लखनऊ में बीबीएयू के 11वें दीक्षांत समारोह में राजनाथ सिंह ने कहा कि डिग्री देने वाली लेकिन चरित्र निर्माण से दूर शिक्षा अधूरी है। उन्होंने युवाओं से मूल्य आधारित जीवन की अपील की।
📍 लखनऊ, उत्तर प्रदेश
🗓️ 29 अगस्त 2026
✍️Mohd Naved
राजनाथ सिंह ने कहा, शिक्षा का मकसद केवल डिग्री हासिल करना नहीं होना चाहिए। अगर शिक्षा व्यक्ति के चरित्र, संवेदनशीलता और सामाजिक जिम्मेदारी का विकास नहीं करती, तो उसका उद्देश्य अधूरा रह जाता है। रक्षा मंत्री ने यह बात शनिवार को लखनऊ स्थित बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के 11वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए कही।
उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि उपलब्धियों का वास्तविक महत्व तब होता है, जब वे मूल्यों पर आधारित हों। उनके मुताबिक ज्ञान और कौशल व्यक्ति को सक्षम बनाते हैं, लेकिन संस्कार, संवेदनशीलता और चरित्र उस क्षमता को सही दिशा देते हैं।
शिक्षा और चरित्र पर राजनाथ का जोर
राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि केवल डिग्री देने वाली शिक्षा, जिसमें चरित्र का विकास नहीं होता, अधूरी है। उन्होंने विद्यार्थियों को व्यापक सोच रखने और दूसरों से ईर्ष्या से बचने की नसीहत दी। उनके अनुसार सोच का दायरा जितना व्यापक होगा, व्यक्ति के जीवन में संतोष और प्रसन्नता की गुंजाइश उतनी बढ़ेगी।
रक्षा मंत्री ने विश्वविद्यालयों की भूमिका को भी केवल अकादमिक शिक्षा तक सीमित नहीं माना। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय व्यक्तित्व निर्माण और बेहतर समाज के निर्माण के केंद्र होते हैं। बीबीएयू का नाम डॉ. भीमराव आंबेडकर से जुड़ा होने के कारण यहां से निकलने वाले विद्यार्थियों से अपेक्षाएं और भी महत्वपूर्ण हो जाती हैं।
ज्ञान के साथ संस्कार और संवेदनशीलता
राजनाथ सिंह ने कहा कि ज्ञान के साथ संस्कार जरूरी हैं और संस्कारों के साथ संवेदनशीलता भी होनी चाहिए। उन्होंने शिक्षा को व्यक्ति के हेड, हार्ट और हैंड यानी सोच, संवेदना और काम करने की क्षमता के समन्वित विकास से जोड़ा।
उन्होंने विद्यार्थियों को केवल समस्याओं पर चर्चा करने के बजाय उनके समाधान तलाशने की दिशा में आगे बढ़ने का संदेश दिया। उनके मुताबिक शिक्षा का मूल्य इस बात से भी तय होना चाहिए कि उससे व्यक्ति समाज और देश के लिए कितना उपयोगी योगदान देता है।
आंबेडकर के जीवन का संदर्भ
रक्षा मंत्री ने अपने संबोधन में डॉ. भीमराव आंबेडकर के जीवन संघर्ष का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सामाजिक भेदभाव और अन्याय का सामना करने के बावजूद आंबेडकर ने हिंसा का रास्ता नहीं चुना और शिक्षा को परिवर्तन का माध्यम बनाया।
राजनाथ सिंह ने विद्यार्थियों को डॉ. आंबेडकर के विचारों से प्रेरणा लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यक्ति को केवल व्यक्तिगत सफलता तक सीमित नहीं रखनी चाहिए, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव की जिम्मेदारी का एहसास भी कराना चाहिए।
बीबीएयू के 11वें दीक्षांत समारोह का महत्व
बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय का 11वां दीक्षांत समारोह 29 अगस्त को आयोजित हुआ। विश्वविद्यालय में पिछले तीन वर्षों से दीक्षांत समारोह नहीं हो पाया था। इस बार 2023, 2024, 2025 और 2026 के अकादमिक सत्रों से जुड़े विद्यार्थियों को एक साथ उपाधियां और पदक प्रदान किए गए।
विश्वविद्यालय से जुड़ी तैयारियों की जानकारी के अनुसार चार अकादमिक वर्षों के विद्यार्थियों को समारोह में शामिल किया गया। उपलब्ध रिपोर्टों में 8,551 विद्यार्थियों को उपाधियां दिए जाने की जानकारी सामने आई है। समारोह में 508 स्वर्ण पदक प्रदान किए जाने थे, जिनमें 342 पदक छात्राओं के हिस्से में आए।
महिला विद्यार्थियों की मजबूत मौजूदगी
