भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति ने रेपो रेट 5.25% पर बरकरार रखने का फैसला किया। केंद्रीय बैंक ने वैश्विक आर्थिक जोखिमों के बीच सतर्क रुख अपनाते हुए FY27 के GDP अनुमान को 6.6% किया और महंगाई का अनुमान बढ़ाकर 5.1% कर दिया।
📍 मुंबई
📰 22 जुलाई 2026
✍️ अपूर्वा चौधरी
RBI ने रेपो रेट में नहीं किया कोई बदलाव
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने अपनी ताज़ा बैठक में रेपो रेट 5.25% पर अपरिवर्तित रखने का फैसला किया। समिति ने सर्वसम्मति से यह निर्णय लेते हुए मौद्रिक नीति का Neutral Stance भी बरकरार रखा। RBI का मानना है कि मौजूदा वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं को देखते हुए सतर्क रुख अपनाना आवश्यक है।
GDP अनुमान घटाया, महंगाई का अनुमान बढ़ाया
RBI ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की GDP वृद्धि दर का अनुमान 6.9% से घटाकर 6.6% कर दिया है। वहीं, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और वैश्विक तनाव को देखते हुए महंगाई (Inflation) का अनुमान बढ़ाकर 5.1% कर दिया गया है।
केंद्रीय बैंक का कहना है कि आर्थिक वृद्धि मजबूत बनी हुई है, लेकिन वैश्विक जोखिमों पर लगातार नजर रखना जरूरी है।
होम लोन, कार लोन और FD पर क्या होगा असर?
RBI द्वारा रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किए जाने का सीधा असर यह है कि अधिकांश फ्लोटिंग रेट होम लोन और कार लोन की EMI में फिलहाल कोई बड़ा बदलाव देखने को नहीं मिलेगा। जिन उधारकर्ताओं के ऋण रेपो रेट से जुड़े हैं, उनकी मासिक किस्तें अभी स्थिर रहने की संभावना है।
वहीं, फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) की ब्याज दरों में भी निकट भविष्य में बड़े बदलाव की संभावना कम है। बैंक मौजूदा ब्याज दरों को बरकरार रख सकते हैं, हालांकि भविष्य के आर्थिक हालात के आधार पर इनमें परिवर्तन संभव है।
शेयर बाजार और निवेशकों पर असर
RBI के फैसले के बाद बैंकिंग, रियल एस्टेट, ऑटो और अन्य ब्याज दर-संवेदनशील सेक्टरों के शेयरों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। निवेशक अब महंगाई, वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और आने वाली मौद्रिक नीति बैठकों पर नजर बनाए रखेंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि केंद्रीय बैंक ने फिलहाल विकास और महंगाई के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की है। यदि आने वाले महीनों में महंगाई नियंत्रित रहती है और वैश्विक परिस्थितियां अनुकूल होती हैं, तो भविष्य में ब्याज दरों को लेकर नए फैसले लिए जा सकते हैं।
RBI ने क्यों अपनाया सतर्क रुख?
RBI के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती कच्चे तेल की कीमतें, भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता भारत की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकती हैं। इसी वजह से केंद्रीय बैंक ने फिलहाल ब्याज दरों में बदलाव करने के बजाय स्थिरता बनाए रखने का निर्णय लिया है।
RBI का रेपो रेट 5.25% पर स्थिर रखने का फैसला यह संकेत देता है कि केंद्रीय बैंक फिलहाल महंगाई और आर्थिक वृद्धि के बीच संतुलन बनाए रखने की रणनीति अपना रहा है। हालांकि GDP वृद्धि अनुमान में कटौती और महंगाई के बढ़े हुए अनुमान से यह भी स्पष्ट है कि वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां अभी भी चुनौतीपूर्ण बनी हुई हैं। आने वाले महीनों में कच्चे तेल की कीमतों, महंगाई के आंकड़ों और वैश्विक बाजार की स्थिति पर RBI की अगली नीति काफी हद तक निर्भर करेगी।