलभराव की स्थिति में सुधार की बात नगर निगम की ओर से कही गई है। हालांकि, लगातार जलजमाव की शिकायतों के बीच स्थायी जलनिकासी व्यवस्था को लेकर सवाल अभी भी महत्वपूर्ण बने हुए हैं।
स्थायी ड्रेनेज प्लान की जरूरत
वाराणसी में पिछले कुछ समय से अलग-अलग इलाकों में जलजमाव और सीवर ओवरफ्लो की शिकायतें सामने आती रही हैं। ऐसे में केवल पंप चलाकर तत्काल पानी हटाना पर्याप्त समाधान नहीं माना जा सकता। स्थायी ड्रेनेज क्षमता, सीवर नेटवर्क की स्थिति और पंपिंग स्टेशनों की नियमित निगरानी भी अहम है।
नगर निगम ने जलजमाव की समस्या से निपटने के लिए स्थायी ड्रेनेज प्लान तैयार करने की बात कही है। इसकी वास्तविक प्रभावशीलता आने वाले बारिश के दौर में ही स्पष्ट होगी।
सियासत और प्रशासन आमने-सामने
वाराणसी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र है। ऐसे में शहर की नागरिक सुविधाओं से जुड़ा कोई भी बड़ा मुद्दा राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बन जाता है।
अखिलेश यादव का हमला इसी राजनीतिक संदर्भ में सामने आया है। दूसरी ओर प्रशासन ने राजनीतिक बयानबाजी के बजाय तत्काल तकनीकी कार्रवाई पर जोर दिया है।
इस पूरे मामले में दो अलग पहलू दिखाई देते हैं। पहला, नागरिकों को तत्काल राहत देना। दूसरा, ऐसी समस्या की पुनरावृत्ति रोकने के लिए स्थायी बुनियादी ढांचा तैयार करना।
आगे क्या देखना होगा
अब निगाह नगर निगम के प्रस्तावित स्थायी ड्रेनेज प्लान पर रहेगी। अहम सवाल यह होगा कि क्या शिवाला और आसपास के क्षेत्रों में सीवर ओवरफ्लो की समस्या दोबारा सामने आती है या पंपिंग और ड्रेनेज व्यवस्था में सुधार से स्थिति स्थिर रहती है।
वाराणसी जैसे प्रमुख धार्मिक और पर्यटन शहर में स्वच्छता, सीवर प्रबंधन और जलनिकासी केवल स्थानीय प्रशासन का मुद्दा नहीं है। इसका सीधा असर स्थानीय नागरिकों, कारोबारियों और पर्यटकों पर पड़ता है।
वाराणसी के जलभराव ने एक बार फिर यह सवाल सामने रखा है कि शहर के विकास का मूल्यांकन केवल बड़े प्रोजेक्ट से नहीं, बल्कि रोजमर्रा की नागरिक सुविधाओं की स्थिति से भी होना चाहिए। राजनीतिक आरोप अपनी जगह हैं, लेकिन अंतिम कसौटी यही रहेगी कि नागरिकों को साफ सड़कें, प्रभावी सीवर व्यवस्था और बारिश के दौरान भरोसेमंद जलनिकासी मिलती है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।