दीक्षांत समारोह में छात्राओं के प्रदर्शन ने भी खास तवज्जो हासिल की। विश्वविद्यालय के आंकड़ों के मुताबिक 508 स्वर्ण पदकों में से 342 छात्राओं को मिले। यानी कुल स्वर्ण पदकों का बड़ा हिस्सा छात्राओं के नाम रहा। यह उच्च शिक्षा में महिला विद्यार्थियों की बढ़ती अकादमिक उपलब्धियों का एक महत्वपूर्ण संकेत है।
रिपोर्टों के अनुसार 278 स्वर्ण पदक अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के विद्यार्थियों को दिए जाने थे। इनमें 189 छात्राएं और 89 छात्र शामिल थे। विश्वविद्यालय ने समारोह में 22 मेधावी विद्यार्थियों को मुख्य मंच पर सम्मानित करने की भी व्यवस्था की थी।
रोजगार तलाशने के बजाय रोजगार देने पर जोर
राजनाथ सिंह ने युवाओं को रोजगार के सवाल पर भी संबोधित किया। उन्होंने कहा कि युवा केवल रोजगार पाने वाले नहीं, बल्कि रोजगार पैदा करने वाले बनने का लक्ष्य रखें। उनके मुताबिक बड़ी सोच का मतलब केवल व्यक्तिगत तरक्की नहीं है, बल्कि देश के लिए बड़े लक्ष्य तय करना भी है।
यह संदेश ऐसे समय आया है जब उच्च शिक्षा के बाद रोजगार, कौशल और उद्यमिता युवाओं की प्राथमिक चिंताओं में शामिल हैं। डिग्री के साथ व्यावहारिक कौशल और समस्या समाधान की क्षमता विकसित करना उच्च शिक्षा की उपयोगिता से जुड़ा अहम मुद्दा बना हुआ है।
भारत की बदलती तस्वीर का उल्लेख
राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में भारत की बदलती वैश्विक छवि का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत आर्थिक ताकत के साथ अपनी सभ्यता, संस्कृति और सामर्थ्य पर भरोसा करने वाला देश बनकर उभरा है। उन्होंने मेक इन इंडिया की सफलता के पीछे भारत में विश्वास की भावना को महत्वपूर्ण बताया।
रक्षा मंत्री ने युवाओं को इस बदलाव का प्रमुख वाहक बताया। उनके अनुसार देश की प्रगति में नई पीढ़ी की भूमिका केवल नौकरी और व्यक्तिगत उपलब्धि तक सीमित नहीं होनी चाहिए। युवाओं को सामाजिक सरोकार, नवाचार और राष्ट्र निर्माण से भी जुड़ना चाहिए।
दीक्षांत समारोह का व्यापक संदेश
दीक्षांत समारोह किसी विद्यार्थी के अकादमिक सफर के एक चरण के पूरा होने का अवसर होता है। लेकिन राजनाथ सिंह के संबोधन का केंद्र यह विचार रहा कि डिग्री शिक्षा की अंतिम मंजिल नहीं है। उन्होंने विद्यार्थियों के सामने शिक्षा के सामाजिक और नैतिक पक्ष को प्रमुखता से रखा।
उनका संदेश तीन बिंदुओं पर केंद्रित रहा। पहला, ज्ञान के साथ चरित्र जरूरी है। दूसरा, कौशल के साथ संवेदनशीलता जरूरी है। तीसरा, व्यक्तिगत सफलता के साथ समाज और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी जरूरी है।
बीबीएयू के संदर्भ में यह संदेश और महत्वपूर्ण हो जाता है, क्योंकि विश्वविद्यालय का नाम डॉ. भीमराव आंबेडकर से जुड़ा है। आंबेडकर के सार्वजनिक जीवन में शिक्षा, समानता, सामाजिक न्याय और अधिकारों का केंद्रीय स्थान रहा। राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में इसी विरासत को विद्यार्थियों के सामने रखा।
आगे की चुनौती क्या है
उच्च शिक्षा संस्थानों के सामने चुनौती केवल अधिक डिग्रियां देने की नहीं है। असली सवाल यह है कि विश्वविद्यालय से निकलने वाला विद्यार्थी अपने ज्ञान का इस्तेमाल किस तरह करता है। रोजगार, तकनीकी कौशल और अकादमिक योग्यता के साथ नैतिक निर्णय क्षमता और सामाजिक संवेदनशीलता भी महत्वपूर्ण हैं।
राजनाथ सिंह का संबोधन इसी व्यापक शिक्षा दृष्टिकोण पर केंद्रित रहा। उन्होंने विद्यार्थियों को बड़े सपने देखने, अनुशासन के साथ आगे बढ़ने और अपनी उपलब्धियों को समाज पर पड़ने वाले असर से जोड़कर देखने की सलाह दी।
समापन
बीबीएयू के 11वें दीक्षांत समारोह में डिग्रियां और पदक विद्यार्थियों की वर्षों की मेहनत का सम्मान बने। लेकिन राजनाथ सिंह ने इस अवसर का इस्तेमाल शिक्षा के बड़े मकसद पर बहस के लिए किया। उनका स्पष्ट संदेश रहा कि डिग्री व्यक्ति को योग्य बना सकती है, लेकिन चरित्र, संस्कार और संवेदनशीलता ही उस योग्यता को सार्थक दिशा देते हैं
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।